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गृहिणियां राष्ट्र निर्माता हैं, समझिए कैसे? उनके कार्यगत योगदान को कदापि कम मत आंकिए

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गृहिणियां राष्ट्र निर्माता हैं, समझिए कैसे? उनके कार्यगत योगदान को कदापि कम मत आंकिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने हाल ही में गृहिणियों के योगदान पर एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि "गृहिणियां राष्ट्र निर्माता (Nation Builders) हैं" और उनके घरेलू व देखभाल संबंधी कार्यों का वास्तविक आर्थिक मूल्य है। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी प्रमुख टिप्पणियों में कहा कि गृहिणी को केवल "आश्रित" (dependent) मानना गलत है; वास्तव में पूरा परिवार उनके श्रम और देखभाल पर निर्भर रहता है।  लिहाजा, महिलाओं द्वारा किया जाने वाला अवैतनिक घरेलू और देखभाल कार्य भारत की GDP में अनुमानतः 15-17% तक योगदान देता है, फिर भी उसे पर्याप्त मान्यता नहीं मिलती। वह गृहणियां ही हैं जो बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा, संस्कार और मानव संसाधन निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में प्रत्यक्ष भूमिका निभाती हैं। इसलिए अदालत ने कहा कि घरेलू कार्य को आर्थिक विश्लेषण से बाहर रखना उचित नहीं है और कानून को गृहिणियों के श्रम, से...

एक प्रेरणात्मक कविता: सम्राट हैं तो संभव है

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सम्राट हैं तो संभव है @ कवि: कमलेश पांडेय सम्राट हैं तो संभव है, बदलावों का उत्सव है। नई उमंग, नई आशा है, विकास-पथ की अभिलाषा है। सड़कों से लेकर खेतों तक, सपनों से लेकर रेतों तक, हर जन-मन में यह स्वर है, भविष्य सुनहरा बेहतर है। युवा शक्ति को मिले उड़ान, शिक्षा, रोजगार का सम्मान, गांव-गांव तक पहुँचे प्रकाश, यही प्रगति का सच्चा विश्वास। संघर्षों से जो न घबराए, जनसेवा को धर्म बनाए, ऐसे नेतृत्व का संदेश, बढ़ता जाए अपना प्रदेश। बिहार की नई पहचान बने, विकास का ऊँचा मान बने, जन-जन की यही पुकार रहे, उन्नति का यह द्वार रहे। सम्राट हैं तो संभव है, हर सपना अब साकार संभव है। मेहनत, विश्वास और संकल्प से, नया बिहार निर्माण संभव है। — कवि: कमलेश पांडेय <script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814"      crossorigin="anonymous"></script> ************** #  "राजनैतिकदुनिया डॉट ब्लॉग्स्पॉट डॉट कॉम" वैचारिक क्रांति का अग्रदूत है, इसलिए जनसहयोग अपेक्षित बृहत्तर भारत, शांतिप्रिय विश्व की ...

आखिर भारत की बढ़ती परमाणु ताकत से चौकन्ना क्यों होने लगा अंतरराष्ट्रीय जगत?

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आखिर भारत की बढ़ती परमाणु ताकत से चौकन्ना क्यों होने लगा अंतरराष्ट्रीय जगत? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत की बढ़ती परमाणु शक्ति से दुनिया में व्यापक भय कम और रणनीतिक सतर्कता अधिक है, क्योंकि भारत की सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक ताकत जितनी बढ़ेगी, उसकी परमाणु क्षमताओं पर वैश्विक चर्चा और निगरानी भी उतनी ही बढ़ेगी। भारत आज उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनकी सामरिक शक्ति वैश्विक शक्ति-संतुलन को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।  दरअसल, SIPRI 2026 रिपोर्ट का संदेश यह है कि भारत की परमाणु शक्ति में वृद्धि संख्या के स्तर पर सीमित है, लेकिन उसकी गुणवत्ता, तैनाती और परिचालन क्षमता में हो रहे बदलाव कहीं अधिक महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ताज़ा Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) रिपोर्ट के अनुसार भारत की परमाणु क्षमता में क्रमिक लेकिन महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। SIPRI Yearbook 2026 के अनुसार भारत की परमाणु क्षमता में लगातार वृद्धि और आधुनिकीकरण जारी है।  # रिपोर्ट के कुछ प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं:...

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में बर्बर सैन्य-पुलिस हिंसा के अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ

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पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में बर्बर सैन्य-पुलिस हिंसा के अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पीओजेके में समय-समय पर सामने आने वाली हिंसा, दमन, विरोध-प्रदर्शन और मानवाधिकार संबंधी आरोप केवल स्थानीय घटनाएं नहीं हैं, बल्कि इनके कई अंतरराष्ट्रीय आयाम भी हैं। चूंकि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हाल के दिनों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों ने भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। इसलिए सबने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, क्योंकि विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार कई लोगों की मौत हुई, तथा बड़ी संख्या में लोग घायल हुए तथा गिरफ्तारियां और इंटरनेट प्रतिबंध जैसी कार्रवाइयाँ भी की गईं। लिहाजा यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय चिंता का भी सबब बन चुकी है। जहां तक भारत की सधी हुई कड़ी प्रतिक्रिया की बात है तो भारत सरकार ने इस घटना पर सधी हुई कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कथित पुलिस बर्बरता और प्रदर्शनकारियों की मौतों पर चिंता जताते हुए कहा कि ...

आखिर 12 वर्षों में राष्ट्रवादी सपनों के शहंशाह कैसे बने पीएम नरेंद्र मोदी? जानिए

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आखिर 12 वर्षों में राष्ट्रवादी सपनों के शहंशाह कैसे बने पीएम नरेंद्र मोदी? समझते हैं विस्तार से @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 12 वर्षीय शासनकाल (2014-2026) कई मायने में महत्वपूर्ण है। यह स्वतंत्र भारत के सबसे प्रभावशाली और बहसयोग्य राजनीतिक दौरों में से एक माना जाता है, जिसका बहुआयामी प्रभाव आने वाले दशकों तक भारतीय राजनीति, शासन और चुनावी संस्कृति पर दिखाई दे सकता है।  पीएम मोदी के इस शासनकाल का भारतीय राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इसलिए जहां समर्थक इसे निर्णायक नेतृत्व, विकास और वैश्विक प्रतिष्ठा का काल बताते हैं। वहीं, आलोचक लोकतांत्रिक संस्थाओं, सामाजिक ध्रुवीकरण और आर्थिक चुनौतियों पर प्रश्न उठाते हैं।  राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मोदी काल ने भारतीय राजनीति को गठबंधन-प्रधान युग से व्यक्तित्व-केंद्रित और राष्ट्रव्यापी चुनावी राजनीति की ओर मोड़ा। लिहाजा, आने वाले वर्षों में यह आकलन होगा कि यह परिवर्तन स्थायी राजनीतिक पुनर्गठन सिद्ध होता है या...

इंडिया गठबंधन की बैठक के राजनीतिक मायने समझिए

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इंडिया गठबंधन की बैठक के राजनीतिक मायने समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक विगत दो-तीन वर्षों में कांग्रेस की सियासी विसात पर अपना अपना-सबकुछ लुटा-पिटा देने के बाद इंडिया (INDIA) गठबंधन के सहयोगियों की जो "नई दिल्ली बैठक" हुई, उसके राजनीतिक मायने कांग्रेस के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुए। क्योंकि इस बैठक में पहली बार नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की आवाज ध्यान से सुनी गई और उनके नेतृत्व को तथा उनकी पार्टी को गाहे-बगाहे चुनौती देने वाले क्षेत्रीय दलों के सुरमा भोपाली नेता दबी जुबान में अपनी भावना प्रकट करने को अभिशप्त हुए। खासकर नेशनल कांफ्रेंस के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सपा प्रमुख अखिलेश यादव को छोड़कर। इसलिए यह बैठक केवल एक नियमित विपक्षी बैठक तक सीमित नहीं रही, क्योंकि यह बैठक ऐसे समय हुई, जब कई सहयोगी दलों और कांग्रेस के बीच मतभेदों की बढ़ती-घटती खबरें सामने आई थीं, इसलिए इसके संदेश पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार, 8 जून को इंडिया (INDIA) गठबंधन की बैठक में लगभग 23 दलों के राजनेत...

बदलते बिहार की सकारात्मक छवि गढ़कर निवेश प्रवाह को आकर्षित करेगा "ब्रांड बिहार"

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बदलते बिहार की पहचान, रमणीक छवि और निवेश परिस्थिति को गढ़कर मजबूत करेगा "ब्रांड बिहार"  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक “ब्रांड बिहार नीति” का अर्थ केवल किसी सरकारी विज्ञापन अभियान से नहीं है, बल्कि बिहार की एक ऐसी व्यापक रणनीति से है जिसके जरिए राज्य की सकारात्मक पहचान बनाई जाए, ताकि बिहार को निवेश, पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति, उद्योग, कृषि और मानव संसाधन के एक बड़े केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।  माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कुशल नेतृत्व में आगे बढ़ रहे "ब्रांड बिहार" की इस आकर्षक पहल को रणनीतिक दिशा प्रदान करने के लिए बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम कार्य करेगा। जबकि इस पहल को श्रद्धा शर्मा द्वारा सहयोग प्रदान किया जाएगा। बता दें कि हाल के वर्षों में बिहार सरकार ने विशेष रूप से “पर्यटन ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग नीति 2024” जैसी पहलें शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य बिहार की छवि को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर मजबूत करना है।  बिहार सरकार ने "ब्रांड बिहार" की शुरुआत की...