भारत-रूस-चीन सम्बन्धों की राह के रोड़ों को समझिए और उन्हें समझदारी पूर्वक दूर हटाइए
भारत-रूस-चीन सम्बन्धों की राह के रोड़ों को समझिए और उन्हें समझदारी पूर्वक दूर हटाइए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक चूंकि रूस, भारत का सबसे भरोसेमंद देश है, इसलिए उसकी चिंता को भारत हमेशा अपनी चिंता समझते आया है। ठीक इसी प्रकार से रूस को भी भारत की चिंताओं को अपनी चिंता समझनी चाहिए, भले ही वह चीन से ही जुड़ीं हुईं क्यों न हो! अक्सर देखा जाता है कि भारत-पाकिस्तान मामलों में रूस मुखर हो जाता है, लेकिन भारत-चीन मामलों में मौन! आखिर ऐसा क्यों और कबतक? वहीं, भारत का नया दोस्त अमेरिका, भारत-चीन मामलों में तो मुखर रहता है, लेकिन भारत-पाकिस्तान मामलों में वह थोड़ा पाकिस्तान की तरफ झुक जाता है, ताकि युद्ध बढ़े, हथियार बिके! भारत इन कूटनीतिक चतुराइयों को बखूबी समझते आया है, इसलिए वह गुटनिरपेक्ष बने रहते हुए भी अमेरिका के मुकाबले रूस से ज्यादा सहानुभूति रखता है। कूटनीतिक मामलों के जानकारों के मुताबिक, भारत-रूस जैसे मजबूत देशों के 'कॉमन शत्रु' अमेरिका-ग्रेट ब्रिटेन समझे जाते हैं। इसलिए यूरोप-अमेरिका खासकर यूएसए-यूनाइटेड किंगडम से मुकाबले के लिए रूस को भारत की जरू...