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आर्थिक व सैन्य मोर्चे पर अमेरिका-चीन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हुआ भारत, अब बातचीत बराबरी से

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आर्थिक व सैन्य मोर्चे पर अमेरिका-चीन को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हुआ भारत, अब बराबरी से ही करेगा बातचीत @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक दुनिया के आर्थिक और सैन्य मंच पर तेजी से कद्दावर बन चुके गुटनिरपेक्ष देश भारत ने रूस को साधकर नम्बर वन  अमेरिका और नम्बर टू चीन को रणनीतिक मुश्किल में डालते हुए भींगी बिल्ली बना दिया है। इससे समकालीन विश्व के जी-7, नाटो, जी--20, ,ब्रिक्स और एससीओ जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में ग्लोबल साउथ की पूछ-परख बढ़ गई है, क्योंकि इनका अगुवा अब भारत बन चुका है। जानकार बताते हैं कि अमेरिकी दांवपेंचों और चीनी पैंतरों से आजिज आ चुके इन ग्लोबल साउथ के देशों को भारत की सदाशयी नीतियों से जो नीतिगत राहत और वैश्विक सहयोग मिला है, वह इनकी प्राथमिक जरूरत भी है। चूंकि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में भारत सबसे तेज़ इकॉनमी बन चुका है, मजबूत सैन्य ताकत के रूप  में छा चुका है, इसलिए भारत की मुखालफत दुनियावी थानेदारों को भी भारी पड़ सकती है। यह ठीक है कि सीजफायर और टैरिफ को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दावों-आरोपों का भारत ने अभ...

आखिरकार ईरान की तरह पाकिस्तानी परमाणु ठिकानों को भी नेस्तनाबूद कब करेगा भारत?

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आखिरकार ईरान की तरह पाकिस्तानी परमाणु ठिकानों को भी नेस्तनाबूद करने में आगे क्यों नहीं बढ़ पा रहा है भारत? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित टाम्पा में पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने फिर एक धमकी भरा बयान दिया है। हालांकि उस पर भारत ने पलटवार करते हुए दो टूक कह दिया है कि किसी भी न्यूक्लियर ब्लैकमेल के प्रभाव में नहीं आएंगे। दरअसल, फ्लोरिडा में पाकिस्तानी प्रवासियों को संबोधित करते हुए मुनीर ने कथित तौर पर परमाणु हमले की धमकी देते हुए कहा था कि भविष्य में भारत के साथ युद्ध में उनके देश के अस्तित्व को खतरा हो सकता है। हम एक परमाणु संपन्न राष्ट्र है। अगर हमें लगता है कि हम नीचे जा रहे है, तो हम अपने साथ आधी दुनिया को भी नीचे ले जाएंगे।  इससे स्पष्ट है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने जिस तरह से खुलेआम परमाणु युद्ध की धमकी दी है, उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इससे भारत की यह चिंता पुष्ट होती है कि पाकिस्तान के पास एटॉमिक पावर होना पूरी दुनिया के लिए खतरा है। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जा...

क्या पीएम नरेंद्र मोदी के सितंबर अमेरिकी दौरा से आपसी रिश्तों में जमी बर्फ कुछ पिघलेगी?

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क्या पीएम नरेंद्र मोदी के सितंबर अमेरिकी दौरा से आपसी रिश्तों में जमी बर्फ कुछ पिघलेगी? समझिए मायने! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक चाहे अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंफ हों, या अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेन्स, दोनों भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "टफ नेगोशिएटर" यानी "कठोर वार्ताकार" बताते आए  हैं। इसका अभिप्राय एक ऐसे व्यक्ति से होता है जो बातचीत में आसानी से हार नहीं मानता, अपनी बात पर दृढ़ रहता है और समझौते पर पहुंचने के लिए आसानी से झुकता नहीं है। जब-जब मैं उन दोनों नेताओं के मुख से  टफ नेगोशिएटर शब्द सुनता हूँ तो महसूस करता हूँ कि आखिर इन अमेरिकियों के मन में चल क्या रहा है?  लेकिन अब उन बातों का जवाब मिल चुका है। वह यह कि अमेरिका को चीन के मुकाबले एक मजबूत भारत नहीं, बल्कि पिछलग्गू भारत की जरूरत है। वहीं, भारत विरोधी पाकिस्तान व बंगलादेश को पुनः भड़काकर अमेरिकी नेताओं ने मित्रता की आड़ में जो शत्रुतापूर्ण चालें चलीं हैं, उसके भी सही जवाब का उन्हें इंतजार करना होगा, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी आजतक किसी के चतुराई भरे व्यवहार या ...

सड़क के कुत्तों को डॉग शेल्टर होम में रखने के सुप्रीम आदेश के व्यवहारिक मायने दिलचस्प

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सड़क के कुत्तों को डॉग शेल्टर होम में रखने के सुप्रीम आदेश के व्यवहारिक मायने दिलचस्प @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने गत सोमवार को दिल्ली-एनसीआर के इलाकों से सड़क के कुत्तों को पकड़ने और उन्हें डॉग शेल्टर में रखने का निर्देश दिया है, उसके व्यवहारिक मायने दिलचस्प हैं, जबकि कतिपय नेताओं व पशु प्रेमियों ने इस सुप्रीम आदेश की सड़क छाप मुखालफत शुरू कर दी है। देखा जाए तो यह प्रेम या घृणा का मामला नहीं है, बल्कि वह सामाजिक न्यायिक पहल है जिससे सबका लोकतंत्र सुनिश्चित होता है। खासकर उन बच्चों-बुजुर्गों का जिन्हें इनसे सर्वाधिक खतरा रहता है। इसी भय से कई बार वे अकेले पार्क या पड़ोस में जाने से घबराते हैं। दरअसल, कोर्ट ने ऐसा आदेश कुत्तों के काटने और रेबीज के खतरे के बढ़ने के मद्देनजर स्वत: संज्ञान लेते हुए उक्त आदेश दिया है। इसलिए वह आलोचना नहीं बल्कि बधाई का पात्र हैं। इससे मीडिया रिपोर्ट्स की गंभीरता और प्रासंगिकता भी परिपुष्ट हुई है। मेरी व्यक्तिगत राय है कि इसका दायरा बढ़ाकर इसमें बंदरों और उन जानलेवा आवारा जानवरों को भी इसमें शामिल किया ...

बदलती हुई बिहार की राजनीति–रोज़ नए रंग, रोज़ नई बिसात

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बदलती हुई बिहार की राजनीति–रोज़ नए रंग, रोज़ नई बिसात @ प्रणय राय बिहार की राजनीति हमेशा से ही देश में चर्चा का विषय रही है। यहां की राजनीतिक संस्कृति में जातीय समीकरण, क्षेत्रीय हित, और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे गहराई से जुड़े रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, और खासकर हाल के दिनों में, बिहार की राजनीति दिन-ब-दिन बदलती नज़र आ रही है। 1. गठबंधन राजनीति का उतार-चढ़ाव बिहार में सत्ता की कुर्सी अब केवल चुनाव जीतने से तय नहीं होती, बल्कि गठबंधन और उनकी समय-समय पर बदलती तस्वीर से भी होती है। नेता एक दिन साथ होते हैं, तो अगले दिन विपक्ष में खड़े मिलते हैं। इससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति भी पैदा हो रही है, और राजनीति में ‘स्थायित्व’ का अभाव दिख रहा है। 2. युवा राजनीति और नए चेहरे सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के ज़रिए युवाओं का राजनीति में दखल बढ़ा है। पहले राजनीति में आने के लिए वर्षों की ज़मीनी मेहनत करनी पड़ती थी, लेकिन अब कोई भी सही मुद्दे को लेकर रातों-रात पहचान बना सकता है। यही कारण है कि कई युवा नेता अब बिहार की राजनीति में असरदार भूमिका निभा रहे ह...

भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति से शिकस्त खा चुकी हैं वैश्विक कूटनीति की शतरंजी चालें!

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भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति से शिकस्त खा चुकी हैं वैश्विक कूटनीति की शतरंजी चालें! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक गुटनिरपेक्ष राष्ट्र भारत ने दुनिया के थानेदार अमेरिका, वैश्विक थानेदारी की 'अमेरिकी कुर्सी' को हथियाने को आतुर चीन और भारत विरोधी तमाम तिकड़मों के केंद्र बिंदु बन चुके शत्रु देश पाकिस्तान को सीधा और स्पष्ट संदेश देते हुए यह साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मुश्किल वक्त के पैमाने पर हर समय खरे उतरे भारत और रूस के रिश्ते कभी नहीं टूटेंगे।  उल्लेखनीय है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई पिछली एक मुलाकात में रणनीतिक साझेदारी (स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी), रक्षा सहयोग (डिफेंस को-ऑपरेशन) और ऊर्जा सुरक्षा (एनर्जी सिक्योरिटी) पर गहन चर्चा हुई। जिसके बाद दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बावजूद भारत-रूस की दोस्ती जो दशकों से मजबूत रही है और आगे भी कायम रहेगी। बता दें कि यह बयान ऐसे समय पर आया है जब पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका, की ओर से रूस के साथ भारत के संबं...

रक्षाबंधन के उदात्त सनातनी भाव में अंतर्निहित शाश्वत सांसारिक मायने को ऐसे समझिए

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रक्षाबंधन के उदात्त सनातनी भाव में अंतर्निहित शाश्वत सांसारिक मायने को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक ब्राह्मण पर्व 'रक्षाबंधन' न केवल भाई-बहनों, बल्कि पंडित-यजमान के पारस्परिक प्रेम, विश्वास और आपसी सौहार्द का एक अनोखा अवसर है, जहां बहन अपने भाई की कलाई पर और ब्राह्मण अपने यजमान के हाथ, शस्त्र और कारोबारी प्रतिष्ठान पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी शाश्वत सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं।  यह एक ऐसा मंगलकामना पर्व है जो सनातनी दूरदर्शिता, पारस्परिक उदारता और रिश्तों के शाश्वत गौरव भाव को अभिव्यक्त करता है। इसके शाश्वत मायने समूची दुनिया के लिए सकारात्मक हैं और इसे समझते ही सनातनी गौरव भाव का बोध होता है। कहा गया है कि यदि आपके विचार अच्छे होंगे तो जीवन-जगत में सबकुछ अच्छा यानी अनुकूल होगा। इसलिए पारस्परिक मानवीय सम्बन्धों, कारोबारी प्रतिस्पर्धा और दो देशों की सीमाओं पर फैलते जा रहे खूनी संघर्ष के परिप्रेक्ष्य में रक्षाबंधन के मायने को समझने और समझाने की जरूरत है।  सच कहूं तो यह पर्व सशक्त लोगों द्वारा निर्बलों की रक्षा करने की प्रेरणा सकल विश्व...