बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग ने कार्यपालक सहायक की नौकरी 60 वर्ष की उम्र तक की पक्की: सम्राट चौधरी
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क्रशर:- आकस्मिक अवकाश, अर्जित अवकाश, मातृत्व अवकाश, कृतित्व अवकाश एवं अवैतनिक अवकाश का भी किया गया है प्रावधान
नई दिल्ली। बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि उनके विभाग के कार्यपालक सहायकों की नौकरी अब 60 साल की आयु तक पक्की कर दी गई है। अब उन्हें अपने अनुबन्ध विस्तार की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस सम्बन्ध में मंत्री श्री चौधरी ने दूरभाष पर बताया कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं बिहार के विकासशील मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में बसे 80 प्रतिशत आबादी के लिए चिंता करते रहते हैं। इसलिए उक्त आशय का निर्णय लिया गया है।
मंत्री श्री चौधरी ने बताया कि बिहार के सभी पंचायतों में लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम के तहत आरटीपीएस काउंटर की सुविधा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिसमें कार्यरत कार्यपालक सहायक को प्रत्येक पंचायत में कार्य करना पर रहा है। परंतु उन लोगों को बार-बार संविदा विस्तार की जरूरत पड़ती थी। इसलिए पंचायती राज विभाग ने अब निर्णय लिया है कि बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन के तहत जिलाधिकारी द्वारा जिन-जिन पंचायतों में कार्यपालक सहायक की नियुक्ति की गई है, उनको अब 60 वर्ष की उम्र तक अपनी सेवा दे सकेंगे। साथ ही, आकस्मिक अवकाश, अर्जित अवकाश, मातृत्व अवकाश, कृतित्व अवकाश एवं अवैतनिक अवकाश का भी प्रावधान किया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि जिन लोगों की नियुक्ति बेल्ट्रॉन के माध्यम से की गई है, आगे उन पर भी विभाग द्वारा विचार किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि बिहार में सत्तारूढ़ भाजपा-जदयू गठबंधन सरकार का यह युगान्तकारी निर्णय है। सरकार के इस निर्णय के बाद अब तक अनुबन्ध के आधार पर कार्य कर रहे विभिन्न विभागों के लोगों द्वारा यह मांग की जाएगी कि उन्हें भी इसी तरह से स्थायी किया जाए।
बताया जाता है कि यदि सरकार सभी लोगों को ऐसी सहूलियत नहीं देगी तो वो कोर्ट में जाएंगे और सरकार के इस निर्णय को नजीर के तौर पर देकर राहत भी पा जाएंगे। यही नहीं, देश के अन्य राज्य सरकारों और केंद्र सरकार में कार्यरत अनुबन्ध आधारित लोगों के द्वारा भी बिहार की तरह ही 60 वर्ष की आयु तक नौकरी स्थायी करने की मांग तेज होगी, जिसे किसी भी तरीके से अनुचित नहीं ठहराया जा सकता है। देर सबेर यही मांग निजी क्षेत्र में भी उठेगी।
सियासी सूत्रों का कहना है कि पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी सुलझे हुए राजनेता हैं। उनके विभाग में हुए इस निर्णय से जनता में भाजपा का इकबाल बुलंद होगा, जो यूपी के बाद बिहार में तेजी से मजबूत हो रही है। यदि अनुबन्ध आधारित नौकरी को 60 वर्ष की उम्र तक स्थायी नौकरी देने की परंपरा आगे बढ़ती है तो भाजपा को निकट भविष्य में इससे काफी फायदा मिलेगा। वहां पर जदयू का मुख्यमंत्री होने से नीतीश कुमार को भी इसकी क्रेडिट मिलेगी, यदि अन्य विभागों में भी वो इसे लागू करते हैं तो।
सच कहा जाए तो तत्कालीन वित्तमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के राज में स्थायी प्रकृति के कार्य वाले स्थायी पदों पर 1 से 3 साल के अनुबन्ध आधारित नौकरी का जो प्रचलन बढ़ा और निर्धारित अवधि के बाद अनुबन्ध विस्तार की जो अड़चन नौकरी पेशा लोगों के भविष्य को अनिश्चितता के गर्त में धकेल रही है, उससे पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम नीतीश कुमार और पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी के कार्यकाल में उससे निजात मिलने की शुरुआत हो गई, यह सरकार का प्रशंसनीय कदम है और इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम है।
फोटोकैप्शन:- सम्राट चौधरी, पंचायती राज मंत्री, बिहार सरकार।
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