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वन सन, वन वर्ल्‍ड, वन ग्रिड योजना क्‍या है? इससे क्या-क्या लाभ होंगे?

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वन सन, वन वर्ल्‍ड, वन ग्रिड योजना क्‍या है? इससे क्या-क्या लाभ होंगे? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवोन्मेषी मस्तिष्क के स्वामी हैं। उनकी टीम में ऐसे स्वभाव वाले लोग भरे पड़े हैं, जिससे वो लीक से अलग हटकर कुछ नया सोच पाते हैं, कुछ अनोखा कर पाते हैं और करवा पाते हैं। इसके एक नहीं बल्कि कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। वन सन, वन वर्ल्‍ड, वन ग्रिड (ओएसओडब्ल्यूओजी) उन्हीं में से एक है, जिसकी परिकल्पना उन्होंने 2018 में की है। इससे समकालीन देश-दुनिया खुद को ऊर्जान्वित भी महसूस कर रहे हैं, क्योंकि इसके तहत पूरी दुनिया को ग्‍लोबल सोलर पावर ग्रिड से बिजली सप्‍लाई करने की योजना है, जिससे ऊर्जा गरीबी भी मिटेगी। ओएसओडब्ल्यूओजी अक्षय ऊर्जा संसाधनों को आपस में जोड़ने के लिए वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण भारत द्वारा शुरू की गयी एक पहल है। ओएसओडब्ल्यूओजी का ब्लू प्रिंट विश्व बैंक के तकनीकी सहायता कार्यक्रम के तहत विकसित किया जाएगा। इसमें दुनिया में सौर ऊर्जा को साझा करने के लिए अंतर-क्षेत्रीय ऊर्जा ग्रिड के निर्माण और स्केलिंग की कल्पना की ...

राजनीति में महिलाओं को 50 प्रतिशत टिकट क्यों नहीं?

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राजनीति में महिलाओं को 50 प्रतिशत टिकट क्यों नहीं? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने आगामी चुनावों में महिलाओं को 40 फीसदी टिकट देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि यह निर्णय पार्टी में आम सहमति से हुआ है। यदि मेरी मानी गई तो आने वाले समय में यह आरक्षण और बढ़ेगा। इसलिए यहां पर यह सवाल मौजूं है कि जब संख्या बल ही लोकतंत्र, सियासत और आरक्षण का आधार है तो फिर आधी आबादी के लिए 50 फीसदी टिकट यानी 50 फीसदी आरक्षण क्यों नहीं? और सिर्फ टिकट में ही क्यों, पहले अपनी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में तो महिलाओं के लिए 40 फीसदी (50 फीसदी अपेक्षित!) जगह बनाइए। एक बात और, प्रियंका गांधी चाहती हैं कि यूपी की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़े। उनका निर्णय उन महिलाओं के लिए है, जो पीड़ित हैं या दुश्वारियों का सामना कर रही हैं और बदलाव चाहती हैं। इसलिए सवाल फिर वही कि सिर्फ यूपी में ही क्यों, अन्य प्रदेशों या फिर पूरे देश में भी क्यों नहीं? और सिर्फ राजनीति में ही क्यों, प्रशासनिक ढांचे में भी क्यों नहीं? उन्हें सलाह है कि पहले आप उन रा...

प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) क्या है?इसका उद्देश्य क्या है? इसके तहत कैसे और कितना मिलेगा लोन?

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प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) क्या है?इसका उद्देश्य क्या है? इसके तहत कैसे और कितना मिलेगा लोन? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही मौलिक प्रवृत्ति वाली जिन विभिन्न योजनाओं को एकसूत्र में पिरोकर और अधिक उपादेय, लाभकारी व जनहितैषी बनाने का यत्न किया है, प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम उन्हीं में से एक है। इसको पहले की दो योजनाएं, प्रधानमंत्री रोजगार योजना (पीएमआरवाई) और ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम (आरईजीपी) को मिलाकर बनाया गया है।  वास्तव में, ये दोनों योजनाएं युवाओं के बीच रोज़गार पैदा करने के लिए समान काम कर रही थीं। इस योजना के तहत लाभार्थी को प्रोजेक्ट की लागत का 5-10 प्रतिशत ही निवेश करना होता है, जबकि सरकार विभिन्न मानदंडों के आधार पर प्रोजेक्ट की लागत की 15-35 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान करती है। वहीं, कार्यकम में भाग लेने वाले बैंक व्यवसायिक व्यक्ति या संस्था को शेष धनराशि टर्म लोन के रूप में प्रदान करते हैं। पीएमईजीपी लोन उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), संस्थानों, को-ऑपरेटिव सोसाइटी और ट्रस्ट्स द्...

पीएम गति शक्ति योजना क्या है? इसका उद्देश्य क्या है? इससे किसको फायदा होगा?

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पीएम गति शक्ति योजना क्या है? इसका उद्देश्य क्या है? इससे किसको फायदा होगा?  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर विभिन्न प्रकार की योजनाएँ आरम्भ करते हैं, जिससे कि देश का कोई भी नागरिक बेरोज़गार ना रहे। प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के माध्यम से भी उन्होंने देश के युवाओं को रोज़गार सृजित करने की एक सकारात्मक पहल की है। इसी वर्ष 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने देश को सम्बोधित करते हुए एक नयी योजना का आरम्भ करने की घोषणा की, वही प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना है।  इस योजना के माध्यम से देश के युवाओं को रोज़गार के अवसर प्रदान किए जाएँगे, इसलिए इसका कुल बजट 100 लाख करोड़ निर्धारित किया गया है। इस योजना के माध्यम से इन्फ़्रस्ट्रक्चर का सर्वांगीण विकास भी सुनिश्चित किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत लोकल मैन्युफ़ैक्चरर भी वर्ल्ड लेवल पर प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे और भविष्य में नए इकोनॉमिक जोन भी विकसित किए जाएँगे। यह योजना पीएम नरेंद्र मोदी की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स पर आने वाले खर्च को कम करना ह...

प्रधानमंत्री कुसुम योजना क्या है? इससे किसान कैसे लाभान्वित होंगे? इसके लिए आवेदन कैसे करें?

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प्रधानमंत्री कुसुम योजना क्या है? इससे किसान कैसे लाभान्वित होंगे? इसके लिए आवेदन कैसे करें? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को जितना लाभ पहुंचाया, उससे मिली आर्थिक सुरक्षा का दुरुपयोग वो उनके ही खिलाफ करने लगे हैं। पिछले लगभग 1 वर्ष से जारी किसान आंदोलन इसका गवाह है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने और उन्हें निर्बाध बिजली आपूर्ति की गरज से ही प्रधानमंत्री कुसुम योजना की शुरुआत की, जिससे किसान लाभान्वित हुए हैं। पीएम कुसुम योजना केंद्र में सत्तारूढ़ नरेंद्र मोदी सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत किसानों को सौर पंप लगाने के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी सहायता मिलती है। इसके तहत किसानों के लिए सौर पंप और ग्रिड से जुड़े अन्य सौर बिजली संयंत्र लगाये जाने का प्रावधान है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान, जिसे प्रधानमंत्री कुसुम योजना की संज्ञा दी गई, की शुरुआत की थी। जिसके तहत किसानों को सौर पंप लगाने के लिए छूट मिलती है।  ...

बेनामी संपत्ति क्या है? इसके बारे में क्या कानून है? इसकी लेन-देन करने वालों को कितनी सजा मिलेगी?

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बेनामी संपत्ति क्या है? इसके बारे में क्या कानून है? इसकी लेन-देन करने वालों को कितनी सजा मिलेगी?  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार मनुष्य जीवन में संपत्ति का बहुत महत्व है। क्योंकि यह जीवन यापन में सहायता करती है। इससे प्रतिष्ठा भी मिलती है। अध्ययन-अध्यापन में भी इससे मदद मिलती है।यह दो तरह की होती है- चल और अचल। चल और अचल संपत्ति में नामी और बेनामी सम्पत्ति का भी प्रचलन है।व्यक्ति या संस्था विशेष के लिए हर तरह से संपत्ति अर्जित करने का खास महत्व होता है। क्योंकि अधिकांश मौके पर यही आपकी पहचान बनती है। चल सम्पत्ति में रुपये-पैसे, स्वर्णाभूषण आदि आते हैं, जबकि अचल संपत्ति में जमीन-जायदाद, मकान-दुकान-बगान आदि आते हैं। आजकल ज्ञान और तकनीक भी एक संपदा है। सबमें सतुंलन भी आवश्यक है। अधिकांश लोग सम्पत्ति प्राप्त करते ही बहक जाते हैं। इसका दुरुपयोग करने लगते हैं। लेकिन कुछ लोग अपने नाम से भी बनाते हैं और अपने मित्रों, परिजनों के नाम से भी। जब हम दूसरों के नाम से अपनी कोई संपत्ति बनाते हैं तो वह बेनामी सम्पत्ति कहलाती है। साफ शब्दों में कहें तो बेनामी संपत्ति वह प्रोप...

हवाला कारोबार क्या है? यह किनके बीच होता है? इसमें कौन लोग शामिल होते हैं? यह कैसे काम करता है?

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हवाला कारोबार क्या है? यह किनके बीच होता है? इसमें कौन लोग शामिल होते हैं? यह कैसे काम करता है?  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार हवाला, धन-हस्तान्तरण की एक अवैध एवं अनौपचारिक प्रणाली है, जो धन लेने-देने वाले दलालों के एक बहुत बड़े नेटवर्क के रूप में काम करती है। दरअसल, हवाला का पूरा काम इस नेटवर्क के 'विश्वास' एवं 'कार्यकुशलता' पर आधारित होता है। भले ही हवाला का काम मुख्यत: मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका एवं दक्षिण एशिया में फैला हुआ है, लेकिन भारत में भी इसकी अच्छी खासी पैठ है।  भारतीय अर्थव्यवस्था इसके नकारात्मक पहलुओं से अंदर तक प्रभावित होती है। इसलिए प्रशासन का कर्तव्य है कि वह ऐसे नेटवर्क की शिनाख्त करे और इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। एक बार तो भारतीय राजनीति में भी हवाला कांड के चलते भूचाल आ गया, जिससे कई राजनेताओं की सियासी विश्वसनीयता पर ही सवाल उठने लगे। इसी हवाला कांड में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी का नाम आने के बाद उन्होंने अपने महत्वपूर्ण पद से न केवल इस्तीफा दे दिया, बल्कि उन्होंने तबतक कोई राजनीतिक पद ग्रहण नहीं किया, जबतक कि वो इस आरोप ...