अभिषेक कुमार और प्रणय राज की जोड़ी ने टीएसवीपी, झारखंड को दी एक नई ऊंचाई


टीएसवीपी झारखंड के प्रदेश संयोजक और सहसंयोजक ने छात्र हित के फैसले करके संगठन को दी एक नई ऊंचाई

हर्षित सिंह/संवाददाता
नईदिल्ली/रांची। बोकारो स्टील प्लांट में मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ने वाले ट्रेड यूनियन के नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह के पुत्र हैं अभिषेक कुमार, जो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद झारखंड के तकनीकी आयाम तकनीकी शिक्षा विद्यार्थी परिषद(टीएसवीपी), झारखंड के प्रदेश संयोजक हैं। समझा जाता है कि समाजसेवा के क्षेत्र में इनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि होने की वजह से ही इनका झुकाव भी उसी तरफ हुआ और ये अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े। 
बता दें कि अभिषेक कुमार अभाविप झारखंड के तकनीकी आयाम तकनीकी शिक्षा विद्यार्थी परिषद के पहले प्रभावशाली प्रदेश संयोजक हैं, जो लगातार दो बार से इस पद पर काबिज हैं। शायद इसलिए कि झारखंड राज्य में शिथिल पड़े तकनीकी शिक्षा विद्यार्थी परिषद को पुनः स्थापित करने का श्रेय अभिषेक कुमार के नेतृत्व में उनकी ऊर्जावान टीम को ही जाता है, जिसमें मुख्य रूप से इशिका रानी, प्रणय राज, राज रौशन पाण्डेय, हर्ष कुमार महतो, उज्जवल कुमार गुप्ता, गौरव मिश्रा और अन्य शामिल हैं और हर कार्य में सक्रिय सहभागिता रखते हैं।
बताया जाता है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद झारखंड के तकनीकी आयाम तकनीकी शिक्षा विद्यार्थी परिषद (टीएसवीपी), झारखंड प्रदेश संयोजक अभिषेक कुमार और प्रदेश सह संयोजक प्रणय राज की सजग, सक्रिय और जुझारू जोड़ी ने पिछले कुछ वर्षों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसे संगठन की उपस्थिति को पालिटेक्निक, आईटीआई जैसे संस्थानों में बढ़ाया, जिससे आज झारखंड में एबीवीपी काफी मजबूत हो चुकी है। यह अभिषेक कुमार और प्रणय राज के नेतृत्व वाली टीएसवीपी की बड़ी उपलब्धि है।
वर्षों से लंबित और 6 वर्ष की रजिस्ट्रेशन अवधि समाप्त होने पर भी वर्ष 2012 से लेकर 2018 तक के 500 विद्यार्थियों के बैकलोग का एक्जाम कराने का मांग किया जाना और राज्यपाल से परीक्षा कराने का आदेश दिलवाया जाना इनकी उल्लेखनीय उपलब्धि है। वहीं, विश्वविद्यालय को इंडस्ट्रीयल विजिट, मेधावी छात्रों को सम्मानित करने की मांग जैसे दर्जनों मांग और उनके पूरा होने और विद्यार्थी के लाभान्वित होने का श्रेय भी अभिषेक और प्रणय की युगल जोड़ी को जाता है, जिन्होंने छात्रों से जुड़े हर चुनौती को स्वीकार किया और उसका समुचित समाधान दिलवाकर टीएसवीपी और एबीवीपी की लोकप्रियता के ग्राफ को ऊंचा उठवाया।

चाहे कोरोना काल में डीटूडी परीक्षा कराने को लेकर आंदोलन करने का मुद्दा हो, या कोरोना काल में डिप्लोमा और डिग्री के विद्यार्थियों को विपरीत परिस्थितियों में भी विश्वविद्यालय में आंदोलन करके प्रमोट करवा कर सेशन को विलंब होने से बचाने की पहल, इसका भी श्रेय इन्हीं दोनों छात्र नेताओं को ही जाता है। वहीं, विश्वविद्यालय स्तर पर छात्रों की समस्याओं को निरंतर उठाने और कुलपति से मिलकर उनका निस्तारण कराने, विश्वविद्यालय में प्लेसमेंट सेल बनाने की मांग और विश्वविद्यालय स्तर पर प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करवा कर सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए रोजगार दिलाने का श्रेय भी अभिषेक-प्रणय की तेजतर्रार जोड़ी के नेतृत्व वाले टीएसवीपी को ही जाता है।

हाल ही में राजकीय महिला पॉलिटेक्निक रांची के छात्राओं के 3 वर्षों से लंबित काॅलेज यूनिफॉर्म वितरण के मांगों पर काॅलेज प्रशासन के द्वारा मानना और वितरण करने का नोटिस जारी करना या तकनीकी संस्थानों में अभाविप की रिकार्ड सदस्यता दिलवाने का श्रेय भी अभिषेक कुमार और प्रणय राज के नेतृत्व वाली टीएसवीपी को ही जाता है। तकनीकी शिक्षा विद्यार्थी परिषद जो कि झारखंड में अपने ऐतिहासिक फैसलों और काम के लिए जानी जाती हैं, उसके पीछे का संयुक्त दिमाग इन दोनों नेताओं का ही है।

तकनीकी शिक्षा और तकनीकी विद्यार्थियों के लिए आज तक का सबसे बेहतरीन काम जो झारखंड में हुआ है या जो हो रहा है उसका एकमात्र श्रेय प्रणय और अभिषेक के कुशल नेतृत्व वाली इस युगल जोड़ी को ही जाता है। महज दो सालों में टेक्निकल एजुकेशन के क्षेत्र में जो अतुलनीय कार्य जो हुए हैं, वो अभिषेक कुमार और प्रणय राज के नेतृत्व में टीएसवीपी ने ही किए हैं।

सच कहा जाए तो तमाम कठिनाइयों और षड्यंत्रों के बावजूद ये जोड़ी लगातार तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रही है और हर दिन नए कीर्तिमान गढ़ रही है। इसलिए हमें उम्मीद ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि इस जोड़ी के असाधारण काम और मेहनत को देखते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इन्हें आगे और भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपेगी।

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