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तीर्थस्थलों पर आकस्मिक भगदड़ से प्रबंधन की भूमिका पर सुलगते सवाल मांग रहे दो टूक जवाब

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तीर्थस्थलों पर आकस्मिक भगदड़ से प्रबंधन की भूमिका पर सुलगते सवाल मांग रहे दो टूक जवाब @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित सुप्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में गत रविवार को सुबह आरती के समय अचानक बेकाबू हुई भीड़ से मची भगदड़ से हुए हादसे में जहां 8 लोगों की जान चली गई, वहीं 26 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इससे भक्त और भगवान के व्याकुल अन्तर्सम्बन्धों के साथ-साथ मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सुलगते हुए सवाल उठ हैं। ऐसा इसलिए कि अपने आपमें न तो यह पहली घटना है और न ही अंतिम! बावजूद इसके, बेगुनाहों की मौतों का यह सिलसिला कब थमेगा, विश्वास पूर्वक कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि ब्रेक के बाद देश भर के सुप्रसिद्ध मंदिरों या फिर उससे जुड़े अनुष्ठानों में ऐसे हादसे होते रहते हैं। आंकड़े बताते हैं कि पहले भी भीड़ जुटने के बाद अचानक मचने वाली भगदड़ में कई जानें जा चुकी हैं। सिर्फ मंदिर ही नहीं, अन्य सेलिब्रेटिज के दीदार या यात्रा सम्बन्धी भीड़ बढ़ने के बाद भी महज एक छोटी सी अफवाह कई लोगों की जान ले लेती हैं और बहुतेरे लोगों को घायल कर जात...

मांसाहारी खाने पर जारी 'सेक्युलर सियासी खेल' के साइड इफेक्ट्स को ऐसे समझिए

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मांसाहारी खाने पर जारी 'सेक्युलर सियासी खेल' के साइड इफेक्ट्स को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक सनातनी हिंदुओं के पवित्र श्रावण यानी सावन के महीने में या आश्विन माह में पड़ने वाले शारदीय नवरात्र के दिनों में पिछले कुछ वर्षों से नॉन-वेज फूड को लेकर जो विवाद सामने आ रहे हैं, वह इस बार भी प्रकट हुए और पक्ष-विपक्ष की क्षुद्र राजनीति के बीच अपनी नीतिगत महत्ता खो बैठे। वहीं, तथाकथित एनडीए शासित राज्य की बिहार विधानसभा के सेंट्रल हॉल में गत सोमवार को खाने में जिस तरह से नॉन-वेज भी परोसा गया, उसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तलवारें खिंच गई हैं।  इसी तरह, यूपी में कांवड़ यात्रा मार्ग स्थित ढाबों और भोजनालयों पर दुकान मालिकों की पहचान स्पष्ट करने का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में उठा। स्पष्ट है कि यहां भी मूल में भोजन ही है। इसलिए पुनः यह सवाल अप्रासंगिक है कि कोई क्या खाता है, क्या नहीं, यह पूरी तरह व्यक्तिगत मामला है और इस पर ऐसे विवाद से बचा जा सकता था। लेकिन ऐसे सो कॉल्ड सेक्यूलर्स और वेस्टर्न लॉ एडवोकेट्स को पता होना चाहिए कि सदियों से भारतीय ...

तो क्या उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पर्दे के पीछे से विपक्षी पिच पर खेलने की भारी कीमत चुकाई?

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 तो क्या उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पर्दे के पीछे से विपक्षी पिच पर खेलने की भारी कीमत चुकाई? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक मैंने अपने आलेखों के माध्यम से समय रहते ही आरएसएस-भाजपा को आगाह कर दिया था कि केंद्र सरकार, भाजपा और संघ के महत्वपूर्ण लोगों के बीच दरार डालने के लिए अमेरिकी, चीनी व पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां सक्रिय हैं, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार, उनकी पार्टी भाजपा और उनके पथप्रदर्शक-मार्गदर्शक आरएसएस को हर हाल में कमजोर बनाया जा सके। हैरत की बात है कि इसका सहज शिकार खुद जगदीप धनखड़ ही हो गए। अन्य किन-किन लोगों पर एजेंसियों ने पर्दे के पीछे से डोरा डाला है, यह तो किसी अन्य खुलासे या कार्रवाई के बाद ही पता चलेगा। ऐसा इसलिए कि केंद्र सरकार जब जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लोकसभा में महाभियोग लेकर आई, तो उस समय तक केंद्र सरकार की योजना थी कि लोकसभा स्पीकर की अगुवाई में जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी और ये कार्य केंद्र सरकार सर्वसम्मति से करेगी, ताकि न्यायपालिका में और न्यायपालिका के प्रति जनमानस में कोई गलत संदेश नहीं जा...

भारत और ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से ऐसे दूरगामी वैश्विक असर पड़ेंगे

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भारत और ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से ऐसे दूरगामी वैश्विक असर पड़ेंगे @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हाल ही में भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) केंद्र में सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है। इसके अंतरराष्ट्रीय मायने बेहद अहम हैं, क्योंकि इसका फायदा दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मिलेगा। इस प्रकार भारत और ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से आने वाले  वर्षों में दूरगामी वैश्विक असर भी देखने को मिलेंगे। यह कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिका प्रेरित भूमंडलीकरण और निजीकरण की नीतियों पर आधारित मुक्त वैश्विक अर्थव्यवस्था के दौरान, पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से कारोबारी संरक्षणवाद बढ़ा है, उसमें ऐसे व्यापार समझौतों की भूमिका और भी अहम हो जाती है। देखा जाए तो भाजपा नीत एनडीए सरकार ने 2014 में केंद्रीय सत्ता में आने के बाद भारत ने मॉरिशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया और ईएफटीए के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया है।  लिहाजा, भारत-ब्रिटेन में बीच हुआ एफटीए उसी की एक अ...

क्या छात्र-छात्राओं की खुदकुशी पर सुप्रीम कोर्ट की सार्वजनिक चिंता से शिथिल प्रशासनिक मिशनरी में कोई नई हलचल पैदा होगी?

क्या छात्र-छात्राओं की खुदकुशी पर सुप्रीम कोर्ट की सार्वजनिक चिंता से शिथिल प्रशासनिक मिशनरी में कोई नई हलचल पैदा होगी? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक देश के शिक्षण संस्थानों में छात्र-छात्राओं (स्टूडेंट्स) की आत्महत्या और उनमें बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) की समस्याओं पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने शुक्रवार को जो चिंता जताई है, वह अकारण नहीं है, बल्कि इसके पीछे उन हजारों परिवारों और लाखों लोगों की बेदना छिपी हुई है जो ऐसे मामलों में अपने परिजनों को गंवा चुके है। इन घटनाओं में कोई बचपन में ही अनाथ हो गया तो कोई बुढ़ापे में बेसहारा। इसलिए सुलगता हुआ सवाल है कि क्या छात्र-छात्राओं की खुदकुशी पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता से शिथिल प्रशासनिक मिशनरी में कोई नई हलचल पैदा होगी? या फिर उसकी यह पहलकदमी भी नक्कारखाने में तूती की आवाज मानिंद दबी रह जायेगी। बता दें कि, ऐसा बिल्कुल नहीं कि केंद्र व राज्य सरकारें इन घटनाओं से अनजान हैं, बल्कि उसने तो 1960 के दशक में ही इन मामलों में संजीदगी दिखाई और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने वर्ष 1966 से ही भा...