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दीनदयाल अंत्योदय योजना : राष्ट्रीय आजीविका मिशन क्या है? इससे किसको लाभ मिलेगा।

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दीनदयाल अंत्योदय योजना : राष्ट्रीय आजीविका मिशन क्या है? इससे किसको लाभ मिलेगा। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें। @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय आजीविका मिशन (डीएवाई-एनएलएम), भारत सरकार की एक महत्‍वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्‍य ग्रामीण एवं शहरी गरीबों के सतत विकास हेतु सामुदायिक संस्था‍नों की स्‍थापना करना तथा इसके माध्यम से ग्रामीण व शहरी गरीबी समाप्त करने के लिए आजीविका के विविध स्रोतों को प्रोत्‍साहन देना है। केन्‍द्र द्वारा प्रायोजित इस कार्यक्रम को गांवों में ग्रामीण विकास मंत्रालय और शहरों में शहरी विकास मंत्रालय द्वारा राज्‍यों के सहयोग से लागू किया गया है। गौरतलब है कि आजीविका- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्रामीण विकास विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जून 2011 में शुरू किया गया था। जिसे बाद में शहरी क्षेत्रों में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तौर पर शहरी विकास मंत्रालय द्वारा लागू किया गया। वहीं, नवंबर 2015 में, इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का नाम बदलकर 'दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' (डी...

....और बाबा जब भक्तों को बुलाते हैं तो रास्ते में कोई व्यवधान उसे रोक नहीं सकता!

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.....और बाबा जब भक्तों को बुलाते हैं तो रास्ते में कोई व्यवधान उसे रोक नहीं सकता! @ यात्रा संस्मरण: गौरव पांडेय, गाजियाबाद   सच ही कहा जाता है कि जब तक बाबा किसी को बुलाते नहीं, तब तक वह बाबा के द्वार तक पहुंच सकता नहीं।  विगत कुछ दिनों पहले उत्तराखंड के चार धामों में एक श्री केदारनाथ धाम में भारी वर्षा एवं श्री बद्रीनाथ धाम के रास्ते में लैंडस्लाइड होने की वजह से रास्ता बंद होने की खबरें सबने पढ़ी व सुनी होगी। जिसके चलते बहुत से लोग तीर्थ यात्रा से वापस कर दिए गए और वो बाबा के दर्शन नहीं कर सके। दैव योग वश हमारी यात्रा का कार्यक्रम भी उसी अंतराल में था, और हमने भी समाचार सुनकर जाने का कार्यक्रम लगभग स्थगित कर दिया था।  # ऐसे बना यात्रा संयोग और बाबा श्री केदारनाथ के दर्शन पूजन से खिल गया मन कमल लेकिन बाबा के आशीर्वाद से वर्षा रुक गई और जिस दिन हमें जाना था ठीक उसके एक दिन पहले दोपहर 2:00 बजे तक श्री बद्रीनाथ धाम के रास्ते भी साफ हो गए। इसलिए हमने भी अपने कार्यक्रम को पुनः व्यवस्थित करते हुए 22 अक्टूबर 2021 को अपनी यात्रा इंदिरापुर...

प्रभासाक्षी ने विश्वसनीयता और प्रामाणिकता को भी बनाए रखा है: ओम बिरला, लोकसभाध्यक्ष

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प्रभासाक्षी ने विश्वसनीयता और प्रामाणिकता को भी बनाए रखा है: ओम बिरला  # गांवों और शहरों के बीच की डिजिटल खाई को पाटने में प्रभासाक्षी का योगदान महत्वपूर्ण: नीरज दुबे # संविधान बनाते समय जनता को बीच में रखा गया, इसीलिए हमारा लोकतंत्र सशक्त और मजबूत हुआ है: लोकसभाध्यक्ष # हिंदी समाचार पोर्टल प्रभासाक्षी.कॉम की 20वीं वर्षगाँठ पर विचार संगम कार्यक्रम आयोजित # लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विभिन्न दलों के सांसदों, राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं और मीडिया क्षेत्र से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता नई दिल्ली। भारत के प्रमुख हिंदी समाचार पोर्टल प्रभासाक्षी.कॉम की 20वीं वर्षगाँठ पर आयोजित विचार संगम कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, विभिन्न दलों के सांसदों, राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं और मीडिया क्षेत्र से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।  कार्यक्रम की शुरुआत में प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने बताया कि प्रभासाक्षी सिर्फ भारत का शुरुआती हिंदी समाचार पोर्टल नहीं है बल्कि यह वह कड़ी भी है जिसने गांवों और शहरों के बीच की डिजिटल खाई को पाटने के लिए अपना म...

पूछता है गाजियाबाद! नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर का जिक्र करना आखिर क्यों भूल गए प्रधानमंत्री जी!

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गाजियाबाद नगर निगम क्षेत्र के तालाब उद्धारक अधिकारी पूछता है गाजियाबाद! नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर का जिक्र करना आखिर क्यों भूल गए प्रधानमंत्री जी! # सम्बंधित केंद्रीय मंत्रालयों से जुड़े लोग ट्वीटर पर सार्वजनिक रूप से सराहना कर चुके हैं नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर की सार्थक पहल की। कमलेश पांडेय/ब्यूरोचीफ, दैनिक भास्कर गाजियाबाद। भले ही नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर के अथक प्रयत्नों से गाजियाबाद नगर निगम क्षेत्र के तालाबों की माली हालत सुधरी हो, लेकिन इसका यश लूट गए गौतमबुद्धनगर स्थित ग्रेटर नोएडा के पॉन्ड मैन रामवीर तंवर! उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीभ फिसली और अपने मन की बात कार्यक्रम में उन्होंने पॉन्ड मैन रामवीर तंवर की जमकर तारीफ करते हुए उन्होंने गाजियाबाद का बता दिया।  यदि उन्होंने पुराने जनपद के हिसाब से गौतमबुद्ध नगर की जगह गाजियाबाद का नाम ले लिया तब तो यह ठीक है। लेकिन गाजियाबाद में पिछले 1 वर्ष से शहरी क्षेत्र के तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए स्थानीय मीडिया और लोगों की जुबां पर जो नाम छाया है, वह है नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर का। जिसकी सराहना केंद्...

वन सन, वन वर्ल्‍ड, वन ग्रिड योजना क्‍या है? इससे क्या-क्या लाभ होंगे?

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वन सन, वन वर्ल्‍ड, वन ग्रिड योजना क्‍या है? इससे क्या-क्या लाभ होंगे? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवोन्मेषी मस्तिष्क के स्वामी हैं। उनकी टीम में ऐसे स्वभाव वाले लोग भरे पड़े हैं, जिससे वो लीक से अलग हटकर कुछ नया सोच पाते हैं, कुछ अनोखा कर पाते हैं और करवा पाते हैं। इसके एक नहीं बल्कि कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। वन सन, वन वर्ल्‍ड, वन ग्रिड (ओएसओडब्ल्यूओजी) उन्हीं में से एक है, जिसकी परिकल्पना उन्होंने 2018 में की है। इससे समकालीन देश-दुनिया खुद को ऊर्जान्वित भी महसूस कर रहे हैं, क्योंकि इसके तहत पूरी दुनिया को ग्‍लोबल सोलर पावर ग्रिड से बिजली सप्‍लाई करने की योजना है, जिससे ऊर्जा गरीबी भी मिटेगी। ओएसओडब्ल्यूओजी अक्षय ऊर्जा संसाधनों को आपस में जोड़ने के लिए वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण भारत द्वारा शुरू की गयी एक पहल है। ओएसओडब्ल्यूओजी का ब्लू प्रिंट विश्व बैंक के तकनीकी सहायता कार्यक्रम के तहत विकसित किया जाएगा। इसमें दुनिया में सौर ऊर्जा को साझा करने के लिए अंतर-क्षेत्रीय ऊर्जा ग्रिड के निर्माण और स्केलिंग की कल्पना की ...

राजनीति में महिलाओं को 50 प्रतिशत टिकट क्यों नहीं?

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राजनीति में महिलाओं को 50 प्रतिशत टिकट क्यों नहीं? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने आगामी चुनावों में महिलाओं को 40 फीसदी टिकट देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि यह निर्णय पार्टी में आम सहमति से हुआ है। यदि मेरी मानी गई तो आने वाले समय में यह आरक्षण और बढ़ेगा। इसलिए यहां पर यह सवाल मौजूं है कि जब संख्या बल ही लोकतंत्र, सियासत और आरक्षण का आधार है तो फिर आधी आबादी के लिए 50 फीसदी टिकट यानी 50 फीसदी आरक्षण क्यों नहीं? और सिर्फ टिकट में ही क्यों, पहले अपनी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में तो महिलाओं के लिए 40 फीसदी (50 फीसदी अपेक्षित!) जगह बनाइए। एक बात और, प्रियंका गांधी चाहती हैं कि यूपी की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़े। उनका निर्णय उन महिलाओं के लिए है, जो पीड़ित हैं या दुश्वारियों का सामना कर रही हैं और बदलाव चाहती हैं। इसलिए सवाल फिर वही कि सिर्फ यूपी में ही क्यों, अन्य प्रदेशों या फिर पूरे देश में भी क्यों नहीं? और सिर्फ राजनीति में ही क्यों, प्रशासनिक ढांचे में भी क्यों नहीं? उन्हें सलाह है कि पहले आप उन रा...

प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) क्या है?इसका उद्देश्य क्या है? इसके तहत कैसे और कितना मिलेगा लोन?

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प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) क्या है?इसका उद्देश्य क्या है? इसके तहत कैसे और कितना मिलेगा लोन? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही मौलिक प्रवृत्ति वाली जिन विभिन्न योजनाओं को एकसूत्र में पिरोकर और अधिक उपादेय, लाभकारी व जनहितैषी बनाने का यत्न किया है, प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम उन्हीं में से एक है। इसको पहले की दो योजनाएं, प्रधानमंत्री रोजगार योजना (पीएमआरवाई) और ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम (आरईजीपी) को मिलाकर बनाया गया है।  वास्तव में, ये दोनों योजनाएं युवाओं के बीच रोज़गार पैदा करने के लिए समान काम कर रही थीं। इस योजना के तहत लाभार्थी को प्रोजेक्ट की लागत का 5-10 प्रतिशत ही निवेश करना होता है, जबकि सरकार विभिन्न मानदंडों के आधार पर प्रोजेक्ट की लागत की 15-35 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान करती है। वहीं, कार्यकम में भाग लेने वाले बैंक व्यवसायिक व्यक्ति या संस्था को शेष धनराशि टर्म लोन के रूप में प्रदान करते हैं। पीएमईजीपी लोन उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), संस्थानों, को-ऑपरेटिव सोसाइटी और ट्रस्ट्स द्...