प्रभासाक्षी डॉट कॉम ने डिजिटल पत्रकारिता को तकनीकी, तेवर और कलेवर सबकुछ देने का काम किया
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प्रभासाक्षी डॉट कॉम ने डिजिटल पत्रकारिता को तकनीकी, तेवर और कलेवर सबकुछ देने का काम किया
कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता
नई दिल्ली। जब भारत में डिजिटल पत्रकारिता ने कदम रखा था तब हर तरफ अंग्रेजी का ही बोलबाला नजर आता था। यही नहीं जो समाचार पोर्टल उस समय थे वह भी सिर्फ बड़े मीडिया हाउसों के ही थे। ऐसे में हिंदी पाठकों के लिए उनसे जुड़ाव आसान नहीं था। उस परिस्थिति को देखते हुए वर्ष 2001 में हिंदी समाचार पोर्टल के रूप में प्रभासाक्षी का उदय हुआ। बीस वर्ष पहले जब प्रभासाक्षी.कॉम की स्थापना हुई तब शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि राष्ट्रभाषा और राजभाषा हिंदी में कोई समाचार पोर्टल पाठकों का इतना विश्वास अर्जित करेगा और इतनी लंबी यात्रा करेगा।
जब हम पत्रकारिता की पढ़ाई करते हैं तो हमें यही पढ़ाया जाता है कि देश में पत्रकारिता की शुरुआत एक 'मिशन' के रूप में हुई थी, प्रभासाक्षी के संदर्भ में भी यही कहा जा सकता है कि इसकी शुरुआत भी एक 'मिशन' के रूप में हुई थी। जब भारत के प्रमुख हिंदी समाचार पोर्टल प्रभासाक्षी की बुनियाद रखी जा रही थी तो इसके संस्थापक और देश के जानेमाने उद्योगपति श्री गौतम मोरारका के मन में अन्यों की भाँति मात्र राजस्व अर्जित करना या मीडिया हाउस स्थापित कर अपनी राजनीतिक पकड़ बनाना लक्ष्य नहीं था, बल्कि उनका उद्देश्य हिंदी पाठकों को हर महत्वपूर्ण समाचार और जानकारी उनकी मातृभाषा में उन तक पहुँचाना था।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि प्रभासाक्षी (www.prabhasakshi.com) के आरम्भ के 16 वर्षों तक विपणन विभाग ही नहीं था, विज्ञापन के जो प्रस्ताव आते थे उन्हें भी इंकार कर दिया जाता था क्योंकि तब हिंदी पाठकों के पास खासकर कम स्पीड वाले इंटरनेट कनेक्शन होते थे, ऐसे में अचानक से और ज्यादा मात्रा में खुलने वाले विज्ञापन उन्हें परेशान करते थे। प्रभासाक्षी के संपादकीय विभाग ने पाठकों का विश्वास अर्जित करने के लिए समाचारों और विश्लेषणों की निष्पक्षता और तीव्रता पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया। भले राजस्व 16 वर्षों तक नहीं आया हो लेकिन प्रबंधन ने हिंदी के तकनीकी विकास की यात्रा को जारी रखने में बढ़-चढ़कर योगदान दिया। यही नहीं, हिंदी फॉन्ट पूर्व के समय में पाठकों के लिए अकसर एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आते थे लेकिन प्रभासाक्षी के विभिन्न फॉन्टों वाले संस्करण सदैव पाठकों को उनकी सुविधानुसार खबरों को पढ़ने की स्वतंत्रता देते थे।
जिस दौर में इंटरनेट पर हिंदी में नाममात्र का कंटेंट ही उपलब्ध होता था, उसी समय से प्रभासाक्षी के माध्यम से सभी उम्र और वर्ग के पाठकों को मात्र समाचार ही नहीं बल्कि उनके लिए महत्व रखने वाली हर जानकारी त्वरित गति से मिलती थी और आज तो खबरों की त्वरितता और विषयों की विविधता में प्रभासाक्षी सबसे आगे है। यह अतिश्योक्ति नहीं बल्कि एकदम सत्य है कि पिछले बीस वर्षों से सिर्फ आम पाठक ही नहीं बड़े से बड़ा मीडिया हाउस भी पुष्ट खबरों को पढ़ने के लिए प्रभासाक्षी.कॉम का ही रुख करते हैं। प्रभासाक्षी की एक नहीं कई गौरवपूर्ण उपलब्धियाँ उसे अन्य समाचार पोर्टलों से भिन्न करती हैं। जैसे देश के विभिन्न विचारधारा वाले शीर्ष स्तंभकारों और लेखकों का सबसे बड़ा पैनल, डिजिटल मीडिया के लिए केंद्र सरकार ने भले नियम वर्ष 2021 में अधिसूचित किये हों लेकिन प्रभासाक्षी.कॉम अपनी स्थापना की तिथि से ही स्व-अनुशासन में रहते हुए पीआईबी के सभी नियमों का पालन करती रही है। संसद सत्रों की सबसे व्यापक कवरेज की बात हो, देश में होने वाले विधानसभा-लोकसभा चुनावों की विस्तृत ग्राउंड कवरेज की बात हो, जन-आंदोलनों पर विस्तृत और निष्पक्ष कवरेज की बात हो या अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र के सिद्धांतों का पालन करते हुए 'शुद्ध खबरें' तीव्र गति से पाठकों तक पहुँचाने की बात हो, प्रभासाक्षी ने हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान कायम की है। यही कारण है कि आज देश ही नहीं विदेशों के विश्वविद्यालयों और पत्रकारिता विश्वविद्यालयों में भी पत्रकारिता की पढ़ाई कराते समय प्रभासाक्षी की खबरों का उदाहरण दिया जाता है। यही नहीं सीबीएसई की 10वीं कक्षा की हिंदी की पाठ्य पुस्तक में भी प्रभासाक्षी से संबंधित सवाल पूछा गया था।
डिजिटल मीडिया पर आज जहाँ फेक न्यूज, नग्नता और एजेंडा भरी पत्रकारिता का बोलबाला है, ऐसे में प्रभासाक्षी का सूरज हर पल सच को ही उजागर करता रहता है और पाठकों को विश्वास दिलाता है कि सदैव सच के साथ ही खड़े रहेंगे। आज प्रभासाक्षी.कॉम का विस्तार जम्मू-कश्मीर से लेकर देश के दक्षिणी भाग तक हो चुका है और देशभर से लेखक/लेखिकाओं की एक बड़ी कड़ी प्रभासाक्षी के साथ कार्य कर रही है। प्रभासाक्षी देश का पहला ऐसा हिंदी समाचार पोर्टल भी बना जिसकी खबरें आप पढ़ ही नहीं सकते बल्कि देख और सुन भी सकते हैं। प्रभासाक्षी का यूट्यूब चैनल दिन-ब-दिन दर्शकों की सराहना अर्जित कर रहा है, इसके अलावा प्रभासाक्षी.कॉम (www.prabhasakshi.com) की खबरें विभिन्न न्यूज एग्रीग्रेटर्स और उसके मोबाइल एप पर भी पढ़ी जा सकती हैं।
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