बिजनौर की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित तो कीजिए, देश-दुनिया को मिलेगा संबल

बिजनौर की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित तो कीजिए, देश-दुनिया को मिलेगा संबल

@ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस

देश में प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना प्रायः हर प्रतिभाशाली छात्र का होता है, लेकिन प्रतिवर्ष सिर्फ मुट्ठी भर छात्र-छात्राओं का चयन बमुश्किल इस महत्वपूर्ण सेवा के लिए हो पाता है। इसलिए इतना तो समझा ही जाता है कि जिनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा संवर्ग में हो गया, इनमें अवश्य ही कुछ अति असाधारण गुण होंगे जो देश व देशवासियों की सेवा के मद्देनजर अनुभवी व विद्वान अधिकारियों द्वारा आंके गए होंगे। इसका मतलब यह कदापि नहीं होता कि असफल छात्र-छात्राएं प्रतिभाशाली नहीं है, बल्कि यह होता है कि वो अपनी प्रतिभा का उपयोग अन्य क्षेत्रों में करेंगे और आगे बढ़ेंगे।

जनकवि तुलसीदास जी रामचरितमानस में लिखते हैं कि
"पर हित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई। निर्णय सर्कल पुराना वेद कर। कहेउ तात जानहि कोविद नर।।" अर्थात हे भाई, दूसरों की भलाई के समान कोई धर्म नहीं है और दूसरों को दु:ख पहुंचाने के समान कोई पाप नहीं है। हे तात, समस्त पुराणों, वेदों का यह निर्णय मैंने तुम्हें बता दिया। इसे विद्वान व्यक्ति भी जानते हैं।

आशय स्पष्ट है कि किसी एक क्षेत्र में असफलता किसी अन्य विशिष्ट क्षेत्र में सफलता प्राप्ति की ओर इशारा करती है। अतः प्रशासनिक सेवा में सफल अभ्यर्थियों को अहं, मान, मद एवं पद की प्रतिष्ठा के आधार पर अहंकार रूपी प्रवृत्ति से दूर रहना होगा, तभी वह व्यष्टिगत सफलता से समष्टिगत  सुधार एवं उन्नति का कारक बन अपने पद एवं योग्यता की सार्थकता का लोहा मनवा सकते हैं। इसी प्रकार किसी विशिष्ट क्षेत्र में असफलता से निराश एवं अवसाद के भाव को मन से त्याग कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रसिद्धि के अन्य नए नूतन मार्ग का चयन कर अपनी सार्थकता एवं योग्यता का लोहा मनवा कर समाज में अपनी उपादेयता को सिद्ध कर सकते हैं।

इस बात में कोई दो राय नहीं कि छात्र-निर्माण में घर-परिवार की प्रत्यक्ष भूमिका के साथ-साथ गांव-समाज की परोक्ष भूमिका होती है। यही बात जनपद, देश-प्रदेश पर भी लागू होता है। कहना न होगा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए जिस परिवेश या प्रबुद्ध माहौल की जरूरत किसी छात्र को पड़ती है, उस नजरिए से उत्तरप्रदेश का बिजनौर जनपद भी बहुत भाग्यशाली है। गंगा की उर्वर मिट्टी, हिमालय की तराई की शीतल अबोहवाओं के बीच यहां के पले-बढ़े छात्र प्रतिवर्ष कुछ न कुछ ऐसा जरूर करते हैं, जिससे उनकी प्रतिभा का डंका हर ओर बजता है। इससे न केवल यह पुरातन गौरव धारण करने वाली वसुधा, बल्कि वहां के बुद्धिजीवी व उद्यमी भी खुद को गौरवान्वित समझते हैं। मैं भी उन्हीं में से एक हूं और इस पावन स्थल के परिवेश का शुक्रगुजार भी, यहाँ की मिट्टी के आत्मीय जनों का कायल भी।

भारतीय प्रशासनिक सेवा संवर्ग 2020 के लिए चयनित
स्नेहिल काजल जी, अभिलाषा जी एवं अन्य यदि कोई और है जो संज्ञानित नहीं है, को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं एवं अनंत आशीर्वाद इसलिए कि आपने 
ऐतिहासिक भूमि बिजनौर को पुनः मुस्कुराने का एक मौका दिया है। तभी तो पुनः एक बार मन हुआ कि बिजनौर जनपद का गौरव एवं मान बढ़ाने की दिशा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले हमारे जनपद की यशस्वी एवं होनहार बेटियों का आभार प्रकट किया जाए। 

वजह यह कि उन्होंने अपनी मेधा, परिश्रम, अपराजेय संकल्प शक्ति, धैर्य, संयम तथा संघर्ष की कटीली यात्रा से उपजाऊ परिवेश का सृजन कर न केवल अपने लिए एक उत्कृष्ट व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल की है, बल्कि  देश की प्रतिष्ठित परीक्षा "भारतीय प्रशासनिक सेवा 2020" में अनुकरणीय उपलब्धि हासिल करके अपना एवं अपने परिवार का मान-सम्मान बढ़ाया है। इसके लिए व्यक्तिगत तौर पर मेरी यानी हमारे समाज की दोनों बेटियों काजल (एआईआर 262) एवं अभिलाषा (एआईआर 292) को अनंत शुभकामनाएं व हार्दिक बधाई देता हूँ। 

कहना न होगा कि आपकी व्यक्तिगत सफलता में जहां एक ओर आपके गुरूजन एवं माता-पिता के आशीर्वाद एवं त्याग का सर्वप्रथम अधिकार है। वहीं, सामाजिक गतिविधियों एवं मातृभूमि के प्रति अगाध प्रेम एवं अटूट श्रद्धा की भावना की दृष्टि से बिजनौर की ऐतिहासिक, पवित्र एवं महात्मा विदुर की सांस्कृतिक विरासत के प्राचीन दर्शन, पराज्ञान, योग्यता एवं मेधा की भूमि भी पुनः गौरवान्वित हुई है। 

सच कहूं तो ज्ञान-विज्ञान-सुसंस्कार पर आधारित भारतीय संस्कृति के मूल में निहित नारी सम्मान का मार्ग प्रशस्त कर रहे दर्शन को पुनः आपकी सफलता ने सच साबित किया है। वह यह कि जहां नारियों एवं बालिकाओं की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास (रमण) होता है। जिस तरह से  आपके माता-पिता ने आपकी मेधा पर विश्वास किया और आपको आगे बढ़ने का हौसला दिया, उससे आपको यह उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय सफलता मिली। साथ ही, बिजनौर की पुरातन भूमि एक बार फिर धन्य हुई।

लिहाजा, मैं पुनः महात्मा विदुर जी, शकुंतला पुत्र भरत, जिनके नाम पर देश का नाम भारत वर्ष रखा गया, उस भूमि को नमन करते हुए आपकी नैतिक व पेशेवर सफलता के प्रति बिजनौर प्रशासनिक ग्रुप की ओर से हार्दिक बधाई देता हूं। इस ग्रुप में अनेकों ऐसे नाम हैं जिन्होंने मुझे भी व्यक्तिगत रूप से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और अब बिजनौर की पावन एवं पवित्र भूमि से ज्ञान की देवी मां सरस्वती जी की अनुकंपा से प्रशासनिक क्षेत्र में वैभव एवं गौरवशाली प्रतिभाओं का चयन प्रत्येक वर्ष होगा, जिससे हमारे इस ग्रुप (संस्था) में निरंतर होनहार अधिकारियों की वृद्धि होगी।

साथ ही, एक और विनम्र आग्रह सभी से है, वह यह कि इस पावन भूमि के लिए एकजुट होकर संगठनात्मक तरीके से, हमारे अग्रज एवं अनुज सदस्यों की समिति के माध्यम से, यदि कभी संयोग बने तो सम्मान समारोह का आयोजन करने की एक आत्मीयता पूर्ण परंपरा की शुरुआत की जाए। जिससे यह आत्मीयता भरा रिश्ता और सुदृढ़ हो। साथ ही, बिजनौर के विकास के लिए सामाजिक धरातल का सृजन कर एक नए युग का अभ्युदय संभव हो सके। क्योंकि बिजनौर में अनंत प्रतिभाएं हैं जो देश-विदेश में कार्य कर रही हैं, परंतु उनसे संपर्क जोड़ने के अभाव के कारण उनके मन में स्वदेश एवं मातृभूमि के प्रति प्यार एवं त्याग की भावना को मूर्त रूप प्रदान करने की दिशा में एक सशक्त सामाजिक  परिवेश का आधार नहीं मिल पा रहा है। इस दिशा में सभी सुधीजनों को एक कार्य योजना के साथ नवयुग की शुरुआत कर सकते हैं। 

वैसे लोकतंत्र में बड़े स्तर पर परिवर्तन की संभावना का माध्यम मजबूत राजनैतिक धरातल होता है, परंतु प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से किया गया कार्य चिरस्थाई एवं दूरगामी परिणाम के रूप में क्रांतिकारी परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए इस पावन उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सभी को अपने हिस्से का योगदान अवश्य देना चाहिए। इससे राष्ट्र को तो मजबूती मिलेगी ही, अपना राज्य भी अतुलनीय तरक्की करेगा। इससे पश्चिमी उत्तरप्रदेश की ज्ञान क्रांति और लोक मर्यादा का अलख जगाते रहने वाली यह भूमि धन्य हो जाएगी। इसकी यश कीर्ति का चतुर्दिक विकास और विस्तार होगा। इसलिए सफल अभ्यर्थियों को पुनः हार्दिक शुभकामनाएं। जय हिंद, जय भारत, जय बिजनौर।

लेखक परिचय:- 
डॉ दिनेश चंद्र सिंह, जिलाधिकारी, जनपद बहराइच, उत्तरप्रदेश.
मोबाइल नम्बर:- +91-9026774771
+91-9412244429
ईमेल:- dineshchandra1997@gmail.com

फोटोकैप्शन:- डॉ दिनेश चंद्र सिंह, जिलाधिकारी, जनपद बहराइच, उत्तरप्रदेश.


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