हे गणतंत्र! तुझे सलाम! तुझसे से ही है सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा..
हे गणतंत्र! तुझे सलाम! तुझसे से ही है सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा..
@ कमलेश पांडेय/स्थानीय संपादक, लोकनायक भारत
26 जनवरी 2022 को भारत अपना 73वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। इस बार गणतंत्र दिवस पर अलग यह होगा कि गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम 23 जनवरी यानी सुभाष चंद्र बोस जयंती से शुरू होगा, जबकि पिछले साल तक यह 24 जनवरी से शुरू होता था। वहीं, इस बार इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति नहीं जली होगी, क्योंकि इसका विलय राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल )में कर दिया गया है। भारत के राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में आयोजित समारोह में ध्वजारोहण करते हैं। गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति भव्य परेड की सलामी लेते हैं। राज्यों में वहां के राज्यपाल राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। वहीं, स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं और राज्यों में मुख्यमंत्री ध्वजारोहण करते हैं।
गणतंत्र दिवस भारत का राष्ट्रीय पर्व है। इसे हर साल 26 जनवरी को धूमधाम से मनाया जाता है। देश में गणतंत्र दिवस या रिपब्लिक डे के अवसर पर स्कूल-कॉलेजों में कार्यक्रम होते हैं। इस दिन राष्ट्रीय अवकाश रहता है।
आपको पता होगा कि इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम 1935 को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। एक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतान्त्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था।
बता दें कि 26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। यह भारत के तीन राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है, अन्य दो राष्ट्रीय अवकाश स्वतन्त्रता दिवस और गांधी जयंती हैं। गणतंत्र दिवस पर उत्सव परेड, भाषण, विद्यालयों में मिठाइयों का वितरण एवम् सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि आयोजित होते हैं। इस दिन हर भारतीय अपने देश के लिए प्राण देने वाले प्रत्येक व्यक्ति को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम संदेश देते हैं। इस मौके पर स्कूलों, कॉलेजों आदि में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
26 जनवरी को भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिल्ली के राजपथ पर भारतीय ध्वज फहराया जाता है। 26 जनवरी को हमारे देश की राजधानी में बहुत सारे आकर्षक और मन को मोह लेने वाले कार्यक्रम किए जाते हैं। इस मौके पर देश की राजधानी दिल्ली को किसी दुल्हन की तरह सजाया जाता है। दिल्ली में बड़ी धूमधाम से परेड निकाली जाती है। देश के कोने कोने से लोग दिल्ली में 26 जनवरी की परेड देखने दिल्ली आते हैं, हालांकि पिछले 2 वर्ष से कोरोना महामारी के कारण यह संख्या सीमित कर दी गई है। दिल्ली में बड़े ही धूमधाम से अस्त्र-शस्त्र व विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली सांस्कृतिक झांकियों का प्रदर्शन होता है। 26 जनवरी के दिन राष्ट्रपति की सवारी बड़ी ही धूम धाम से निकाली जाती है और भी बहुत से मनमोहक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
देश के हर कोने में जगह जगह 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जैसे- नृत्य नाटक आदि। 26 जनवरी का यह त्योहार केवल भारत द्वारा ही नहीं मनाया जाता बल्कि दुनिया भर में निवास कर रहे प्रत्येक भारत वासी द्वारा मनाया जाता है। विदेशों में भारतीय दूतावास में ये कार्यक्रम पूरी भव्यता के साथ आयोजित किये जाते हैं।
# ये है गणतंत्र दिवस मनाने का उद्देश्य
गणतंत्र दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि 26 जनवरी 1950 को पूरे 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगा कर बनाया गया भारतीय संविधान पूर्ण रूप से लागू किया गया था और हमारे देश भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया गया। वैसे तो हमारा देश 15 अगस्त 1947 को अंग्रेज़ों के चंगुल से आज़ाद हो गया था परंतु इस आज़ादी को रूप 26 जनवरी को पूर्ण रूप से दिया गया। तब से अब तक हम इस दिवस को आज़ादी के दिन के रूप में ही हमलोग मनाते आये हैं। आज हमें अपना संविधान मिले हुए पूरे 73 साल हो चुके हैं।
हमारे देश की आज़ादी किसी भी एक व्यक्ति के कारण नहीं प्राप्त हुई, बल्कि यह बहुत सारे भगत सिंह, महात्मा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस आदि जैसे महान पुरुषों के त्याग व बलिदान का परिणाम है। देश भक्त अपने देश को गुलामी की जंजीरों से बंधा ना देख सके और अपने देश को आज़ाद कराने के लिए उन्होंने अपने प्राण तक त्याग दिये। उनके बलिदानों के कारण ही अंग्रेज़ों को अपने घुटने टेकने पड़े और उन्होंने भारत को आज़ाद कर दिया।
इसलिए, गणतंत्र दिवस के दिन भी हम लोग इन महान पुरुषों के बलिदान को याद करते और उनसे प्रेरणा लेते हैं कि हम भी इन्हीं महान पुरुषों की तरह अपने देश के लिए अपने प्राण त्याग देंगे। उसकी आन, बान और शान की रक्षा के लिए हमसब हर समय तैयार रहेंगे और दोबारा कभी अपने देश को गुलामी की जंजीरों में बंधने नहीं देंगे। हम सब को इन देश भक्तों से प्रेरणा लेनी चाहिए और देश की हिफाज़त के लिए तैयार रहना चाहिए। गणतंत्र दिवस को मनाने का एक उद्देश्य यह भी है कि हम उन महान पुरुषों के बलिदान को याद करके उनसे प्रेरणा लेते रहते हैं।
प्रत्येक भारत वासियों को भारत के शहीदों से प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने देश को ऊँचाईयों तक पहुंचाने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए। अब हर भारतीय का कर्तव्य बनता है कि वह देश के विकास के लिए अपना पूरा योगदान दे और देश की रक्षा के लिए हर समय खड़ा रहे।
# गणतंत्र दिवस का है जुनूनी इतिहास
सन् 1929 के दिसंबर में लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ, जिसमें एक प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को स्वायत्त उपनिवेश (डोमीनियन) का पद नहीं प्रदान करेगी, जिसके तहत भारत ब्रिटिश साम्राज्य में ही एक स्वशासित इकाई बन जाए तो उस दिन ही भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की जाएगी और इस हेतु उनलोगों ने अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। उस दिन से सन 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी को ही प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। इसके पश्चात, स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन यानी 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया।
वहीं, भारत के स्वतंत्र हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1947 से आरंभ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य, भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। डॉ० भीमराव अम्बेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान निर्माण में कुल 22 समितियाँ थी जिसमें प्रारूप समिति (ड्राफ्टींग कमेटी) सबसे प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस समिति का कार्य संपूर्ण ‘संविधान लिखना’ या ‘निर्माण करना’ था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष विधिवेत्ता डॉ० भीमराव आंबेडकर थे।
फिर, प्रारूप समिति ने और उसमें विशेष रूप से डॉ. आंबेडकर जी ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान सुपूर्द किया, इसलिए 26 नवंबर दिवस को भारत में संविधान दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है। संविधान सभा ने संविधान निर्माण के समय कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किये। इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को यह देश भर में लागू हो गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई।
जैसा कि आप सभी जानते है कि 15 अगस्त 1947 को अपना देश हजारों देशभक्तों के बलिदान के बाद अंग्रेजों की दासता यानी शासन से मुक्त हुआ था। इसके बाद 26 जनवरी 1950 को अपने देश में भारतीय शासन और कानून व्यवस्था लागू हुई। भाईयों और बहनों ने इस स्वतन्त्रता को पाने में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था।अपने देश की हजारों माताओं की गोद सूनी हो गई थी, हजारों बहनों बेटियों के माँग का सिंदूर मिट गया था, तब कहीं इस महान बलिदान के बाद देश स्वतंत्र हो सका था।
साल 1950 में भारत का संविधान लागू किया गया था। स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा ने संविधान अपनाया था। 26 जनवरी 1950 को संविधान को लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था। यानी 2 साल 11 महीने और 18 दिन बाद संविधान लागू हुआ था। इस दिन भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया गया था।
पहली बार गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को मनाया गया था। इस दिन भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण किया था और भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया था। तब से हर साल 26 जनवरी को भारत में गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।
26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। इस दिन पहली बार भारत का स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने तक 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता था। 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज घोषित करने की तारीख को महत्व देने के लिए 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस घोषित किया गया।
# राजपथ पर भव्य परेड: इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक देखते ही बनता है इसका आकर्षण
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय राष्ट्र ध्वज को फहराया जाता है। इसके बाद सामूहिक रूप में खड़े होकर राष्ट्रगान गाया जाता है। फिर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को सलामी दी जाती है। गणतंत्र दिवस को पूरे देश में विशेष रूप से भारत की राजधानी दिल्ली में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर के महत्व को चिह्नित करने के लिए हर साल राजपथ पर एक भव्य परेड इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन (राष्ट्रपति के निवास) तक राजधानी नई दिल्ली में आयोजित की जाती है।
इस भव्य परेड में भारतीय सेना के विभिन्न रेजिमेंट, वायुसेना, नौसेना आदि सभी भाग लेते हैं। इस समारोह में भाग लेने के लिए देश के सभी हिस्सों से राष्ट्रीय कडेट कोर व विभिन्न विद्यालयों से बच्चे आते हैं, समारोह में भाग लेना एक सम्मान की बात होती है। परेड प्रारंभ करते हुए प्रधानमंत्री राजपथ के एक छोर पर इंडिया गेट पर स्थित अमर जवान ज्योति (सैनिकों के लिए एक स्मारक) पर पुष्प माला अर्पित करते हैं। इसके बाद शहीद सैनिकों की स्मृति में दो मिनट मौन रखा जाता है। यह देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए लड़े युद्ध व स्वतंत्रता आंदोलन में देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों के बलिदान का एक स्मारक है। इसके बाद प्रधानमंत्री, अन्य व्यक्तियों के साथ राजपथ पर स्थित मंच तक आते हैं, राष्ट्रपति बाद में अवसर के मुख्य अतिथि के साथ आते हैं।
परेड में विभिन्न राज्यों की प्रदर्शनी भी होती हैं, प्रदर्शनी में हर राज्य के लोगों की विशेषता, उनके लोक गीत व कला का दृश्यचित्र प्रस्तुत किया जाता है। हर प्रदर्शिनी भारत की विविधता व सांस्कृतिक समृद्धि प्रदर्शित करती है। परेड और जुलूस राष्ट्रीय टेलीविजन पर प्रसारित होता है और देश के हर कोने में करोड़ों दर्शकों के द्वारा देखा जाता है।
# संघर्षपूर्ण समझदारी से विकसित हुआ है भारतीय गणतंत्र
गणतंत्र दिवस पर पूरे देश में खुशी का माहौल रहता है।
क्योंकि 1857 से शुरू हुआ आजादी का सफऱ 1947 में पूरा हुआ। किन्तु यह आजादी अधूरी थी, यह 1950 में हमारे देश के गणयतंत्र राज्य बनने के बाद फलीभूत हुआ।
गण मतलब जनता और तंत्र मतलब शासन या प्रणाली। इसका शाब्दिक अर्थ हुआ, जनता द्वारा चलाये जाने वाला शासन या प्रणाली।
हमारे देश में 26 जनवरी 1950 से गणतंत्र देश घोषित होते ही हमारा देश लोकतंत्रात्मक सम्प्रभुता-सम्पन्न, धर्म-निरपेक्ष, सामाजिक और न्यायवादी देश बन गया। यह सभी विशेषताएं संविधान की उद्देशिका में साफ लिखी गईं है। इन सभी का गूढ़ अर्थ है। सम्प्रभु मतलब हमारा देश अपने किसी भी फैसले को लेने के लिए पूर्णतया स्वतंत्र है। किसी को भी उसमें हस्तक्षेप की अनुमति नहीं। धर्म-निरपेक्ष अर्थात सभी धर्मो की मान्यता एवं सम्मान है। हमारे देश की विविधता ही हमारा अलंकार है। जो हमें औरों से भिन्न करता है।
वाकई परतंत्रता ऐसी चीज है, जो किसी को पसंद नहीं होती। जानवरों को भी गुलामी अच्छी नहीं लगती, हम तो फिर भी इंसान है। अगर पंछी को सोने के पिंजरे में भी रखे, फिर भी वो खुले आकाश में ही रहना चाहती है। कहने का तात्पर्य यह है कि, आजादी सबसे बहुमूल्य होती है। आजादी पाना ही काफी नहीं होता, उसे सम्भाल कर और सहेज कर रखना भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं है।
इसलिए भारतीय संविधान में अनुच्छेद 12 से 35 के अन्तर्गत मौलिक अधिकारों का वर्णन किया गया है। छः मौलिक अधिकार हैं- “समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, सांस्कृतिक तथा शिक्षा सम्बंधित अधिकार, संवैधानिक उपचारों का अधिकार।”
हमारे देश में गणतंत्र की व्यवस्था में (लोकतंत्र में) जनता का शासन होता है। जनता ही सर्वेसर्वा होती है।
गणतंत्र का तातपर्य गण अर्थात जनता, और तंत्र मतलब होता है शासन। गणतंत्र या लोकतंत्र का शाब्दिक अर्थ हुआ, जनता का शासन। ऐसा देश या राज्य जहाँ जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है। ऐसे राष्ट्र को लोकतांत्रिक गणराज्य की संज्ञा दी गयी है। ऐसी व्यवस्था हमारे देश में है। इसीलिए हमारा देश एक लोकतांत्रिक गणराज्य कहलाता है।
गणतंत्र अर्थात ऐसा देश जहां सत्ताधारी सरकार को चुनने और हटाने का अधिकार आम जनता के पास होता है।
ऐसी सरकार कभी निरंकुश नहीं होती, क्योंकि किसी एक के हाथ में शक्ति नहीं होती। हमारी सरकार का स्वरूप संसदीय है। सरकार कुछ लोगों का ग्रुप होता है। जो कि निर्धारित कार्य-प्रणाली पर काम करते हैं। इसके तीन पार्ट होते हैं- कार्यपालिका, न्यायपालिका और व्यवस्थापिका।
लोकतंत्र की परिभाषा के अनुसार यह "जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता का शासन है"। सच कहा जाए तो आज के टाइम में लोकतांत्रिक कहलाना एक फैशन हो गया है। होड़ सी मची हुई है। हमें आजादी बहुत ही मुश्किलों के बाद मिली है। इसके माध्यम से हम अपनी आने वाली पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास के बारे में बता सकते हैं। साथ ही हमें देश के सपूतों को देखकर उनसे प्रेरणा मिलती है और देश के लिए कुछ भी कर गुजरने का जज्बा पैदा होता है।
हमारे देश में कोई भी आम आदमी सत्ता के सबसे ऊंचे पद पर आसीन हो सकता है। जब एक चाय वाला प्रधानमंत्री बन सकता है, तो कुछ भी हो सकता है। हमारा इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है।
हमारा देश का संविधान दुनिया के तमाम देशों के संविधानों को पढ़ने के बाद बनाया गया है। उन सबकी अच्छी-अच्छी बातों को आत्मसात करके इसका निर्माण हुआ है, जो इसे सबसे अलग और उम्दा बनाता है। देश के नागरिक होने के हैसियत से हमारे कुछ अधिकार और कर्तव्य हैं जो संविधान ने हमें मुहैय्या कराये हैं। आजकल अधिकार तो सबको याद रहते है, किंतु कर्तव्य नहीं। ये सबसे बड़ी विडम्बना है।
भारत में गणतांत्रिक प्रणाली है। भारत में सबसे उंचे पद पर राष्ट्रपति बैठते है, जिसे अप्रत्यक्ष रुप से ही, जनता ही चुनी होती है। साथ ही जनता हर 5 साल में राष्ट्रपति को बदलने का राइट रखती है। इसलिए भारत को एक लोकतांत्रिक देश होने के साथ-साथ गणतांत्रिक देश भी कहते है। गणतांत्रिक देश का मुखिया और संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति होता है। यही हमारे देश की सबसे बड़ी विशेषता है।
# हमारी संसदीय व्यवस्था इंग्लैंड की संसदीय व्यवस्था से बिल्कुल अलग है, कैसे?
हमारे देश में सरकार चुनने का हक जनता को दिया गया है। दुनिया में बहुत सारे देश लोकतांत्रिक देश हैं लेकिन सब गणराज नहीं। अब आप सोच रहे होगे कि मैं क्या बोल रहा। दोनों तो एक ही बात है। एक जैसा प्रतीत होता है, परंतु थोड़ा सा फर्क है। चलिए देखते हैं, ये फर्क है क्या, कैसे है, किन किन देशों की क्या स्थिति है।
दरअसल, गणतंत्र में कानून का शासन होता है। एक गणतांत्रिक देश यह सुनिश्चित करता है कि किसी का भी अधिकार न मारा जाय, जैसे अल्पसंख्यक आदि। कोई भी शक्ति पाकर निरंकुश न हो, इसलिए प्रधानमंत्री के साथ-साथ कुछ शक्तियां राष्ट्रपति को भी दी जाती हैं। इस शासन में सभी मिल-जुल कर काम करते हैं और एक-दूसरे के पूरक होते हैं। इसीलिए भारत में राष्ट्रपति कई बार संसद के बनाए कानूनों पर साइन करने से मना कर देते हैं, लेकिन लोकतांत्रिक देशों में ऐसा नहीं होता है। वहां संसद के बनाए नियम ही अंतिम एवं सर्वमान्य होते हैं। तो अब समझ में आ ही गया होगा कि आखिर क्यों भारत को एक गणतांत्रिक देश कहा जाता है और यहां के गणतंत्र का महत्व और विशेषता क्या है।
# इसे कुछ इस तरह से भी समझिये
दुनिया के तमाम देशों में लोकतंत्र तो है, किन्तु वे सभी देश, गणतंत्र की श्रेणा में नहीं आते। इंग्लैंड का उदाहरण लेते है। इंग्लैंड में लोकतंत्र तो है,परंतु वह गणतंत्रिक देश नहीं है। हमारे संविधान में संसदीय व्यवस्था इंग्लैंड से ही ली गई है, तथापि उससे भिन्न है। इंग्लैंड की संसदीय व्यवस्था से प्रेरित होकर ही, हमारे यहां भी संसदीय व्यवस्था की गई है। वहां भी हमारी ही तरह लोग सांसद चुनते हैं और फिर वो सभी सांसद मिलकर प्रधानमंत्री का चुनाव करते हैं। इंग्लैंड का प्रधानमंत्री भी हमारे ही देश की भाँति जनता के प्रति उत्तरदायी होता है। जनता हर पांच साल में इस प्रधानमंत्री को चुनने और हटाने का अधिकार रखती है। इसीलिए इंग्लैंड भी एक लोकतांत्रिक देश है, लेकिन फिर भी इंग्लैंड को गणतंत्र नहीं कहते हैं।
वास्तव में इंग्लैंड अकेला ऐसा देश नहीं जहां ऐसी परंपरा है। जापान, स्पेन, बेल्जियम, डेनमार्क समेत विश्व के बहुधा देश हैं जहां लोकतंत्र तो हैं लेकिन गणतंत्र नहीं है, लेकिन भारत के साथ ऐसा नहीं है, इसीलिए तो हमारा देश सबसे न्यारा है। सच ही कहते है न, “सारे जहां से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा।” इसके अतिरिक्त एक आधारभूत अंतर भी है। सत्ता के सबसे ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति का अंतर। जो जल्दी समझ नहीं आता, क्योंकि वह हमें दिखाई नहीं देता।
यदि जनता के पास सत्ता की सबसे ऊंची पदवी पर बैठे व्यक्ति को चुनने और हटाने का अधिकार होता है, तो उस देश को गणतांत्रिक देश कहा जाता है। (जैसा कि भारत में है।) अगर नहीं तो वो देश गणतांत्रिक देश नहीं कहलायेगा।
इंग्लैंड में ऐसा नही है। वहां तो सत्ता के सबसे उंचे पद पर राजा (या रानी) बैठे होते है। वहां आज भी नाम का ही सही, लेकिन राजशाही ही है। इंग्लैंड के लोग प्रधानमंत्री तो चेंज कर सकते है, लेकिन राजा या रानी नहीं।
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