क्या साहिबाबाद विधानसभा सीट से पूरा होगा डॉ सपना बंसल का सपना?

क्या साहिबाबाद विधानसभा सीट से पूरा होगा डॉ सपना बंसल का सपना?

@ राजपथ/अशोक कौशिक, संपादक

राजनीतिक पतंगबाजी का अपना ही मजा है। इसको सिर्फ वही ले सकता है, जो सक्रिय सियासत में है। आखिर कब, कैसे और किसकी सियासी पतंग काटनी है, यह बात सिर्फ उसे ही पता होती है जो ऐसी चाल चलता या चलवाता है।राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि इसकी भी एक अलग ही फितरत होती है, जिसका शिकार अक्सर सभ्य, सुशील  व सुसंस्कृत राजनीतिज्ञ ही होते हैं। 

यूं तो उत्तरप्रदेश की सबसे बड़ी विधानसभा सीट साहिबाबाद पर सबकी नजर है। यह सीट अभी भाजपा के कब्जे में है। वरिष्ठ भाजपा नेता सुनील शर्मा यहां के लोकप्रिय विधायक हैं। पार्टी ने उन्हें पंचायती राज समिति का अध्यक्ष बनवाकर दर्जा प्राप्त मंत्री का दर्जा दे दिया है। यहां पर बहुजन समाज पार्टी से पूर्व विधायक रहे अमरपाल शर्मा का इस बार समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ना तय है। पिछली बार उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़कर शिकस्त खाई है। चर्चा है कि कांग्रेस इस बार अपने पूर्व महानगर अध्यक्ष नरेंद्र भारद्वाज या पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता डॉली शर्मा को चुनाव लड़ने का निर्देश देगी, ताकि यह सीट किसी भी तरह से निकाल ले।

वहीं, भाजपा के रणनीतिकारों ने एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति पैदा कर दी है। बताया जाता है कि सुनील शर्मा का टिकट काट कर पार्टी नेत्री सपना बंसल को देने का दबाव वैश्य लॉबी बनवा रही है। राज्य सभा सदस्य अनिल अग्रवाल, स्वास्थ्य राज्य मंत्री अतुल गर्ग, एमएलसी दिनेश गोयल, क्षेत्रीय मंत्री मयंक गोयल, जीडीए बोर्ड मेम्बर और निगम पार्षद हिमांशु मित्तल आदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर दवाब बना रहे हैं कि साहिबाबाद सीट पर इस बार वैश्य प्रत्याशी उतारा जाए।

इसके पीछे की राजनीति भी बड़ी दिलचस्प है। जानकारों का कहना है कि महापौर आशा शर्मा पार्टी के पूर्व महानगर अध्यक्ष अजय शर्मा को गाजियाबाद विधानसभा का चुनाव लड़वाना चाहती हैं तो केंद्रीय मंत्री व स्थानीय सांसद जनरल वी के सिंह गाजियाबाद महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा को गाजियाबाद विधानसभा की सीट पर चुनाव लड़वाने की योजना बनाए हुए हैं। ऐसा इसलिए कि लोकसभा चुनाव 2019 में नगर विधायक व स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग की नकारात्मक भूमिका और कोविड 19 की दूसरी लहर को नियंत्रित करवाने में उनकी विफलता से उनके प्रति जनाक्रोश है, जिससे उनकी सीट बदलकर उन्हें मुरादनगर भेजे जाने की चर्चा है। जबकि मुरादनगर विधायक अजीतपाल त्यागी को जनरल वी के सिंह का आदमी समझा जाता है। पार्टी रणनीतिकार उन्हें एमएलसी बनाने की पैरवी कर रहे हैं। वहीं, ब्रजपाल तेवतिया भी मुरादनगर सीट पर अपना दावा ठोक रहे हैं।

वहीं, वैश्यों, ब्राह्मणों और ठाकुरों की पार्टी समझी जाने वाली पार्टी भाजपा में केंद्रीय रक्षा मंत्री व गाजियाबाद के पूर्व सांसद राजनाथ सिंह के पुत्र और भाजपा के प्रदेश महामंत्री नीरज सिंह भी बनिया और ब्राह्मण के अलावा एक सीट क्षत्रिय यानी राजपूत के लिए मांग रहे हैं। उनकी टीम के नजरिये से गाजियाबाद से ब्राह्मण, साहिबाबाद से क्षत्रिय और मुरादनगर से वैश्य प्रत्याशी उतारा जाए। जबकि वैश्य नेताओं की दिलचस्पी मुरादनगर में नहीं है। क्योंकि वह सीट त्यागी और जाट बहुल है। इसलिए नीरज सिंह का खेल बिगाड़ने के लिए ही वैश्य लॉबी ने साहिबाबाद से इंदिरापुरम निवासी सपना बंसल को आगे कर दिया है। वो हर ओर अपनी पैरवी भी कर रही हैं। बातचीत में तो वो तेजतर्रार महिला बताई जाती हैं, लेकिन जनता पर उनकी पकड़ बेहद ढीली है। लोकल मीडिया व जनसम्पर्क माध्यम में भी अक्सर वह हाशिये पर ही रहती हैं। ऐसे लोगों की दावेदारी से साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा का रिपीट होना तय माना जा रहा है, क्योंकि दूसरे को टिकट देने की भूल पार्टी यदि करेगी भी तो वह सपा प्रत्याशी अमरपाल शर्मा को टक्कर दे पाएंगे, इसकी सम्भावना कम है। क्योंकि यह ब्राह्मण मतदाता बहुल सीट है। 

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