जीएसटी नियमों का पालन करना व्यापारियों के लिए एक बड़ी समस्या: अमन
जीएसटी नियमों का पालन करना व्यापारियों के लिए एक बड़ी समस्या: अमन
# बीते 4 वर्षों में जीएसटी में करीब 1200 संशोधन लाए गए, लेकिन व्यापारियों को विश्वास में नहीं लिया गया
भास्कर ब्यूरो
गाजियाबाद। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के जिला महामंत्री अमन कुमार अग्रवाल ने आरोप लगाया कि
बीते 4 वर्षों में जीएसटी में करीब 1200 संशोधन लाए गए हैं। लेकिन कोई भी संशोधन लाने से पहले व्यापारियों से किसी तरह की कोई बातचीत नहीं की गई और न ही जीएसटी को लेकर व्यापारियों की परेशानियों को जानने का कोई प्रयास ही किया गया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दिन एक नया प्रावधान लागू कर दिया जाता है जिसकी पालना करना व्यापारियों के लिए बेहद मुश्किल भरा है। व्यापारी को अनेक प्रकार के क़ानून का पालन करने वाली मशीन बना दिया गया है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में जो जीएसटी का स्वरुप है, यदि उसके विरोध में आज आवाज नहीं उठाई तो अब व्यापार करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इसलिए जीएसटी के कुछ वर्तमान प्रावधानों को जानना और समझना तथा अपने साथी व्यापारियों को भी बताना बेहद जरूरी है।
पहला, अगर आपने जीएसटीआर-1 में अपनी लायबिलिटी दिखा दी और जीएसटीआर- 3 बी में उसको नहीं लिया तो डिपार्टमेंट बिना नोटिस दिए डिफरेंस अमाउंट की वसूली कर सकता है और यह वसूली आपका बैंक अकाउंट अटैच करके या आपके किसी भी देनदार से डायरेक्ट रिकवर जा सकती है। दूसरा, अगर आप जीएसटीआर- 3 बी एक महीने का फाइल नहीं करते हैं तो आप जीएसटीआर-1 फाइल नहीं कर पाएंगे और अगर जीएसटीआर-1 फाइल नहीं कर पाएंगे तो आपको इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा।
तीसरा, अगर आप 2 महीने का जीएसटीआर- 3 बी फाइल नहीं करते हैं तो आप ई वे बिल नहीं जनरेट कर पाएंगे।
चतुर्थ, अगर आप किसी भी कारण से रिटर्न फ़ाइल नहीं कर पाते हैं तो डिपार्टमेंट सेक्शन 73 के अंदर आपको नोटिस दे सकता है, उसमें आपके इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में जो क्रेडिट पड़ा है, उसका क्रेडिट आपको नहीं मिलेगा बल्कि पूरी देय राशि पर आपको ब्याज देना होगा।
पांचवां, अगर आपके जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर- 3 बी में डिफरेंस पाया जाता है तो डिपार्टमेंट बिना नोटिस या सुनवाई के आपका जीएसटी रजिस्ट्रेशन नंबर सस्पेंड कर सकता है। उसी तरह यदि आपके जीएसटीआर- 3 बी और जीएसटीआर- 2 में अधिक डिफरेंस पाया जाए तो भी आपका नंबर सस्पेंड किया जा सकता है। छठा, ई-वे बिल की वैलिडिटी प्रतिदिन 200 किलोमीटर कर दी गई है जो की संभव नहीं है।
सातवां, ई-वे बिल में अगर कुछ भी गलती हो तो टैक्स के अमाउंट का 200 प्रतिशत पेनाल्टी लगाई जाएगी और यह अमाउंट आपको आपके इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर से भुगतान करना पड़ेगा और अगर आप यह अमाउंट नहीं भर पाते हैं तो आपका माल जब्त कर लिया जाएगा। अगर आपको इस जब्ती के खिलाफ अपील करनी है तो 25 पर्सेंट पेनल्टी भर कर अपील कर सकते हैं, पर जब तक अपील पर आपके हक़ में फैसला नहीं आ जाता, तब तक माल जब्त रहेगा। आठवां, 100 करोड़ से ऊपर टर्नओवर वालों को ई-इनवॉइस मैंडेटरी हो गया है। अगर वह इनवॉइस नहीं इशू करते तो आपको उसका क्रेडिट नहीं मिलेगा।
नवम, अगर आप ई-इनवॉइसिंग की कैटेगरी में आते हैं तो आप को इनवॉइस इश्यू करने के 72 घंटे के अंदर ई वे बिल जेनरेट करना होगा, नहीं तो आपकी वो इनवॉइस को कैंसल कर दूसरी इनवॉइस बनानी पड़ेगी।
दसवां, यदि आपने गलती से कोई गलत इनपुट क्रेडिट ले लिया है तो आपका बैंक खाता सीज हो जाएगा।
ग्यारहवां, यदि किसी गलती से आपने अधिक इनपुट क्रेडिट ले लिया है तो आपके लिए पोर्टल लॉक हो जाएगा।
बारहवां, अधिकारी अपने खुद के विवेक के आधार पर किसी का भी सर्वे या ऑडिट कर सकते हैं।
बारहवां, एक ही प्रोडक्ट का क्लासिफिकेशन अलग-अलग राज्य में एडवांस रूलिंग के तहत अलग-अलग किया जा रहा है। इसके लिए नेशनल एडवांस रूलिंग अथॉरिटी अभी तक गठन नहीं की गई है जिसकी वजह से बहुत परेशानी हो रही है। तेरहवां, 4 साल हो गए हैं पर अभी तक अपीलेट ट्रिब्यूनल गठित नहीं हुआ है, जिसकी वजह से हर छोटे केस के लिए व्यापारी को हाईकोर्ट जाना पड़ रहा है।
चौदहवां, जीएसटी के कुछ ऑफिसर देश भर में व्यापारियों को बुरी तरह से प्रताड़ित करते हैं और बिना सुनवाई के व्यापारियों से जबरदस्ती विभाग में ढेर पैसा भरवाते हैं।
पन्द्रहवां, जीएसटी कंप्लायंस से संबंधित कोई भी बदलाव लाया जाता है तो व्यापार को अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव का समय नहीं दिया जाता, ना ही उसे बदलाव समझने का मौका दिया जाता है, जिसकी वजह से व्यापारी काम धंधा छोड़ कर जीएसटी के बदलावों को समझने में ही समय गंवाता रहता है। सत्रहवां, अगर आपकी रिटर्न लेट भरी गई जो और बेशक निल रिटर्न हो तो भी लेट फी लगाई जायेगी। अठारहवां, टैक्स से ज़्यादा लेट फ़ी लगाई जाती है।
उन्नीसवां, जब तक जीएसटीआर- 3 बी ना भरा जाए तब तक ब्याज लगता रहता है चाहे क्रेडिट और कैश लेजर में बैलेंस हो तो भी। उन्होंने कहा कि ऐसी अनेक समस्याएं हैं जिनके कारण आज व्यापार करना बहुत मुश्किल होता जा रहा है हमारा जीएसटी काउंसिल से अनुरोध है कि इन समस्याओं को जल्द से जल्द सुलझाया जाए जिससे व्यापार सुगमता से किया जा सके l
फोटोकैप्शन:- अमन कुमार अग्रवाल, जिला महामंत्री,
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश।
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