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कर्मचारी भविष्य निधि से उठाइए लाभ, पर जरूरी है अपेक्षित सावधानियां

# कर्मचारी भविष्य निधि से उठाइए लाभ, पर जरूरी है अपेक्षित सावधानियां @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार देश-प्रदेश में कोई भी सेवारत व्यक्ति सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना चाहता है, जिसमें उसके लिये कर्मचारी भविष्य निधि यानि ईपीएफ बहुत सहायक होते हैं। भले ही अधिकतर कर्मचारियों के लिए यह अनैच्छिक बचत होती है, लेकिन सेवानिवृत्ति, असामयिक मृत्यु या अपंगता की स्थिति में कर्मचारी और उसके परिवार के लिये ये अत्यंत लाभदायक होते हैं। क्योंकि इस निधि में कर्मचारी के मासिक वेतन से कुछ अंश यानी कि मूल वेतन का 12.5 प्रतिशत स्रोत पर ही काट कर जमा कर लिया जाता है। साथ ही, इसके बराबर राशि नियुक्तिकर्ता द्वारा भी जमा कराई जाती है, जिस पर 8.5 प्रतिशत की दर से ब्याज भी मिलता है।  उदाहरण के लिए, यदि कर्मचारी की आयु 25 वर्ष है और उसका तत्कालीन वेतन 20 हजार रुपये है, तो यह मानकर चलें कि ईपीएफ में 8.5 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है और हर वर्ष उसके वेतन में 5 प्रतिशत की बचत होती है। ऐसे में यदि वह हर माह अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 12 प्रतिशत ईपीएफ में जमा कराता है...

बिहार केशरी श्री कृष्ण सिंह के अधूरे सपनों को साकार करने से आखिर कबतक कतराएंगे हमलोग

बिहार केशरी श्री कृष्ण सिंह के अधूरे सपनों को साकार करने से आखिर कबतक कतराएंगे हमलोग @ गोपाल जी राय, वरिष्ठ पत्रकार व लेखक महान स्वतंत्रता सेनानी 'बिहार केसरी' डॉ. श्रीकृष्ण सिन्हा उर्फ श्री बाबू भारतीय राजनीति में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्हें आधुनिक बिहार का निर्माता कहा जाता है। उनका जन्म वर्ष 1887 में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1961 तक आजीवन बिहार की सेवा की और समकालीन भारतीय राजनीति के दैदीप्यमान राजनेता बने रहे। वह भारत के अखंड बिहार राज्य के प्रधानमंत्री व प्रथम मुख्यमंत्री थे। उनका कार्यकाल 1946 से 1961 तक था।  श्री बाबू संघर्षशील, जुझारू और दूरदर्शी कांग्रेसी राजनेता थे। वह सामाजिक न्याय व साम्प्रदायिक सद्भाव के भी प्रणेता समझे जाते हैं। उन्होंने समाज के सभी वर्गों के सन्तुलित विकास पर ध्यान देते हुए बिहार और देश को बहुत कुछ दिया है। समझा जाता है कि तत्कालीन किसान नेता स्वामी सहजानन्द सरस्वती अपना वैचारिक लट्ठ लेकर उनके पीछे पड़े रहते थे, इसलिए सफलता और यश ने उनको वरेण्य किया। यदि कोई उन्हें गुमराह या प्रभावित करने की कोशिश करता तो स्वामी जी का परोक्ष भय अथवा प्रेम द...

जानिए, क्या है राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली? कैसे, कितना और कबतक अपेक्षित है आपका योगदान

जानिए, क्या है राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली? कैसे, कितना और कबतक अपेक्षित है आपका योगदान @ कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गयी एक पेंशन-योजना है, जिसे रिटायरमेंट सेविंग स्कीम करार दिया जाता है। यह एक प्रकार की पेंशन कम इन्वेस्टमेंट स्कीम है जो कि बाजार आधारित रिटर्न की गारंटी देती है। इसको ई-ई-ई यानी अंशदान पर निवेश, प्रतिफल और निकासी तीनों स्तर पर कर में छूट प्राप्त होती है, जैसा कि कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ और लोक भविष्य निधि यानी पीपीएफ योजनाओं के मामले में है।  उल्लेखनीय है कि एनपीएस के तहत कर्मचारी सेवानिवृत्ति के समय कुल जमा कोष में से 60 प्रतिशत राशि निकालने का पात्र है, जबकि शेष 40 प्रतिशत जुड़ी राशि पेंशन योजना में चली जाती है। यह योजना 1 जनवरी 2004 से आरम्भ हुई थी। आरंभ में यह योजना सरकार में भर्ती होने वाले नए व्‍यक्तियों यानी सशस्‍त्र सेना बलों के अलावा, के लिए आरंभ की गई थी। लेकिन इसकी बढ़ती लोकप्रियता के बाद 1 मई 2009 से यह स्‍वैच्छिक आधार पर असंगठित क्षेत्र के कामगारों सहित देश के सभी नागरिकों को प्र...

नोटा के लाभ या हानि का आकलन तो तब होगा जब इसके बहुमत को स्पष्ट आकार व मान्यता मिले

नोटा के लाभ या हानि का आकलन तो तब होगा जब इसके बहुमत को स्पष्ट आकार व मान्यता मिले @ कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार किसी भी लोकतंत्र में 'नन ऑफ द एबभ' यानी नोटा की अवधारणा विकसित करना अच्छी बात तब मानी जा सकती है, जबकि उसके बहुमत की स्थिति में पुनः निर्वाचन कराने की नौबत नहीं आए। साथ ही, अगले पूरे पांच साल तक शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी उस क्षेत्र का पदेन प्रतिनिधित्व इसलिए करें, या फिर नोटा में शामिल मतदाता ही आम राय या बहुमत से बाद में बताएं कि उनका प्रतिनिधित्व कौन करेगा, क्योंकि जनता का बहुमत अपने सभी समकालीन नेताओं को खारिज कर चुका है। इसलिए उनके नेतृत्व तय करने की जिम्मेदारी उन्हीं पर छोड़ता अधिक व्यवहारिक पहल होगी। लेकिन दुर्भाग्यबस हमारे कानून निर्माता राजनेता व नौकरशाह इस स्पष्ट नीति तक क्यों नहीं पहुंच पाए हैं, यह हमारे समझ से परे है! या फिर यह भी हो सकता है कि नौकरशाहों पर नेताओं का परोक्ष दबाव हो! और न्यायपालिका भी इस बाबत स्पष्ट निर्देश देने से महज इसलिए बची होगी कि विद्वान वकीलों ने इस ओर उनका ध्यान ही नहीं खींचा होगा। इसलिए इस आलेख के माध्यम से यह विषय हम जि...

जनहित याचिकाओं के सबल पक्ष को याद रखिये, भूल जाइए निर्बल पक्ष

जनहित याचिकाओं के सबल पक्ष को याद रखिये, भूल जाइए निर्बल पक्ष  # भारत का उच्चतम न्यायालय द्वारा जनता या अधीनस्थ व समकक्ष न्यायालय को सुपुर्द किया गया एक अहम कानूनी औजार है जनहित याचिका @ कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार भारतीय कानून में सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए जनहित याचिका के तौर पर जो मुकदमें करने का प्रावधान है, वह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अन्य सामान्य अदालती याचिकाओं से अलग है। इसकी खास बात यह है कि इसमें यह आवश्यक नहीं है कि पीड़ित पक्ष स्वयं अदालत में जाए, बल्कि यह किसी भी नागरिक या स्वयं न्यायालय द्वारा पीड़ितों के पक्ष में दायर किया जा सकता है। इसके पक्ष और विपक्ष में कई बातें कही जाती हैं, लेकिन निर्विवाद रूप से इसके महत्व से इंकार नहीं किया जा सकता है। भारतीय न्यायिक व्यवस्था का यह ऐसा अवदान है, जिसकी चाहे जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है। ऐसा इसलिए कि इससे आम आदमी के सकारात्मक पक्ष को मजबूती मिली है। यह बात अलग है कि कभी कभी इसके दुरूपयोग की बातें भी सामने आती हैं, लेकिन तब विद्वान जजों द्वारा ऐसे तत्वों को स्पष्ट आईना भी दिखा दिया गया है, जिससे इसके अनुप्...

एसआईपी: यदि बेस्ट म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना चाहते हैं तो विलम्ब मत कीजिए

# एसआईपी: यदि बेस्ट म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना चाहते हैं तो विलम्ब मत कीजिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार वर्ष दर वर्ष कैसे गुजर गए, बहुतों को पता भी नहीं चल पाया। कई लोग तो बेस्ट म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने के बारे में एसआईपी को लेकर जोड़-घटाव करते रहे, लेकिन कर नहीं पाए। वे निवेश सम्बन्धी गुणा-भाग में इस कदर उलझे रहे कि अंततोगत्वा यह तय ही नहीं कर पाए कि कब, कहां, कैसे और कितना इन्वेस्ट करना है? फिलवक्त तेजी से बीतते वर्ष में आप अपने हिसाब से नया निवेश कैसे और कहां कर सकते हैं। इसलिए हम आपको बता रहे हैं एसआईपी शुरू करने के लिए टॉप फंड के बारे में जिसे आप इस साल ही शुरू कर सकें। हालांकि, इस बार हमने एक मामूली परिवर्तन करते हुए अपनी सूची से आदित्य बिड़ला सन लाइफ टॉप-10 को हटाया है। दरअसल, यह निर्णय इसलिए लिया गया, क्योंकि यह फंड हमारे तीन साल और पांच साल के पैमाने पर निरंतरता दिखाने में पूरी तरह से असफल रहा है जिसका सीधा असर आपके पोर्टफोलियो पर पड़ता और आपका कुल रिटर्न घट जाता। यही वजह है कि हमने आदित्य बिड़ला सन लाइफ टॉप-10 के बजाय मिराय एसेट इंडिया ऑपर्ट्यूनिटीज-जी और ...

यदि आपको पुलिस कर रही हो गिरफ्तार तो ये हैं आपके कानूनी अधिकार

यदि आपको पुलिस कर रही हो गिरफ्तार तो ये हैं आपके कानूनी अधिकार @ कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार यदि पुलिस किसी को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार करती है तो यह न सिर्फ भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता मतलब सीआरपीसी का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20, 21 और 22 में दिए गए मौलिक अधिकारों के भी विरूद्ध है। दरअसल, किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी से सम्बंधित प्रावधानों का उल्लेख सीआरपीसी में मिलता है, खासकर भाग-5 धारा-41 से धारा-61 ए उन सभी प्रक्रियायों व कार्यों के बारे में उपबंध करता है जो प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों व कर्तव्यों से सम्बंधित है।  इस बात में कोई दो राय नहीं कि गिरफ़्तारी हमेशा कोई अपराध करने या फिर किसी अपराध करने से विरत रहने के लिए की जाती है। क्योंकि समाज में विधि का शासन हो, कानून व्यवस्था मौजूद रहे, इसी दिशा में पुलिस प्रशासन कार्यरत रहता है। लिहाजा, वह उन व्यक्तियों को उन दशाओं में गिरफ्तार कर सकता है, जब वह किसी कानून का उल्लंघन करता है जो कि कानून की नज़र में अपराध है।  कहने का तातपर्य यह कि पुलिस को जब किसी व्यक्ति के द्वारा कोई संज्ञेय अपराध...