जनसेवा के लिए चुनावी राजनीति में आऊंगा, किसी की बुराई के लिए नहीं: संजीव गुप्ता

जनसेवा के लिए चुनावी राजनीति में आऊंगा, किसी की बुराई के लिए नहीं: संजीव गुप्ता

# गाजियाबाद शहर विधानसभा सीट से शीर्ष उद्यमी, लोकप्रिय समाजसेवी व भाजपा कोषाध्यक्ष संजीव गुप्ता द्वारा टिकट की दावेदारी ठोकने से उनके प्रतिस्पर्धी नेताओं के होश उड़े, कैसे जानिए विस्तार से.....

कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार
गाजियाबाद। जब कोई राजनेता और टिकट प्रार्थी बीजेपी जैसे दुनिया के सबसे बड़े दल से यह कहे कि "मैं जनसेवा के लिए राजनीति में आना चाह रहा हूँ, मुझे किसी की बुराई नहीं करनी है।" तो दिग्गज राजनेता भी यही समझते हैं कि टिकट चाहने वाला लंबे रेस का सियासी घोड़ा है, जिस पर पार्टी यदि दांव लगाने का रिस्क लेती है तो यह अपने क्षेत्र में न केवल पार्टी को नई मंजिल देगा, बल्कि सियासत में अक्सर होनेवाली पारस्परिक आपाधापी में भी कभी थक कर नहीं बैठेगा, क्योंकि इस बात की गारंटी उसके शुरुआती लहजे से ही मिल रही है। जी हां, मैं बात कर रहा हूँ विगत 18 वर्ष से भाजपा में विभिन्न पदों पर रहते हुए कुशलता पूर्वक अपनी जिम्मेदारी निभा रहे लघु उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासभा के जिला चेयरमैन एवं प्रतिष्ठित समरकूल समूह के सीएमडी संजीव कुमार गुप्ता की, जिन्होंने हाल ही में भाजपा के महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा से मिलकर गाजियाबाद शहरी विधानसभा सीट से अपनी दावेदारी पत्र उन्हें सौंपी है। इसके बाद से सुप्रसिद्ध समाजसेवी व उद्यमी संजीव गुप्ता  न केवल गाजियाबाद में बल्कि लखनऊ से लेकर दिल्ली के भाजपाई गलियारे में चर्चा का विषय बन चुके हैं। 

यही वजह है कि वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार कमलेश पांडेय ने उनसे बातचीत करके यह जानने की कोशिश की है कि उद्यम के क्षेत्र में अपनी सफलता का डंका पीटने के बाद सियासत में कूदने का ख्याल उन्हें कैसे आया और न केवल तहसील, बल्कि जनपद, राज्य और देश के लिए क्या कुछ करने की तमन्ना उन्होंने अपने दिल में संजो रखी हैं, हमारे पाठकों से सबकुछ साझा कीजिए।

सवाल:- गाजियाबाद शहर विधानसभा सीट से अपनी दावेदारी ठोकते वक्त पार्टी नेतृत्व के समक्ष आपने अपनी क्या क्या विशेषताएं गिनाई, कुछ बताइए।

जवाब:- पार्टी के महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा को सौंपे हुए दावेदारी प्रपत्र में हमने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को अवगत कराते हुए लिखा है कि उनका परिवार विगत पांच दशक से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अनुयायी है। वह खुद विगत 30 वर्षों से भाजपा व संघ से जुड़े हैं। उन्होंने 10 महानगर अध्यक्षों के साथ पार्टी के विभिन्न पदों पर रहते हुए कार्य किया है। पिछले दो बार से वह पार्टी के कोषाध्यक्ष हैं। वे जनसेवा के लिए चुनावी राजनीति में आना चाहते हैं, किसी की बुराई करने के लिए नहीं। उन्होंने दावेदारी पत्र में कहा कि वह पहली बार टिकट के लिए आवेदन कर शहर विधानसभा 56 गाजियाबाद से 2022 विधानसभा चुनाव के लिए दावेदारी कर रहे हैं। इसलिए पार्टी उन्हें एक बार टिकट देने पर विचार करे। यदि वह नहीं भी देगी तो पार्टी की पूर्ववत सेवा करते रहेंगे।

सवाल: गाजियाबाद आप कब आए और यहां तक पहुंचने के लिए क्या क्या किये?

जवाब: 1 जनवरी 1968 को मेरा जन्म हुआ है। जब मैं मात्र 17 साल का रहा होगा तो 1985 में मैं गाजियाबाद चला आया। बचपन में पढ़ाई करने के दौरान भी मैं अपनी किराना की दुकान पर पिता जी के साथ बैठा करता था, इसलिए व्यापारिक समझ मुझमें गहरी होती चली गई। फिर मैंने अपने कारोबार की नींव डाली। आज से 30 साल पहले यानी वर्ष 1991 में मैं व्यापार मंडल का युवा मंत्री बना। फिर बीजेपी जॉइन कर ली। फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मैंने लघु उद्योग प्रकोष्ठ के संयोजक, व्यापार प्रकोष्ठ के दो-दो बार महानगर अध्यक्ष, लघु उद्योग व्यापार मण्डल के प्रदेश अध्यक्ष, व्यापार प्रकोष्ठ के जिला व महानगर चेयरमैन जैसे पदों को भी सुशोभित किया है। 

सवाल:- आप एक समाजसेवी भी हैं। अपने कुछ अहम सेवा कार्यों पर प्रकाश डालिए।

जवाब:- जनसेवा की भावना मुझे अपने अभिभावकों से ही मिली। लेकिन बीजेपी व संघ के जनसरोकार ने उसमें काफी गति प्रदान की। उनसे जुड़ीं अनेकानेक संस्थाओं में भी विभिन्न पदों पर अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए सनातन धर्म की पुनर्स्थापना में अपनी सूक्ष्म भूमिका अदा की है। मां वैष्णो धाम मंदिर की स्थापना कर उसके चेयरमैन के तौर पर लोगों की बहुत तरीके से सेवा की है। कई गौशालाओं की सेवाओं से भी जुड़े हुए हैं। 

सवाल:- जनपद के दानदाताओं में आपका नाम भी शुमार किया जाता है, खासकर कोरोना काल में और भी। आखिर क्या क्या किया है आपने। कुछ बताइये तो सही।

जवाब:- मैं दान और धर्म कार्य के प्रदर्शन में विश्वास नहीं रखता। लेकिन जब आप पूछ रहे हैं तो कुछ साझा कर रहा हूँ। जब भी किसी आदमकद व्यक्ति ने जरूरतमंद लोगों या संस्थाओं के लिए सहयोग मांगा तो सामर्थ्य अनुरूप देने की कोशिश की, जिन्हें यहां पर गिनाना उचित नहीं होगा। कोरोना काल में न केवल गाजियाबाद, बल्कि दिल्ली एनसीआर में कई जगहों पर लोगों की उम्मीद के अनुरूप अन्न, जल, वस्त्र और अपनी फैक्ट्री के उत्पादों को भी निःशुल्क देने की कोशिश की, ताकि मानवता पर आंच नहीं आये। एम्स, नई दिल्ली तक को मैंने निःशुल्क कूलर प्रदान किये हैं। गोयल स्टोर गाजियाबाद से हमने हरेक दल के लोगों की अनुशंसा पर जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने का कार्य किया, ताकि किसी की आत्मा को कष्ट नहीं पहुंचे।

सवाल:- गाजियाबाद के लोगों के लिए आप क्या क्या करना चाह रहे हैं, जो राजनीति में आने पर ही संभव है।

जवाब:- झुग्गियों में रहने वाले जितने भी गरीब लोग हैं, सबको मकान दिलवाना उनकी प्राथमिकता है। उसी तरह रेहड़ी-पटरी पर समान बेचने वाले लोगों के लिए एक पक्का स्थायी ठिया मिले, यह उनकी कोशिश होगी। इसके लिए पैसा कहां से आएगा, उसका जुगाड़ हम कर लेंगे, सरकार पर ज्यादा बोझ नहीं डालेंगे। इसी तरह सीमाओं के रखवाले सैनिकों के लिए, खासकर अपंगता की स्थिति में रहने वालों के लिए एक फंड बनाने की मुहिम चलाएंगे।

इसके अलावा, दिल्ली और नोएडा की तर्ज पर गाजियाबाद के इंडस्ट्रियल एरिया को भी फ्री होल्ड करवाएंगे। जहां पर आवासीय एरिया फ्री होल्ड नहीं है, उसे भी फ्री होल्ड करवाएंगे। कुछ प्लॉट्स को आवासीय या इंडस्ट्रियल से कमर्शियल भी करवाएंगे, जो उसके अनुरूप खरा उतरने वाले स्थानों पर होंगी। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में एफ आर बढ़ाकर अच्छा कार्य किया है। लेकिन फ्री होल्ड की दिशा में जब वह त्वरित कार्रवाई करेगी तो यूपीएसआईडीसी, जीडीए व आवास विकास परिषद आदि की आय भी बढ़ेगी, क्योंकि फ्री होल्ड होने पर एक चौथाई धनराशि बतौर शुल्क सरकारी कोष में ही जमा होंगे।

उन्होंने कहा कि गाजियाबाद को ग्रीन, क्लीन और पॉल्युशन फ्री टाउन बनाने के लिए जो कुछ भी करना होगा, वह पूरी तन्मयता पूर्वक करेंगे।

सवाल: अपने देश और प्रदेश के लिए आपकी क्या प्राथमिकताएं होंगी, यदि आपकी राय सक्षम लोगों द्वारा ली जाए तो।

जवाब:- भाजपा का मतलब ही राष्ट्रवाद है। हर भाजपाई अपने देश की आन, बान और शान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने की कुव्वत रखता है। पहले राष्ट्र हित, फिर समाज हित हमारे लिए सर्वोपरि है। हम अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देंगे, लेकिन राष्ट्र को कभी भी झुकने नहीं देंगे। दुनियादारी में पीएम मोदी ने जिस 56 इंच सीने का लोहा मनवाया है, वह यथावत रहे, यही हमलोग चाहते हैं। हल्दीघाटी वाले भामाशाह हमारे प्रेरणा स्रोत हैं।

जहां तक प्रदेश की बात है तो सीएम योगी आदित्यनाथ की सख्ती से गुंडा राज खत्म हुआ है, माफ़ियावाद हतोत्साहित हुआ है और छोटे-मोटे अपराध नियंत्रित हुए हैं। इससे व्यापारी और महिलाएं दोनों भयमुक्त हुए हैं। पारदर्शी सरकार के आने से भ्रष्टाचार पर रोक लगी है। यदि कुछ अधिकारी चोरी छुपे गड़बड़ कर रहे हैं, तो अगली बार हमारी सरकार उनका भी शिनाख्त करके इलाज कर देगी।

सवाल:- व्यापारियों के हित में क्या क्या करना और करवाना आपकी प्राथमिकता होगी?

जवाब:- पीएम नरेंद्र मोदी की युगान्तकारी कारोबारी नीतियों से व्यापारियों को काफी फायदा हो रहा है। वन नेशन, वन टैक्स यानी जीएसटी से निर्माताओं को काफी सहूलियत मिली है। इसमें और भी सुधार करने की जरूरत है, क्योंकि अभी भी कुछ अधिकारीगण ऊपरी आय की चाहत में कारोबारियों को परेशान कर रहे हैं, जो ज्यादा दिन नहीं चलने दिया जाएगा। पार्टी के पास सारी बातें पहुंच रही हैं और जीएसटी में अपेक्षाकृत सुधार शीघ्र नजर आएंगे, जैसा कि उन्हें भी आश्वासन मिला है। उन्होंने पहले की अलग अलग कर दरों, फार्म 31 और फार्म सी का हवाला देते हए पूरे मुद्दे की बारीकियों को बताया।

बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के तहत सबसे पहले मिशन से जुड़ कर उद्यमी व राजनेता संजीव गुप्ता ने पीएम मोदी के सपने को आगे बढ़ाने का प्रयास करने में अपने महत्वपूर्ण कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं। भाजपा के दिग्गज नेता भी उनकी विनम्रता, सादगी व दूरदर्शिता के कायल हैं। यही वजह है कि गाजियाबाद शहर विधानसभा चुनाव क्षेत्र 56- से शहर के प्रमुख समाजसेवी और भाजपा के जिला कोषाध्यक्ष संजीव गुप्ता की दावेदारी करने से ही टिकट मांगने वाले भाजपाइयों के होश उड़े हुए हैं, क्योंकि श्री गुप्ता की दावेदारी को राजनीतिज्ञ एक बड़े बदलाव के रुप में आंक रहे हैं। 

वाकई जिस तरह से संजीदगी के साथ सक्रिय राजनीति में उतरकर उन्होंने टिकट की दावेदारी पेश की है और इसे सामान्य प्रक्रिया बता कर पार्टी के अग्रिम आदेश को सर्वोपरि मानने की वकालत करते नजर आ रहे हैं, उससे उनका सियासी कद ऊंचा उठा है। वहीं टिकट को लेकर भाजपाइयों के बीच आपसी वर्चस्व की चर्चा भी शहर में जंगल की आग की तरह फ़ैल चुकी है। सभी अपने राजनीतिक गॉड फादर के आश्वासन के अनुरूप टिकट फाइनल होने के इंतजार में हैं और पार्टी की तरफ से मकरसंक्रांति बाद होने वाली घोषणा की ओर टकटकी लगाए हुए ताक रहे हैं।

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