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भारत को सनातन ने नहीं, विदेशी आक्रांताओं और कांग्रेस ने बर्बाद किया

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भारत को सनातन ने नहीं, विदेशी आक्रांताओं और कांग्रेस ने बर्बाद किया @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारतीय पृष्ठभूमि वाली दुनिया की सबसे पुरातन सभ्यता-संस्कृति 'सनातन धर्म" पर सियासी वजहों से जो निरंतर हमले हो रहे हैं, उनका समुचित जवाब देने में अब कोई कोताही नहीं बरती जानी चाहिए। अन्यथा इसकी सार्वभौमिक स्थिति और महत्ता को दरकिनार करने वाले  ऐसे ही बेसिरपैर वाले क्षुद्र सवाल उठाए जाते रहेंगे।  हाल ही में तथाकथित धर्मनिरपेक्ष और अवसरवादी क्षेत्रीय पार्टी एनसीपी शरद पवार के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने एक नया विवाद छेड़ते हुए जो कहा है कि सनातन धर्म ने भारत को बर्बाद कर दिया और इसकी विचारधारा को विकृत बताया, वह निहायत ही बेहूदगी भरी, अपरिपक्व और पूर्वाग्रह ग्रसित बयानबाजी है, उसकी जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है।  वहीं, भारत की आत्मा समझी जाने वाली सनातन सभ्यता-संस्कृति पर ऐसी अपमानजनक टिप्पणी करने वाले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ उनकी पार्टी को अपना स्टैंड क्लियर करते हुए उनका इस्तीफा लिया जाना चाहिए, अन्यथा चुनाव आयोग को ऐसे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ क...

आदिवासियों के प्रेरणास्रोत बने रहेंगे 'दिशोम गुरू' शिबू सोरेन

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आदिवासियों के प्रेरणास्रोत बने रहेंगे 'दिशोम गुरू' शिबू सोरेन  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक सुप्रसिद्ध आदिवासी नेता और दिशोम गुरू के नाम से विख्यात शिबू सोरेन गोलोकधाम चले गए, लेकिन वे आदिवासियों के प्रेरणास्त्रोत बने रहेंगे। दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में 4 अगस्त 2025 की सुबह को उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके निधन से झारखंड के साथ बिहार में भी शोक की लहर है। उन्होंने जिस झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की, वह आज सूबाई सत्ता में गठबंधन सरकार को नेतृत्व प्रदान कर रहा है। ऐसा इसलिए कि वे खालिस बागी आदिवासी नेता व कार्यकर्ता दोनों थे। उनके कुछ रणनीतिक गुण झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन में भी मौजूद हैं, जिसके बदौलत वे अपने प्रतिद्वंद्वियों को सियासी मात देते रहते हैं।  उल्लेखनीय है कि झामुमो नेता हेमंत सोरेन ने गत विधानसभा चुनाव में तमाम सत्ता विरोधी अटकलों को खारिज करते हुए झारखंड की सत्ता में न केवल शानदार वापसी की, बल्कि सियासत में मोदी-शाह युग के मिथक को भी तोड़ दिया। अपनी जेल यात्रा के बावजूद वह अपने लोगों से नहीं कटे और सूबाई मुद्दों के प्रति...

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ रचे गए कांग्रेसी षड्यंत्रों से उपजते सवाल

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ रचे गए कांग्रेसी षड्यंत्रों से उपजते सवाल @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक मालेगांव बम विस्फोट कांड (2008) के बारे में हाल ही में जो महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं, वो किसी भी सजग भारतीय का दिल दहलाने वाले हैं। साथ ही भारत के एक प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस के सार्वजनिक चरित्र के बारे में जो खुलासे हुए हैं, वह उस पर एक गम्भीर लांछन के रूप भी दिखाई दे रहे हैं। यह भारत के उन कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों की मनोदशा पर भी प्रकाश डाल रहे हैं, जिन्हें राजनीतिक नाफरमानी की स्थिति में भारी कीमत चुकानी पड़ती है। इसलिए हमारी संसद को चाहिए कि वह भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए हमारे प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों को सक्षम बनाने के लिए कानून बनाए और उनके पाकसाफ हाथ को मजबूत करे।  ऐसा इसलिए कि कांग्रेस के जड़विहीन व खुराफाती रणनीतिकारों यथा- तत्कालीन गृह मंत्री पी.चिदम्बरम, महाराष्ट्र के पार्टी नेता सुशील कुमार शिंदे और तत्कालीन गृह सचिव आर के सिंह आदि ने यूपीए संयोजिका और कांग्रेस सुप्रीमो श्रीमती सोनिया गांधी, जो इ...

अमेरिका के टैरिफ अटैक से प्रभावित होंगे भारतीय निर्यात, लेकिन लांग टर्म में कारोबारी हित रहेंगे अछूते!

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अमेरिका के टैरिफ अटैक से प्रभावित होंगे भारतीय निर्यात, लेकिन लांग टर्म में कारोबारी हित रहेंगे अछूते!  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक लीजिए, अंततोगत्वा अमेरिका ने भारत पर अपना टैरिफ बम फोड़ ही दिया। लेकिन अब भारत क्या जवाबी कार्रवाई करता है, इसपर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। उल्लेखनीय है कि गत बुद्धवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारतीय चीजों पर 25% जवाबी टैरिफ लगाने का पुनः ऐलान किया। हालांकि, चतुराई पूर्वक ट्रंप ने भारत को 'दोस्त' बताते हुए निज सोशल मीडिया साइट 'सोशल ट्रूथ' पर किये गए अपने पोस्ट में लिखा है कि यह टैरिफ 1 अगस्त से लागू होगा। वहीं, अभी तक यह भी साफ नहीं हुआ है कि ट्रंप का यह टैरिफ पहले से लागू 10% शुल्क के अतिरिक्त होगा या उसमें ही समाहित होगा। इसके अलावा, भारत की रूसी मित्रता के लिए जो अमेरिकी जुर्माना लगेगा, वह कितना होगा। बता दें कि ट्रंप ने इससे पहले गत 2 अप्रैल को भारत सहित कई देशों पर 10% टैरिफ लगाया था, जिसे पहले 90 दिनों तक और फिर बाद में 1 अगस्त तक टाल दिया था। वहीं, इस बार ट्रंप ने यह ऐलान भी किया कि...

पहलगाम आतंकी हमला: यूएनएससी रिपोर्ट में पाकिस्तान बेनकाब, काम नहीं आई चीनी-अमेरिकी दोस्ती!

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पहलगाम आतंकी हमला: यूएनएससी रिपोर्ट में पाकिस्तान बेनकाब, काम नहीं आई चीनी-अमेरिकी दोस्ती! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मॉनिटरिंग रिपोर्ट में भारत के पहलगाम आतंकी हमले में आतंकी संगठन "द रेजिस्टेंस फ्रंट" (टीआरएफ) की भूमिका का जिक्र होने के बाद अब पाकिस्तान के लिए बचने का कोई रास्ता नहीं रह गया है।इस प्रकार आतंकवादियों की मदद के लिए अब दुनिया से मुंह छिपाने का भी कोई रास्ता उसके लिए नहीं बचा हुआ  है। देखा जाए तो उसका यह झूठ अब दुनिया के सामने एक बार फिर बेनकाब हो चुका है कि भारत में हुए आतंकवादी हमले से उसका कोई नाता नहीं है। कुलमिलाकर यह अप्रत्याशित रिपोर्ट भारत के अनवरत यानी लगातार किए गए कूटनीतिक प्रयासों की जीत है। इससे यह भी स्पष्ट हो जाता है कि भारत के प्रति अमेरिका-चीन दोनों के रुख में नरमी आई है। खास बात यह है कि मॉनिटरिंग टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि टीआरएफ ने दो बार हमले की जिम्मेदारी ली है और यह पहलगाम आतंकी अटैक भी पाकिस्तान की जमीन से संचालित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एल...

आखिर अमेरिकी 'टेररिस्ट इकॉनमी' और इंडियन 'डेड इकॉनमी' जैसे आरोपों के अंतरराष्ट्रीय मायने क्या हैं?

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आखिर अमेरिकी 'टेररिस्ट इकॉनमी' और इंडियन 'डेड इकॉनमी' जैसे आरोपों के अंतरराष्ट्रीय मायने क्या हैं? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंफ ने दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और तेजी से मजबूत होती जा रही 'समाजवादी अर्थव्यवस्था' यानी भारतीय अर्थव्यवस्था को डेड इकॉनमी करार दिया है, तो एक भारतीय होने के नाते उनसे मेरा सीधा सवाल है कि आखिर उनकी अमेरिकी अर्थव्यवस्था क्या है- 'कैपिटलिस्ट इकॉनमी' या 'टेररिस्ट इकॉनमी!' मुझे पता है कि वो मेरे इस सवाल का जवाब नहीं देंगे, इसलिए आज उनकी डॉलर डिप्लोमेसी, मिलिट्री डिप्लोमेसी और घृणित कूटनीति को आईना दिखलाना अपना राष्ट्रघर्म/बुद्धिजीवी धर्म समझता हूं। वहीं, अमेरिका को यह भी स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि रूस के साथ भारत गर्त में नहीं, बल्कि उंस शिखर पर जाएगा जहां आज अमेरिका काबिज है!  सच कहूं तो सात समुंदर पार बसा अमेरिका यदि अपनी फूट डालो और राज करो वाली क्षुद्र नीतियों और अभद्र स्वभाव/व्यवहार के बल पर एशिया-यूरोप के देशों पर शासन करना चाहता है तो अब उसके दिन लद गए...

'ऑपरेशन सिंदूर' पर संसद में उठे सुलगते सवालों के मिले अस्पष्ट जवाबों के गम्भीर वैश्विक मायने को ऐसे समझिए

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'ऑपरेशन सिंदूर' पर संसद में उठे सुलगते सवालों के मिले अस्पष्ट जवाबों के गम्भीर वैश्विक मायने को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े सुलगते हुए सवालों पर भारत की संसद के दोनों सदनों यानी राज्यसभा और लोकसभा में लगभग 32 घण्टे तक पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस चली, लेकिन नेता प्रतिपक्ष के दहकते हुए कुछ सवालों का सटीक जवाब प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और गृहमंत्री आदि नहीं दे पाए! इसके पीछे मौलिक वजह यह बताई जाती है कि विपक्ष के कुछ मूर्खतापूर्ण सवालों का जवाब चतुर सत्तापक्ष ने रणनीतिक पूर्वक गोलमोल तरीके से दिया है। तभी तो यह सवाल उठने लगे कि पीएम मोदी के भाषण द्वारा मिले जवाब में कुछेक विपक्षी सवालों का  सीधा और माकूल जवाब नहीं मिल पाया है? इस बाबत राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी भले ही संसद में अपनी बात रख चुके हों, लेकिन अभी तक उनके मार्फ़त कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। कहा जा रहा है कि पीएम मोदी की स्पीच में बहुत सारे सवालों के जवाब तो मिले लेकिन ढेर सारे सवालों क...