Collaboration Camp: The Identity of a New Bihar (सहयोग शिविर : नए बिहार की पहचान)
सहयोग शिविर : नए बिहार की पहचान कवि : कमलेश पांडेय https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 न टालमटोल, न कोई बहाना, अब बदला है शासन का तराना। जनता के द्वार स्वयं प्रशासन, यही है सेवा, यही सुशासन। फाइलों की धूल झाड़ दी गई, लालफीताशाही हार गई। बिचौलियों के टूटे जाल, जनता को मिला अधिकार विशाल। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 सहयोग शिविर बना विश्वास, जन-जन को मिला नया प्रकाश। अधिकारी बैठे गाँव-गाँव, सुनते हर पीड़ा, हर घाव। अब नहीं महीनों का इंतजार, तुरंत समाधान, तुरंत विचार। न्याय पहुँचता घर के द्वार, यही है विकास का असली सार। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 कड़क नेतृत्व, दृढ़ संकल्प, जनहित जिसका सर्वोत्तम विकल्प। सम्राट चौधरी के मार्गदर्शन में, बिहार बढ़ रहा नव सृजन में। सत्ता नहीं केवल सम्मान, जनसेवा ही है उनकी पहचान। साफ नीयत, ईमानदार विचार, बना र...