क्या भूलुं क्या याद करूँ...शुक्रिया आप सभी सुधीजनों का...

# क्या भूलुं क्या याद करूँ...शुक्रिया आप सभी सुधीजनों का...

@ डॉ दिनेश चंद्र 'सिंह', डीएम, बहराइच, यूपी

12 मई 2022, मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण, मंगलकारी, भूत एवं भविष्य की उस सुखद यात्रा को स्मरण करने का दिवस है, जिसने मेरे परिवार को खुशियों की एक ऐसी चिरस्मरणीय सौगात दी, जिसके बलबूते पर मैंने अपने गृहस्थ जीवन की सुखद यात्रा की शुरुआत हर्ष व उल्लास भरे वातावरण में की। इसी दिन हमने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती सपना रानी सिंह के साथ सफल एवं सुखद वैवाहिक जीवन की शुरुआत की, जो परम पिता परमेश्वर की असीम कृपा से अनवरत रूप से जारी है। 

देखा जाए तो विगत 27 वर्षों की इस यात्रा में मुझे अपने सेवाकाल के दौरान निम्नलिखित सभी स्थानों पर रहने व लोगों से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मेरी पहली पदस्थापना हरिद्वार से शुरू हुई और सहारनपुर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, मेरठ, इलाहाबाद, गोरखपुर, अलीगढ़, गाजियाबाद, कानपुर देहात, लखनऊ से गुजरते हुए फिलवक्त बहराइच तक आ पहुंची है, जहां पर मैं जिलाधिकारी के रूप में पदस्थापित हूँ। सिविल प्रशासन का एक महत्वपूर्ण अंग होने के चलते सभी स्थान पर जनता एवं जनप्रतिनिधिगण के साथ-साथ प्रेस एवं साहित्य जगत के विभिन्न वरिष्ठ अधिवक्ता, मूर्धन्य साहित्यकार से लेकर सड़क एवं बाजार में छोटे-बड़े कारोबारी सभी ने मुझे प्यार दिया। 
इसकी पृष्ठभूमि को समझने के लिए, यह जानना आवश्यक है कि यदु ऐसा है तो उसका कारण है व्यवहारिक शिक्षा की बुनियाद पर खड़ा उदार व्यक्तित्व और उस व्यक्तित्व को  गढ़ने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज की उस पौराणिक कर्मभूमि ने, जिसमें हमने यह उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त की। इस बात में कोई दो राय नहीं कि व्यक्ति अपने कर्म से ही अपनी पहचान बना सकता है। मैंने इलाहाबाद में जूता साफ करने से लेकर कपड़े धोने, स्वादिष्ट व्यंजन यानी भोजन बनाने की कला के साथ साथ अपने बुजुर्गों एवं अपने से वरिष्ठ एवं अनुज जनों के प्रति कैसे व्यवहार किया जाता है, वह न केवल सीखा अपितु अपने जीवन में उतारा, अपनी कार्यशैली में पिरोया और उसे ही व्यवहारिक जीवन का उमंग बनाकर उसे आत्मसात किया। 

वैसे तो मैं शिक्षा के क्षेत्र में में अग्रणी रहा, परंतु ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने के कारण अंग्रेजी में उत्कृष्ट प्रवीणता न होने के कारण सीधे तौर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा में एंट्री नहीं पा सका। किंतु प्रांतीय सिविल सेवा में सीधे उत्कृष्ट ढंग से चयन की प्रक्रिया के माध्यम से भारतीय सिविल सेवा में चयन का द्वार भी धीरे-धीरे प्राप्त करने में सफल हुआ। मुझे वैवाहिक वर्षगांठ पर इस वर्ष पूर्व वर्षों की भांति सभी जन का प्यार मिला। मैं उस प्यार की अनुभूति से इतना प्रसन्न एवं खुश हूं कि मैं कैसे कहूं अपने खुशी के क्षणों की मर्म स्पर्श की मधुर कहानी को! इसलिए इसका वर्णन मौन रहकर सभी के प्रति यथाश्रेष्ठ अभिवादन कर रहा हूं। 

.....और एक ऐसे शुभकामनाएं भरे संदेश के साथ अपने को जोड़ते हुए श्रीमान भागवत शुक्ला जी को हृदय से आभार व्यक्त करना चाहूंगा, जिन्होंने अपने शुभकामना संदेश में मुझे एहसास भी कराया है। उनके ही शब्दों में, "लोकप्रियता एक ऐसा शब्द है जिसे वरन तो हर कोई करना चाहता है, पर यह ऐसी राजकुमारी है जो अपनी वरमाला हर किसी के गले में नहीं डालती है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि ये, ये भी नहीं सोचती है कि जिसे वह चुन रही है- वह नेता है, अफसर है या आम अदना-सा इंसान। बस जिसे यह अपनी कसौटी पर कसकर अपने लायक चुन ले ले। लेकिन जिसे चुनती है उसे अपने करोड़ों के दिलों का राजा बना देती है। 

यूं तो श्रीमान शुक्ला जी को मैं सिर्फ नाम के आधार पर ही जानता हूं, क्योंकि कभी बहुत ही निकटता पूर्वक मिलने का अवसर नहीं मिला। परंतु आपके शुभकामना संदेश से मुझे अपने व्यवहार को और अधिक संयम के साथ मजबूत बनाने की प्रेरणा मिली है। मैं हृदय की गहराइयों के साथ आपका धन्यवाद करता हूं। वहीं अनेकों मेरे शुभेच्छुओं के संदेश ने मुझे खुशी के पल का एहसास कराया है। मैं अपने और अपने परिवार के सभी सदस्यों की ओर से ऐसे शुभकामना भरे संदेश के प्रत्येक शब्दों के मोतियों को अपनी दिल की तिजोरी में सदैव संजोकर अक्षुण्ण रखूंगा।

गोया, मैं भी एक मानव हूँ। इसलिए मानवोचित दुर्बलता एवं कमजोरी मेरे व्यक्तित्व में भी ढूंढने पर मिल जाएगी। आप सभी ने उन कमियों और दुर्बलताओं की उपेक्षा कर मुझे प्यार, स्नेह एवं आशीर्वाद दिया, उससे मैं अभिभूत हूं, अनुगृहित एवं कृतज्ञ हूँ। अपनी मातृभूमि, कर्मभूमि एवं वर्तमान कार्यस्थली बहराइच के नागरिकों का विशेष आभार व्यक्त करता हूं कि बहराइच की कर्मभूमि में मुझे सृजन का अवसर भी प्राप्त हुआ। मेरी चौथी पुस्तक "काल प्रेरणा" दिनांक 20 मई 2022 को भारत माता के वीर सपूत, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साहित्यिक  चेतना, सुस्पष्ट राजनीतिक चेतना तथा विधि की सूक्ष्म से सूक्ष्म जानकारी के मर्मज्ञ, उत्कृष्ट कोटि के विद्वान, राष्ट्र के प्रति समर्पित राष्ट्र प्रेमी, केरल के राज्यपाल श्री (डॉ) आरिफ मोहम्मद खान साहब द्वारा विमोचन किया जाएगा। इसलिए आप सबकी शुभकामनाएं मेरी सृजन "काल प्रेरणा" पुस्तक के प्रति भी चाहता हूं। "काल प्रेरणा" की विषय वस्तु मैं  सभी से 20.05.2022 को साझा करूंगा। 

# आपके स्नेहाकांक्षी
डॉ दिनेश चंद्र 'सिंह'
जिलाधिकारी, बहराइच, उत्तरप्रदेश।

                 जय हिंद, जय भारत।

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