संदेश

बैंकिंग प्रणाली के रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, एसएलआर, सीआरआर व एमएसएफ के बारे में जानिए

चित्र
बैंकिंग प्रणाली के रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, एसएलआर, सीआरआर व एमएसएफ के बारे में जानिए , किसी पर इसका क्या पड़ेगा प्रभाव, इसे भी समझिए @ कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार जैसे-जैसे बैंकिंग प्रणाली का विस्तार हो रहा है, इसके बहुप्रचलित शब्दों के बारे में जानने की जिज्ञासा हर किसी के मन में पैदा हो रही है। रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर, एसएलआर, एमएसएफ आदि कुछ महत्वपूर्ण टर्म्स हैं, जिनके बारे में सबको जानना चाहिए। भारत के केंद्रीय बैंक के रूप में काम करने वाले रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा ही जब बैंकों की नीतिगत दरों में बदलाव किया जाता है, या फिर बदलाव नहीं करके यथास्थिति बनाये रखने का फैसला किया जाता है, तब इन शब्दों का प्रयोग ज्यादा देखने-सुनने को मिलता है। दरअसल, यह फैसला इतना महत्वपूर्ण होता है कि इसी पर कारोबारियों के साथ-साथ आम आदमी की निगाहें भी टिकी रहती हैं। इसलिए आरबीआई क्रेडिट पॉलिसी की घोषणा के दौरान रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर जैसे शब्द जरूर सुनने को मिलते हैं, तो मन में सवाल पैदा होता है कि आखिर इन शब्दों के मायने क्या हैं? इसलिए,  मैं ...

रैंडम चेकिंग अभियान के तहत सब इंस्पेक्टर यतेंद्र कुमार ने ली गहन तलाशी

चित्र
रैंडम चेकिंग अभियान के तहत सब इंस्पेक्टर यतेंद्र कुमार ने ली गहन तलाशी # इंदिरापुरम थाना क्षेत्र अंतर्गत रामप्रस्थ ग्रीन पुलिस चौकी वैशाली सेक्टर 6 के वसुंधरा टी पॉइंट पर सोमवार की सुबह 8 से 9 बजे तक चला रैंडम चेकिंग अभियान विशेष संवाददाता गाजियाबाद। एसएसपी पवन कुमार के निर्देश पर  ट्रांस हिंडन स्थित इंदिरापुरम थाना क्षेत्र अंतर्गत रामप्रस्थ ग्रीन पुलिस चौकी वैशाली सेक्टर 6 के वसुंधरा टी पॉइंट पर सोमवार की सुबह 8 से 9 बजे तक रैंडम चेकिंग अभियान चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर यतेंद्र कुमार के नेतृत्व में चलाया गया। इस दौरान गुजरने वाले हर वाहन की चेकिंग बारीकी से की गई।  इस सम्बन्ध में पूछे जाने पर सब इंस्पेक्टर यतेंद्र कुमार ने बताया कि जनपद पुलिस द्वारा पिछले महीने से एक घण्टे का रैंडम चेकिंग अभियान शुरू किया गया है, जिसका समय व स्थान परिवर्तित होता रहता है। जब जिस थाने और चौकी को निर्देश मिलता है, वहां चेकिंग प्रारंभ कर दी जाती है। पुलिस के मुताबिक, टीन एज के अपराधी प्रवृत्ति के युवाओं को काबू में लाने और उनके नेटवर्क पर हाथ डालने के लिए यह अभियान वर...

बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व की तारीफ की

चित्र
बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व की तारीफ की # नीतीश सरकार में सम्राट चौधरी की कोई नहीं सुनता है, इन बातों का दो टूक खंडन किया  भास्कर ब्यूरो नई दिल्ली/पटना। बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने उन खबरों का खंडन किया है, जिसमें यह बताया गया है कि नीतीश सरकार में सम्राट चौधरी की कोई नहीं सुनता है। मंत्री श्री चौधरी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया है कि ऐसी बातें सरासर असत्य एवं मनगढ़ंत व काल्पनिक है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए एकजुट है। बिहार में लंबे समय से विकास कार्य किए जा रहे हैं। पंचायती राज विभाग में भी कई बड़े फैसले मुख्यमंत्री श्री कुमार के कुशल व प्रगतिशील नेतृत्व में ही लिए गए हैं।  बता दें कि गत 2 अगस्त को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में ए.एन.आई न्यूज़ के कैमरा सहायक विजय कुमार के द्वारा मुख्यमंत्री श्री कुमार से पूछा गया कि कैबिनेट मंत्री पंचायती राज विभाग सम्राट चौधरी के द्वारा कहा जा रहा है कि सरकार में मेरी कोई नही...

एक सफल राजनीतिज्ञ बनने के लिए राजनीति के इन विशिष्ट कौशलों को अपनाइए, आज इनकी बहुत है जरूरत!

चित्र
एक सफल राजनीतिज्ञ बनने के लिए राजनीति के इन विशिष्ट कौशलों को अपनाइए, आज इनकी बहुत है जरूरत! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार किसी भी संवैधानिक लोकतंत्र में सियासत ही वह कुंजी है, जिसके समुचित संचालन से सम्बन्धित देश की समुन्नति संभव हो सकती है। अमूमन हरेक देश के नागरिक सुख-शांति-समृद्धि की तो आकांक्षाएं रखते हैं, लेकिन उसके अनुरूप राजनीतिक शिष्टाचार विकसित करने वाले दलों को बढ़ावा देने में कुछ निहित स्वार्थवश विफल भी रह जाते हैं। भारत वर्ष को इसका एक उदाहरण समझा जा सकता है, जिसने किसी न किसी विदेशी दबाव में उन लोकतांत्रिक अथवा मानवीय मूल्यों से ही समझौता कर लिया, जो उसे प्राचीन काल से ही विरासत में प्राप्त है।  देखा जाए तो जनहित के नजरिए से भारतीय प्रशासनिक व न्याय व्यवस्था कतिपय मोर्चे पर विफल प्रतीत हो रही है, जिसके लिए कहीं न कहीं हमारी क्षुद्र राजनीति ही जिम्मेदार है, क्योंकि जब कानून निर्माण में ही त्रुटियां या कमियां होंगी तो फिर तर्क-वितर्क-कुतर्क को कौन रोक सकता है। इसलिए यदि हमलोग एक अच्छे राष्ट्र का निर्माण करना चाहते हैं तो हमें अच्छे राजनेताओं को न केवल प्रशिक्...

15 वीं वित्त आयोग से टाईड मद में बिहार को मिला 1112 करोड़: सम्राट चौधरी

चित्र
15 वीं वित्त आयोग से टाईड मद में बिहार को मिला 1112 करोड़: सम्राट चौधरी # प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह का जताया आभार  # उत्तर प्रदेश को 2162 करोड़, पश्चिम बंगाल को 978 करोड़, तमिलनाडू को 799 करोड़, गुजरात को 708 करोड़, झारखण्ड को 374 करोड़ एवं अन्य सभी प्रदेशों को टाईड मद में मिली करोड़ों की सहायता राशि  कमलेश पांडेय नई दिल्ली। 15 वें वित्त आयोग की सिफारिश पर वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत सरकार द्वारा टाईड मद में 1112 करोड़ रू बिहार को उपलब्ध कराया गया है। जिससे कि बिहार राज्य के त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में नल-जल का काम, छठ घाट का निर्माण, कचरा प्रबंधन, पक्की गली-नाली निर्माण कराये जाएंगे। चूँकि बिहार में पंचायती राज चुनाव हो रहे हैं। इसलिए जनता लाभान्वित होगी। उन्होंने इस सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह को विशेष तौर पर धन्यवाद ज्ञापित किया है। जिन्होंने बंगाल को 978 करोड़, तमिलनाडू को 799 करोड़, गुजरात को 708 करोड़, उत्तर प्रदेश को 2162 करोड़,...

कर्म योग: निष्काम कर्म, सकाम लक्ष्य और जनसेवा का दृढनिश्चय

चित्र
कर्म योग: निष्काम कर्म, सकाम लक्ष्य और जनसेवा का दृढनिश्चय @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, जिलाधिकारी, बहराइच (यूपी) भारतीय संस्कृति कर्म प्रधान रही है। आधुनिक लोकतांत्रिक भारत में भी यही भावना प्रबल हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने भी कर्मयोग को महत्व दिया है। संत कबीर भी व्यवहारिक कर्म की सीख प्रदान करते हैं। तातपर्य यह कि मन की चंचलता को दूर कर निष्काम कर्म किया जाए, पूर्ण एकाग्रचित होकर सकाम लक्ष्य निर्धारित किया जाए और जनसेवा का दृढनिश्चय लेकर पूर्ण दत्त-चित्त से कर्म करते रहा जाए तो कठिन और दुर्लभ लक्ष्य को भी प्राप्त करके व्यक्तिगत हित से लेकर लोकहित का कार्य किया जा सकता है। देश काल पात्र प्रेरित अधिकांश महामानिषियों ने भी प्राणी मात्र के हित में ऐसा ही कार्य व आचरण करने का आह्वान किया है।  कर्मयोग नियंता भगवान श्रीकृष्ण उनके मुताबिक ज्ञानेंद्रियों व कर्मेन्द्रियों पर संयम स्थापित करके किसी भी व्यक्ति के द्वारा दुरूह से दुरूह लक्ष्य को साधा जा सकता है और जटिल से जटिलतम परिस्थितियों पर काबू पाया जा सकता है। भारतीय प्रशासनिक सेवाओं, प्रादेशिक प्रशासनिक सेवाओं समेत सभी विद्यार्थियों और उद्यमियो...

हॉलमार्किंग योजना क्या है? यह कितनी सफल हुई है? विस्तार पूर्वक बताइए।

चित्र
हॉलमार्किंग योजना क्या है? यह कितनी सफल हुई है? विस्तार पूर्वक बताइए। @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार स्वर्णाभूषण को अधिकांश भारतीयों की पहली पसंद समझा जाता है, फैशन के लिहाज से भी और निवेश के हिसाब से भी। लेकिन, इसकी खरीद-बिक्री में होने वाली धांधली किसी से छिपी हुई नहीं है। इसके मूल्य, नापतौल के तौर-तरीकों और इसमें होने वाली मिलावट यानी 24 कैरेट के बिस्कुट की बजाय 22 कैरेट, 20 कैरेट, 18 कैरेट और 16 कैरेट के बनने वाले आभूषणों यानी गहनों और उनके वास्तविक मूल्यों में होने वाले गड़बड़झालों की बात सरकार से छिपी हुई नहीं थी। इसलिए उसने हॉलमार्किंग योजना शुरू की। इससे इस धंधे की आड़ में होने वाली लेन-देन सम्बन्धी गड़बड़ियों और कालाबाजारी को भी रोकने में मदद मिलेगी। वस्तुतः, सोने के आभूषणों और कलाकृतियों की अनिवार्य हॉलमार्किंग 16 जून 2021 से चरणबद्ध तरीके से लागू होगी और शुरुआत में इसे 256 जिलों में लागू किया गया है। दरअसल, गोल्ड हॉलमार्किंग कीमती धातु की शुद्धता का प्रमाणीकरण है और वर्तमान में यह स्वैच्छिक है। फिर भी गत 1 जून से ज्वैलर्स को केवल 14, 18 और 22 कैरेट के सोने ...