हमारा वैवाहिक वर्षगांठ वृक्षारोपण, गौमाता सेवा और बच्चों के लिए लाजवाब लड्डू वितरण हेतु समर्पित
हमारा वैवाहिक वर्षगांठ वृक्षारोपण, गौमाता सेवा और बच्चों के लिए स्वाद, स्वरूप व सेहतमंद लाजवाब लड्डू वितरण के लिए है समर्पित
@ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस, डीएम, जौनपुर, यूपी
भारतीय जनजीवन खासकर सनातन संस्कृति में दाम्पत्य जीवन की स्थापना यानी शुरुआत का उद्देश्य परिवार कल्याण के साथ-साथ लोक कल्याण अथवा राष्ट्र कल्याण भी होता है। इसलिए इस पुनीत स्थापना दिवस यानी वैवाहिक वर्षगांठ को धूमधाम से मनाने की परंपरा हमारे यहां सदियों से चलती आ रही है। यूँ तो महाशिवरात्रि यानी भगवान शिव-पार्वती जी के वैवाहिक वर्षगांठ दिवस के आयोजन से हिन्दू जनमानस को भी अपने दाम्पत्य जीवन के शुरुआत दिवस यानी मैरेज एनिवर्सरी के आयोजन की उत्कंठा जगती है। इसलिए हरेक दम्पति अपने माता-पिता, कुलदेवी-देवता, इष्ट देवी-देवता, तीर्थस्थल दर्शन करके इस दिन को सार्थक बनाते हैं। साथ ही, स्वजनों-परिजनों के मुंह मीठा करवाने के लिए लड्डू यानी मोदक बंटवाए जाते हैं।
चूंकि आज 12 मई 2025 है, जो मेरे भी वैवाहिक जीवन के शुरुआत यानी परिणय सूत्र में बंधने का पावन दिवस है। इसलिए आज के दिन को हम वृक्षारोपण यानी पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं खासकर गाय-नन्दी बाबा और बच्चों के लिए प्रिय प्रसाद लड्डू वितरण के लिए समर्पित करते हैं। आज हम नन्दी बाबा और सभी गौमाताओं समेत ऋषि-महर्षियों, देवी-देवताओं, अपने-अपने इष्ट देव से भी विशेष आशीर्वाद की आकांक्षा रखते हैं। चूंकि पृथ्वी हमारी मां है और उसपर उगने वाले पेड़-पौधों से ही सभी को ऑक्सीजन यानी जीवन मिलता है। इसलिए वृक्षारोपण के माध्यम से इनका संवर्द्धन व संरक्षण हम सभी का पुनीत उद्देश्य होना चाहिए। मानव जीवन से साहचर्य रखने वाले पशु-पक्षियों के लिए भी ये अन्न का भंडार सरीखा हैं। गाय-बैल, घोड़ा-हाथी, कुत्ता-बिल्ली, कबूतर-मोर आदि से मानवीय लगाव भी सदियों पुराना है।
इसी प्रकार पेड़ पौधे और पशु-पक्षी मानवीय जीवन के अभिन्न अंग हैं। इनके बिना इस जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इसलिए मानवीय जीवन, प्राणिमात्र के जीवन और प्रकृति पर्यावरण के पारस्परिक सहचर्य की उपेक्षा नहीं की जा सकती है। निःसन्देह ये पशु-पक्षी नहीं होते, बल्कि हमारे परिवार के अंग होते हैं। ये पेड़-पौधे नहीं होते, बल्कि सभी मानवों और प्राणियों के आश्रयदाता व अन्न दाता होते हैं। इसलिए इन सभी का विशेष ख्याल रखना ही मानवधर्म है।
जैसे कहा जाता है कि जल है तो कल है, उसी प्रकार से कहा जा सकता है कि वृक्ष है तो आज है, कल है, सुंदर भविष्य है, अन्यथा कदापि नहीं। इसलिए हमें मानवीय पर्यावरण, प्राकृतिक वातावरण और जैव मंडल के बीच समुचित तालमेल बिठाते हुए सदैव सजग रहना चाहिए।
मेरा मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जन्मदिवस पर, वैवाहिक वर्षगांठ पर या अपने परिजनों से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण दिवस पर वृक्षारोपण अवश्य करना चाहिए। बेबस और लाचार पशु-पक्षियों के स्थायी कल्याण हेतु कुछ सार्थक कदम अवश्य उठाए जाने चाहिए। खासकर बच्चों में लड्डू अवश्य वितरित करवाना चाहिए, क्योंकि ये भी भगवान तुल्य होते हैं।
कहा भी गया है कि "जापर जेकर सत्य सनेहू, ताहि से मिलहिं में ना कछु संदेहु।" यानी कि जिसका जिस पर सत्य के साथ स्नेह होता है, उसका उससे मिलने में कोई संदेह नहीं होता है। क्योंकि सही समय आने पर गुज़श्ता वक्त स्वतः मिलवा देता है यानी तालमेल बिठा देता है। यही वजह है कि आज का दिन हम पर्यावरण की सेवा करते हुए व्यतीत कर रहे हैं। बच्चों के लिए लड्डू, पशुओं के लिए चारा और प्रकृति के लिए वृक्षारोपण को बढ़ावा दे रहे हैं।
हमारे गौशाला में भूषा का भंडार रखा हुआ है जो बेबस व लाचार जानवरों को खिलाया जाएगा। यह नेपियर घास है, ताकि सभी पशुओं को हमेशा हरा चारा मिलता रहे। यह आम्रपाली पेड़ है, जिसके आम सुमधुर होते हैं। यह गूलर का वृक्ष है, जो पक्षियों के लिए पावर हाउस है। इसके छोटे-छोटे मीठे फल पक्षी बड़े ही प्रेम से खाते हैं। यह आंवला वृक्ष तो सभी के लिए विटामिन सी का भंडार है।
इसलिए हमें मनुष्यों के बच्चों के बीच मिठाई, पशुओं के लिए चारा और पक्षियों के लिए वृक्षारोपण अवश्य करना चाहिए। क्योंकि फलदार वृक्ष तो उनके लिए अन्न भंडार सरीखे हैं। बहुत सारे फल मनुष्यों के लिए भी सेहतमंद होते हैं। इसलिए इन्हें रणनीतिपूर्वक रोपना चाहिए, उनकी सेवा सुश्रुषा करनी चाहिए। वहीं पालतू पशुओं को भी पालना चाहिए, उनके लिए चारा की व्यवस्था करना चाहिए। क्योंकि दुग्ध-घी से लेकर विभिन्न प्रकार की उपयोगी सामग्री हमें प्राप्त होती है।
मेरा स्पष्ट मानना है कि अपने जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, जीव-जंतुओं आदि से खास लगाव रखना चाहिए। उनके कल्याण के बारे में हमेशा सोचना चाहिए। क्योंकि हमारे ग्रामीण जनजीवन से शहरी जनजीवन तक उनका अपना महत्व है, लौकिक उपयोगिता है। बेहतर होता कि हमलोग उसे शिकार की दृष्टि से नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से देखिए। प्रकृति के नयनाभिराम स्वरूप इनके बिना कतई नहीं निखर सकते।
जब भी हम मानवीय पर्यावरण की कल्पना संजोते हैं, भूमंडलीय वातावरण के बारे में सोचते-विचारते हैं, प्राकृतिक जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए प्रयत्न करते हैं तो पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, जीव-जंतुओं आदि की याद बरबस आ जाती है। वैसे भी गाय-भैंस, भेड़-बकरियों, कुत्ते-शेर, तोता-मैना, कोयल-मोर आदि से जुड़ी उपदेशात्मक बाल कहानियों के बिना जीवन में रोमांच कहाँ।
जनजीवन में प्रत्येक व्यक्ति का उत्तरदायित्व है कि वह जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम करे, उनके प्रति हिंसा का भाव न रखे, और उनके साथ मानवोचित, उनकी सवेदनाओं के अनुसार स्नेह, प्यार का भाव प्रदर्शित करे, तो जीव जंतु हमें जीवन में खुश रहने की प्रेरणा देते हैं और हमारे उत्साह और साहस को बढ़ाकर राष्ट्र के प्रति, समाज के प्रति और निजी व्यक्तिगत जीवन में हमें उत्साहवान बनाकर कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।
मेरा स्पष्ट विचार है कि जिंदगी को पूरी ऊर्जा और उल्लास के साथ जीना चाहिए। उत्साह से जीना चाहिये। आप कोई भी कार्य करो, उत्सव के रूप में करो, मन से करो, कर्तव्यपरायणता से करो, निष्ठा से करो। यदि हम सब उत्साह के साथ कार्य करेंगे, पात्रों के बीच में जाकर उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करेंगे तो हमारा जीवन एक उत्सव के रूप में सबके लिए यादगार रहेगा और हम भी अपने जीवन में खुशी की अनुभूति करेंगे।
निर्विवाद रूप से लड्डू सर्वसिद्धि दाता भगवान गणेश जी का प्रिय भोग भी है, जिन्हें संकटहर्ता, विघ्नहर्ता समझा जाता है। यही वजह है कि हमने भी अपने वैवाहिक वर्षगांठ को शुभत्व प्रदान करके के लिए स्वाद, स्वरूप और सेहतमंद सबसे पुरातन मिठाई लड्डू बनवाए हैं, ताकि उसे कुछ जगहों पर लोगों खासकर बच्चों के बीच वितरित किया जा सके। इस बात में कोई दो राय नहीं कि लड्डू का स्वाद आज भी अनोखा लगता है। यह देखने में भी रंग-बिरंगा हो चुका है जबकि पीलीमा इसकी पहचान है जो भगवा आवरण समेटे रहती है।
जनसाधारण के मुताबिक, यह बहुत ही शुभ प्रसाद माना जाता है। यूँ तो हमारे देश में तिरुपति का लड्डू प्रसिद्ध है, लेकिन हमारे हरेक इलाके में इसके स्थानीय स्वाद अलग-अलग मिलते हैं, जो किसी भी मायने में उससे कम भी नहीं होते। इसलिए इस पावन अवसर पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान रामजी, अपने इष्ट श्री हनुमानजी के अलावा सभी देवी- देवताओं, ग्राम देवता, स्थान देवता आदि से हमारी यही विनती है कि इस दिवस को ज्यादा से ज्यादा सफल और पावन बनाने का आशीर्वाद दें, ताकि हमारा दाम्पत्य जीवन सुख, शान्ति, समृद्धि प्रदायक बना रहे। इससे लोककल्याण का भी मार्ग प्रशस्त होता रहेगा।
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