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यूक्रेन में चिकित्सा शिक्षा हासिल करने के लिए क्यों जाते हैं भारतीय छात्र, जानिए प्रमुख वजहें

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यूक्रेन में चिकित्सा शिक्षा हासिल करने के लिए क्यों जाते हैं भारतीय छात्र, जानिए प्रमुख वजहें @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार रूस और यूक्रेन के बीच जारी मौजूदा संघर्ष ने भारत के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। यूक्रेन में फंसे हजारों भारतीय छात्रों को वहां से सुरक्षित निकालने की चुनौती भारत सरकार के समक्ष उतपन्न हो चुकी है। सरकार लगातार उनकी वापसी के लिए प्रयास कर रही है। इंडिया से फ्लाइट भेज उन्हें वापस लाया जा रहा है। यूक्रेन में फंसे हुए ज्यादातर छात्र ऐसे हैं, जो मेडिकल की पढ़ाई के लिए वहां गए हुए थे।  गौरतलब है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वहां से सभी फ्लाइट ऑपरेशन बंद है, जिसके चलते हजारों भारतीय छात्र वहां मुश्किल और खतरनाक परिस्थितियों में फंसे हुए हैं। वहीं, रूस-यूक्रेन के बीच होने वाला युद्ध अब लंबा खींच रहा है। इससे परेशान यूक्रेन ने खारकीव शहर में, भारतीय छात्रों को बंधक बना रखा है और मानव शिल्ड के रुप में इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए भारत सरकार ने अपने नागरिकों को वहां से निकालने के लिए 'ऑपरेशन गंगा' के तहत सभी तरह के प्रयास शुरू कर दिए हैं...

प्रधानमंत्रियों की सूझबूझ से सामर्थ्यशाली बना भारत, बढ़ी वैश्विक पूछ

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प्रधानमंत्रियों की सूझबूझ से सामर्थ्यशाली बना भारत, बढ़ी वैश्विक पूछ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार साम्यवादी सोवियत संघ यानी यूएसएसआर के पतन के साथ ही शीत युद्ध की समाप्ति के बाद पूंजीवादी अमेरिका ने जिस भूमंडलीकरण यानी ग्लोबलाइजेशन और नई आर्थिक नीति यानी न्यू इकोनॉमिक पालिसी को बढ़ावा दिया, उसे तीसरी दुनिया के देशों में नवआर्थिक साम्राज्यवाद करार दिया गया। जिसके तहत दुनिया के थानेदार संयुक्त राज्य अमेरिका ने नाटो देशों के साथ मिलकर कहीं विकास की चकाचौंध दिखाकर तो कहीं बल प्रयोग आजमाकर मनमाफिक नीतियों को लागू करवाया।  हालांकि, समय के साथ ही नई आर्थिक नीतियों की सफलता का कारक समझी गईं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और उनकी छत्रछाया में विकसित हुईं राष्ट्रीय कम्पनियों की पोल खुलती गई। क्योंकि इनका मकसद सुशासन और जनसुविधाएं विकसित करवाना नहीं था, बल्कि इसी की आड़ लेकर लाभकारी सरकारी संस्थाओं का निजीकरण करवाना हो गया, ताकि सरकार और उसके चमचों की सभी अंगुलियां घी में डूबी रहें।  लेकिन इन्हीं नीतियों का फायदा उठाकर विकसित हुए चीन ने जब अपने विस्तारवादी रवैये का इजहार कि...

सामरिक क्षेत्र में मोदी प्रशासन की तैयारियों से सबक लें संघर्षरत देश, यूक्रेन जैसी बला पास भी नहीं फटकेगी

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सामरिक क्षेत्र में मोदी प्रशासन की तैयारियों से सबक लें  संघर्षरत देश, यूक्रेन जैसी बला पास भी नहीं फटकेगी @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार वैश्विक महाशक्तियों में से एक रूस द्वारा अपने पड़ोसी देश यूक्रेन पर किये गए अप्रत्याशित आक्रमण और यूक्रेन को रूस के खिलाफ भड़का रहे अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो देशों के तथाकथित सहयोगियों द्वारा यूक्रेन को युद्धजन्य परिस्थितियों में उसके हाल पर अकेले छोड़ दिये जाने और आत्मरक्षार्थ उसे त्वरित सैन्य सहयोग प्रदान नहीं किये जाने वाला अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम विश्व कूटनीति की एक ऐसी मार्मिक पहेली बन चुकी है कि जिसका इजहार खुद यूक्रेन के राष्ट्रपति ने यह कहकर किया कि हमें हमारे हाल पर अकेला छोड़ दिया गया और रूस के खिलाफ किसी ने हमारा खुलकर साथ नहीं दिया। यही वजह है कि अब भविष्य में कोई भी जरूरतमंद देश किसी अंतरराष्ट्रीय समूह या गठबंधन के झांसे में आने से पहले सौ बार सोचेगा। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठ रहा है कि किसी भी राष्ट्र की बागडोर कैसे राजनेता के हाथ में सौंपी जाए, वह अपनी रक्षा जरूरतों को कितनी अहम प्राथमिकता दे और अपने से मजबूत द...

विनिर्माण क्षेत्र में विदेशी निवेश का आकर्षक केंद्र बन चुका है भारत, सिंगापुर से सम्बन्ध हुए प्रगाढ़

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विनिर्माण क्षेत्र में विदेशी निवेश का आकर्षक केंद्र बन चुका है भारत, सिंगापुर से सम्बन्ध हुए प्रगाढ़ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार भारत अब विनिर्माण क्षेत्र में विदेशी निवेश का एक आकर्षक केंद्र बन चुका है। मेक इन इंडिया अभियान की मदद से भारत हाई-टेक विनिर्माण का केंद्र बनने की राह पर है। क्योंकि वैश्विक दिग्गज या तो भारत में विनिर्माण संयंत्र लगा रहे हैं या लगाने की प्रक्रिया में हैं, जो भारत के एक अरब से अधिक उपभोक्ताओं के बाजार और उनकी बढ़ती क्रय शक्ति से आकर्षित हैं।  ऐसा इसलिए कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की निगरानी में भारत 1,200 से अधिक सरकारी वित्त पोषित अनुसंधान संस्थानों, सक्रिय नीति तंत्र, उद्योग और शिक्षाविदों के बीच सहयोग के साथ नवाचार अर्थव्यवस्था के युग को लेकर खुद को तैयार कर रहा है। भारत नवाचार के निरंतर बढ़ते पथ पर है और उभरती हुई तकनीकियां जैसे ब्लॉक चेन, नैनो टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नवाचार के केंद्र में हैं।  भारत शीर्ष 25 नवोन्मेषी देशों के संघ में शामिल होना चाहता है। एनएसएफ डेटाबेस ...

बच्चों में खेल की संस्कृति और फिटनेस को बढ़ावा मिलेगा: मंजू राणा

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बच्चों में खेल की संस्कृति और फिटनेस को बढ़ावा मिलेगा: मंजू राणा  # सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल वसुंधरा ने भदावल को आदर्श खेल गांव के रूप में गोद लिया, ताकि गांव के बच्चों में खेल और फिटनेस को मिले बढ़ावा  कमलेश पांडेय/स्थानीय संपादक गाजियाबाद। सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल वसुंधरा ने इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी यानी आईएमटी गाजियाबाद के सहयोग से उत्तर प्रदेश के भदावल गांव को आदर्श खेल गांव के रूप में गोद लिया है, ताकि गांव के बच्चों में खेल और फिटनेस को बढ़ावा मिले। सेठ आनंदराम जयपुरिया ग्रुप ऑफ स्कूल्स की निदेशक (स्कूल) मंजू राणा और स्पोर्ट्स रिसर्च सेंटर आईएम टी प्रमुख डॉ. कनिष्का पांडे की उपस्थिति में कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) की यह पहल गत गुरुवार को छाता तहसील के भदावल में की गई। इस मौके पर मुख्य अतिथि पूर्व हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार ध्यानचंद और अंतर्राष्ट्रीय हैंडबॉल खिलाड़ी नवीन पुनिया थे। इस अवसर पर रस्साकशी खेल का आयोजन किया गया, जिसमें गांव के लड़के-लड़कियों ने उत्साह से भाग लिया। विजेताओं को प्रशस्ति पत्र और ट्राफियां और सभी प्रतिभागियों को भागीदारी का प्रमाण प...

मार्च के बाद शहर में कोई कूड़ाघर दिखाई न दे: नगरायुक्त

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मार्च के बाद शहर में कोई कूड़ाघर दिखाई न दे: नगरायुक्त  # स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 में सहारनपुर को नंबर वन लाने की कवायद तेज  सहारनपुर। नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने सभी सफाई निरीक्षकों और डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन में लगे एनजीओ को निर्देश दिए कि वे सहारनपुर को कूड़ा मुक्त करने के लिए युद्ध की तरह काम करें, ताकि स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 में सहारनपुर को नंबर वन लाया जा सके। उन्होंने पांवधोई किनारे के कूड़ाघरों सहित शहर के सभी कूड़ाघरों को समाप्त करने के निर्देश दिए। नगरायुक्त ने अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि मार्च तक शहर से सभी कूड़ा घरों को समाप्त करना है। नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने वृहस्पतिवार को लखनऊ से आये स्वच्छ भारत मिशन के सहारनपुर मंडल प्रभारी वैभव पांडेय व निगम के अधिकारियों, सफाई निरीक्षकों व आईटीसी मिशन सुनहरा कल के प्रोग्राम मैनेजर तथा एनजीओ वालंटियर्स के साथ सहारनपुर को नंबर वन लाने पर गंभीर विचार मंथन किया। नगरायुक्त ने आईटीसी सुनहरा कल तथा एनजीओ को अपने वालंटियर्स की संख्या बढ़ाने और शत प्रतिशत घरों से कूड़ा कलेक्शन पर जोर दिया। उन्होंने सफाई निरीक्षकों को पांवधो...

यदि अगले माह में एलआईसी आईपीओ लेना चाहते हैं तो इन बातों पर दीजिये ध्यान और अपने कागज पूरे रखिये

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यदि अगले माह में एलआईसी आईपीओ लेना चाहते हैं तो इन बातों पर दीजिये ध्यान और अपने कागज पूरे रखिये @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार एक तरफ विश्व युद्ध की आशंकाओं के बीच दुनिया समेत भारत के शेयर बाजार धड़ाम हो चुके हैं तो दूसरी तरफ अगले महीने मार्च में भारत का सबसे बड़ा आईपीओ आने वाला है, जिसमें सबकी अभिरुचि बढ़ती जा रही है। यदि आप भी अगले माह में एलआईसी आईपीओ लेना चाहते हैं तो कुछ बातों का ख्याल रखिये और अपने कागज पूरे करिए। अन्यथा इस सरकारी उपक्रम में अपने लिए शेयर खरीदने की संभावनाओं से आप वंचित रह सकते हैं या वंचित किये जा सकते हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) आगामी 11 मार्च को अपना आईपीओ पेश कर सकती है। उस दिन यह सिर्फ एंकर निवेशकों के लिए खुलेगा, जबकि अन्य निवेशकों के लिए इसे दो दिन बाद यानी 13 मार्च को खोला जाएगा। बताया जाता है कि मार्च के पहले सप्ताह में इसे नियामकीय मंजूरी मिल सकती है। यदि वह किसी कारण वश नहीं मिल पाती है, तभी आईपीओ प्रस्तुत करने की तिथि में फेरबदल संभव है। एलआईसी आईपीओ में निवेशकों का ध्यान खींचने के लिए विभागीय ...