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Collaboration Camp: The Identity of a New Bihar (सहयोग शिविर : नए बिहार की पहचान)

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                सहयोग शिविर : नए बिहार की पहचान कवि : कमलेश पांडेय https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 न टालमटोल, न कोई बहाना, अब बदला है शासन का तराना। जनता के द्वार स्वयं प्रशासन, यही है सेवा, यही सुशासन। फाइलों की धूल झाड़ दी गई, लालफीताशाही हार गई। बिचौलियों के टूटे जाल, जनता को मिला अधिकार विशाल। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 सहयोग शिविर बना विश्वास, जन-जन को मिला नया प्रकाश। अधिकारी बैठे गाँव-गाँव, सुनते हर पीड़ा, हर घाव। अब नहीं महीनों का इंतजार, तुरंत समाधान, तुरंत विचार। न्याय पहुँचता घर के द्वार, यही है विकास का असली सार। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 कड़क नेतृत्व, दृढ़ संकल्प, जनहित जिसका सर्वोत्तम विकल्प। सम्राट चौधरी के मार्गदर्शन में, बिहार बढ़ रहा नव सृजन में। सत्ता नहीं केवल सम्मान, जनसेवा ही है उनकी पहचान। साफ नीयत, ईमानदार विचार, बना र...

I am a word merchant! (मैं शब्दों का दुकानदार हूँ!)

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मैं शब्दों का दुकानदार हूँ! https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 ✍️  कवि: कमलेश पांडेय मैं शब्दों का दुकानदार हूँ, विचारों का सौदागर समझो, मन की मिट्टी से गढ़ता हूँ, मुझको भावों का आगर समझो। मेरी पूँजी अक्षर-अक्षर है, सपनों का व्यापार नहीं, सच की लौ से दीप जलाता, झूठों का बाजार नहीं। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 कभी कलम तलवार बन जाती, कभी मरहम का काम करे, कभी सवालों की आंधी बन, सत्ता से सीधा संवाद करे। मैं बेचूँ नहीं जमीर किसी का, न ही सत्य गिरवी रखता हूँ, जनमन की पीड़ा को सुनकर, शब्दों में उसको लिखता हूँ। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 मेरी दुकान सजी रहती है, अनुभव, संघर्ष, विश्वासों से, कुछ गीतों की खुशबू लेकर, कुछ आँसू के इतिहासों से। जो चाहे ले जाए मुझसे, आशा, चेतन, नई उमंग, मैं शब्दों का दुकानदार हूँ, विचारों का सौदागर संग। कलम मेरी पहचान बने, जनहित मेरा धर...

The social and political implications of the questions constantly raised regarding the RSS's registration and funding. (आरएसएस के रजिस्ट्रेशन और फंडिंग के बारे हमेशा सवाल उठने के सामाजिक व राजनीतिक मायने)

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आरएसएस के रजिस्ट्रेशन और फंडिंग के बारे हमेशा सवाल उठने के सामाजिक व राजनीतिक मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 जो लोग अमूमन देश भक्त संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के रजिस्ट्रेशन, फंडिंग और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठाते हैं, वही लोग आरएसएस (RSS) जैसी अन्य वैचारिक संस्थाएं जैसे, Jamaat-e-Islami Hind जैसी धार्मिक-सामाजिक संस्था, Vishwa Hindu Parishad जैसे सांस्कृतिक संगठन, विभिन्न चर्च, गुरुद्वारा और मंदिर ट्रस्ट, वक्फ संस्थाएं के अलावा लाखों एनजीओ, सोसाइटियां और धर्मार्थ ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के बारे में  रणनीतिक चुप्पी साध लेते हैं, आखिर ऐसा क्यों? क्या इसके पीछे कोई सामाजिक, राजनीतिक वजह है या साम्प्रदायिक कारण है?  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 जानकार बताते हैं कि ऐसे सिर्फ आरएसएस के बारे में  उठने वाले सियासी मौसमी सवालों के के...

How can AI be leveraged in the publishing business while ensuring the continued relevance of editors in the industry? (प्रकाशन व्यवसाय में एआई (AI) की मदद कैसे ली जाए कि इंडस्ट्री में संपादक की उपयोगिता बनी रहे?)

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प्रकाशन व्यवसाय में एआई (AI) की मदद कैसे ली जाए कि इंडस्ट्री में संपादक की उपयोगिता बनी रहे? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रिंट, डिजिटल या वीडियो प्रकाशन/प्रसारण व्यवसाय में एआई (Artificial Intelligence) का बढ़ता प्रभाव कई संपादकों को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि कहीं उनकी भूमिका समाप्त तो नहीं हो जाएगी। लेकिन वास्तविकता यह है कि एआई संपादकों का विकल्प नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली सहायक उपकरण बन सकता है। जो संपादक एआई को अपनाएंगे, उनकी उपयोगिता और प्रभाव पहले से अधिक बढ़ सकता है। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 सवाल है कि प्रकाशन व्यवसाय में एआई का उपयोग कैसे करें? तो यह जान लीजिए कि निम्नलिखित प्रकार से आप इसका उपयोग कर सकते हैं:- पहला, शोध और तथ्य-संग्रह में एआई का उपयोग कीजिए, क्योंकि एआई कुछ ही मिनटों में किसी विषय पर उपलब्ध सामग्री, रिपोर्ट, दस्तावेज और पृष्ठभूमि जानकारी जुटा सकता है। अब रही संपा...

Burning questions regarding institutional registration and funding, such as that of the RSS. (आरएसएस जैसे संस्थागत रजिस्ट्रेशन और फंडिंग के दृष्टिगत सुलगते सवाल)

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आरएसएस जैसे संस्थागत रजिस्ट्रेशन और फंडिंग के दृष्टिगत सुलगते सवाल https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक किसी भी सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक या गैर-सरकारी संगठन (NGO) के संदर्भ में जब उसके रजिस्ट्रेशन, वित्तीय स्रोतों और धन के उपयोग को लेकर सवाल उठते हैं, तो यह केवल कानूनी मुद्दा नहीं रह जाता, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक विश्वास का प्रश्न बन जाता है।आखिर ये सवाल क्यों उठते हैं कि फलां-फलां संगठन की कानूनी स्थिति क्या है? क्या वह सोसायटी, ट्रस्ट, कंपनी या किसी अन्य स्वरूप में पंजीकृत है?  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 स्वाभाविक सवाल है कि यदि पंजीकृत नहीं है, तो उसकी गतिविधियां किस कानूनी ढांचे के अंतर्गत संचालित हो रही हैं? उसकी फंडिंग का स्रोत क्या है? धन आम जनता के दान से आता है या संस्थागत सहयोग से? क्या विदेशी स्रोतों से वित्तीय सहायता प्राप्त होती है? क्या सभी वित्तीय स्रोत संबंधित कान...

Emperor of the People (जन-जन के सम्राट)

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जन-जन के सम्राट @ कमलेश पांडेय/कवि  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 सत्ता के ऊँचे सिंहासन से, जो जनता का दर्द समझता है, भीड़ नहीं, इंसानों में जो अपने सपनों का भारत रचता है। गाँव की धूल, शहर की धड़कन, जिसकी राजनीति का आधार बने, सुख-दुःख में जो साथ खड़ा हो, जनता का सच्चा सरोकार बने। नहीं महलों की चकाचौंध में, अपना पथ वह भूल गया, जन-मन की आकांक्षाओं से जो हर दिन जुड़ना कबूल गया। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 किसानों की आशा की फसलें, युवाओं के सपनों की उड़ान, शिक्षा, रोजगार और विकास का जिसके मन में बसता अभियान। सुनता है वह हर आवाज़ को, चाहे छोटी हो या बड़ी, जनसेवा को धर्म मानकर जिसने अपनी राह गढ़ी। बिहार की धरती कहती है, नेतृत्व वही महान बने, जो पद से नहीं, व्यवहार से जन-जन की पहचान बने। जनहित जिसका प्रथम व्रत हो, सेवा जिसका सम्मान हो, ऐसे जननायक के जीवन में सदा सफलता का गान हो। सम्राट नहीं केवल नाम से, जनविश्वास का प्रहरी हो, जनता के सुख-दुःख का सा...

Political implications of cross-voting in Rajya Sabha and Legislative Council elections (राज्यसभा व विधान परिषद चुनावों में क्रॉस वोटिंग के सियासी निहितार्थ)

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राज्यसभा व विधान परिषद चुनावों में क्रॉस वोटिंग के सियासी निहितार्थ https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत की राजनीति में हालिया (जून 2026) के राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में क्रॉस वोटिंग के सबसे चर्चित मामले मुख्यतः झारखंड और कर्नाटक में सामने आए हैं, जिनके अपने-अपने सियासी निहितार्थ हैं। ऐसा इसलिए कि इन दोनों घटनाओं ने क्रमशः कांग्रेस और भाजपा की हेकड़ी भरी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। साथ ही खास तरह के राजनीतिक प्रबंधन को लोकतंत्र के लिए खतरा भी करार दे दिया, क्योंकि इससे मतदाताओं के विश्वास को ठेस पहुंची और आया राम, गया राम वाली पूंजीवादी राजनीतिक संस्कृति की बल्ले बल्ले हो गई।  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 लिहाजा, ऐसी राजनीतिक अनैतिकता के खिलाफ स्पष्ट प्रावधान होने चाहिए, ताकि उनके समर्थक मतदाताओं के साथ सियासी छलावा न हो। सबसे पहले समझते हैं कि आखिर क्रॉस वोटिंग का अर्थ क्या है? ...