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जानिए, आने वाले आम बजट 2022 से संबंधित महत्वपूर्ण शब्दावली, बजट प्रावधानों को समझने में होगी आसानी

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जानिए, आने वाले आम बजट 2022 से संबंधित महत्वपूर्ण शब्दावली, बजट प्रावधानों को समझने में होगी आसानी @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार आगामी 1 फरवरी  2022 को केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण संसद में अगले वित्त वर्ष 2022-23 के लिए आम बजट प्रस्तुत करने वाली हैं, जो मोदी सरकार का नौंवा बजट होगा। इसलिए इसमें बहुधा प्रयोग होने वाली महत्वपूर्ण शब्दावली के बारे में हम आपको विस्तार पूर्वक यहां बता रहे हैं, ताकि नए बजट प्रावधानों को समझने में किसी भी व्यक्ति को आसानी हो।  गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत अनुमानित प्राप्तियों और व्यय के विवरण को 'वार्षिक वित्तीय विवरण' कहा जाता है, जिसे भारत के वित्त मंत्री हर वर्ष संसद में वार्षिक बजट के रूप में प्रस्तुत यानी पेश करते हैं। फुल बजट प्रेजेंटेशन के दौरान कतिपय क्लिष्ट हिंदी शब्दों का प्रयोग किया जाता है। इसमें अक्सर राजकोषीय घाटा, राजस्व प्राप्तियां, बजट में संशोधित अनुमान व राजस्व बजट आदि कुछ महत्वपूर्ण कठिन शब्द प्रयोग में लाए जाते हैं, जो आम प्रचलन में नहीं हैं, इसलिए इनके अर्थ को बहुत से लोग नहीं समझ पाते हैं। लि...

जनसेवा के लिए चुनावी राजनीति में आऊंगा, किसी की बुराई के लिए नहीं: संजीव गुप्ता

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जनसेवा के लिए चुनावी राजनीति में आऊंगा, किसी की बुराई के लिए नहीं: संजीव गुप्ता # गाजियाबाद शहर विधानसभा सीट से शीर्ष उद्यमी, लोकप्रिय समाजसेवी व भाजपा कोषाध्यक्ष संजीव गुप्ता द्वारा टिकट की दावेदारी ठोकने से उनके प्रतिस्पर्धी नेताओं के होश उड़े, कैसे जानिए विस्तार से..... कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार गाजियाबाद। जब कोई राजनेता और टिकट प्रार्थी बीजेपी जैसे दुनिया के सबसे बड़े दल से यह कहे कि "मैं जनसेवा के लिए राजनीति में आना चाह रहा हूँ, मुझे किसी की बुराई नहीं करनी है।" तो दिग्गज राजनेता भी यही समझते हैं कि टिकट चाहने वाला लंबे रेस का सियासी घोड़ा है, जिस पर पार्टी यदि दांव लगाने का रिस्क लेती है तो यह अपने क्षेत्र में न केवल पार्टी को नई मंजिल देगा, बल्कि सियासत में अक्सर होनेवाली पारस्परिक आपाधापी में भी कभी थक कर नहीं बैठेगा, क्योंकि इस बात की गारंटी उसके शुरुआती लहजे से ही मिल रही है। जी हां, मैं बात कर रहा हूँ विगत 18 वर्ष से भाजपा में विभिन्न पदों पर रहते हुए कुशलता पूर्वक अपनी जिम्मेदारी निभा रहे लघु उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय वैश्य ...

गाजियाबाद के पंजाबी समाज को अपने नेताओं के लिए चाहिए समुचित टिकट

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गाजियाबाद के पंजाबी समाज को अपने नेताओं के लिए चाहिए समुचित टिकट # अन्यथा करेंगे अपनी उपेक्षा करने वालों के खिलाफ बगावत, किया ऐलान कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता गाजियाबाद। उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2022 की डुगडुगी चुनाव आयोग ने बजा दी है। इसलिए सत्ताधारी भाजपा एवं प्रमुख विपक्षी दल सपा के अलावा कांग्रेस, बसपा, आप आदि दलों व उनके नेतृत्व वाले गठबंधनों के द्वारा अपने-अपने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जिसपर गाजियाबाद के पंजाबी समाज की नजरें भी गड़ी हुई हैं। क्योंकि आजादी के बाद हुए तीन विधानसभा चुनावों में गाजियाबाद विधानसभा सीट पर पंजाबी समाज से आने वाले कद्दावर कांग्रेस नेता सरदार तेजा सिंह का कब्जा हुआ करता था। इस नाते वो गाजियाबाद के पहले विधायक माने जाते हैं। लेकिन चौथे विधानसभा चुनाव में उन्हें गाजियाबाद विधानसभा सीट की बजाय पड़ोसी मुरादनगर विधानसभा सीट से लड़ाने की पार्टी की रणनीति विफल रही और वे चुनाव हार गए। इसके बाद से गाजियाबाद व आसपास की विधानसभा सीटों पर पंजाबी समाज के किसी भी नेता को बतौर विधायक, प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला। उस भाजपा ...

बजट अनुमान: पीपीएफ खाताधारकों के लिए अब निवेश की सीमा हो सकती है दोगुनी, आईसीएआई ने की है वकालत

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बजट अनुमान: पीपीएफ खाताधारकों के लिए अब निवेश की सीमा हो सकती है दोगुनी, आईसीएआई ने की है वकालत @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार बढ़ती महंगाई और कमाई के घटते अवसरों के बीच आने वाले अगले आम बजट 2022 के मद्देनजर इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने आगामी 1 फरवरी को संसद में पेश किए जाने वाले आम बजट में पीपीएफ में निवेश की अधिकतम सीमा को डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने की सिफारिश केंद्रीय वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से की है। उसे विश्वास है कि सरकार उसकी बात को मान जाएगी और शीघ्र ही घोषित होने वाले बजट प्रावधानों में उसे निश्चय ही जगह देगी। बता दें कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अगले 1 फरवरी 2022 को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए आम बजट पेश होगा, जिसके लिए सरकारी तैयारी लगभग पूरी हो गई है। इसके तहत स्टेकहोल्डर्स के अलावा राज्यों के वित्त मंत्रियों ने भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अपने अपने सुझावों की सूची (लिस्ट) सौंप दी है। इस कड़ी में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई), नई दिल्ली ने भी अपनी सिफारिशें भ...

वर्चुअल रैली क्या होती है? इसका क्या भविष्य है? इससे राजनीतिक दलों को कितना लाभ मिलेगा?

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वर्चुअल रैली क्या होती है? इसका क्या भविष्य है? इससे राजनीतिक दलों को कितना लाभ मिलेगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार कोविड 19 के बढ़ते संक्रमण के बीच वर्ष 2020 में संपन्न संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रपति पद के तत्कालीन दावेदार और अब मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति जो विडेन ने जिन वर्चुअल रैलियां और इलेक्शन कैंपेन का सहारा लेकर चुनावी विजय श्री का वरण किया है, अब वही डिजिटल व वर्चुअल तकनीक भारत में वर्ष 2022 में होने जा रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी धमाल मचाएगी। हालांकि इसके टेलर तो वर्ष 2020 में हुए बिहार विधानसभा के चुनाव और 2021 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव में भी देखे जा चुके हैं, जिससे भारतीय राजनैतिक दल भी बेहद उत्साहित हैं।  बता दें कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच सियासी दलों से अपील की है कि चुनाव प्रचार के लिए वो डिजिटल और वर्चुअल चुनाव प्रचार माध्यमों का अधिक से अधिक सहारा लें। क्योंकि आयोग ने चुनावों के दौरान किसी भी तरह की भीड़ नहीं जुटने देने की प्रशासनिक प्रतिबद्धता के मद्देनजर किसी भ...

पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में डिजिटल व वर्चुअल चुनाव प्रचार के लिए राजनीतिक दल कितने हैं तैयार, जानिए

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पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में डिजिटल व वर्चुअल चुनाव प्रचार के लिए राजनीतिक दल कितने हैं तैयार, जानिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार कोरोना की चुनौतियां और ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच केंद्रीय चुनाव आयोग ने देश के पांच राज्यों में आगामी 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच सात चरणों में होने वाले विधानसभा चुनावों की क्रमशः 10, 14, 20, 23 व 27 फरवरी एवं 3 व 7 मार्च की तारीखों का ऐलान कर दिया है। लगे हाथ ही उसने चुनाव प्रचार के लिए नई गाइड लाइंस भी तय कर दी है, जिससे इन सभी राज्यों में डिजिटल और वर्चुअल चुनाव प्रचार की उम्मीदें जग गई हैं। हालांकि, इस पर निर्णायक निर्णय 15 जनवरी को कोविड समीक्षा के बाद आएगा। लेकिन 15 जनवरी तक सभी राजनीतिक दलों को डिजिटल व वर्चुअल चुनाव प्रचार पर ज्यादा निर्भर रहना होगा।  ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या राजनीतिक दल इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं? और यदि हां, तो क्या सभी मतदाताओं तक उनकी डिजिटल और वर्चुअल माध्यम से पहुंच संभव है! क्या सभी विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटल संसाधन उपलब्ध हैं, जिसका फायदा निर्दलीय उम्मीदवार...

वीर गाथा परियोजना के सुपर 25 विजेताओं में बिहार से कोई नहीं, आखिर ऐसा कैसे?

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वीर गाथा परियोजना के सुपर 25 विजेताओं में बिहार से कोई नहीं, आखिर ऐसा कैसे? @ राजपथ/अशोक कौशिक, संपादक रक्षा मंत्रालय ने वीर गाथा परियोजना के सुपर 25 विजेताओं की घोषणा कर दी है, हालांकि इन दो दर्जन से अधिक विजेताओं में बिहार के किसी भी छात्र ने अपनी जगह नहीं बनाई है। ये उस बिहार की शैक्षणिक दुर्दशा को प्रकट करता है, जो पढ़ाई में अव्वल माना जाता है और देश के प्रशासनिक सेवाओं में जिसका सर्वश्रेष्ठ योगदान रहता आया है। इसलिए बिहार सरकार को, वहां सक्रिय निजी शिक्षा कारोबारियों को यह सोचना चाहिए कि आखिर ऐसा कैसे हुआ और इस स्थिति के लिए कौन, किस हद तक जिम्मेदार है। आपको पता है कि गणतंत्र दिवस 2022 कई मायनों में विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह भारत की स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में मनाया जा रहा है। आजादी के अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में, गणतंत्र दिवस समारोह में पहली बार कई नए कार्यक्रम किये जा रहे हैं। जीवन के सभी क्षेत्रों से उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करके इसे लोगों का उत्सव बनाने का प्रयास किया गया है। साथ ही गणतंत्र दिवस के आयोजनों की तैयारी की प्रक्रिया में भी लोगों में राष्...