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आखिर आरएसएस को भाजपा के नजरिए से न देखें तो फिर कैसे देखें, बना यक्ष प्रश्न!

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आखिर आरएसएस को भाजपा के नजरिए से न देखें तो फिर कैसे देखें, बना यक्ष प्रश्न! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक मोहन भागवत ने कोलकाता में हाल ही में दिए बयान में कहा कि आरएसएस को भाजपा के नजरिए से देखना बड़ी गलती है, क्योंकि इससे संगठन की सच्ची प्रकृति का गलत अंदाजा लगता है। देखा जाए तो भागवत का यह बयान आरएसएस की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को राजनीतिक चश्मे से अलग करने के उद्देश्य से आया है। लेकिन इसके सियासी मायने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय दोनों दृष्टि से अहम हैं। इसलिए देश-दुनिया के पक्ष-विपक्ष में यह बहस छिड़ चुकी है कि आखिरकार भाजपा (पूर्व नाम जनसंघ)  के मातृ संगठन समझे जाने वाले आरएसएस को बदलती भाजपा की अवसरवादी नजरिए से न देखें तो आप लोग ही बता दें कि फिर कैसे देखें? मसलन, भागवत ने स्पष्ट किया है कि आरएसएस का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है और इसे न तो केवल सेवा संगठन समझा जाए, न ही भाजपा से जोड़कर। ऐसा उन्होंने इसलिए कहा क्योंकि कई लोग/दल गलती से आरएसएस को भाजपा से सीधे जोड़ते हैं, जबकि संगठन समाज निर्माण और हिंदू एकता पर केंद्रित है। चूंकि कोलकाता ...

पीएम मोदी की चार दिवसीय जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान यात्रा के कूटनीतिक निहितार्थ को ऐसे समझिए

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पीएम मोदी की चार दिवसीय जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान यात्रा के कूटनीतिक निहितार्थ को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चार दिवसीय विदेश यात्रा (15-18 दिसंबर 2025) के क्रम में इस बार मध्य-पूर्व एशियाई और अफ्रीकी देशों यथा- जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की यात्रा की और द्विपक्षीय कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत बनाया। पीएम मोदी के इस ताजा दौरे पर भी अमेरिका-चीन-रूस व यूरोपीय-एशियाई देशों की नजरें केंद्रित हैं, जो मध्य पूर्व और अफ्रीका में भारत की स्वतंत्र कूटनीतिक मजबूती को रेखांकित करती है। निर्विवाद रूप में पीएम मोदी की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक गहरा करने, व्यापार बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता पर केंद्रित है। सच कहूं तो यह यात्रा भी अमेरिका द्वारा पाकिस्तान-बंगलादेश के मार्फ़त भारत को घेरने की क्षुद्र रणनीति का अपने हिसाब से कूटनीतिक जवाब ही है, जिससे चीन का भी चौकन्ना हो जाना स्वाभाविक है। जहां तक जॉर्डन दौरा की बात है तो यह दौरा भारत-जॉर्डन राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जहां पीएम मो...

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को समर्पित 'वीबी-जी राम जी योजना' के सियासी मायने को ऐसे समझिए

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सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को समर्पित 'वीबी-जी राम जी योजना' के सियासी मायने को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक वीबी-जी राम जी योजना, जिसका पूरा नाम 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' है, मनरेगा को प्रतिस्थापित करने वाले नए विधेयक के रूप में जब भारतीय संसद में पेश की गई तो विपक्षी दलों ने भारी एतराज जताया। फलस्वरूप यह योजना संसद में भारी विवाद का कारण बनी क्योंकि विपक्ष ने इसे महात्मा गांधी के नाम वाली ऐतिहासिक योजना का अपमान माना। विपक्षी दलों का आरोप है कि योजना का नाम 'जी राम जी' रखकर गांधीजी के नाम को हटाया गया, जिसे वे 'गोडसे राम' विधेयक कह रहे हैं।  शायद इन विपक्षी राजनेताओं को याद नहीं है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और हे राम शब्द एक दूसरे के पूरक समझे जाते हैं, क्योंकि हे राम! उनके जीवन के अंतिम शब्द हैं जो उनकी स्मृति स्थल 'राजघाट' पर मोटे अक्षरों में खुदे हुए हैं।इसलिए चाहे मनरेगा और या फिर वीबी-जी राम जी इससे जनसेवा की सोच में कोई खास अंतर नहीं पड़ता है।हां, यदि तुष्टीकरण की सि...

भाजपा ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर एक तीर से कई सियासी निशाने साधे, समझिए इसके मायने

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भाजपा ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर एक तीर से कई निशाने साधे, समझिए सियासी मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक समकालीन भाजपा के कुशल सियासी शिल्पी समझे जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी का चाणक्य करार दिए जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की युगल प्रभावशाली जोड़ी ने 14 दिसंबर को यकायक पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में तीसरी पीढ़ी के कद्दावर और सूझबूझ वाले युवा नेता नितिन नबीन के नाम की घोषणा करवाकर न केवल सबको चौंकाया है, बल्कि एक तीर से कई सियासी निशाने भी साधे हैं। इसके सियासी मायने भी दूरगामी और दिलचस्प साबित होंगे, क्योंकि मोदी-शाह के सियासी तरकश से निकले इस प्रभावी तीर ने आरएसएस-भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को भी आश्चर्य चकित कर दिया है। बताते चलें कि भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में सत्तारूढ़ राजग के नीतीश सरकार में भाजपा कोटे के कैबिनेट मंत्री नितिन नबीन को गत दिनोंतत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है, जिससे खुद पार्टी के कार्यकर्ता भी पशोपेश में पड़कर चौंक गए हैं और इस ...

डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत के वैश्विक निहितार्थ

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डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत के वैश्विक निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच के द्विपक्षीय व्यक्तिगत रिश्तों पर जमी  बर्फ अब भीषण नीतिगत ठंड के बावजूद भी पिघलने लगी है। ऐसा इसलिए कि गत 10 दिसंबर 2025 को दोनों नेताओं में बीच हुई फोन वार्ता ने भारत-अमेरिका संबंधों को पुनः मजबूत करने का संकेत दिया है। उल्लेखनीय है कि डॉनल्ड ट्रंफ की पाकिस्तान परस्त नीतिगत हठधर्मिता और टैरिफ दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी की वजह से भारत-अमेरिका के महत्वपूर्ण व रणनीतिक सम्बन्धों में भरोसे का भाव टूटा है और दोनों नेताओं के बीच खटास बढ़ी है, जिसको दूर करने के लिए ही यह ताजातरीन पहल की गई है। पीएमओ के मुताबिक, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय ट्रेड वार्ता की प्रगति की समीक्षा की और व्यापार, रक्षा, ऊर्जा तथा क्रिटिकल टेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों में पारस्परिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। यही वजह है कि इस प्रमुख चर्चा बिंदुवार्ता को "गर्मजोशीपूर्ण और सकारात्मक" बताया गया है, जिसमें वैश्व...

इंडिगो संकट के दृष्टिगत डायनेमिक प्राइसिंग पर उठते सुलगते सवालों के जवाब चाहिए

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इंडिगो संकट के दृष्टिगत डायनेमिक प्राइसिंग पर उठते सुलगते सवालों के जवाब चाहिए  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक इंडिगो संकट दिसंबर 2025 में नई FDTL (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट) नियमों के कारण पैदा हुआ, जिसके चलते एयरलाइन ने 1600 से अधिक उड़ानें रद्द कीं, लेकिन सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप कर किराए पर कैप लगाया और रिफंड सुनिश्चित किए। दरअसल इस संकट का कारण नई FDTL नियमों से पायलटों की रात्रिकालीन ड्यूटी सीमित हुई, जबकि इंडिगो ने पर्याप्त क्रू भर्ती नहीं की और पतली मार्जिन पर संचालन किया। इससे कैंसिलेशन बढ़े और अन्य एयरलाइंस पर दबाव पड़ा, जिससे दिल्ली-मुंबई जैसे रूट्स पर किराए 5-10 गुना (₹48,000-₹82,000 तक) उछले। इसलिए इंडिगो संकट के दृष्टिगत डायनेमिक प्राइसिंग पर उठते सुलगते सवालों के जवाब चाहिए। आज नहीं तो कल चाहिए और इस गोरखधंधे पर लगाम लगनी चाहिए। यह ठीक है कि इससे परेशान यात्रियों के हितों के मद्देनजर सरकार ने कार्रवाई की, लेकिन तबतक करोडों के बारे न्यारे हो गए। मसलन DGCA ने इंडिगो को अस्थायी छूट दी, शो-कॉज नोटिस जारी किया, 10% फ्लाइट शेड्यूल कटौती का आदे...

मंजूषा लोक चित्रकला को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाने की दिशा में आखिर कब जागरूक होंगे अंग के बुद्धिजीवी

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मंजूषा लोक चित्रकला को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाने की दिशा में आखिर कब जागरूक होंगे अंग के बुद्धिजीवी @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार मंजूषा एक पारंपरिक लोक चित्रकला है जो बिहार के भागलपुर जिले के अंग क्षेत्र से जुड़ी हुई है और इसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त है। लेकिन सुलगता हुआ सवाल है कि आखिर मंजूषा लोक चित्रकला को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाने की दिशा में महाजनपद कालीनअंग भूमि के बुद्धिजीवी कब तलक जागरूक होंगे। हालांकि, स्थानीय पत्रकारों ने जो नेक पहल शुरू की है, इस बात की उम्मीद बंधी है कि समसामयिक सियासत इसे मुकम्मल मुकाम प्रदान करने में कोताही नहीं बरतेगी। ऐसा इसलिए कि ईबीसी आदि वर्ग की यह पारंपरिक लोककला है जिसे बढ़ावा देने से इनकी कला और अध्यवसाय में भी दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की होगी। जहां तक इसकी उत्पत्ति और विशेषताएँ की बात है तो अवकाश प्राप्त प्रधानाध्यापिका श्री मती गायत्री देवी बताती हैं कि यह कला मुख्य रूप से बिहुला-विषहरी लोककथा पर आधारित है, जिसमें सर्प चित्रण और रेखाचित्र शैली प्रमुख हैं। अपने जमाने की विदुषी महिला स...