योगी राज में गालंद की गुंडई के निहितार्थ को समझिए
योगी राज में गालंद की गुंडई के निहितार्थ को समझिए
@ तेरे-मेरे सामने/कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस दिन मेरठ मंडल के गौतमबुद्ध नगर स्थित जेवर तहसील में एक अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का शिलान्यास कर रहे हों, उसी के एक दिन पहले हापुड़ जनपद अंतर्गत गालंद में कुछ असामाजिक तत्व जब
गाजियाबाद नगर निगम के प्रस्तावित कूड़ा डंपिंग केंद्र की निर्माणाधीन बाउंड्री को क्षतिग्रस्त कर दें, तो इसे विधिव्यवस्था के नजरिए से कदापि अच्छा संकेत नहीं समझा जाएगा। इस उत्पात की सुनियोजित टाइमिंग और हापुड़ पुलिस का संयम काबिलेगौर है। जब यूपी में चुनावी रंग दिन प्रतिदिन चोखा हो रहा हो, तब ऐसी वारदातों का होना बहुत कुछ कह जाता है, जिसे मोदी प्रशासन और योगी प्रशासन को समझने की जरूरत है।
यहां पर यह भी बताना जरूरी है कि गाजियाबाद नगर निगम के गालंद कूड़ा सेग्रिगेशन प्रोजेक्ट में एक विदेशी कम्पनी भी शामिल है, इसलिए इससे जुड़ी कोई भी घटना वैश्विक चर्चा का विषय भी बनेगी। इसलिए सिविल और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। वैसे तो गाजियाबाद नगर निगम के इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट का विरोध यहां के स्थानीय लोग व्यक्तिगत कारणों से करते आए हैं, लेकिन अब जो उन्होंने तोड़-फोड़ का सहारा लेते हुए राष्ट्रीय सम्पत्ति को क्षति पहुंचाई है, इस पर प्रशासन को गंभीर हो जाना चाहिए। चूंकि यह मामला न केवल दो जनपदों के हित से जुड़ा हुआ है, बल्कि इसमें दो देशों का
इंट्रेस्ट भी शामिल है, इसलिए मेरठ कमिश्नर और मेरठ आईजी की भूमिका और बढ़ जाती है। हालांकि, स्थितियों-परिस्थितियों को देखकर ऐसा नहीं लगता कि इतने महत्वपूर्ण अधिकारी इस मसले पर गम्भीर हैं। इससे योगी प्रशासन की साख को ही बट्टा लग रहा है।
बताते चलें कि गाजियाबाद नगर निगम द्वारा गालंद में कराए जा रहे कार्यों में बाधा उत्पन्न किए जाने पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ नगर निगम प्रशासन द्वारा गत दिनों एक मुकदमा दर्ज किया गया है और इस कार्य को पुलिस प्रशासन की उपस्थिति में आगे बढ़ाने की कार्यवाही की गई है। इस बाबत अपर नगर आयुक्त आरएन पांडे द्वारा बताया गया कि गालंद में गाजियाबाद नगर निगम भूमि पर निर्माण विभाग, नगर निगम द्वारा बाउंड्री वॉल का कार्य कराया जा रहा था, इसी क्रम में कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया गया। साथ ही वहां कार्य कर रहे निर्माण विभाग के अवर अभियंता योगेश व अन्य कर्मचारियों से गाली गलौज कर अभद्र व्यवहार करना प्रारंभ कर दिया गया। उन्होंने बताया कि ऐसा करने वालों के हाथों में घातक हथियार फावड़ा इत्यादि भी थे।
उन्होंने आगे बताया कि सरकारी कार्य में बाधा डालने वाले व्यक्तियों के हाथों में जो हथियार थे, उसके बल पर उन्होंने जेसीबी तथा ट्रैक्टर द्वारा किए जा रहे कार्य को रोक कर उनको भी तोड़फोड़ करना शुरू कर दिया। जिससे लगभग 10 लाख की सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ। इस घटना की प्रतिक्रिया में योगेश कुमार, अवर अभियंता निर्माण द्वारा अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है। आगामी कार्यवाही महापौर आशा शर्मा तथा नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर के निर्देशानुसार की जाएगी ताकि सरकारी कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही ना हो।
बता दें कि गालंद में बाउंड्री वॉल का कार्य लगभग 150 से 200 मीटर पूर्ण हो चुका था और 2 दिनों से कार्य शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, किंतु कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा गाजियाबाद नगर निगम द्वारा करवाये जा रहे सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न की गई, जिसके बाद उन सबके खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है। मौके पर पुलिस प्रशासन, नगर निगम के अधिकारीगण तथा प्रवर्तन दल की टीम भी उपस्थित रही। इन घटनाओं से साफ है कि गाजियाबाद नगर निगम को न केवल अभी, बल्कि भविष्य में भी यहां चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उसके साथ साथ उस विदेशी कम्पनी को भी जो यहां के प्रोजेक्ट से जुड़ी है। इसलिए योगी प्रशासन की साख यदि बरकरार रखनी है तो यहां पर कड़ी कार्रवाई अपेक्षित है। हालांकि, मोदी प्रशासन द्वारा तीनों कृषि कानून को वापस लेने से स्थानीय प्रशासन के हौसले भी पस्त हैं। योगी सरकार की पुनर्वापसी को लेकर भी उनमें संशय है। इसलिए प्रशासन यथास्थिति के मूड में है, जिससे जनहित को खतरा है।
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