बिजेथुआ महावीरन के दर्शन और पुलिस होली मिलन से हुई भक्ति और प्रेम रस की अनुभूति

बिजेथुआ महावीरन के दर्शन और पुलिस होली मिलन से हुई भक्ति और प्रेम रस की अनुभूति
@ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस, डीएम, जौनपुर जनपद

शनिवार को बिजेथुआ महावीरन, सुल्तानपुर के दर्शन और जौनपुर पुलिस होली मिलन कार्यक्रम के दौरान भक्ति और प्रेम रस की जो अनुभूति हुई, उसमें ही आम और खास के लिए जीवन दर्शन निहित है। यूँ तो कहा गया है कि- "जिंदगी की राहों में जो गम के साये हैं। हम एक में भी तन्हा थे, सब में भी अकेले हैं।" लेकिन जब भगवान से भक्त का मिलन होता है या फिर वरिष्ठ-कनिष्ठ जब एक साथ जुटकर कोई खास कार्यक्रम करते हैं तो वाकई भक्ति रस और प्रेम रस के साथ साथ संयोग रस की धारा भी जुड़ जाती है।


हुआ कुछ यूं कि डॉ कौस्तुभ, पुलिस अधीक्षक जौनपुर के नेतृत्व में पुलिस लाइन जौनपुर में पुलिस विभाग की परंपरागत होली मिलन का आयोजन गत 15 मार्च 2025 को अपराह्न 3 बजे से होना तय था। समारोह समयानुसार चल रहा था। चूंकि शनिवार का दिन था। इसलिए अपने इष्टदेव हनुमानजी की पूजा-अर्चना के बाद अकस्मात मेरे मन में विचार आया कि बिजिथुआ धाम (बिजेथुआ धाम), सुल्तानपुर के महावीरन हनुमानजी का आशीर्वाद प्राप्त किया जाए। ततपश्चात मैंने निर्णय लिया और गंतव्य की ओर चल दिया। 

दरअसल, यह सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल जनपद जौनपुर की शाहगंज तहसील के समीप ही सुल्तानपुर जनपद सीमान्तर्गत अवस्थित है। "बिजेथुआ धाम" महावीरन नाम यह पौराणिक स्थल सुल्तानपुर जनपद के कादीपुर तहसील क्षेत्र में अवस्थित है। बिजेथुआ महावीरन के प्रसिद्ध ऐतिहासिक धाम सम्बन्धी कथाओं के अनुसार, जब राम-रावण युद्ध के दौरान मेघनाथ के बाण लगने से लक्ष्मण जी मूर्क्षित हो गए तो हनुमानजी संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय की ओर निकले। 

कहते हैं कि अत्यधिक प्यास लगने पर वे विजेथुआ नामक इसी स्थल पर निर्मित उत्तरकुंड में पानी पीने के लिए चले गए। जबकि यहां पर रावण द्वारा भेजे गए कालनेमि नामक राक्षस ने वेश बदलकर उनकी यात्रा में विघ्न डालने की असफल कोशिश भी की। उसने साधु का वेश धारण कर लिया और उधर ही चल दिया, जिधर हनुमानजी पानी पीने के लिए जा रहे थे। इस बीच एक मकड़ी ने उनके कान में छद्मवेशी कालनेमि की मौजूदगी के बारे में उन्हें जानकारी दी। तब हनुमानजी ने तत्काल कालनेमि का बद्ध किया और कुंड में स्नान के बाद संजीवनी बूटी की खोज में निकल पड़े। चूंकि संजीवनी बूटी से ही लक्ष्मण जी के प्राण की रक्षा हुई। इसलिए यह कुंड अब मकड़ी कुंड के नाम से विख्यात है। श्री हनुमानजी जी, जो मेरे इष्ट भी हैं, उनकी इस पौराणिक शक्तिपीठ के दर्शन का लाभ लेकर और विद्वत आचार्य से विचार विमर्श और दर्शन के बाद जब मैं जौनपुर आ रहा था तो जो अलौकिक अनुभूति हुई, उसकी चर्चा शब्दों में नहीं की जा सकती। 

वहीं, जब मैं वापस लौटकर जनपद पुलिस लाइन में होली मिलन के निमंत्रण और आग्रह पर वहां पहुंचा तो मैं बहुत ही सुंदर कपड़ा एवं नई वेशभूषा में था। हालांकि वहां पर यह देखकर हतप्रभ हो चुका था कि यह होली मिलन नहीं, बल्कि होली खेलने का आमंत्रण था। क्योंकि वहां पर कीचड़, पानी, रंग और पानी के कीचड़ युक्त गड्ढे में सबको पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में गड्ढे में लाकर कीचड़ युक्त गड्ढे में स्नान कराकर होली खेली जा रही थी। इस प्रकार मन को यकीन नहीं हो रहा था कि क्या यहां पर अभी भी होली में ऐसा हुड़दंग होता है। परंतु आँखों से देख कर और सुनकर समझकर प्रयास किया कि ऐसी होली में कैसे प्रतिभाग करूँ।

फिर भी ऊर्जावान होने के कारण मैं कीचड़ युक्त गड्ढे में जाने से किसी तरह बचा, परन्तु पुलिस बल की प्रेम पूर्वक होली के खेल में सबके साथ सभी से प्रेम पूर्वक खेलने लगा। इस दौरान सबके कुर्ते फटे थे। आदरणीय जनपद न्यायाधीश भी उसी गड्ढे में उतरे फटे कुर्ते के बाद। वो भी बिना ऊपरी वस्त्र धारण किए ही होली खेल रहे थे। मेरे द्वारा भी रंगों से बचने के क्रम में सिर, आंख और सम्पूर्ण शरीर रंगों से सने होने के कारण सभी ने मुझे भी मेरी कमीज को निकालकर वस्त्रहीन कर दिया। पुनः मैंने अन्य कठिनाइयों से बचने के लिए होली का गीत गाया जो कई रूप में वायरल किया जा रहा है। परन्तु सच्चाई की जीत एवं रंगों के इस त्यौहार होली में गाया गया गीत विकास एवं धर्म, अध्यात्म एवं कर्तव्य निष्ठा पर आधारित मेरा सुझाव होगा, पुलिस लाइन में भी कीचड़ युक्त होली से बचकर पुष्पों, गुलाल, अबीर की होली खेली जानी चाहिए तथा होली मिलन के कार्यक्रम में होली खेलने के इस रूप से बचना चाहिए। क्योंकि डीएम होने के नाते मेरा जाना अपरिहार्य था, इसलिए मुझे जाना पड़ा। मुझे आंखों में जलन भी महसूस हुई, परन्तु प्रेम की होली में आंखों की जलन ठीक हो गई। वाकई सत्य की विजय अक्सर होती है और सत्य कभी परेशान और पराजित नहीं होता है।

इस प्रकार होली बीत गई। कुछ सुखद स्मृतियां शेष रह गईं हैं। सब कुछ बदल रहा है- प्रकृति व परिस्थिति भी। जौनपुर महोत्सव 2025 की उपलब्धि एवं प्रशंसा से मन खुश था, परन्तु कदाचित मन में कुछ परेशानी भी थी, फिर भी होली अच्छी रही। एक वीडियो पुलिस लाइन जौनपुर का काफी वायरल हो रहा है जिसमें डीएम एसपी की कपड़ा फाड़ होली का उल्लेख है। पुलिस प्रशासन में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी भी मानव हैं। महामानव या ऐसे नहीं, उनके हृदय में करुणा, माधुर्य, प्रेम और मस्ती न हो। हम सब भी मानव हैं। लघु मानव भी नहीं हैं कि प्रेम, करुणा, वात्सल्य, माधुर्य तथा मस्ती को भूल जाएं। महाकुंभ 2025 में जौनपुर पुलिस प्रशासन ने परिश्रम किया। होली का अवसर मिला। वह भी सबको कुशलता पूर्वक होली संपन्न करवाकर तो कुछ गीत संगीत और हंसी खुशी से होली पुलिस लाइन में मनाई गई।

जिलाधिकारी आवास पर होली का आयोजन पुष्प होली के रूप में रहा। पुलिस लाइन की होली हमेशा से इसी प्रकार से होती आई है। जिला न्यायाधीश और मुझे आमंत्रण मिला। हमें यहां की परंपरा का बहुत अधिक अनुभव नहीं था। मैं बहुत अच्छे लिबास में उत्कृष्ट कोटि की शर्ट एवं जीन्स पहनकर गया था। मन में ख्याल था कि अबीर की रंगों भरी होली होगी। परंतु वहां दृश्य अलग था। अपने को कैसे बचाया जाए, जबकि सभी ने प्रेम से मुझे ऊपर उठा लिया। और प्रेम में वह शक्ति है कि किसी से भी कुछ कराया जा सकता है।

कबीरदास जी ने ठीक ही कहा है कि "पोथी पढ़ी पढ़ी जग मुआ, पंडित हुआ न कोई। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े तो पंडित होई।" उपरोक्त भाव के अनुरूप सभी ने मुझे रंगों से सराबोर कर दिया। आंखों में रंग भर जाने से और साहस नहीं था कि रंगों की होली में अपने को सराबोर करूँ। इसलिए मंच से होली गाकर सभी को उत्साहित कर  प्रेम एवं रंगों के त्यौहार होली में प्रेम से होली के त्यौहार का आनंद पुलिस बल के साथ लिया। वायरल वीडियो का सच यही है कि इसमें प्रेम है, उत्कृष्ट कार्य करने की प्रेरणा है, सभी त्यौहारों में उत्कृष्ट व्यवस्था दिए जाने का संकल्प है और गंगा जमुना तहजीब का सुंदर शानदार संदेश है।

सभी को होली की शुभकामनाओं के साथ जौनपुर महोत्सव 2025 एवं वर्ष 2025 की होली सुंदर रही और उद्देश्य परक रही। "यदि कर्म तेरे पावन हैं सभी, डूबेगी नहीं नाव तेरी कभी। तेरी बांह पकड़ने को, वह वेश बदलकर आएगा। पता नहीं किस रूप में आकर, नारायण मिल जाएगा।" अच्छे कर्म करने के संकल्प के साथ सभी को पुनः होली की ढेर सारी शुभकामनाएं। जय हिंद, जय भारत।

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