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भाजपा ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर एक तीर से कई सियासी निशाने साधे, समझिए इसके मायने

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भाजपा ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर एक तीर से कई निशाने साधे, समझिए सियासी मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक समकालीन भाजपा के कुशल सियासी शिल्पी समझे जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी का चाणक्य करार दिए जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की युगल प्रभावशाली जोड़ी ने 14 दिसंबर को यकायक पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में तीसरी पीढ़ी के कद्दावर और सूझबूझ वाले युवा नेता नितिन नबीन के नाम की घोषणा करवाकर न केवल सबको चौंकाया है, बल्कि एक तीर से कई सियासी निशाने भी साधे हैं। इसके सियासी मायने भी दूरगामी और दिलचस्प साबित होंगे, क्योंकि मोदी-शाह के सियासी तरकश से निकले इस प्रभावी तीर ने आरएसएस-भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को भी आश्चर्य चकित कर दिया है। बताते चलें कि भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में सत्तारूढ़ राजग के नीतीश सरकार में भाजपा कोटे के कैबिनेट मंत्री नितिन नबीन को गत दिनोंतत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है, जिससे खुद पार्टी के कार्यकर्ता भी पशोपेश में पड़कर चौंक गए हैं और इस ...

डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत के वैश्विक निहितार्थ

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डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत के वैश्विक निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच के द्विपक्षीय व्यक्तिगत रिश्तों पर जमी  बर्फ अब भीषण नीतिगत ठंड के बावजूद भी पिघलने लगी है। ऐसा इसलिए कि गत 10 दिसंबर 2025 को दोनों नेताओं में बीच हुई फोन वार्ता ने भारत-अमेरिका संबंधों को पुनः मजबूत करने का संकेत दिया है। उल्लेखनीय है कि डॉनल्ड ट्रंफ की पाकिस्तान परस्त नीतिगत हठधर्मिता और टैरिफ दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी की वजह से भारत-अमेरिका के महत्वपूर्ण व रणनीतिक सम्बन्धों में भरोसे का भाव टूटा है और दोनों नेताओं के बीच खटास बढ़ी है, जिसको दूर करने के लिए ही यह ताजातरीन पहल की गई है। पीएमओ के मुताबिक, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय ट्रेड वार्ता की प्रगति की समीक्षा की और व्यापार, रक्षा, ऊर्जा तथा क्रिटिकल टेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों में पारस्परिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। यही वजह है कि इस प्रमुख चर्चा बिंदुवार्ता को "गर्मजोशीपूर्ण और सकारात्मक" बताया गया है, जिसमें वैश्व...

इंडिगो संकट के दृष्टिगत डायनेमिक प्राइसिंग पर उठते सुलगते सवालों के जवाब चाहिए

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इंडिगो संकट के दृष्टिगत डायनेमिक प्राइसिंग पर उठते सुलगते सवालों के जवाब चाहिए  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक इंडिगो संकट दिसंबर 2025 में नई FDTL (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिट) नियमों के कारण पैदा हुआ, जिसके चलते एयरलाइन ने 1600 से अधिक उड़ानें रद्द कीं, लेकिन सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप कर किराए पर कैप लगाया और रिफंड सुनिश्चित किए। दरअसल इस संकट का कारण नई FDTL नियमों से पायलटों की रात्रिकालीन ड्यूटी सीमित हुई, जबकि इंडिगो ने पर्याप्त क्रू भर्ती नहीं की और पतली मार्जिन पर संचालन किया। इससे कैंसिलेशन बढ़े और अन्य एयरलाइंस पर दबाव पड़ा, जिससे दिल्ली-मुंबई जैसे रूट्स पर किराए 5-10 गुना (₹48,000-₹82,000 तक) उछले। इसलिए इंडिगो संकट के दृष्टिगत डायनेमिक प्राइसिंग पर उठते सुलगते सवालों के जवाब चाहिए। आज नहीं तो कल चाहिए और इस गोरखधंधे पर लगाम लगनी चाहिए। यह ठीक है कि इससे परेशान यात्रियों के हितों के मद्देनजर सरकार ने कार्रवाई की, लेकिन तबतक करोडों के बारे न्यारे हो गए। मसलन DGCA ने इंडिगो को अस्थायी छूट दी, शो-कॉज नोटिस जारी किया, 10% फ्लाइट शेड्यूल कटौती का आदे...

मंजूषा लोक चित्रकला को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाने की दिशा में आखिर कब जागरूक होंगे अंग के बुद्धिजीवी

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मंजूषा लोक चित्रकला को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाने की दिशा में आखिर कब जागरूक होंगे अंग के बुद्धिजीवी @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार मंजूषा एक पारंपरिक लोक चित्रकला है जो बिहार के भागलपुर जिले के अंग क्षेत्र से जुड़ी हुई है और इसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त है। लेकिन सुलगता हुआ सवाल है कि आखिर मंजूषा लोक चित्रकला को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाने की दिशा में महाजनपद कालीनअंग भूमि के बुद्धिजीवी कब तलक जागरूक होंगे। हालांकि, स्थानीय पत्रकारों ने जो नेक पहल शुरू की है, इस बात की उम्मीद बंधी है कि समसामयिक सियासत इसे मुकम्मल मुकाम प्रदान करने में कोताही नहीं बरतेगी। ऐसा इसलिए कि ईबीसी आदि वर्ग की यह पारंपरिक लोककला है जिसे बढ़ावा देने से इनकी कला और अध्यवसाय में भी दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की होगी। जहां तक इसकी उत्पत्ति और विशेषताएँ की बात है तो अवकाश प्राप्त प्रधानाध्यापिका श्री मती गायत्री देवी बताती हैं कि यह कला मुख्य रूप से बिहुला-विषहरी लोककथा पर आधारित है, जिसमें सर्प चित्रण और रेखाचित्र शैली प्रमुख हैं। अपने जमाने की विदुषी महिला स...

राष्ट्रीय विरासत को सहेजने या मिटाने का यक्ष प्रश्न

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विरासत को सहेजने या मिटाने का यक्ष प्रश्न @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत में पक्ष विशेष के विरासत को बचाने और मिटाने की कोशिशों को लेकर सत्ताधारी भाजपा और प्रमुख विपक्षी कांग्रेस अब आमने-सामने आ चुकी है। दोनों पार्टियों के बीच जारी वाक-युद्ध से विरासत का यक्ष प्रश्न लोगों के समक्ष समुपस्थित हो चुका है। कहना न होगा कि भारत में देश के विरासत को लेकर राजनेताओं की दृष्टि संकुचित है। हालांकि, भाजपा के मुकाबले कांग्रेस की दृष्टि ज्यादा संकीर्ण प्रतीत हुई है।  उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेत्री सोनिया गांधी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि केंद्र में सत्तारूढ़ सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को बदनाम करना है और उनकी बहुमुखी विरासत को मिटाना है। श्रीमती गांधी ने यहां तक आरोप लगाया कि नेहरू की बहुमुखी विरासत को मिटाने और इतिहास को फिर से लिखने का एक व्यवस्थित प्रयास भाजपा सरकार द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा, नेहरू को निशाना बनाने वाले लोग ऐसी विचारधारा से जुड़े हैं, जिसकी देश के स्वतंत्रता आंदोलन और संविधान...

आरएसएस को भाजपा में संजय जोशी जैसे समझदार नेता की आज भी है जरूरत, समझें मोदी-शाह

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आरएसएस को भाजपा में संजय जोशी जैसे समझदार नेता की आज भी है जरूरत, समझें मोदी-शाह @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक देश-दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को यदि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) संजय जोशी मिल जाते तो बहुत अच्छा होता। यह बात मैं नहीं बल्कि आरएसएस-भाजपा से जुड़े लोग अपने निज अनुभवों के आधार पर बताते हैं। लेकिन यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के द्वारा यह अप्रत्याशित निर्णय लिया जाता तो यह सोने पर सुहागा सियासी फैसला माना जाता। निर्विवाद रूप से आरएसएस को भाजपा में संजय जोशी जैसे समझदार नेता की जरूरत आज भी है, लेकिन मोदी-शाह को समझाना उसके लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। वैसे भी जब भाजपा का प्रधानमंत्री ओबीसी हो तो राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जोशी से बेहतर कोई दूसरा नहीं हो सकता! लोगों का कहना है कि संजय जोशी को भाजपा में हाशिए पर धकेले जाने का मुख्य कारण मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत और रणनीतिक मतभेद थे, खासकर गुजरात में सांगठनिक भूमिका को...

तालिबान द्वारा आतंकवाद के खिलाफ सक्रिय कदम उठाने के वैश्विक मायने

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तालिबान द्वारा आतंकवाद के खिलाफ सक्रिय कदम उठाने के वैश्विक मायने  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक तालिबान द्वारा आतंकवाद के खिलाफ सक्रिय कदम उठाने के रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के संकेत के वैश्विक मायने को समझने के लिए सबसे पहले आतंकवाद की पृष्ठभूमि और इसके बुनियादी करवट को समझना जरूरी है। मसलन, जब पूंजीवादी देश संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) की बढ़ती वैश्विक महत्वाकांक्षाओं ने रणनीति पूर्वक वामपंथी राष्ट्र समूह सोवियत संघ (यूएसएसआर) को छिन्न-भिन्न कर दिया, तब 15 देशों के इस राष्ट्र समूह से 14 देश यकायक अलग हो गए और रूस अकेला बच गया। अपने इस नापाक इरादे की पूर्ति के लिए ही अमेरिका ने चीन को प्रगति की राह पर अग्रसर किया।  दरअसल, 1980-90 के दशक की इस अंतर्राष्ट्रीय वैचारिक  त्रासदी यानी वामपंथ के पतन ने पूरी दुनिया के बुद्धिजीवियों को झंकझोर डाला था। तभी अकस्मात लाई गई दुनियावी नई आर्थिक नीतियों यानी वैश्वीकरण/भूमंडलीकरण व निजीकरण ने विकास की चकाचौंध दिखलाकर अमेरिका (यूएसए) को सर्वस्वीकार्य बना दिया फिर उसने अपनी हथियार इंडस्ट्री को चमकाने ...