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ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के बाद आखिर क्यों परस्पर बंट चुके हैं दुनिया के महत्वपूर्ण देश?

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ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के बाद आखिर क्यों परस्पर बंट चुके हैं दुनिया के महत्वपूर्ण देश? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक ईरानी परमाणु ठिकानों पर गत दिनों हुए अमेरिकी हमले से दुनिया के शक्तिशाली देश परस्पर बंट चुके हैं, वहीं छोटे छोटे देश भी क्षेत्रीय हितों के अनुरूप अपनी बातें रख रहे हैं, जिसके सियासी व रणनीतिक अभिप्राय स्पष्ट हैं। इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के बाद आखिर क्यों दुनिया के महत्वपूर्ण देश परस्पर बंट चुके हैं? अमेरिका के महत्वपूर्ण सहयोगी यूरोपीय देश ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा है कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम दुनिया की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। इसलिए उन्होंने ईरान से अपील की है कि वह बातचीत के जरिए इस संकट को खत्म करने में मदद करे। स्टार्मर ने कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर रात में जो हमले किए, वे इसी खतरे को कम करने के लिए किए गए हैं। फिलहाल मध्य पूर्व की स्थिति बहुत तनावपूर्ण बनी हुई है और ...

ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के वैश्विक मायने

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ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के वैश्विक मायने  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक आखिरकार दुनिया का थानेदार समझे जाने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मित्र यहूदी देश इजरायल की शांति के लिए चुनौती बन चुके कट्टरपंथी इस्लामिक राष्ट्र ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों पर हवाई हमले करके जहां विगत 10 दिनों से चल रहे इजरायल-ईरान युद्ध को एक नया मोड़ दे दिया, वहीं अपनी इस अप्रत्याशित कार्रवाई से उनकी थानेदारी को महज बयानी चुनौती देने वाले चीन-रूस-उत्तर कोरिया आदि देशों को भी एक स्पष्ट संदेश दे दिया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अपनी हद में रहो, अन्यथा अंजाम और भी बुरे हो सकते हैं। इस प्रकार ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमले के वैश्विक मायने स्पष्ट हैं, जो एक ध्रुवीय विश्व को बहुध्रुवीय बनाने के प्रयासों की विफलता को उजागर करते हैं। वहीं, ये कुछ अन्य महत्वपूर्ण वैश्विक पहलुओं पर भी प्रकाश डालते हैं जो अग्रलिखित हैं। पहला, ईरान पर हुए अमेरिकी हमले से एक बार फिर यह स्पष्ट हो चुका है कि मौजूदा एक ध्रुवीय विश्व में अमेरिका के सजग और शातिर ...

अमेरिका-इंग्लैंड के 'लोकतांत्रिक आतंकवाद' और चीन-रूस के 'साम्यवादी आतंकवाद' के बीच पिसते भारत-इजरायल के 'वैश्विक मानवतावाद' को ऐसे समझिए

अमेरिका-इंग्लैंड के 'लोकतांत्रिक आतंकवाद' और चीन-रूस के 'साम्यवादी आतंकवाद' के बीच पिसते भारत-इजरायल के 'वैश्विक मानवतावाद' को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक दुनिया के थानेदार अमेरिका-इंग्लैंड के 'लोकतांत्रिक आतंकवाद' और उनके धुर विरोधी चीन-रूस के 'साम्यवादी आतंकवाद' के बीच पिसते भारत-इजरायल के 'वैश्विक मानवतावाद' को बचाना आज तीसरी दुनिया के देशों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, अन्यथा पूरा मुल्क ईरान-अफगानिस्तान जैसे आतंकियों के सरगनाओं के द्वारा शासित किया जाएगा और इनकी घिनौनी सांप्रदायिक  हरकतों के खिलाफ जो भी आवाज उठाएगा, वह कुचला जाएगा।  यहां पर भारत के साथ इजरायल का जिक्र करना इसलिए जरूरी है कि दोनों देश भले ही इस्लामिक कट्टरवाद के खिलाफ लड़ रहे हैं, लेकिन दोनों के तौर तरीके अलग-अलग हैं। एक तरफ इजरायल जहां डंके की चोट पर यहूदियों को समाप्त करने के ख्वाब देखने वालों के ऊपर चोट करता है, वहीं भारत की नीतियां इतनी अस्पष्ट हैं कि हिंदुओं के खिलाफ लगातार विषबमन करने वाले पाकिस्तान-बंगलादेश जैसे 'हरामी मुल्को...