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धर्म, कर्म, आस्था की त्रिवेणी में सुखद सुरुचिपूर्ण संगम स्नान की दिव्य अनुभूति को ऐसे समझिए

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@ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस महाकुंभ 2025 में संगम स्नान का अपना महत्व है, लेकिन यह बार-बार किया जाए, वो भी वीवीआईपी बनकर, यह अनुचित है। मेरी अंतरात्मा ने इस पर गौर किया और मैंने संगम स्नान की जगह भक्त समूह से निकलते रहनी वाली सकारात्मक ऊर्जा स्नान को तवज्जो दी। ऐसा इसलिए कि 21 फरवरी 2025 दिन शुक्रवार का संयोग ही कुछ ऐसा बना दैवीय प्रेरणा और पेशेवर कार्यवश। यह दिन मेरे लिए सभी दृष्टि से खासकर धार्मिक दृष्टि से पुण्य प्रदायक और प्रशासनिक एवं न्यायिक दृष्टि से उपलब्धियों भरा रहा।  दरअसल, शुक्रवार को ही माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज में न्यायालय खंड पीठ 3 के समक्ष जिलाधिकारी जौनपुर के तौर पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश के क्रम में मुझे 10 बजे प्रातः न्यायालय में उपस्थित होना था। इसलिए मैं अहले सुबह में 4 ए.एम. पर उठा और दैनिक प्रातःकालीन कार्य जिसके अंतर्गत स्नान, ध्यान, पूजा के संक्षिप्त कार्य होते हैं, को नियमितता पूर्वक संपादित करने के पश्चात् मैं प्रयागराज के लिए स्वयं सम्पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था के साथ 5.14 पर रवाना हुआ।...

उत्तरप्रदेश की योगी सरकार की उत्कृष्ट प्रबंधकीय व्यवस्था का अनुपम उदाहरण है महाकुंभ 2025

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@ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस "मैं कहाँ और आप कहाँ, यह एहसास ही तो नहीं, मुझमें और आप में! इसलिए अनवरत संघर्षरत हैं, अपनी एहमियत को स्थापित करने की, संघर्ष भरी! कंटकाकीर्ण जिंदगी की यात्रा में!" यानी मैं और आप के अंतर और विभिन्न पदेन संघर्षपूर्ण यात्रा से प्राप्त प्रतिष्ठित व्यक्तित्व की ऊंचाइयों पर पहुंचे, संत, संन्यासी, राजनीतिज्ञ, न्याय की मूर्ति न्यायाधीश, लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रतिष्ठा, जनप्रतिनिधित्व के प्रतीक, समाज की व्यवस्था को यथार्थ की ऊसर, अनुपजाऊ भूमि के साथ उर्वरा भूमि में तब्दील करने को प्रतिबद्ध, विभिन्न प्रलोभनों एवं व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए समष्टि की समृद्धि का आवरण होकर नितांत व्यैक्तिक उपलब्धियों के लिए प्रयासरत, सभी वर्गों के लोग! क्योंकि हम भारत के लोग ही भारतीय लोकतंत्र की आन-बान-शान हैं। परन्तु प्रत्येक वर्ग के उच्च शिखर पर बैठे और उस वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रतिष्ठित भारत के नागरिक, चाहे वह पूज्य संत हो, माननीय राजनीतिज्ञ हों, न्याय के लिए प्रतिबद्धता के साथ जनता की उम्मीदों के न्याय का प्रकाश पुंज न्यायाधीश हो और क...

महाकुंभ 2025 की अतुलनीय प्रशासनिक तैयारियां अब शोध-अनुसंधान का विषय, योगी जी को मिला यश

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# अद्भुत और अविस्मरणीय, महाकुंभ स्नान से होती है चार पुरुषार्थों की प्राप्ति @ डॉ दिनेश चन्द्र सिंह, आईएएस   "प्रथमं तीर्थराजं तू प्रयागाख्यं सुविश्रुतिम। कामिकं सर्वतीर्थानां धर्म कामार्थ मोक्षदम।।" अर्थात तीर्थराज प्रयाग का नाम सर्वश्रेष्ठ तीर्थ के रूप में लोक विख्यात है। यह सभी तीर्थों के फलों को देने वाला अकेला तीर्थ है, जो व्यक्तिविशेष के जीवन में- धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष- नामक चारों पुरुषार्थों का प्रदाता है। यूँ तो हर 12 वें वर्ष में यहां कुंभ का आयोजन अनंत काल से हो रहा है, लेकिन महाकुम्भ का आयोजन प्रयागराज हर बार 144वें वर्ष में ही होता है। इसलिए पतित पावनी गंगा, कलंक प्रक्षालिनी यमुना और अंतर्धारा पुण्य सलिला सरस्वती नदी के त्रिवेणी संगम तट पर अवस्थित प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत गणराज्य का अलग ही महात्म्य है। सनातन मनीषियों के मुताबिक, हर 144 वर्ष के अंतराल पर और इस बार वर्ष 2025 में पुनः ग्रहों का ऐसा शुभ संयोग बना है जिसके कारण यहाँ आना और संगम तट पर स्नान-ध्यान करना पुण्यबर्धक समझा जाता है। 2025 का दिव्य महाकुंभ 144 वर्षों की सुदीर्घ प्रतीक्षा के ब...

भारत को मजबूत बनाने के लिए नरेंद्र मोदी की कीप एंड बैलेंस थ्योरी को ऐसे समझिए

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@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक 21वीं सदी के एशियाई बिस्मार्क समझे जाने वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'कीप एंड बैलेंस' थ्योरी से जहां विकसित देश अमेरिका, रूस, चीन हैरान-परेशान हैं, वहीं भारत ग्लोबल साउथ यानी तीसरी दुनिया के देशों के दूरगामी हितों की हिफाजत करते हुए तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है। यह बात मैं नहीं कह रहा हूँ बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंफ, रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा वक्त-वक्त पर की हुई बयानबाजियां इस बात की चुगली करती हैं। इसके अलावा भी बहुतेरे राष्ट्राध्यक्ष हैं जो कुछ ऐसी ही बातें छेड़ चुके हैं, जो गलत भी नहीं है। समझा जाता है कि जैसे भारतीय सियासत में उन्होंने अटलबिहारी बाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे कद्दावर नेताओं को साधते हुए नरेंद्र मोदी ने खुद को एक आदमकद चेहरे के रूप में स्थापित करते हुए पहले मुख्यमंत्री, फिर प्रधानमंत्री बने। ठीक वैसे ही अब अमेरिका, रूस और चीन को साधते हुए वो भारत के नेतृत्वकर्ता के तौर पर अपने राष्ट्र को एक अग्रणी विकसित देश की कतार में खड़ा करक...

युद्ध के प्रति भारतीय तटस्थता नहीं, बल्कि शांतिपरक पक्षधरता को ऐसे समझिए

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@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक चाहे 'वैश्विक युद्ध' की संभावना की बात हो या विभिन्न देशों के बीच ब्रेक के बाद जारी 'द्विपक्षीय युद्ध' की, भारत ने साफ कर दिया है कि वह ऐसे किसी भी मामले में तटस्थ नहीं, बल्कि शांति का पक्षधर है। बता दें कि अपनी हालिया अमेरिकी यात्रा (12-13 फरवरी 2025) के क्रम में भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने एक सवाल का जवाब देते हुए यह साफ कर दिया है कि "रूस-यूक्रेन जंग पर भारत न्यूट्रल यानी तटस्थ नहीं है। भारत शांति का पक्षधर है।" इसलिए दुनियादारी के निष्णात लोग 'ह' से 'हलंत' तक की अटकलें लगा रहे हैं और उनके इस वक्तव्य के अंतर्राष्ट्रीय मायने निकाले जा रहे हैं।  ऐसा इसलिए कि इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध के दौरान भी भारत का कुलमिलाकर यही नजरिया रहा है। चाहे चीन-ताइवान युद्ध की अटकलें हों या ईरान-इजरायल युद्ध की संभावनाएं, अफगानिस्तान सरकार का तालिबान के हाथों पतन हो या तुर्की के इशारे पर सीरिया की सरकार का पतन, भारत ने कभी हस्तक्षेप नहीं किया। वह हमेशा यही कहता रहा कि हम वसुधैव कुटुंबकम के पक्षधर हैं। पीएम मोदी भी लग...

अमेरिका-चीन में पुनः शुरू हुए व्यापार युद्ध का कारोबारी लाभ आखिर कैसे उठाएगा भारत?

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@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हम भारतीयों के मनोमस्तिष्क में  इसलिए हमेशा बसे रहते हैं कि उन्होंने आपदा को अवसर में बदलने का हुनर दिखलाया-सिखलाया-बतलाया है। इस हेतु राष्ट्रीय जज्बे को जिस शानदार-जानदार तरीके से उन्होंने प्रदर्शित किया-करवाया है, उसने हम सबको उनका मुरीद बना दिया है। वैश्विक महामारी कोरोना के पहले, कोविड-19 के दौरान और उसके बाद भी उन्होंने दुनियावी त्रासदी/पारस्परिक संघर्षों-संकटों को जितना सकारात्मक तरीके से लिया है, उससे भारत पुनः विश्वगुरू बनने की ओर अग्रसर है। उनके नेतृत्व में भारत अब याचक कम, दाता ज्यादा नजर आता है।  यही वजह है कि समावेशी व्यापार प्रचलन स्थापित-संचालित-नियंत्रित करने में विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ की विफलता के बाद दुनिया के देशों में मचे व्यापार युद्ध मतलब टैरिफ वॉर से उतपन्न होने वाले द्विपक्षीय कारोबारी आपदा को तीसरे पक्ष हेतु अवसर में बदलने के लिए भारत के लिए क्या संभावनाएं हैं और उसकी क्या रणनीति होनी चाहिए, इस विषय पर हम यहां चर्चा करेंगे। क्योंकि आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि अ...

दिल्ली में भाजपा की जीत और आप की हार के सियासी मायने को ऐसे समझिए

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@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में विगत 12 वर्षों से सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी यानी 'आप' की हार और  प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा की अप्रत्याशित जीत के सियासी मायने दिलचस्प हैं। इसके राजनीतिक असर भी दूरगामी होंगे। क्योंकि एक तरफ जहां भाजपा की जीत से केंद्र में सत्तारूढ़ 'एनडीए' की एकजुटता मजबूत होगी, वहीं देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन में बिखराव को बढ़ावा मिलेगा।  ऐसा इसलिए कि इंडिया गठबंधन की अगुवा पार्टी कांग्रेस ने दिल्ली में अपने पूर्व गठबंधन सहयोगी 'आप', जो दिल्ली में लंबे समय से सत्तारूढ़ थी, को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे कांग्रेस ने आप से जहां अपना पुराना सियासी हिसाब-किताब बराबर कर लिया है, वहीं अपनी खोई राजनीतिक जमीन हासिल करने का शिलान्यास भी कर चुकी है। वहीं, अब उसमें इस बात की भी नई उम्मीद जगी है कि 2030 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में जब भाजपा से उसका सीधा मुकाबला होगा तो उसकी स्थिति और मजबूत होगी और उसका खोया जनाधार पुनः वापस लौट जाएगा। बता दें कि 2010 के दशक ...