कांग्रेसियों के त्याग-बलिदान से मिली आजादी पर पद्मश्री कंगना रनौत की टिप्पणी अस्वीकार्य: नरेंद्र भारद्वाज
कांग्रेसियों के त्याग-बलिदान से मिली आजादी पर पद्मश्री कंगना रनौत की टिप्पणी अस्वीकार्य: नरेंद्र भारद्वाज
# माफी मांगे कंगना रनौत, नहीं करें बचकानी हरकतें: पूर्व महानगर अध्यक्ष
कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता
गाजियाबाद। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और गाजियाबाद महानगर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र भारद्वाज ने पद्मश्री कंगना रनौत को आड़े हाथों लेते हुए उनकी ‘भीख में मिली आजादी’ वाले बयान की निंदा की है। उन्होंने बताया कि
वह अपना मानसिक संतुलन खो चुकी हैं, इसलिए मोदी सरकार को उन पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि कोई भविष्य में ऐसा दुस्साहस नहीं कर सके।
श्री भारद्वाज ने दूरभाष पर बताया कि हद तो यह है कि कंगना रनौत ने ‘भीख में मिली आजादी’ वाले बयान का बचाव सही से नहीं किया और यह कह कर एक नया बावेला खड़ा कर दिया कि मैं पद्मश्री वापस कर दूंगी, अगर मेरे सवालों के जवाब मिलें। उनके द्वारा पूछे गए सवाल और भी निंदनीय है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर भावनात्मक मुद्दे उछालने का नहीं है बल्कि जनता के लिए दो जून की रोटी, हर मौसम के अनुकूल कपड़ा, विपरीत मौसम से हिफाजत करने लायक मकान, समुचित शिक्षा, उपयुक्त जनस्वास्थ्य और पर्याप्त सामाजिक सम्मान लोगों को कैसे मिले, सरकार या उससे जुड़े लोगों को इस बात पर बहस करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि जिस तरह से बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस कंगना रनौत इन दिनों आजादी पर दिये गए बयान को लेकर काफी चर्चा में बनी हुई हैं, उसका एकमात्र मकसद उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड आदि विधानसभा चुनावों को प्रभावित करना है और जनहितैषी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है, जिसे कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि "कंगना रनौत ने टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में कहा था कि 1947 में मिली आजादी भीख थी और असली आजादी 2014 में मिली है" जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है। यही वजह है कि कंगना रनौत के बयान से जहां भाजपा ने भी असहमति जताई है तो वहीं हमारी पार्टी कांग्रेस ने पद्मश्री वापस लेने की मांग की है। लेकिन इन विवादों के बीच अब कंगना रनौत का जो रिएक्शन आया है, वह और चिंतित करता है। क्योंकि उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी से यह ऐलान किया है कि वह पद्मश्री वापस कर देंगी, लेकिन इसके लिए उन्होंने एक शर्त भी रखी है।
कांग्रेस नेता नरेंद्र भारद्वाज ने बताया कि कंगना रनौत ने जिस तरह से आजादी को लेकर दिये गए बयान का बचाव किया और कहा कि “हर चीज इंटरव्यू में साफतौर पर बताई गई थी कि 1857 में आजादी की पहली लड़ाई सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई और वीर सावरकर जी के बलिदान के साथ हुई थी। लेकिन 1947 में कौन सी लड़ाई हुई, मुझे तो नहीं मालूम, अगर कोई बता सकता है तो मैं पद्मश्री वापस कर दूंगी और माफी भी मांगूंगी।” उनकी यह शैली गौर करने लायक है। क्योंकि वह अपनी ओर से खेद जताकर विवाद को समाप्त नहीं करना चाहती हैं, बल्कि तरह तरह के कुतर्कों का सहारा ले रही हैं।
भारद्वाज ने आगे बताया कि "कंगना रनौत ने अपने बयान का बचाव करते हुए यह भी लिखा है कि कृप्या इस चीज में मेरी मदद करें। मैंने शहीद रानी लक्ष्मीबाई के ऊपर बनी फीचर फिल्म में काम किया है। आजादी के लिए लड़ी गई पहली लड़ाई 1857 पर गहराई से शोध भी किया था। राष्ट्रवाद का उदय हुआ और दक्षिणपंथ का भी, लेकिन अचानक ही यह खत्म क्यों हुआ? गांधी जी ने भगत सिंह को मरने क्यों दिया? सुभाष चंद्र बोस को मारा क्यों गया और गांधी जी ने उनका कभी समर्थन क्यों नहीं किया? विभाजन की रेखा एक श्वेत व्यक्ति द्वारा क्यों खींची गई? स्वतंत्रता का जश्न मनाने के बजाय भारतीयों ने एक-दूसरे को क्यों मारा था। कुछ जवाब खोजने में मेरी कृप्या मदद करें।" इससे विवाद और बढ़ेगा। उन्हें इतिहास की समझ नहीं है और वो सस्ती लोकप्रियता के लिए बचकानी हरकतें कर रही हैं।
नरेंद्र भारद्वाज ने बताया कि "कंगना रनौत ने ‘2014 में मिली आजादी’ वाले बयान का बचाव करते हुए लिखा है कि जहां तक 2014 में मिली आजादी की बात है तो मैंने साफ तौर पर कहा था कि शारीरिक आजादी हमारे पास थी, लेकिन भारत की चेतना और विवेक साल 2014 में मुक्त हुए। एक मृत सभ्यता जीवित हुई और उसने अपने पंख फैलाए, अब वह चीख रही है और उड़ रही है।" यह किसी को स्वीकार्य नहीं हो सकती है। इसलिए वह राष्ट्र से माफी मांगें। उन्होंने एक तरह से उन कांग्रेसियों का अपमान किया, जिन्होंने खुद को न्यौछावर करके यह आजादी दिलाई है। इसलिए सच्चा कांग्रेसी इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें