Yaksha Question: Will the goal of Developed India 2047 be achieved in 2075?
यक्ष प्रश्न: क्या विकसित भारत 2047 का लक्ष्य 2075 में हासिल होगा?
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार
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यदि आप विकसित भारत 2047 का स्वप्न देख रहे हैं तो थोड़ा संभल जाइए, क्योंकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने यह तर्क दिया है कि यदि भारत की मौजूदा आर्थिक वृद्धि दर, उत्पादकता और रोजगार सृजन की गति में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ, तो भारत को "विकसित देश" बनने में 2047 के बजाय 2075 तक का समय लग सकता है। बता दें कि यह कोई आधिकारिक सरकारी अनुमान नहीं है, बल्कि कतिपय अर्थशास्त्रियों द्वारा किए गए एक आर्थिक विश्लेषण पर आधारित दृष्टिकोण मात्र है, जो सत्य के निकट है या परे, यह भविष्य के गर्भ में है। हाँ, इतना जरूर है कि इससे विपक्ष को सत्तापक्ष की खिल्ली उड़ाने का एक मौका जरूर मिल गया है।
दरअसल, इस संदर्भ में चर्चित अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने भी कहा कि यदि वर्तमान गति ऐसी ही बनी रही, तो विकसित भारत का लक्ष्य 2047 तक हासिल करना कठिन हो सकता है। मसलन, Surjit Bhalla का आशय यह है कि केवल उच्च आर्थिक वृद्धि दर पर्याप्त नहीं है। यदि वर्तमान गति, निवेश, उत्पादकता और रोजगार सृजन की चुनौतियाँ बनी रहीं, तो भारत को विकसित देश बनने में 2047 के बजाय 2075 तक का समय लग सकता है।
इस प्रकार से देखा जाए तो उन्होंने और उनके जैसे अन्य कई अर्थशास्त्रियों द्वारा उठाई जाने वाली प्रमुख चिंताएँ इस प्रकार हैं:- पहली, विकास दर में कमी: विकसित भारत के लक्ष्य के लिए लंबे समय तक 8–9% या उससे अधिक वास्तविक GDP वृद्धि की आवश्यकता मानी जाती है, जबकि हाल के वर्षों में वृद्धि इससे कम रहने का अनुमान है।
दूसरी, प्रति व्यक्ति आय: विकसित देश बनने का आधार केवल कुल GDP नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय भी है। यदि जनसंख्या के अनुपात में आय पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ती, तो लक्ष्य पीछे खिसक सकता है। तीसरी, रोजगार की चुनौती: आर्थिक वृद्धि के अनुरूप पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण रोजगार नहीं बनने से आय और उपभोग दोनों प्रभावित होते हैं।
चौथी, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग): GDP और रोजगार में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी अपेक्षित स्तर तक नहीं बढ़ पाई है। पांचवीं, मानव पूंजी: शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और श्रम उत्पादकता में अभी भी उल्लेखनीय सुधार की आवश्यकता है। छठी, वैश्विक अनिश्चितताएँ: भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार बाधाएँ, ऊर्जा कीमतें और वैश्विक आर्थिक मंदी जैसे कारक भी विकास की गति को प्रभावित कर सकते हैं।
हालाँकि, यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि यह एक आर्थिक आकलन है, कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं। यदि भारत अगले दो दशकों में तेज़ और निरंतर आर्थिक वृद्धि, व्यापक रोजगार सृजन, विनिर्माण विस्तार, बुनियादी ढाँचे में निवेश, शिक्षा-स्वास्थ्य सुधार और प्रशासनिक सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करता है, तो 2047 का लक्ष्य अधिक यथार्थवादी हो सकता है।
इसलिए सुरजीत भल्ला का तर्क मूलतः यह है कि यदि वर्तमान गति और संरचनात्मक चुनौतियाँ नहीं बदलीं, तो विकसित भारत का लक्ष्य 2047 से काफी आगे खिसक सकता है। इसके पीछे प्रमुख कारण बताए जाते हैं जो इस प्रकार हैं: पहला, विकास दर की चुनौती: विकसित देशों की श्रेणी में पहुँचने के लिए भारत को लंबे समय तक लगभग 7–8% या उससे अधिक वास्तविक जीडीपी (GDP) वृद्धि बनाए रखनी होगी। यदि वृद्धि 6% के आसपास रहती है, तो लक्ष्य पीछे खिसक सकता है।
दूसरा, प्रति व्यक्ति आय कम होना: भारत की कुल अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बड़ी आबादी के कारण प्रति व्यक्ति आय अभी विकसित देशों से काफी कम है। तीसरा, रोजगार और उत्पादकता: उच्च आर्थिक वृद्धि के साथ गुणवत्तापूर्ण रोजगार और श्रम उत्पादकता में तेज सुधार आवश्यक है। चौथा, विनिर्माण क्षेत्र की धीमी प्रगति: यदि मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात अपेक्षित गति से नहीं बढ़ते, तो आय वृद्धि सीमित रह सकती है।
पांचवां, शिक्षा और स्वास्थ्य: मानव पूंजी में निवेश पर्याप्त न होने पर दीर्घकालिक विकास प्रभावित होता है। छठा, बुनियादी ढाँचा और संस्थागत सुधार: न्यायिक दक्षता, भूमि, श्रम और प्रशासनिक सुधारों की गति भी निर्णायक मानी जाती है।
वहीं, दूसरी ओर, 2047 के लक्ष्य के समर्थन में भी मजबूत तर्क हैं क्योंकि भारत में सत्ता प्रतिष्ठान के रिकॉर्ड दर रिकॉर्ड को तोड़ती जा रही भाजपा नीत राजग की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए विकसित भारत 2047 एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। चूंकि भारत की आजादी प्राप्ति का सौवाँ वर्ष है, इसलिए सरकार इसे ज्यादा तवज्जो दे रही है, जबकि वैश्विक षड्यंत्रकारी देश अमेरिका/चीन और उनके पिछलग्गू कट्टर मुस्लिम देश भारत की तरक्की से जल-भुन रहे हैं!
नामचीन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि भारत की अर्थव्यवस्था लगातार ऊँची आर्थिक वृद्धि बनाए रखे,
डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और विनिर्माण में तेजी से आगे बढ़े, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर जोर दे, तथा राज्यों में सुधारों की गति तेज हो, तो विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य अपेक्षाकृत जल्दी यानी कि 2047 तक या उससे कुछ साल पहले भी हासिल किया जा सकता है।
इसलिए 2047 और 2075 को निश्चित भविष्यवाणी नहीं, बल्कि अलग-अलग आर्थिक परिदृश्यों (scenarios) के रूप में देखना चाहिए। अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले दो दशकों में भारत सुधारों, निवेश, उत्पादकता, मानव संसाधन विकास की गति और सुशासन व पारदर्शिता कितनी बढ़ा पाता है।
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