क्या हिंदुओं की जातीय मानसिकता को बदल पाएंगे संघ प्रमुख मोहन भागवत?
क्या हिंदुओं की जातीय मानसिकता को बदल पाएंगे संघ प्रमुख मोहन भागवत? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्राचीनकाल में मनुस्मृति से लेकर आधुनिक काल के संविधान तक हिंदू समुदाय में जिस जातिवाद को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में बढ़ावा दिया गया, वह अब दुनिया के तीसरे बड़े धर्म सनातन (हिन्दू) के लिए अभिशाप साबित हो रहा है। जिस तरह से सियासी गोलबंदी के लिए जातिवाद को हवा दी जा रही है, वह किसी लोकतांत्रिक कलंक से कम नहीं है। अब तो प्रशासनिक और न्यायिक निर्णय भी इसे हवा देते प्रतीत हो रहे हैं। मसलन, इससे निरंतर कमजोर हो रहे हिन्दू समाज की एकजुटता के दृष्टिगत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत की चिंता स्वाभाविक है। यह उन जैसे सैकड़ों मशहूर लोगों के लिए भी सार्वजनिक चिंता का विषय रहा है। लेकिन हमारी संसद और सरकार के लिए यह कोई मुद्दा नहीं है क्योंकि जातिवादी खिलौने से मतदाताओं को फुसलाने के संवैधानिक तरकीब उसने विकसित कर लिए हैं और आधिकारिक निर्णयों में भी इसका भौंडा प्रदर्शन दिखाई दे जाता है। बता दें कि विगत 18 जनवरी 2026 को छत्रपति संभाजीनगर में संघ सरचालक मोहन...