सामरिक क्षेत्र में मोदी प्रशासन की तैयारियों से सबक लें संघर्षरत देश, यूक्रेन जैसी बला पास भी नहीं फटकेगी
सामरिक क्षेत्र में मोदी प्रशासन की तैयारियों से सबक लें संघर्षरत देश, यूक्रेन जैसी बला पास भी नहीं फटकेगी @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार वैश्विक महाशक्तियों में से एक रूस द्वारा अपने पड़ोसी देश यूक्रेन पर किये गए अप्रत्याशित आक्रमण और यूक्रेन को रूस के खिलाफ भड़का रहे अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो देशों के तथाकथित सहयोगियों द्वारा यूक्रेन को युद्धजन्य परिस्थितियों में उसके हाल पर अकेले छोड़ दिये जाने और आत्मरक्षार्थ उसे त्वरित सैन्य सहयोग प्रदान नहीं किये जाने वाला अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम विश्व कूटनीति की एक ऐसी मार्मिक पहेली बन चुकी है कि जिसका इजहार खुद यूक्रेन के राष्ट्रपति ने यह कहकर किया कि हमें हमारे हाल पर अकेला छोड़ दिया गया और रूस के खिलाफ किसी ने हमारा खुलकर साथ नहीं दिया। यही वजह है कि अब भविष्य में कोई भी जरूरतमंद देश किसी अंतरराष्ट्रीय समूह या गठबंधन के झांसे में आने से पहले सौ बार सोचेगा। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठ रहा है कि किसी भी राष्ट्र की बागडोर कैसे राजनेता के हाथ में सौंपी जाए, वह अपनी रक्षा जरूरतों को कितनी अहम प्राथमिकता दे और अपने से मजबूत द...