Emperor of the People (जन-जन के सम्राट)

जन-जन के सम्राट
@ कमलेश पांडेय/कवि 

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सत्ता के ऊँचे सिंहासन से, जो जनता का दर्द समझता है, भीड़ नहीं, इंसानों में जो अपने सपनों का भारत रचता है।

गाँव की धूल, शहर की धड़कन, जिसकी राजनीति का आधार बने, सुख-दुःख में जो साथ खड़ा हो, जनता का सच्चा सरोकार बने।

नहीं महलों की चकाचौंध में, अपना पथ वह भूल गया, जन-मन की आकांक्षाओं से जो हर दिन जुड़ना कबूल गया।

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किसानों की आशा की फसलें, युवाओं के सपनों की उड़ान, शिक्षा, रोजगार और विकास का जिसके मन में बसता अभियान।

सुनता है वह हर आवाज़ को, चाहे छोटी हो या बड़ी, जनसेवा को धर्म मानकर जिसने अपनी राह गढ़ी।

बिहार की धरती कहती है, नेतृत्व वही महान बने, जो पद से नहीं, व्यवहार से जन-जन की पहचान बने।

जनहित जिसका प्रथम व्रत हो, सेवा जिसका सम्मान हो, ऐसे जननायक के जीवन में सदा सफलता का गान हो।

सम्राट नहीं केवल नाम से, जनविश्वास का प्रहरी हो, जनता के सुख-दुःख का साथी, विकास-पथ का पथिक सही हो।

जन-जन की आशा, जन-जन का साथ, यही हो उसकी सच्ची जीत, लोककल्याण की पावन राह पर गूँजती रहे सेवा की प्रीत।

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