झारखंड की तकनीकी छात्र राजनीति का उभरता हुआ चेहरा बनते जा रहे हैं प्रणय राज
झारखंड की तकनीकी छात्र राजनीति का उभरता हुआ चेहरा बनते जा रहे हैं प्रणय राज
हर्षित सिंह/संवाददाता
नई दिल्ली/पटना/रांची। जी हाँ, डीएनए बोलता है। यदि आपके बाप-दादा समाजसेवी रहे हैं तो आपका रुझान भी समाजसेवा की तरफ हो सकता है। आप अपने जीवन के प्रारंभिक काल में भी छात्र राजनीति की ओर रुख कर सकते हैं। देखा जा रहा है कि बिहार के लोग झारखंड की सियासत में हिट कर रहे हैं।
बतौर उदाहरण आप भवानीपुर, कहलगांव, भागलपुर निवासी और गोड्डा, झारखंड के सांसद निशिकांत दुबे का नाम ले सकते हैं। कुछ इसी तरह से सबलपुर, पीरपैंती, भागलपुर निवासी प्रणय राय पाकुड़, झारखंड की छात्र राजनीति में ऐसा धमाल मचा रहे हैं, जिससे आप यह कहने को विवश हो जाएंगे कि पूत के पांव पालने में ही दिखाई दे जाते हैं।
कहा भी गया है कि होनहार विरवान के होत चिकने पात।बीजेपी नेता द्वय सुमन राय-राजहंस राय के पुत्र और इलाके के सुप्रसिद्ध समाजसेवी बाबू हरिहर राय के प्रपौत्र प्रणय राय की सियासी प्रतिभा की चर्चा आजकल शैक्षणिक सियासी गलियारों में रांची ही नहीं बल्कि पटना और दिल्ली तक में चल रही है। छात्रों को उदाहरण पूर्वक बताया जा रहा है कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए धैर्य, प्रयास और जीवटता की जो त्रिवेणी प्रणय राय के हाव-भाव में दिखाई देती है, यदि छात्र उसका अनुकरण करें तो निकट भविष्य में अच्छे छात्र नेता पैदा किये जा सकेंगे, जो भविष्य के भारत यानी अमृतकाल खंड की राजनीति की दशा और दिशा तय कर सकते हैं।
बता दें कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, झारखंड के तकनीकी आयाम तकनीकी शिक्षा विद्यार्थी परिषद(टीएसवीपी), झारखंड के प्रदेश सह संयोजक प्रणय राज, जिसे झारखंड के तकनीकी शिक्षण संस्थानों के बच्चे राॅय प्रणय के नाम से भी जानते हैं, पिछले कुछ वर्षों में विद्यार्थी परिषद की छात्र राजनीति में बहुत तेजी से उभरे हैं। विद्यार्थी परिषद का जो संगठन और उपस्थिति बीटेक, पालिटेक्निक, आईटीआई, जैसे संस्थानों में आज झारखंड में दिखाई दे रहा है वो अभिषेक कुमार और प्रणय राज के नेतृत्व वाली टीएसवीपी की देन बताई जा रही है।
बीते कुछ वर्षों में इनकी अगुवाई में जिस तरह से स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम, बैकलोग एक्जाम, इंडस्ट्रीयल विजीट और मेधावी छात्रों को सम्मानित करने-करवाने की मांग आदि की गई है, उससे छात्रों को काफी लाभ हुआ है। जिससे बीजेपी की छात्र इकाई एबीवीपी की क्षेत्रीय पकड़ में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। बताया जाता है कि कोरोना काल में डीटूडी परीक्षा कराने को लेकर जिस तरीके से सफल आंदोलन किया गया, उससे छात्रों की समस्याओं का समाधान हुआ।
इन छात्रों की करिश्माई पहल से ही कोरोना काल में डिप्लोमा और बीटेक के विद्यार्थियों को विपरीत परिस्थितियों में भी विश्वविद्यालय में आंदोलन करके प्रमोट करवा कर सेसन को विलंब होने से बचाया गया। वहीं, विश्वविद्यालय स्तर पर भी छात्रों की समस्याओं को निरंतर उठाने और कुलपति से मिलकर उनका निस्तारण करवाने से छात्रों के बीच इन उभरते हुए छात्र नेताओं की पकड़ मजबूत हुई। बताया जाता है कि विश्वविद्यालय में प्लेसमेंट सेल बनाने की मांग और विश्वविद्यालय स्तर पर प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करवा कर सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए रोजगार दिलाने का श्रेय भी अभिषेक-प्रणय की जोड़ी के नेतृत्व वाले टीएसवीपी को जाता है।
यही नहीं, राजकीय महिला पॉलिटेक्निक रांची के छात्राओं के 3 वर्षों से लंबित मांगों पर कालेज प्रशासन के द्वारा उनकी मांगों को मानने का आश्वासन भी अभिषेक कुमार और प्रणय राज के नेतृत्व वाली टीएसवीपी को जाता है।
छात्र बताते हैं कि तकनीकी शिक्षा और तकनीकी विद्यार्थियों के लिए आज तक का सबसे बेहतरीन काम, जो झारखंड में आज हुआ है या जो हो रहा है, उसका एकमात्र श्रेय प्रणय और अभिषेक की कुशल नेतृत्व वाली इस जोड़ी को जाता है।
इसलिए चर्चा है कि एवीबीपी इनकी उपलब्धियों के नक्शेकदम पर अन्य गैर भाजपा शासित राज्यों में भी छात्र नेताओं को आगे बढ़ाने के लिए एक रोड मैप थमाने की योजना पर विचार कर रही है, ताकि छात्रों का भला हो और सँगठन को मजबूती मिले। जानकारों के मुताबिक, महज दो सालों में टेक्निकल एजुकेशन के क्षेत्र में जो अतुलनीय कार्य हुए हैं, वो अभिषेक कुमार और प्रणय राज के नेतृत्व में ही टीएसवीपी ने ही किए हैं। जिस तरह से तमाम कठिनाइयों और षड्यंत्रों के बावजूद यह जोड़ी लगातार तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रही है और नित्य नए कीर्तिमान गढ़ रही है, उसको झारखंड के पड़ोसी प्रान्त बिहार-उड़ीसा-पश्चिम बंगाल में भी अपनाए जाने की जरूरत है।
समझा जाता है कि यदि इन छात्र नेताओं को मास्टर ट्रेनर बनाकर यदि इन गैर भाजपा शासित राज्यों में छात्र नेताओं को व्यवहारिक प्रशिक्षण देने के लिए भेजा जाए तो इससे न केवल एबीवीपी का जनाधार बढ़ेगा, बल्कि इन राज्यों में संघर्षरत भाजपा को भी बहुत जल्द सत्ता में आने में मदद मिलेगी। क्योंकि ये करिश्माई छात्र हैं।
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