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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जौनपुर डीएम डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने शिष्टाचार मुलाकात की और नई पुस्तक कर्मकुम्भ की प्रति भेंट की

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जौनपुर डीएम डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने शिष्टाचार मुलाकात करते हुए नई पुस्तक कर्मकुम्भ की प्रति भेंट की नई दिल्ली/लखनऊ/जौनपुर। उत्तरप्रदेश के जौनपुर जनपद के जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस ने प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी महाराज को अपनी बहुचर्चित पुस्तक कर्मकुम्भ की प्रति शिष्टाचार पूर्वक भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी का मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त किया।  उल्लेखनीय है कि इस पुस्तक में विश्व प्रसिद्ध दिव्य एवं भव्य महाकुंभ 2025 की प्रशासनिक दूरदर्शिता और अहर्निश जनसेवा भाव को विभिन्न दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। साथ ही समाज के सभी वर्ग के प्रति प्रशासनिक संवेदनशीलता को भी चित्रित किया गया है, जिसका श्रेय माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल और सफल नेतृत्व को जाता है।

अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस पर अमेरिका की नजर, नहीं दिया तो लेने के देने पड़ेंगे?

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यदि अफगानिस्तान बगराम एयरबेस को अमेरिका को नहीं देता, तो लेने के देने पड़ सकते हैं?  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए अपने एक बयान में साफ़ कहा है कि उनका प्रशासन अफगानिस्तान स्थित बगराम हवाई अड्डे को फिर से अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रहा है। दरअसल, ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर बयान देते हुए तालिबान को चेतावनी दी है कि यदि अफगानिस्तान ने यह एयरबेस अमेरिका को वापस नहीं दिया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इससे सवाल उठता है कि यदि अफगानिस्तान बगराम एयरबेस को अमेरिका को नहीं देता, तो अफगानिस्तान को लेने के देने पड़ सकते हैं?  दरअसल, दुनिया के थानेदार ट्रंप ने तर्क दिया है कि बगराम एयरबेस की भौगोलिक स्थिति अफगानिस्तान, ईरान, पाकिस्तान, भारत, तजाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, चीन और रूस आदि पूर्व एशियाई, मध्य एशियाई और दक्षिण एशियाई देशों से नजदीकी के कारण अमेरिका की सुरक्षा और निगरानी के लिए अत्यंत जरूरी है। यही वजह है कि ट्रंप ने तर्कसम्मत तरीके से कहा कि, "हम इसे वापस लेने की कोशिश कर ...

वैश्विक कूटनीति का चातुर्य काल, मोदी डॉक्ट्रिन से मजबूत हुआ भारत

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वैश्विक कूटनीति का चातुर्य काल, मोदी डॉक्ट्रिन से मजबूत हुआ भारत @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक वैश्विक कूटनीति के चातुर्य काल का तात्पर्य उस दौर से है जब विश्व के देशों के बीच कूटनीति (राजनय) और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में निपुणता, समझदारी और रणनीतिक कुशलता अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। इस काल में देशों को सीमाओं के पार जटिल राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संदर्भों में अपने हितों की रक्षा और विस्तार के लिए सूझ-बूझ, संतुलन, संवाद, और मध्यस्थता करनी पड़ती है। 21वीं सदी में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  वैश्विक कूटनीति के चातुर्य काल के अधिष्ठाता समझे जाते हैं। उन्होंने समकालीन विश्व को जो कूटनीतिक संदेश दिया है, वह ।मोदी डॉक्ट्रिन यानी मोदी सिद्धांत के नाम से मशहूर है। कहना न होगा कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का यह काल वैश्विक सत्ता संघर्ष, क्षेत्रीय विवाद, आर्थिक साझेदारी, तकनीकी और आर्थिक सहयोग तथा बहुपक्षीय कूटनीतिक पहलों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय माहौल को स्थिर और सकारात्मक बनाए रखने के लिए दक्षता और चतुराई की आवश्यकता पर जोर देता है। उदाहरण के रूप मे...

नेक्स्टजेन जीएसटी सुधार केवल कर सुधार नहीं, राष्ट्र-निर्माण को तेज रफ्तार देने का है परिचायक

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नेक्स्टजेन जीएसटी सुधार केवल कर सुधार नहीं बल्कि  राष्ट्र-निर्माण को तेज रफ्तार देने का परिचायक  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार मौजूदा नेक्स्टजेन जीएसटी सुधार केवल कर सुधार नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण को तेज रफ्तार देने का परिचायक है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थ भारत के सपनों को पंख लगाने वाला वह निर्णायक उपाय है जिसका सकारात्मक असर बहुत जल्द ही देश-दुनिया पर दिखाई पड़ेगा। बता दें कि 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक, जो गत 3 सितम्बर 2025 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित हुई, ने नेक्स्टजेन जीएसटी सुधारों की घोषणा की। जिसके दृष्टिगत यह कहा जा सकता है कि यह भाजपा सरकार का एक साहसिक, ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम है, जिसने भारत की आधुनिक आर्थिक क्रांति के निर्माता के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत किया है। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक लाल किले के संबोधन में घोषित और आगामी  22 सितम्बर 2025 अर्थात नवरात्रि के पहले दिन से लागू होने वाले ये सुधार वास्तव में 140 करोड़ भारतीयों के लिए राहत और समृ...

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 में हुए सुप्रीम संशोधन के मायने

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वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 में हुए सुप्रीम संशोधन के मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजननीतिक विश्लेषक सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर तो रोक नहीं लगाई, लेकिन उसके कुछेक प्रावधानों में विधिसम्मत और तर्कसंगत संशोधन किया है या फिर पूरी तरह से उन पर रोक लगा दी है। इसलिए वक्फ संशोधन अधिनियम में हुए सुप्रीम संशोधन के मायने समझना बहुत जरूरी है। लोगों को उम्मीद है कि कोर्ट के इस ताजातरीन फैसले से वे आशंकाएं दूर हो जाएंगी, जो इस नए कानून को लेकर इससे पहले  जताई जा रही थीं। चूंकि कोर्ट का यह निर्णय संविधान के अनुरूप है, इसलिए दोनों पक्षों ने इसे मान लिया है। यह एक शुभ लक्षण है। बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से किए गए संशोधन महत्वपूर्ण और जरूरी हैं, क्योंकि इनमें संविधान की भावनाओं का भी ख्याल रखा गया है। इसलिए इसके परिवर्तित मायने राष्ट्रीय एकता के लिहाज से अहम हैं। लिहाजा इस फैसले का मुख्य असर निम्नलिखित है:- पहला, कोर्ट ने उस प्रावधान पर रोक लगा दी है, जिसमें वक्फ बनाने के लिए व्यक्ति का 5 वर्षों तक इस्लाम का अनुयायी होना जरूरी था, बताया गया ...

जब डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां भारत के ख़िलाफ़ तो फिर मोदी की नीतियां अमेरिकी हितों को चोट क्यों न पहुंचाएं?

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जब डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां भारत के ख़िलाफ़ हैं तो फिर मोदी की नीतियां अमेरिकी हितों पर चोट क्यों न दें? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जब भारत के गांवों में किसी से विवाद बढ़ने पर और घात-प्रतिघात की परिस्थितियों के पैदा होने पर पारस्परिक हुक्का-पानी या उठक-बैठक, खान-पान बन्द करने के रिवाज सदियों से चलते आए हैं, तो फिर वैश्विक दुनियादारी में हमलोग इसे लागू क्यों नहीं कर सकते, ताकि हमारे मुकाबिल खड़े होने वाले देशों को ठोस नसीहत मिल सके। वहीं, अक्सर यह भी कहा जाता है कि जो ज्यादा तेज बनता है वह तीन जगहों पर बदबू फैलाता है। जबकि चतुर व्यक्ति की कोशिश रहती है कि वह तीनों जगहों पर अपनी गमक व महक छोड़े। अव्वल दर्जे पर रूस, अमेरिका और चीन, के साथ भारतीय सम्बन्धों पर, फ्रांस, इजरायल, जापान जैसे दूसरे दर्जे के महत्वपूर्ण देशों के साथ भारतीय सम्बन्धों पर, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया जैसे तीसरे महत्वपूर्ण देशों के साथ भारत के सम्बन्धों पर भी यही बात लागू होती है। यूँ तो पड़ोसी देशों से जुड़ी हमारी नीतियों में, मुस्लिम बहुल अरब देशों से जुड़ी हमारी नीतियों में, आश...

विदेशी निर्भरता घटाइए, राष्ट्रीय सफलता बढ़ेगी

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विदेशी निर्भरता घटाइए, राष्ट्रीय सफलता बढ़ेगी @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत दिनों गुजरात के भावनगर में कहा है कि भारत का सबसे बड़ा दुश्मन अन्य देशों पर निर्भरता है और जितनी ज्यादा विदेशी निर्भरता होगी, उतनी ज्यादा राष्ट्रीय विफलता बढ़ेगी। उन्होंने यहां तक कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का भविष्य बाहरी ताकतों पर नहीं छोड़ा जा सकता और इसके लिए भारत को आत्मनिर्भर बनना ही होगा। आत्मनिर्भरता देश के सभी समस्याओं का समाधान है और यही राष्ट्रीय सौभाग्य और विकास की कुंजी है।  इससे साफ है कि 2025 की अंतिम तिमाही से पहले चले अंतरराष्ट्रीय दांवपेचों के दृष्टिगत प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को आगाह कर दिया है कि जितनी ज्यादा विदेशी निर्भरता होगी, उतनी ज्यादा राष्ट्रीय विफलता होगी। ऐसा कहकर उन्होंने एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है। एक तरफ तो उन्होंने चीन से आयात पर और अमेरिका को निर्यात पर या ऐसे ही अन्य देशों पर निर्भरता समाप्त करने के लिए सोच और साधन दोनों बदलने का आह्वान किया है।  वहीं, दूसरी तरह विदेशी बहु समझी जाने वाली का...