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नेक्स्टजेन जीएसटी सुधार केवल कर सुधार नहीं, राष्ट्र-निर्माण को तेज रफ्तार देने का है परिचायक

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नेक्स्टजेन जीएसटी सुधार केवल कर सुधार नहीं बल्कि  राष्ट्र-निर्माण को तेज रफ्तार देने का परिचायक  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार मौजूदा नेक्स्टजेन जीएसटी सुधार केवल कर सुधार नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण को तेज रफ्तार देने का परिचायक है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थ भारत के सपनों को पंख लगाने वाला वह निर्णायक उपाय है जिसका सकारात्मक असर बहुत जल्द ही देश-दुनिया पर दिखाई पड़ेगा। बता दें कि 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक, जो गत 3 सितम्बर 2025 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित हुई, ने नेक्स्टजेन जीएसटी सुधारों की घोषणा की। जिसके दृष्टिगत यह कहा जा सकता है कि यह भाजपा सरकार का एक साहसिक, ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम है, जिसने भारत की आधुनिक आर्थिक क्रांति के निर्माता के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत किया है। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक लाल किले के संबोधन में घोषित और आगामी  22 सितम्बर 2025 अर्थात नवरात्रि के पहले दिन से लागू होने वाले ये सुधार वास्तव में 140 करोड़ भारतीयों के लिए राहत और समृ...

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 में हुए सुप्रीम संशोधन के मायने

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वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 में हुए सुप्रीम संशोधन के मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजननीतिक विश्लेषक सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर तो रोक नहीं लगाई, लेकिन उसके कुछेक प्रावधानों में विधिसम्मत और तर्कसंगत संशोधन किया है या फिर पूरी तरह से उन पर रोक लगा दी है। इसलिए वक्फ संशोधन अधिनियम में हुए सुप्रीम संशोधन के मायने समझना बहुत जरूरी है। लोगों को उम्मीद है कि कोर्ट के इस ताजातरीन फैसले से वे आशंकाएं दूर हो जाएंगी, जो इस नए कानून को लेकर इससे पहले  जताई जा रही थीं। चूंकि कोर्ट का यह निर्णय संविधान के अनुरूप है, इसलिए दोनों पक्षों ने इसे मान लिया है। यह एक शुभ लक्षण है। बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से किए गए संशोधन महत्वपूर्ण और जरूरी हैं, क्योंकि इनमें संविधान की भावनाओं का भी ख्याल रखा गया है। इसलिए इसके परिवर्तित मायने राष्ट्रीय एकता के लिहाज से अहम हैं। लिहाजा इस फैसले का मुख्य असर निम्नलिखित है:- पहला, कोर्ट ने उस प्रावधान पर रोक लगा दी है, जिसमें वक्फ बनाने के लिए व्यक्ति का 5 वर्षों तक इस्लाम का अनुयायी होना जरूरी था, बताया गया ...

जब डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां भारत के ख़िलाफ़ तो फिर मोदी की नीतियां अमेरिकी हितों को चोट क्यों न पहुंचाएं?

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जब डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां भारत के ख़िलाफ़ हैं तो फिर मोदी की नीतियां अमेरिकी हितों पर चोट क्यों न दें? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जब भारत के गांवों में किसी से विवाद बढ़ने पर और घात-प्रतिघात की परिस्थितियों के पैदा होने पर पारस्परिक हुक्का-पानी या उठक-बैठक, खान-पान बन्द करने के रिवाज सदियों से चलते आए हैं, तो फिर वैश्विक दुनियादारी में हमलोग इसे लागू क्यों नहीं कर सकते, ताकि हमारे मुकाबिल खड़े होने वाले देशों को ठोस नसीहत मिल सके। वहीं, अक्सर यह भी कहा जाता है कि जो ज्यादा तेज बनता है वह तीन जगहों पर बदबू फैलाता है। जबकि चतुर व्यक्ति की कोशिश रहती है कि वह तीनों जगहों पर अपनी गमक व महक छोड़े। अव्वल दर्जे पर रूस, अमेरिका और चीन, के साथ भारतीय सम्बन्धों पर, फ्रांस, इजरायल, जापान जैसे दूसरे दर्जे के महत्वपूर्ण देशों के साथ भारतीय सम्बन्धों पर, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया जैसे तीसरे महत्वपूर्ण देशों के साथ भारत के सम्बन्धों पर भी यही बात लागू होती है। यूँ तो पड़ोसी देशों से जुड़ी हमारी नीतियों में, मुस्लिम बहुल अरब देशों से जुड़ी हमारी नीतियों में, आश...

विदेशी निर्भरता घटाइए, राष्ट्रीय सफलता बढ़ेगी

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विदेशी निर्भरता घटाइए, राष्ट्रीय सफलता बढ़ेगी @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत दिनों गुजरात के भावनगर में कहा है कि भारत का सबसे बड़ा दुश्मन अन्य देशों पर निर्भरता है और जितनी ज्यादा विदेशी निर्भरता होगी, उतनी ज्यादा राष्ट्रीय विफलता बढ़ेगी। उन्होंने यहां तक कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का भविष्य बाहरी ताकतों पर नहीं छोड़ा जा सकता और इसके लिए भारत को आत्मनिर्भर बनना ही होगा। आत्मनिर्भरता देश के सभी समस्याओं का समाधान है और यही राष्ट्रीय सौभाग्य और विकास की कुंजी है।  इससे साफ है कि 2025 की अंतिम तिमाही से पहले चले अंतरराष्ट्रीय दांवपेचों के दृष्टिगत प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को आगाह कर दिया है कि जितनी ज्यादा विदेशी निर्भरता होगी, उतनी ज्यादा राष्ट्रीय विफलता होगी। ऐसा कहकर उन्होंने एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है। एक तरफ तो उन्होंने चीन से आयात पर और अमेरिका को निर्यात पर या ऐसे ही अन्य देशों पर निर्भरता समाप्त करने के लिए सोच और साधन दोनों बदलने का आह्वान किया है।  वहीं, दूसरी तरह विदेशी बहु समझी जाने वाली का...

लद्दाख के जेन-जेड क्रांति से सबक सीखे भारत, अन्यथा.....!

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लद्दाख के जेन-जेड क्रांति से सबक सीखे भारत, अन्यथा.....! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर जारी आंदोलन ने गत्वबुधवार को हिंसक रूप अख्तियार कर लिया है। इसके बाद लेह में प्रदर्शनकारी छात्रों की सुरक्षाबलों से झड़प हुई, जिसमें 4 लोगों की मौत हुई और 70 से ज्यादा घायल है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान बीजेपी के ऑफिस और सीआरपीएफ की गाड़ी में आग लगा दी गई। चूंकि यह अतिवादी कार्रवाई है। इसलिए हिंसा पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। वहीं, हालात को देखते हुए लेह में कर्फ्यू लगा दिया गया। बिना मंजूरी के रैली और प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई है। बताते चलें कि लद्दाख को राज्य का दर्जा समेत कई मांगों पर सोशल ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक विगत 15 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। लिहाजा, उनकी मांगे पूरी न होने पर प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को बंद बुलाया। इसी सिलसिले में सोशल मीडिया पर लोगों से लेह हिल काउंसिल पहुंचने की अपील की गई। जिसके बाद गत बुधवार को सैकड़ों की संख्या में आंदोलनकारी सड़कों पर उत...

राजनीतिक दलों को कार्यस्थल पर पॉश एक्ट, 2013 से प्राप्त वैधानिक छूट एक नैतिक विडंबना नहीं तो क्या?

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राजनीतिक दलों को कार्यस्थल पर पॉश एक्ट, 2013 से प्राप्त वैधानिक छूट एक नैतिक विडंबना नहीं तो क्या?  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक राजनीतिक दलों को महिलाओं की कार्यस्थल सुरक्षा संबंधी कानून प्रोटेक्शन ऑफ सेक्सुअल हरासमेंट एक्ट (पॉश एक्ट), 2013 से प्राप्त वैधानिक छूट किसी नैतिक विडंबना से कम नहीं है, चाहे इसका विधिक कारण कुछ भी हो! यह हमारी संसद और सर्वोच्च न्यायालय दोनों की नैतिक लापरवाही या खामोशी दोनों का नतीजा है? ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह तर्क कि राजनीतिक दल और उनके सदस्यों के बीच पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध नहीं होता है, किसी के गले नहीं उतरता है। यह अनुभव की व्यवहारिक कसौटी पर भी खरा नहीं उतरता है।  यह ठीक है कि उनके बीच पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी का सम्बन्ध नहीं होता, लेकिन दफ्तर और कार्यसंस्कृति दोनों होती है। यहां तक कि टूर के दौरान ठहरने वक्त नेताओं और महिला कार्यकर्ताओं का कमरा आसपास ही रखा जाता है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि इससे राजनीतिक दलों व उनके नेताओं को कार्यकर्ताओं के शोषण का अंतहीन अधिकार मिल जाता है! खासकर, जब ...

शिक्षक दिवस: जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया और बाल बाटिका का महत्व समझाया

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शिक्षक दिवस: जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया और बाल बाटिका का महत्व समझाया # डीएम साहब ने शिक्षकों और छात्रों को विभिन्न प्रकार के गृह उद्योग निर्मित आचारों के स्वाद चखाये और मिड डे मील में बच्चों को देने के निर्देश दिये। @ कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता नई दिल्ली/जौनपुर। गुरुवार को उत्तरप्रदेश के जौनपुर जनपद के यशस्वी जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने शिक्षक दिवस से पूर्व जनपद के सरकारी प्राथमिक व मध्य विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया और छात्रों को "गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरा:। गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः।।" का मर्म समझाते हुए कहा कि यह एक संस्कृत गुरु मंत्र है, जिसका अर्थ है कि गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर (शिव) हैं और गुरु ही साक्षात परब्रह्म हैं, उन गुरु को मेरा नमस्कार है। इसका भावार्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि यह मंत्र गुरु की महत्ता को दर्शाता है, जो सृजनहार ब्रह्मा के समान शिष्य में ज्ञान और जागरूकता का सृजन करते हैं, रक्षा करने वाले विष्णु के समान छात्रों में अच्छे गुणों की रक्षा करते हैं,...