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नया भारत जितना आधुनिक होगा उतना ही अपनी परम्पराओं से भी जुड़ा होगा

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नया भारत जितना आधुनिक होगा उतना ही अपनी परम्पराओं से भी जुड़ा होगा @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार केंद्र में पिछले साढ़े सात वर्षों से सत्तारूढ़ पीएम नरेंद्र मोदी  सरकार का मानना है कि नया भारत जितना आधुनिक होगा, उतना ही वह अपनी परम्पराओं से भी जुड़ा होगा। इसी उद्देश्य से यह सरकार पर्यटक महत्व वाले जिन स्वदेशी पर्यटन स्थलों को विकसित कर रही है, उसमें गुजरात का प्रख्यात द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर सोमनाथ क्षेत्र भी एक है। सरकार ने स्वदेश दर्शन योजना के तहत देश में 15 थीम बेस्ड टूरिस्ट सर्किट्स भी विकसित किए जा रहे हैं। ये सर्किट न केवल देश के अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ते हैं, बल्कि पर्यटन को नई पहचान देकर सुगम भी बनाते हैं।  हमारी सरकार का दृढ़ मत है कि भारत में आप जिस किसी भी राज्य का नाम लेंगे, तीर्थाटन और पर्यटन के क्षेत्र में एक साथ कई केंद्र हमारे मन में उभरकर आ जाएंगे। क्योंकि ये स्थान हमारी राष्ट्रीय एकता का, एक भारत-श्रेष्ठ भारत की जनभावना का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन स्थलों की यात्रा, राष्ट्रीय एकता को बढ़ाती है। आज देश इन जगहों को समृद्धि के एक मजब...

अपने मौखिक स्वास्थ्य पर ध्यान दीजिए, अन्यथा कोरोना संक्रमण हो सकता है जानलेवा

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अपने मौखिक स्वास्थ्य पर ध्यान दीजिए, अन्यथा कोरोना संक्रमण हो सकता है जानलेवा @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार क्या आपको पता है कि आपका मौखिक स्वास्थ्य कोविड की प्रगति को कैसे प्रभावित करता है? क्योंकि खराब मौखिक स्वास्थ्य पर विचार करने के लिए चिकित्सा विज्ञानियों के पास पर्याप्त सबूत हैं, जो यह जाहिर करते हैं कि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों में जटिलताओं के लिए खराब मौखिक स्वास्थ्य भी एक जोखिम कारक है- विशेष रूप से सह-रुग्णता जैसे कि मधुमेह, श्वसन संबंधी विकार या हृदय रोग, आदि की उपस्थिति में। स्पष्ट है कि पिछले दो वर्षों से देश दुनिया को आक्रांत की हुई इस कोविड महामारी में हरेक व्यक्ति के लिए अपने दांतों की देखभाल करना कितना महत्वपूर्ण है, इस बात का पता इस पर किये गए विभिन्न तरह के रिसर्च से चलता है। अधिक शोध होने के साथ ही यह ठीक-ठीक पता चल रहा है कि आपका मौखिक स्वास्थ्य कोविड की प्रगति को कैसे प्रभावित करता आया है। इसलिए, अच्छा मौखिक स्वास्थ्य बनाए रखना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, जिसका अर्थ है दिन में दो बार कम से कम दो मिनट तक ब्रश करना और नियमित रूप से दंत चिकित्स...

जमीनी स्तर के नवोन्मेषों व रचनात्मकताओं पर आधारित उत्पाद अब ऑनलाइन बिक्री के लिए होंगे उपलब्ध

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जमीनी स्तर के नवोन्मेषों, पारंपरिक ज्ञान और छात्रों की रचनात्मकता पर आधारित उत्पाद भी अब ऑनलाइन बिक्री के लिए होंगे उपलब्ध  @ कमलेश पाण्डेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार नये भारत में डिजिटल इंडिया को प्रोत्साहित करके आम आदमी के हुनर का उपयोग करते हुए उनकी आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में अपेक्षाकृत सुधार लाने का सपना संजोए हुए पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार ने सत्ता में आने के तत्काल बाद ही जो कुछ नूतन प्रारूप विकसित किये, उनका युगान्तकारी चेहरा अब धीरे धीरे स्पष्ट होता जा रहा है। देखा जाए तो बीते लगभग साढ़े सात वर्षों से देश में जो तीव्र गति से डिजिटल परिवर्तन हो रहा है, उसे देखते हुए जमीनी स्तर के उद्यमियों के लिए अपने नवाचारों को पूरे भारत में सीधे उपभोक्ताओं तक ले जाने पर विचार करने का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता है।  वस्तुतः एनआईएफआईईएनटीआरईसी के साथ अमेजन की साझेदारी का उद्देश्य जमीनी स्तर के उद्यमियों और उनके उद्यमों को डिजिटलीकरण और ई-कॉमर्स का लाभ पहुंचाने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों की रचनात्मकता वाले उत्पादों के विपणन को भारत और पूरे विश्व में लाखों अमे...

साजिशकर्ता मीडिया इकाइयों पर अविलम्ब कार्रवाई कीजिए

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साजिशकर्ता मीडिया इकाइयों पर अविलम्ब कार्रवाई कीजिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार दुनिया के कतिपय देशों के मुकाबले भारत, जिसे इंडिया या हिन्दुस्तान भी कहा जाता है, में प्रेस अपेक्षाकृत ज्यादा स्वतंत्र है। इसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है। कहने का तातपर्य यह कि लोकतंत्र के तीन स्तम्भों यथा-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के समान ही खबरपालिका, प्रेस-मीडिया को प्रमुखता देते हुए एक मजबूत चतुर्थ स्तम्भ की संज्ञा दी गई है। क्योंकि लोकतंत्र में जनता अपने शासकों के बारे में क्या राय रखती है, क्या सोचती है, क्या कहती है, ये बातें लोगों के बीच मीडिया रपटों से ही स्पष्ट होती हैं।  वैसे तो राजनीतिक कार्यकर्ता, प्रशासनिक कर्मचारी और अधिवक्तागण भी अपने-अपने संस्थानों में स्थापित तौर तरीकों के माध्यम से जनता की बात रखते आए हैं जिनपर कार्रवाई भी हुई है। हालांकि सत्ता यानी शासन-प्रशासन का स्थायी अंग होने के कारण आमलोग उनकी बातों पर हमेशा पूर्ण विश्वास नहीं करते हैं। लेकिन उन्हीं की बात जब उनकी भाषा में ही आकाशवाणी, दूरदर्शन, समाचार पत्र और पत्रिकाओं, निजी टीवी व ...

वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बहुमुखी वैश्विक संस्थाओं में सुधारों पर बल दें दुनिया के सभी सदस्य देश

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वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बहुमुखी वैश्विक संस्थाओं में सुधारों पर बल दें दुनिया के सभी सदस्य देश @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए दुनिया के सभी देशों को बहुमुखी वैश्विक संस्थाओं में सुधारों पर बल देना चाहिए। ताकि विभिन्न तरह की चुनौतियों से निपटने में दुनियावी देशों को सक्षम बनाया जा सके। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व आर्थिक मंच के डावोस एजेंडा शिखर सम्मेलन में स्टेट ऑफ दी वर्ल्ड यानी विश्व की स्थिति विषय पर विशेष रूप से अपने विचार व्यक्त करते हुए कही है, जिसका सर्वकालिक महत्व है। पीएम ने गत दिनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जो गूढ़ बातें कही हैं, वो उनकी दूरदर्शिता का परिचायक है। उनके विचार सभी देशों के लिए उत्साहबर्द्धक हैं और विश्व में भारत के बढ़ते महत्व का भी द्योतक है। इसका आधुनिक विश्व व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने जो कुछ महत्वपूर्ण बातें कही हैं, उसके विभिन्न पहलुओं की चर्चा करना यहां जरूरी है, क्योंकि वे देश-दुनिया सभी के लिए प्रासंगिक और उपादेय हैं और रह...

क्या लोकनायक, लोकनीति और संपूर्ण क्रांति से कुछ सबक लेंगे हमारे राजनेता?

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क्या लोकनायक, लोकनीति और संपूर्ण क्रांति से कुछ सबक लेंगे हमारे राजनेता? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार जब देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हों, जिनमें से एक बिहार का जुड़वाँ भाई समझा जाने वाला उत्तरप्रदेश भी हो तो जेपी यानी जयप्रकाश नारायण की याद आना स्वाभाविक है। समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया के इस प्रदेश में यदि जातीय सूबेदारों को सही समावेशी सियासी आईना दिखाना हो तो समाजवादी सियासत को राजनीतिक शिखर प्रदान करने वाली सम्पूर्ण क्रांति के प्रणेता जयप्रकाश नारायण की याद बरबस आ जाती है।  वजह यह कि एक ओर जहां राममनोहर लोहिया ने 1960 के दशक में समाजवादी सियासत को पिछड़ा पावे सौ में साठ का नारा देकर प्रभुता से लघुता की ओर धकेल दिया। वहीं, दूसरी ओर जयप्रकाश नारायण ने 1970 के दशक में सम्पूर्ण क्रांति का नारा देकर समाजवादी सियासत को लघुता से प्रभुता की ओर पुनर्स्थापित कर दिया। इसलिए आज उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव को राममनोहर लोहिया की राजनीतिक संकीर्णता से ज्यादा जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति सरीखी राजनीतिक व्यापकता के नजरिये से देखने और उसकी के अन...

लोकनायक, लोकनीति और संपूर्ण क्रांति

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लोकनायक, लोकनीति और संपूर्ण क्रांति @ कमलेश पांडेय, स्थानीय संपादक, लोकनायक भारत, दिल्ली लोकनायक जयप्रकाश ने पटना, बिहार में पाँच जून 1975 को घोषणा की थी कि भ्रष्टाचार मिटाना, बेरोजगारी दूर करना, शिक्षा में क्रांति लाना, आदि ऐसी चीजें हैं जो आज की व्यवस्था से पूरी नहीं हो सकतीं; क्योंकि वे इस व्यवस्था की ही उपज हैं। वे तभी पूरी हो सकती हैं जब सम्पूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए और सम्पूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए क्रान्ति, ’सम्पूर्ण क्रान्ति’ आवश्यक है।  आपको पता है कि उन्होंने सम्पूर्ण क्रान्ति का आह्वान तत्कालीन लोह महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की अधिनायकवादी सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए किया था। तब लोकनायक ने ही कहा था कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियाँ शामिल है जो राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति का सूत्रपात करती हैं। इन सातों क्रांतियों को मिलाकर ही सम्पूर्ण क्रान्ति होती है।  इस नजरिए से देखा जाए तो उनका आह्वान आज भी अधूरा है, जिन्हें पूरा करने के लिए ही महान स्वप्नद्रष्टा और स्वनामधन्य स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक और स...