सादा जीवन उच्च विचार के प्रतिमूर्ति थे पत्रकार ए एन शर्मा


सादा जीवन उच्च विचार के प्रतिमूर्ति थे पत्रकार ए एन शर्मा 

कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार
नई दिल्ली। पत्रकारिता और जनसंपर्क के पेशे में स्व.
अरविंद नारायण शर्मा उर्फ ए एन शर्मा की एक 
अपनी पहचान रही, जिसे चाहकर भी दिल्ली वाले भूल नहीं सकते। पूर्व उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी के मीडिया सलाहकार और इससे पहले दिल्ली पुलिस का प्रवक्ता रहने की वजह से राजधानी वासियों के लिए वह परिचित व्यक्तित्व बने रहे। पीआईबी से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार के रूप में भी उन्होंने लोगों के मनमस्तिष्क पर अपनी गहरी छाप छोड़ी। सादा जीवन, उच्च विचार के प्रतिमूर्ति थे वो। लोकसभा के पूर्व महासचिव व दिग्गज आईएएस अधिकारी योगेंद्र नारायण से उनकी अच्छी बनती थी, इसलिए इंटेक में भी वो मीडिया सलाहकार रहे थे। उन्हें दिल्ली का चलता फिरता इंसाइक्लोपीडिया भी कहा जाता था। किसी भी अजनबी को अपना बना लेने की जो उनकी दक्षता थी और अपरिचित व्यक्ति पर भी जितना अटूट विश्वास कर लेते थे, यही उनकी लोकप्रियता का कारक साबित हुआ। यदि आप किसी जेन्विन काम के लिए राह चलते भी उनसे आप पूछ बैठते तो अपनी गाड़ी पर बिठाकर सम्बन्धित दफ्तर में आपका परिचय करवाकर ही वापस लौटते। यही वजह है कि बड़े बड़े राजनेता और अधिकारी भी उनकी मुरीद हुआ करते थे। यह कोई अलंकारिक बातें नहीं हैं, बल्कि दिल्ली की पत्रकारिता में उनसे मित्रवत व्यवहार रहते हुए हमने खुद देखा है। आप उन्हें फक्कड़ स्वभाव का तो नहीं कह सकते, लेकिन उन जैसे मददगार बिरले ही मिलते हैं। नेकी कर, दरिया में डाल उनका मूल उपदेश था। बात बात में वो कहते थे कि जहां तक हो सके, कुछ अच्छा करते जाओ, इससे जो दुवा मिलेगी, मुश्किल वक्त में वह दवा की तरह कारगर साबित होगी। 

10 जनवरी 2021 को ग्रीन पार्क, नई दिल्ली स्थित कोठी पर उन्होंने अंतिम सांस ली थी। वो आज हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन उनके मौलिक गुण जनसम्पर्क और पत्रकारिता के पेशे में रहने वालों के लिए किसी प्रकाश स्तंभ की तरह काम करेंगे। गुस्सा उनमें रंच मात्र भी नहीं था। लोगों से मिलना-जुलना, बातें करना और लंबी अवधि बीत जाने के बाद फोन कॉल करके याद करने और व्यक्तिगत रिश्तों को तरोताजा करने का जो उनका गुण था, यह पत्रकारिता और जनसंपर्क के हर छात्र में होना चाहिए। वो एक 
अच्छा पाठक, स्रोता और वक्ता भी थे। उनकी हर बात में मानवता और आत्मीयता निहित रहती थी।

निर्विवाद रूप से अरविंद नारायण शर्मा एक महान, शांतिपूर्ण, दिव्य और नैतिक आत्मा थे। उनका जन्म
 02 जुलाई 1942 को हुआ था। प्राचीन इतिहास में परास्नातक और फ्रेंच में डिप्लोमा पूरा करने के बाद, वह 1966 में भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) में शामिल हो गए। पीआईबी के फोटो डिवीजन में अपने करियर की शुरुआत करते हुए उन्होंने लगभग 36 वर्षों के अपने करियर में कई मंत्रालयों में काम किया। 

वे पहले वी सी शुक्ला के अधीन आईटीबीपी और फिर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में शामिल हुए, जहां वे विभिन्न फिल्म समारोहों के आयोजन में सक्रिय रूप से शामिल रहे, और फिर बाद में श्रीमती सुषमा स्वराज के अधीन रहे। सन
1976 में वह दिल्ली पुलिस में शामिल हुए, जिसमें उन्होंने जनसंपर्क अधिकारी के रूप में 6 वर्षों तक सेवा की।
उन्होंने राजेश पायलट के अधीन जहाजरानी और परिवहन मंत्रालय में शामिल होकर अपनी यात्रा जारी रखी।
वह कुछ समय के लिए सीआरपीएफ का भी हिस्सा थे।
लखनऊ में रहने के दौरान उनका कुछ समय प्रधान सूचना अधिकारी के रूप में रहा।

लखनऊ के कार्यकाल के बाद, वह मदन लाल खुराना के मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल के दौरान दिल्ली सरकार में निदेशक पीआर के रूप में शामिल हुए। इसके बाद वे लालकृष्ण आडवाणी के कार्यकाल के दौरान गृह मंत्रालय का एक अभिन्न अंग बन गए, जहां उन्हें उनकी सेवानिवृत्ति से पहले 
सेवा विस्तार से सम्मानित किया गया था, जो कि उनकी कार्यकुशलता को दर्शाता है। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने कला और संस्कृति के क्षेत्र की प्रतिष्ठित संस्था इंटेक के लिए भी काम किया। वो पीआईबी के मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार थे। उन्होंने एक दैनिक समाचार पत्र के सलाहकार के रूप में प्रिंट मीडिया के साथ अपना जुड़ाव जारी रखा, जब तक कि उनके खराब स्वास्थ्य ने उन्हें अधिक शांत जीवन जीने के लिए प्रेरित नहीं किया।

सच कहा जाए तो अरविंद नारायण शर्मा एक अत्यंत दयालु और अनुशासित आत्मा थे, जिन्होंने अपने जीवन की यात्रा के हर क्षण में शांति और अहिंसा के मूल्यों को मूर्त रूप दिया, चाहे वह जीवन की कई चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करना हो या काम के माहौल में पेशेवर दबाव हो, फिर भी एक हमेशा मुस्कुराते हुए व्यक्तित्व के रूप में वे अपने स्वयं के लाभ के लिए बिना सोचे-समझे हर किसी को सहायता देने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। उन्होंने एक नि:स्वार्थ जीवन व्यतीत किया, नैतिक और नैतिक मूल्यों से समृद्ध और एक समर्पित सैनिक के रूप में अपनी यात्रा के अंत तक एक समर्पित पति, पिता, दादा, भाई, मित्र, दार्शनिक, मार्गदर्शक और सबसे ऊपर, एक भावुक देशभक्त बने रहे। भारत माता यानी धरती माता की वे सच्चे संतान थे। उनका व्यक्तित्व व कृतित्व पत्रकारिता और जनसम्पर्क से जुड़े लोगों का पथ प्रदर्शन करता रहेगा। पत्रकारिता के पितरों में वो अग्रगण्य रहेंगे।

फोटोकैप्शन:- अरविंद नारायण शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार, पूर्व पीआईबी ऑफिसर।

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