पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा आम लोगों की आजीविका और अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने की चिंता करना बात है बहुत बड़ी
पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा आम लोगों की आजीविका और अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने की चिंता करना बात है बहुत बड़ी
@ राजपथ/अशोक कौशिक, संपादक
एक अरसा बाद देश को एक ऐसा संवेदनशील प्रधानमंत्री मिला है, जो उच्चस्तरीय बैठकों में भी आम लोगों की आजीविका की चिंता और अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने की फिक्र रखता है। यह देशवासियों के लिए परम सौभाग्य की बात है। गत दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी तैयारियों तथा राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण की प्रगति की समीक्षा के लिए राज्यों व केंद्र-शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों व प्रशासकों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी। जिसमें उन्होंने बारीकीपूर्वक कोविड-19 और राष्ट्रीय कोविड-19 के टीकाकरण की प्रगति के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने इस बैठक में केंद्रीय मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार आदि के अलावा वहां उपस्थित शीर्ष अधिकारियों से महामारी की स्थिति पर नवीनतम विवरण लेने के बाद उन्हें अवगत कराया कि आम लोगों की आजीविका को न्यूनतम क्षति हो और अर्थव्यवस्था की गति बने रहे, ऐसा प्रभावशाली निर्णय हमें सामूहिक रूप से लेने की तरकीब सीखनी होगी और ऐसा ही करना होगा।
प्रधानमंत्री ने ठीक ही कहा कि 100 वर्षों की सबसे बड़ी महामारी के साथ भारत की लड़ाई अब अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर गई है। इसलिए परिश्रम ही हमारा एकमात्र रास्ता है और विजय ही एकमात्र विकल्प है। हम 130 करोड़ भारत के लोग, अपने प्रयासों से कोरोना से जीतकर अवश्य निकलेंगे। कारण कि ऑमिक्रोन को लेकर पहले जो संशय की स्थिति थी, वो अब धीरे-धीरे साफ हो रही है। पहले जो वैरिएंट थे, उनकी अपेक्षा में कई गुना अधिक तेज़ी से ऑमिक्रोन वैरिएंट सामान्य जन को संक्रमित कर रहा है। इसलिए हमें सतर्क रहना है, सावधान रहना है लेकिन घबराने की स्थिति ना आए, इसका भी ध्यान रखना है। हमें ये देखना होगा कि त्योहारों के इस मौसम में लोगों की और प्रशासन की एलर्टनेस कहीं से भी कम नहीं पड़े। पहले केंद्र और राज्य सरकारों ने जिस तरह प्री-एम्प्टिव, प्रो-एक्टिव और कलेक्टिव अप्रोच अपनाई है, वही इस समय भी जीत का मंत्र है। कोरोना संक्रमण को हम जितना सीमित रख पाएंगे, परेशानी उतनी ही कम होंगी।
प्रधानमंत्री ने सही कहा कि कोविड के नए वैरिएंट सहित, महामारी से निपटने का सिद्ध तरीका केवल टीकाकरण ही है। भारत में बने टीके पूरी दुनिया में अपनी श्रेष्ठता साबित कर रहे हैं। यह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है कि आज भारत की लगभग 92 प्रतिशत वयस्क आबादी को कोविड टीके की पहली खुराक दी जा चुकी है। जबकि देश में टीके की दूसरी खुराक की कवरेज भी 70 प्रतिशत के आस-पास पहुंच चुकी है। महज 10 दिनों के भीतर ही भारत ने अपने लगभग 3 करोड़ किशोरों का भी टीकाकरण किया है। अग्रिम मोर्चे के कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों को जितनी जल्दी कोविड टीके की एहतियाती खुराक दी जाएगी, उतनी ही हमारी स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता भी बढ़ेगी। इसलिए हमें शत-प्रतिशत टीकाकरण के लिए हर घर दस्तक अभियान को तेज करना होगा। साथ ही टीकों या मास्क पहनने के बारे में किसी भी गलत सूचना का मुकाबला करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
अपनी चिंता को अभिव्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि कोई भी रणनीति बनाते समय इस बात का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि आम लोगों की आजीविका का कम से कम नुकसान हो, आर्थिक गतिविधियों पर कम से कम प्रभाव पड़े और अर्थव्यवस्था की गति बनी रहे। इसलिए बेहतर होगा कि लोकल कंटेनमेंट पर अधिक ध्यान दिया जाए। हमें होम आइसोलेशन के दौरान अधिकतम उपचार प्रदान करने की स्थिति में होना चाहिए और इसके लिए होम आइसोलेशन संबंधी दिशा-निर्देशों में सुधार करते रहना चाहिए। इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपचार में टेली मेडिसिन सुविधाओं के उपयोग से काफी सहायता मिलेगी।
वहीं, स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे के संबंध में, प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए केंद्र द्वारा प्रदान किए गए 23,000 करोड़ रुपये के पैकेज का उपयोग करने के लिए राज्यों की सराहना की। क्योंकि इसके अंतर्गत पूरे देश में 800 से अधिक बाल चिकित्सा इकाइयों, 1.5 लाख नई गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) और एचडीयू बेड, 5 हजार से अधिक विशेष एम्बुलेंस, 950 से अधिक तरल चिकित्सा ऑक्सीजन भंडारण टैंक क्षमता को जोड़ा गया है। इसलिए उन्होंने बुनियादी ढांचे का विस्तार जारी रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया और दो टूक कहा कि कोरोना को हराने के लिए महामारी के किसी भी स्वरूप के आने से पहले हमें अपनी तैयारी रखने की जरूरत है। ऑमिक्रोन वैरिएंट से निपटने के साथ-साथ हमें भविष्य के किसी भी वैरिएंट के लिए अभी से तैयारी शुरू करने की जरूरत है।
हर्ष की बात यह है कि मुख्यमंत्रियों ने कोविड-19 की लगातार लहरों के दौरान उनके नेतृत्व के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री को उनके समर्थन और मार्गदर्शन एवं केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की गई धनराशि के लिए धन्यवाद दिया, जो राज्यों में स्वास्थ्य देखभाल की अवसंरचना को बढ़ावा देने में बहुत सहायक रही है। मुख्यमंत्रियों ने बिस्तरों की संख्या, ऑक्सीजन की उपलब्धता आदि में वृद्धि जैसे कदमों के माध्यम से संक्रमितों के बढ़ते मामलों से निपटने की तैयारियों के बारे में बात की। कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु में संक्रमितों की संख्या के बढ़ने और अपार्टमेंट में संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए किए गए उपायों के बारे में जानकारी दी। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने आगामी उत्सवों के कारण राज्य में संक्रमितों की संख्या में संभावित वृद्धि और इससे निपटने के लिए प्रशासन की तैयारी के बारे में चर्चा की। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य इस कोविड-लहर के खिलाफ लड़ाई में केंद्र के साथ खड़ा है। वहीं, झारखंड के मुख्यमंत्री ने कुछ ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में फ़ैली गलत धारणाओं के बारे में बात की, जिससे टीकाकरण कार्यक्रम में कुछ समस्याएं हुई हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने टीकाकरण अभियान में ‘कोई छूट न जाए’ को सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे विभिन्न कदमों के बारे में जानकारी दी। वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से ऑक्सीजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए दी गयी धनराशि और अवसंरचना-समर्थन के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि एहतियाती खुराक (प्रीकॉशन डोज) जैसे कदम आत्मविश्वास को बहुत अधिक बढ़ाने वाले साबित हुए हैं। वहीं, मणिपुर के मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य टीकाकरण कवरेज बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इस प्रकार चाहे सत्ता पक्ष के मुख्यमंत्री हों या विपक्ष के मुख्यमंत्री, सबके द्वारा की गई प्रशंसा से प्रधानमंत्री को सुकून मिली होगी और निकट भविष्य में वो और भी कुछ बेहतर कदम उठा पाएंगे।
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