नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने अपने काव्य पाठ से अवसरवादियों को झकझोरा
नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने अपने काव्य पाठ से अवसरवादियों को झकझोरा
# मंचस्थ कवियों ने भी मानवीय चेतना को शब्द तीर से कुरेदा
# मैं भी शुरुआत करता हूँ, महेंद्र हूँ मोहब्बत की बात करता हूँ: नगर आयुक्त
# गिला इस बात का नहीं कि उनको जल्दी थी जाने की, शिकायत तो ये रहती है कि ऐसे लोग मिलने क्यों आते हैं: महेंद्र सिंह तंवर
कमलेश पांडेय/भास्कर ब्यूरो
गाजियाबाद। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर एक सुलझे हुए आईएएस अधिकारी ही नहीं, बल्कि बातों ही बातों में अवसरवादी लोगों के हावभाव पर गहरी चोट करने वाले एक कवि भी हैं। यह बात मैं नहीं कह रहा, बल्कि गाजियाबाद नगर निगम द्वारा आयोजित दीपावली मेले में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कविता पाठ करते हुए उनमें जो मानवीय संवेदनाएं झलकी, उससे यह बात स्पष्ट हुई है।
रामलीला मैदान, कविनगर के काव्य मंच पर गणमान्य कवियों- विनीत चौहान और तेज नारायण के हाथों एक कवि के रूप में पुष्प गुच्छ और रेशमी शॉल से सम्मानित होने के बाद वहां उपस्थित श्रोताओं को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि "मैं भी शुरुआत करता हूँ, महेंद्र हूँ, मोहब्बत की बात करता हूँ।" फिर काव्य शब्द तीर छोड़ते हुए उन्होंने कहा- " गिला इस बात का नहीं कि उनको जल्दी थी जाने की, शिकायत तो ये रहती है कि ऐसे लोग मिलने क्यों आते हैं।" पुनः उन्होंने कहा- "अक्सर वो मुझे मिल जाते हैं शायद ये इत्तिफाक है। वजह अगर ना मिले तो फिर ये इत्तिफाक है।" उनकी अगली बोल है- "कुछ तो मगर है वरना यूं ही ऐसे मुलाकात नहीं होती। कह तो दूं दिल की बात, मगर अभी उनसे बात नहीं होती।" इससे पहले प्रस्तोता कवि ने उनकी तारीफ के तराने गाते हुए और उनकी साहित्यिक अभिरुचियों का रहस्योद्घाटन करते हुए कहा कि सुप्रसिद्ध शायर प्रो वसीम बरेलवी उन्हें बेहद पसंद हैं, जिनकी दो पंक्तियां उनपर खूब फब्ती हैं- "उसूलों पर जो आंच आए, तो टकराना जरूरी है। जो जिंदा हो तो फिर जिंदा, नजर आना जरूरी है।"
बता दें कि कवि सम्मेलन में हजारों की संख्या में उमड़े जनसैलाब ने ताली बजाकर नगर आयुक्त समेत काव्य पाठ करने वाले कवियों का मनोबल बढ़ाया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महापौर आशा शर्मा के द्वारा उपस्थित समस्त कवियों को सम्मानित भी किया गया।
इस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में सुप्रसिद्ध कवि कृष्ण मित्र गाजियाबाद, विनीत चौहान वीर रस अलवर, डॉ प्रवीण शुक्ल हास्य व्यंग, डॉक्टर कीर्ति काले शृंगार रस, तेज नारायण बेचैन व्यंग्यकार ग्वालियर, बलराम श्रीवास्तव गीतकार मैनपुरी, राज कौशिक गजलकार गाजियाबाद, सुश्री पूनम वर्मा श्रंगार रस मथुरा, सुश्री अंजू जैन गीत ग़ज़ल गाजियाबाद, शंभू शिखर हास्य व्यंग दिल्ली, अमित शर्मा वीर रस नोएडा द्वारा अपना-अपना काव्य पाठ किया गया, जिसकी उपस्थित अतिथियों द्वारा भूरी भूरी प्रशंसा की गई।
काव्य पाठ का शुभारंभ गाजियाबाद के विश्व विख्यात सुप्रसिद्ध कवि कृष्ण मित्र के काव्य पाठ से किया गया।
कवि विनीत चौहान अलवर द्वारा "श्रीनगर में गूंज रहे जो देशद्रोह के नारे हैं। ठंडी झीलों से निकले ये जलते से अंगारे हैं" सुनाया गया। वहीं, कवि डॉ प्रवीण शुक्ल द्वारा "जाने कितने अनुभवों का है यही बस सार अंतिम। ना कोई भी जीत अंतिम ना कोई भी हार अंतिम" कविता सुनाई गई। वहीं, राज कौशिक गजलकार गाजियाबाद द्वारा "अगर नाचूं नहीं तो पांव मेरे रूठ जाते हैं, अगर नाचूं ज़रा खुल कर तो घुंघरू टूट जाते हैं। ज़माने की अदाएं देख कर ये सोचता हूं मैं वहां सच क्यूं नहीं जाते जहां तक झूठ जाते हैं" सुनाया गया, जिसका लोगों ने खड़े होकर खूब आनंद लिया और उपस्थित सभी कवियों का भी तालियां बजाकर मनोबल बढ़ाया गया।
फोटोकैप्शन:- रामलीला मैदान कविनगर में आयोजित सात दिवसीय दीपावली मेले में गाजियाबाद नगर निगम द्वारा प्रायोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते हुए नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर।
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