आखिर अमेरिका, चीन और रूस के 'साम्राज्यवादी लव ट्रेंगल' को क्यों खटकता है भारत? समझिए विस्तार से
आखिर अमेरिका, चीन और रूस के 'साम्राज्यवादी लव ट्रेंगल' को क्यों खटकता है भारत? समझिए विस्तार से @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की शतरंजी विसात पर भारत ने अमेरिका को जो पटखनी दर पटखनी दी है, उसकी खुन्नस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंफ के चेहरे पर साफ महसूस की जा सकती है। वहीं, भारत के सम्बन्ध में उनकी बदलती नीतियों से अब यह स्पष्ट परिलक्षित हो रहा है कि रूस और भारत के संयुक्त चक्रब्युह में निरंतर फंसते जा रहे अमेरिका के पास अब चीन के समक्ष घुटने टेकने के अलावा और कोई चारा भी नहीं बचा है। लेकिन आप यह जानकर और भी हैरत में पड़ जाएंगे कि इसके बाद भी अमेरिका की दुश्वारियां कम नहीं होने वाली हैं। ऐसा इसलिए की तेजी से वैश्विक महाशक्ति बनते जा रहे भारत ने अंतरराष्ट्रीय दुनियादारी में अमेरिका, चीन और रूस तथा इनके शागिर्द देशों/गठबंधन भागीदारों को साधते हुए खुद को आगे बढ़ाने का जो निश्चय किया है, उससे अमेरिका और चीन के होश फाख्ता हो चुके हैं। वहीं, भारत का सदाबहार दोस्त रूस मन ही मन गदगद है, क्योंकि अमेरिका और नाटो देशों के खिलाफ जो चक्...