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वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बहुमुखी वैश्विक संस्थाओं में सुधारों पर बल दें दुनिया के सभी सदस्य देश

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वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बहुमुखी वैश्विक संस्थाओं में सुधारों पर बल दें दुनिया के सभी सदस्य देश @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए दुनिया के सभी देशों को बहुमुखी वैश्विक संस्थाओं में सुधारों पर बल देना चाहिए। ताकि विभिन्न तरह की चुनौतियों से निपटने में दुनियावी देशों को सक्षम बनाया जा सके। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व आर्थिक मंच के डावोस एजेंडा शिखर सम्मेलन में स्टेट ऑफ दी वर्ल्ड यानी विश्व की स्थिति विषय पर विशेष रूप से अपने विचार व्यक्त करते हुए कही है, जिसका सर्वकालिक महत्व है। पीएम ने गत दिनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जो गूढ़ बातें कही हैं, वो उनकी दूरदर्शिता का परिचायक है। उनके विचार सभी देशों के लिए उत्साहबर्द्धक हैं और विश्व में भारत के बढ़ते महत्व का भी द्योतक है। इसका आधुनिक विश्व व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने जो कुछ महत्वपूर्ण बातें कही हैं, उसके विभिन्न पहलुओं की चर्चा करना यहां जरूरी है, क्योंकि वे देश-दुनिया सभी के लिए प्रासंगिक और उपादेय हैं और रह...

क्या लोकनायक, लोकनीति और संपूर्ण क्रांति से कुछ सबक लेंगे हमारे राजनेता?

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क्या लोकनायक, लोकनीति और संपूर्ण क्रांति से कुछ सबक लेंगे हमारे राजनेता? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार जब देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हों, जिनमें से एक बिहार का जुड़वाँ भाई समझा जाने वाला उत्तरप्रदेश भी हो तो जेपी यानी जयप्रकाश नारायण की याद आना स्वाभाविक है। समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया के इस प्रदेश में यदि जातीय सूबेदारों को सही समावेशी सियासी आईना दिखाना हो तो समाजवादी सियासत को राजनीतिक शिखर प्रदान करने वाली सम्पूर्ण क्रांति के प्रणेता जयप्रकाश नारायण की याद बरबस आ जाती है।  वजह यह कि एक ओर जहां राममनोहर लोहिया ने 1960 के दशक में समाजवादी सियासत को पिछड़ा पावे सौ में साठ का नारा देकर प्रभुता से लघुता की ओर धकेल दिया। वहीं, दूसरी ओर जयप्रकाश नारायण ने 1970 के दशक में सम्पूर्ण क्रांति का नारा देकर समाजवादी सियासत को लघुता से प्रभुता की ओर पुनर्स्थापित कर दिया। इसलिए आज उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव को राममनोहर लोहिया की राजनीतिक संकीर्णता से ज्यादा जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति सरीखी राजनीतिक व्यापकता के नजरिये से देखने और उसकी के अन...

लोकनायक, लोकनीति और संपूर्ण क्रांति

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लोकनायक, लोकनीति और संपूर्ण क्रांति @ कमलेश पांडेय, स्थानीय संपादक, लोकनायक भारत, दिल्ली लोकनायक जयप्रकाश ने पटना, बिहार में पाँच जून 1975 को घोषणा की थी कि भ्रष्टाचार मिटाना, बेरोजगारी दूर करना, शिक्षा में क्रांति लाना, आदि ऐसी चीजें हैं जो आज की व्यवस्था से पूरी नहीं हो सकतीं; क्योंकि वे इस व्यवस्था की ही उपज हैं। वे तभी पूरी हो सकती हैं जब सम्पूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए और सम्पूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए क्रान्ति, ’सम्पूर्ण क्रान्ति’ आवश्यक है।  आपको पता है कि उन्होंने सम्पूर्ण क्रान्ति का आह्वान तत्कालीन लोह महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की अधिनायकवादी सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए किया था। तब लोकनायक ने ही कहा था कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियाँ शामिल है जो राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति का सूत्रपात करती हैं। इन सातों क्रांतियों को मिलाकर ही सम्पूर्ण क्रान्ति होती है।  इस नजरिए से देखा जाए तो उनका आह्वान आज भी अधूरा है, जिन्हें पूरा करने के लिए ही महान स्वप्नद्रष्टा और स्वनामधन्य स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक और स...

डिजिटल क्रांति तेजी से फल-फूल रही है, इसे अपनाकर आगे बढ़िए: शिशिर जयपुरिया

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डिजिटल क्रांति तेजी से फल-फूल रही है, इसे अपनाकर आगे बढ़िए: शिशिर जयपुरिया # उद्योग जगत के डिजिटल परिवर्तन यात्रा के कई परिवर्तन महामारी के बाद भी बने रहेंगे: संजीव बिखचंदानी # नई डिजिटल संस्कृति के निर्माण में कुछ बुनियादी बदलाव सामने आए हैं: राजेन्द्र सिंह पवार # जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट गाज़ियाबाद ने डिजिटल संस्कृति से प्रतिस्पर्धा का विकास विषयक अपना 7वां  कॉरपोरेट सम्मेलन का किया आयोजन  कमलेश पांडेय गाजियाबाद। जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट इंदिरापुरम, गाजियाबाद ने शनिवार को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपना 7वां कॉरपोरेट सम्मेलन का आयोजन किया। जिसका विषय था डिजिटल संस्कृति से प्रतिस्पर्धा का विकास। इस आयोजन का सीधा प्रसारण www.jaipuriaevents.com पर किया गया। यह सालाना सम्मेलन बीएफएसआई, एफएमसीजी, आईटी-आईटीईएस क्षेत्रों पर केंद्रित था। इसे लगभग 40,000$ प्रतिभागियों ने इसे देखा और इसमें भाग लिया। इनमें कॉरपोरेट प्रमुख, व्यवसाय प्रमुख, शिक्षाविद और प्रबंधन के विद्यार्थी शामिल थे। इस अवसर पर 20 से अधिक वक्ताओं ने 3 पैनल डिस्कशन में भागीदारी की। जयपुरिया इंस्टीट्...

राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस से देश में उद्यमिता विस्तार और गहराई के प्रदर्शन का मिलेगा माहौल

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राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस से देश में उद्यमिता विस्तार और गहराई के प्रदर्शन का मिलेगा माहौल @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार भारत में उद्यमिता के विस्तार और गहराई को प्रदर्शित करने के लिए केंद्र सरकार दृढ़ संकल्पित है। इस निमित्त उसके द्वारा विभिन्न प्रकार के स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी के दृष्टिगत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट यानी देश की स्टार्टअप इकाइयों को नए भारत का ‘आधार-स्तंभ’ बताते हुए कहा है कि सरकार ने 16 जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। यानी कि कल राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस पूरे देश में मनाया जाएगा। बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा पूर्व की घोषणाओं के मद्देनजर इस सप्ताह स्टार्टअप इंडिया नवोन्मेषण सप्ताह (10-16 जनवरी) मनाया जा रहा है। इसी दौरान प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों के स्टार्टअप कारोबारियों को वर्चुअल तरीके से संबोधित करते हुए ऐलान किया है कि स्टार्टअप की यह संस्कृति देश के दूर-दराज क्षेत्रों तक पहुंचे, इसके लिए 16 जनवरी को अब "राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस" के रूप में ...

पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा आम लोगों की आजीविका और अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने की चिंता करना बात है बहुत बड़ी

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पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा आम लोगों की आजीविका और अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने की चिंता करना बात है बहुत बड़ी @ राजपथ/अशोक कौशिक, संपादक एक अरसा बाद देश को एक ऐसा संवेदनशील प्रधानमंत्री मिला है, जो उच्चस्तरीय बैठकों में भी आम लोगों की आजीविका की चिंता और अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने की फिक्र रखता है। यह देशवासियों के लिए परम सौभाग्य की बात है। गत दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी तैयारियों तथा राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण की प्रगति की समीक्षा के लिए राज्यों व केंद्र-शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों व प्रशासकों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी। जिसमें उन्होंने बारीकीपूर्वक कोविड-19 और राष्ट्रीय कोविड-19 के टीकाकरण की प्रगति के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने इस बैठक में केंद्रीय मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार आदि के अलावा वहां उपस्थित शीर्ष अधिकारियों से महामारी की स्थिति पर नवीनतम विवरण लेने के बाद उन्हें अवगत कर...

स्टेबल करेंसी क्या हैं? क्रिप्टो करेंसी के मुकाबले यह इतना लोकप्रिय क्यों हैं? समझिए।

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स्टेबल करेंसी क्या हैं? क्रिप्टो करेंसी के मुकाबले यह इतना लोकप्रिय क्यों हैं? समझिए। @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार डिजिटल मुद्रा किसी भी प्रकार का भुगतान है जो विशुद्ध रूप से इलेक्ट्रॉनिक रूप में मौजूद है और कंप्यूटर का उपयोग करके इसका हिसाब और हस्तांतरण किया जाता है। वहीं, आभासी मुद्रा विशुद्ध रूप से इलेक्ट्रॉनिक रूप में मूल्य का एक डिजिटल प्रतिनिधित्व है, जो खुला या बंद और केंद्रीकृत या विकेंद्रीकृत हो सकता है। जबकि, फिएट मनी एक सरकार द्वारा जारी मुद्रा है जो किसी भौतिक वस्तु, जैसे सोना या चांदी द्वारा समर्थित नहीं है। इनसे इतर स्टेबल करेंसी/कॉइन्स जैसे स्थिर सिक्कों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे अस्थिरता का सामना करने के लिए इस तरह से बनाए गए हैं, जैसी कि रचना अन्य क्रिप्टोकरेंसी में नहीं की गई हैं।  दरअसल, क्रिप्टो करेंसी एक प्रकार जुआ और अस्थिरता है, जो हर किसी के लिए नहीं है। क्योंकि जहां एक ओर इस करेंसी के सिक्कों की कीमतें बढ़ती हैं, वहीं दूसरी ओर अचानक गिर भी जाती हैं, जिससे निवेशक परेशान हो जाते हैं। इसलिए आप अपने मस्तिष्क में यह बात दर्ज कर लें...