बैंक जमा बीमा ऋण गारंटी योजना क्या है? इसमें क्या-क्या बदलाव किये गए हैं? इससे बैंकों में कितनी जमा राशि सुरक्षित रहेगी और कबतक मिलेगी?
बैंक जमा बीमा ऋण गारंटी योजना क्या है? इसमें क्या-क्या बदलाव किये गए हैं? इससे बैंकों में कितनी जमा राशि सुरक्षित रहेगी और कबतक मिलेगी?
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी भी समस्या को टालने में नहीं, बल्कि उसके त्वरित समाधान में विश्वास करते हैं। इसके लिए वह लीक से हटकर भी कोई बड़ा और अप्रत्याशित कदम उठाने में भी नहीं हिचकते हैं, बशर्ते कि उनकी दृष्टि में व्यापक लोकहित सध रहा हो और स्थापित सिस्टम भी अप्रभावित रह रहा हो। ऐसा दृढ़ विश्वास उन्होंने कई मौकों पर प्रदर्शित किया है।
बहरहाल, बैंक जमा बीमा अंतर्गत मिलने वाली न्यूनतम जमा राशि को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाना और इस प्रक्रिया में लगने वाली औसतन अवधि लगभग 8-9 वर्षों को घटा कर मात्र 90 दिन किया जाना भी एक ऐसा ही महत्वपूर्ण निर्णय है, जिससे जमाकर्ताओं का विश्वास बैंकिंग सेक्टर पर बढ़ेगा। इससे बैंकिंग सेक्टर का विस्तार गांव-गांव तक हो पायेगा।
बता दें कि डिपॉजिट इंश्योरेंस भारत में कार्यरत सभी वाणिज्यिक बैंकों में बचत, सावधि, चालू, आवर्ती जमा आदि जैसे सभी जमा यानी डिपॉजिट को कवर करता है। जिसके तहत विभिन्न राज्यों, केन्द्र-शासित प्रदेशों में कार्यरत राज्य, केंद्रीय और प्राथमिक सहकारी बैंकों के डिपॉजिटस को भी कवर किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत दिनों "जमाकर्ता पहले: गारंटी के साथ व तय समयसीमा में बैंक जमा पर 5 लाख रुपये तक का बीमा भुगतान" विषय पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए उक्त आशय का खुलासा किया और कुछ जमाकर्ताओं को चेक भी सौंपे।
# देश के करोड़ों बैंक खाताधारकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है यह फैसला
उन्होंने दो टूक कहा कि बैंकिंग क्षेत्र और देश के करोड़ों बैंक खाताधारकों के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह गवाह है कि कैसे दशकों से चली आ रही एक बड़ी समस्या का समाधान हो गया है। 'जमाकर्ता पहले' की भावना बहुत अर्थपूर्ण है। इसलिए पिछले कुछ दिनों में, एक लाख से अधिक जमाकर्ताओं को वर्षों से फंसा उनका पैसा वापस मिल गया है। यह धनराशि 1300 करोड़ रुपये से अधिक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन बातों में दम है कि कोई भी देश समस्याओं का समय पर समाधान करके ही उन्हें विकराल होने से बचा सकता है। हालांकि, वर्षों से एक प्रवृत्ति रही है कि समस्याओं को टाल दो। लेकिन आज का नया भारत, समस्याओं के समाधान पर जोर देता है। आज का भारत समस्याओं को टालता नहीं है।
# भारत में बैंक जमाकर्ताओं के लिए इंश्योरेंस की व्यवस्था बनाई गई थी 1960 के दशक में
गौरतलब है कि भारत में बैंक जमाकर्ताओं के लिए इंश्योरेंस की व्यवस्था 1960 के दशक में बनाई गई थी। जिसके अंतर्गत पहले बैंक में जमा रकम में से सिर्फ 50 हजार रुपए तक की राशि पर ही गारंटी थी। फिर इसे बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दिया गया था। कहने का तातपर्य यह कि अगर बैंक डूबा, तो जमाकर्ताओं को सिर्फ एक लाख रुपए तक ही मिलता था, लेकिन वो भी गारंटी नहीं कि कब मिलेगा। इसलिए प्रधानमंत्री ने गरीब की चिंता को समझते हुए, मध्यम वर्ग की चिंता को समझते हुए इस राशि को 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया है। यानि आज की तारीख में यदि कोई भी बैंक संकट में आता है, तो जमाकर्ताओं को 5 लाख रुपए तक तो जरूर वापस मिलेगा।
# बैंक अगर डूबने की स्थिति में हैतो 90 दिन के भीतर जमाकर्ताओं को वापस मिल जाएगा उनका पैसा
इसके अलावा, कानून में संशोधन करके एक और समस्या का समाधान किया गया है। पहले जहां पैसा वापसी की कोई समय सीमा सुनिश्चित नहीं थी, वहीं नरेंद्र मोदी सरकार ने 90 दिन अर्थात् 3 महीने के भीतर पैसा वापसी यानि रिफंड की समय सीमा निर्धारित कर दी है। बैंक अगर डूबने की स्थिति में भी है, तो 90 दिन के भीतर जमाकर्ताओं को उनका पैसा वापस मिल जाएगा। संसद ने गत अगस्त में जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम (संशोधन) विधेयक, 2021 को पारित किया था। इसके तहत किसी बैंक पर रिजर्व बैंक की 'रोक' के बाद 90 दिन के अंदर जमाकर्ताओं को उनकी जमा में से पांच लाख रुपये तक की राशि का भुगतान किया जाता है। यह राशि 1,300 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है।
इस बात में कोई दो राय नहीं कि देश की समृद्धि में बैंकों की बड़ी भूमिका है और बैंकों की समृद्धि के लिए जमाकर्ताओं की राशि सुरक्षित होना भी उतना ही जरूरी है। यदि हमें बैंक बचाने हैं, तो जमाकर्ताओं को सुरक्षा देनी ही होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक ही कहा कि बीते वर्षों में अनेक छोटे सरकारी बैंकों को बड़े बैंकों के साथ मर्ज करके, उनकी कैपेसिटी, कैपेबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी हर प्रकार से सशक्त की गई है। जब आरबीआई, को-ऑपरेटिव बैंकों की निगरानी करेगा तो उससे भी इनके प्रति सामान्य जमाकर्ता का भरोसा और बढ़ेगा। यहां समस्या सिर्फ बैंक अकाउंट की ही नहीं थी, बल्कि दूर-सुदूर तक गांवों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने की भी थी।
# देश के हर गांव में 5 किलोमीटर के दायरे में पहुंच चुकी है बैंक ब्रांच या बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट की सुविधा
कहना न होगा कि आज देश के करीब-करीब हर गांव में 5 किलोमीटर के दायरे में बैंक ब्रांच या बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट की सुविधा पहुंच चुकी है। आज भारत का सामान्य नागरिक कभी भी, कहीं भी, सातों दिन, 24 घंटे, छोटे से छोटा लेनदेन भी डिजिटली कर पा रहा है। ऐसे अनेक सुधार हैं जिन्होंने 100 साल की सबसे बड़ी आपदा में भी भारत के बैंकिंग सिस्टम को सुचारु रूप से चलाने में मदद की है। जब दुनिया के समर्थ देश अपने नागरिकों तक मदद पहुंचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब भारत ने तेज़ गति से देश के करीब-करीब हर वर्ग तक सीधी मदद पहुंचाई।
ऐसा इसलिए कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए उपायों से बीमा, बैंक ऋण और वित्तीय सशक्तिकरण जैसी सुविधाओं को गरीबों, महिलाओं, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे किसानों के बड़े वंचित वर्ग तक पहुंचा दिया है। अमूमन मोदी सरकार से पहले किसी भी विशेष तरीके से देश की महिलाओं तक बैंकिंग व्यवस्था नहीं पहुंची थी। लिहाजा, उनकी सरकार ने इसे प्राथमिकता के तौर पर लिया है। जन धन योजना के अंतर्गत खोले गए करोड़ों बैंक खातों में से आधे से अधिक महिलाओं के खाते हैं। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर इन बैंक खातों का प्रभाव पड़ा है और हाल के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में पीएम मोदी ने भी इसे देखा है।
# वरिष्ठ नागरिकों और मध्यम वर्ग के जमाकर्ताओं को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ
इस बात में कोई दो राय नहीं कि बीमा कवर को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने के सरकार के फैसले से वरिष्ठ नागरिकों और मध्यम वर्ग के जमाकर्ताओं को सबसे ज्यादा लाभ होगा। देरी से ही सही, लेकिन उपभोक्ताओं को अंतत: न्याय मिल गया है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने जमा राशि पर बीमा कवर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा था। क्योंकि पहले जमाकर्ताओं को उनका पैसा 8-9 साल बाद मिलता था।
इसलिए पीएम बनने के 7 वर्ष बाद ही सही, लेकिन उन्होंने जमा बीमा ऋण गारंटी योजना लाकर इसकी अवधि इसके अंतर्गत घटाकर 90 दिन कर दिया है। इससे लोगों का बैंकों पर भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी। ऐसी नायाब पहल करके प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों, विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही को प्रदर्शित किया है। उन्होंने खुद भी और अपनी कैबिनेट के मंत्रियों को भी जमा बीमा योजना के आमंत्रित लाभार्थियों से उनके संबंधित स्थानों पर जाकर बातचीत की और रिफंड राशि के चेक भी वितरित किए, ताकि सरकार की इस नेक पहल पर जन भरोसा बढ़े।
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