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निर्णय क्या है? इसके बारे में विद्वानों की क्या राय है? इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझिए।

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निर्णय क्या है? इसके बारे में विद्वानों की क्या राय है? इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझिए। @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस निर्णय सफलता की जननी है। सही वक्त पर लिया गया समुचित निर्णय उन्नति के मार्ग प्रशस्त करता है। अनुभव बताता है कि किसी अधिकारी/प्रबन्धक का महत्वपूर्ण कार्य निर्णय लेना है। पीटर ड्रकर के मुताबिक, प्रबन्धक जो कुछ भी करता है, निर्णयों के द्वारा ही करता है। हम जानते हैं कि प्रशासकों को दिन-प्रतिदिन अनेक कार्य करने पड़ते हैं और इन कार्यों को करने के लिए उनके पास अनेक विकल्प होते हैं। पर इन विकल्पों में से सर्वोंत्तम विकल्प कौन सा है, इसका निर्धारण करना ही 'निर्णय' लेना है। इसलिए जीवन जगत की इस महत्वपूर्ण विधा में हर किसी को निष्णात होना चाहिए।  टेरी ने इसके बारे में कहा है कि 'प्रशासकों का जीवन ही निर्णय लेना है। यदि प्रशासक की कोई सार्वभौमिक पहचान है, तो वह है उसका निर्णय लेना। प्रशासक को अपने निर्णय प्रबन्ध के कार्यों-नियोजित संगठन, निर्देशन, नियन्त्रण आदि के अन्तर्गत ही लेने पड़ते हैं। इस प्रकार, हम यह कह सकते हैं कि निर्णयन यानी निर्णय प्रबन्ध प्रक...

कर्म क्या है? मनीषियों ने इसके बारे में क्या-क्या निर्णय दिए हैं?

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कर्म क्या है? मनीषियों ने इसके बारे में क्या-क्या निर्णय दिए हैं? @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस किसी भी व्यक्ति के मन में कार्य करने की प्रेरणा अपने आप पैदा होती है। इससे जुड़ा हर निर्णय वह खुद लेता है जो देश-काल-पात्र की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसके बारे में सबकी अवधारणा अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन लक्ष्य एक होता है- समाज सेवा, राष्ट्र सेवा और निज धर्म सेवा, अन्य किसी को आहत किये बिना। दो टूक शब्दों में कहूँ तो कर्म हिंदू धर्म की वह अवधारणा है, जो एक प्रणाली के माध्यम से कार्य-कारण के सिद्धांत की व्याख्या करती है, जहां पिछले हितकर कार्यों का हितकर प्रभाव और हानिकर कार्यों का हानिकर प्रभाव प्राप्त होता है। जो पुनर्जन्म का एक चक्र बनाते हुए आत्मा के जीवन में पुनः अवतरण या पुनर्जन्म की क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं की एक प्रणाली की रचना करती है।  कहा जाता है कि कार्य-कारण सिद्धांत न केवल भौतिक दुनिया में लागू होता है, बल्कि हमारे विचारों, शब्दों, कार्यों और उन कार्यों पर भी लागू होता है जो हमारे निर्देशों पर दूसरे किया करते हैं। जब पुनर्जन्म का चक्र समाप्त हो जाता है, तब...

कर्म निर्णय: गहन है कर्म, अकर्म और विकर्म की गति

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                          कर्म निर्णय: गहन है कर्म, अकर्म और विकर्म की गति @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस श्रीमद्भागवत गीता में कहा गया है कि कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः। अकर्मणश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः।। आशय यह कि कर्म का तत्त्व भी जानना चाहिये और अकर्म का तत्त्व भी जानना चाहिये तथा विकर्म का तत्त्व भी जानना चाहिये; क्योंकि कर्म की गति गहन है। 'कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यम्' यानी कर्म करते हुए निर्लिप्त रहना ही कर्म के तत्त्व को जानना है, जिसका वर्णन आगे अठारहवें श्लोकमें 'कर्मण्यकर्म यः पश्येत्' पदों से किया गया है। कर्म स्वरूप से एक दीखने पर भी अन्तःकरण के भाव के अनुसार उसके तीन भेद हो जाते हैं- कर्म, अकर्म और विकर्म। सकाम भाव से की गयी शास्त्र विहित क्रिया 'कर्म' बन जाती है। वहीं, फलेच्छा, ममता और आसक्ति से रहित होकर केवल दूसरों के हित के लिये किया गया कर्म 'अकर्म' बन जाता है। वहीं, विहित कर्म भी यदि दूसरे का हित करने अथवा उसे दुःख पहुँचाने के भाव से किया गया हो तो वह भी 'विकर्म' बन जाता है। नि...

"जमाना उन्हें याद रखता है जो लिखने लायक कुछ कर जाते हैं या पढ़ने लायक कुछ लिख जाते हैं....."

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"जमाना उन्हें याद रखता है जो लिखने लायक कुछ कर जाते हैं या पढ़ने लायक कुछ लिख जाते हैं....." @ परमेश्वर सिंह/पुस्तक समीक्षक इतिहास साक्षी है कि "जमाना उन्हें याद रखता है जो लिखने लायक कुछ कर जाते हैं या पढ़ने लायक कुछ लिख जाते हैं।" आईएएस अधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह में यह दोनों विशेषताएं पाई जाती हैं। कालजयी रचना "काल- प्रेरणा" सरीखे उनके श्रम साध्य लेखन कार्य से यह परिलक्षित होता है कि "डॉक्टर दिनेश चंद्र सिंह जी ईज ए पर्सन ऑफ वर्सटाइल पर्सनैलिटी एंड स्प्लेंडिड जेनेरोसिटी।" इस कृति में डॉ दिनेश चंद्र सिंह के द्वारा व्यक्त किए गए विचारों, लोक कल्याणकारी कार्यों, प्रीतिकर कार्यसंस्कृति और लोक संग्रही स्वभाव को जानकर ही उपर्युक्त निष्कर्ष पर पहुंचा हूं। काल-प्रेरणा की विषय-वस्तु गूढ़ है। वेदों पर जब आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि अथर्ववेद के सूक्त संख्या 53 व 54 में काल की महिमा का प्रतिपाद न किया गया है। वस्तुतः काल की छह स्थितियां होती हैं- पहला, जायते (जन्म लेना); दूसरा, अस्ति (वर्तमान अवस्था); तीसरा, वर्द्धते (विकास); चतुर्थ, विपरिणमते...

आईएएस डॉक्टर दिनेश चंद्र सिंह की कृति ''काल-प्रेरणा" पर एक विहंगम दृष्टि

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आईएएस डॉक्टर दिनेश चंद्र सिंह की कृति ''काल-प्रेरणा" पर एक विहंगम दृष्टि  @ पुस्तक समीक्षा/परमेश्वर सिंह अथर्ववेद के सूक्त संख्या 53 54 में काल की महिमा का प्रतिपादन किया गया है। वस्तुतः काल की छह स्थितियां होती हैं- पहला, जायते (जन्म लेना); दूसरा, अस्ति (वर्तमान अवस्था); तीसरा, वर्द्धते (विकास); चतुर्थ, विपरिणमते (बढ़ती उम्र का शरीर पर प्रभाव); पंचम, अपक्षीयते (वृद्धावस्था); षष्टम, म्रियते (मृत्यु)। वस्तुतः मृत्यु एक ऊर्जा का दूसरी ऊर्जा में रूपांतरण है। ऊर्जा अमर है और द्रव्य नाशवान।  सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा के प्रति आस्थावान केरल के वर्तमान राज्यपाल डॉ आरिफ मोहम्मद खान ने इस कृति का लोकार्पण किया है। उत्तराखंड के ऊर्जावान और यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस लोकप्रिय कृति के लिए शुभ संदेश भेजे हैं। बाबा हरदेव सिंह जैसे गहन अध्येता और प्रकांड विद्वान ने काल प्रेरणा की शुभाशंसा लिखी है।  आत्म उद्गार में वैश्विक महामारी कोविड-19 के प्रकोप के दौरान आपने समर्पित भाव से की गई सेवा का उल्लेख किया है। वस्तुतः श्रद्धापूर्वक की गई सेवा लघु मानव को मह...

जबतक हमारे नेता रिहा नहीं होंगे, तबतक हमलोग चिलचिलाती धूप में यहीं पर डंटे रहेंगे: डॉली शर्मा

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जबतक हमारे नेता रिहा नहीं होंगे, तबतक हमलोग चिलचिलाती धूप में यहीं पर डंटे रहेंगे: डॉली शर्मा # यूपी कांग्रेस की प्रवक्ता डॉली शर्मा के साथ दिल्ली पुलिस की महिलाकर्मियों ने किया दुर्व्यवहार, तुगलक रोड थाना पर उनका रास्ता रोका कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता नई दिल्ली। मीडिया समूह नेशनल हेराल्ड से जुड़े धनशोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कांग्रेस सुप्रीमो राहुल गांधी को पूछताछ हेतु ईडी मुख्यालय बुलाये जाने और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की बेगुनाही के समर्थन में दिग्गज कांग्रेस नेताओं के सड़क पर उतर कर आक्रोश मार्च निकाला और शांतिपूर्ण तरीके से ईडी मुख्यालय, 24 अखबार रोड स्थित पार्टी मुख्यालय और तुगलक रोड थाने पर अलग-अलग गिरफ्तारी दी। इस क्रम में पूरे देश से कांग्रेस नेताओं के दिल्ली दाखिल हो जाने से यह पूरा मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है।  वहीं, पार्टी महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी के  तुगलक रोड थाना पहुंचने के दौरान जब यूपी कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता डॉली शर्मा भी थाने में बंद किये गए अपने बड़े नेताओं से मिलने जा रही थीं तो दिल्ली पुलिस की महिला कर्मियो...

प्रेरक और प्रासंगिक कालजयी कृति है काल-प्रेरणा: रवि किशन शुक्ला

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प्रेरक और प्रासंगिक कालजयी कृति है काल-प्रेरणा: रवि किशन शुक्ला कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश के गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद एवं लोकप्रिय अभिनेता रवि किशन शुक्ला ने आ ईएएस अधिकारी डॉ दिनेश चन्द्र सिंह द्वारा लिखित और वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार कमलेश पांडेय द्वारा संपादित कालजयी रचना "काल प्रेरणा" की तारीफ की है।  यूपी के बहराइच जनपद के जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह को भेजे हुए संदेश पत्र में उन्होंने लिखा है कि प्रिय डॉ दिनेश जी, अत्यंत हर्ष का विषय है कि आज के दौर में आपके जैसे लोकसेवक अपनी अतुलनीय सेवा भावना से प्रान्त और राष्ट्र का गौरव बढ़ा रहे हैं। आपके द्वारा प्रदत्त कृति आपके व्यक्तित्व के अनुरूप प्रेरक और प्रासंगिक है। यह पुस्तक देवतुल्य भारतीय नागरिकों की मनोस्थिति को स्पष्ट रूप से, विशेष तौर पर विश्व महामारी के संदर्भ में व्याख्यायित करती है। आदरणीय पूज्य योगी जी ने जिस रूप में संकट की इस घड़ी में प्रदेश वासियों की सेवा की है, वह निश्चित रूप से वर्णनातीत है। मित्रवर, ईश्वर आपको ज्यादा से ज्यादा सशक्त बनायें, जिससे आप अपने गौरवप...