Country first, everything else later
देश पहले, सब बाद में
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@ कवि कमलेश पांडेय
जो इस मिट्टी का मान बढ़ाए, उसका हम सम्मान करें,
जो भारत की जड़ों को सींचे, उसका जयगान करें।
लेकिन जो छल, कपट और स्वार्थ से राष्ट्र को कमजोर करे,
ऐसे हर षड्यंत्रकारी से मिलकर खुला प्रतिकार करें।
देश न बिके विचारों से, न धन के व्यापारों से,
भारत जीता है सदियों से अपने ही संस्कारों से।
यह ऋषियों की तपोभूमि है, वीरों की बलिदानी धरती,
इसके कण-कण में गूँज रही है स्वतंत्रता की अमर वंदना भरती।
न्याय रहे संविधान संग, शासन रहे कानूनों पर,
सत्य सदा विजयी हो आखिर, झूठ टिके कब आँधियों पर।
जो भी संस्था, व्यक्ति, दल हो—सब पर एक समान नियम,
राष्ट्रहित सर्वोपरि हो जिसमें, वही हमारा परम धर्म।
विदेशी धन यदि आए भी तो, पारदर्शिता साथ रहे,
जनसेवा का हर इक पैसा जनता के ही हाथ रहे।
न सेवा के नाम पर छल हो, न नफरत का व्यापार चले,
भारत की उन्नति के पथ में कोई भी अवरोध न पले।
सीमा पर प्रहरी जाग रहे, खेतों में अन्न उगाते लोग,
प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिक, श्रम से सपने सजाते लोग।
उनके पसीने की कीमत पर कोई सौदा होने न पाए,
राष्ट्रगौरव की पावन ज्योति कभी धुंधली होने न पाए।
युवा बने चरित्र के प्रहरी, शिक्षा बने उजियारा,
विज्ञान, नीति, परिश्रम से ही बदले भारत सारा।
जाति-धर्म से ऊपर उठकर कर्म बने पहचान हमारी,
विश्वगुरु बनने की राह यही, यही विजय की तैयारी।
न्यायालय का मान रहे, संसद की गरिमा भी अक्षुण्ण,
लोकतंत्र की पावन धारा बहती रहे सदा अविरल पूर्ण।
मतभेद रहें तो रहें मगर, मनभेद कभी न होने पाएँ,
भारत माँ के हित की खातिर सब एक ध्वजा बन जाएँ।
उठो जवानों! प्रण कर लो अब सत्य-पथ से न हटेंगे,
देशहितों की रक्षा में हम हर संकट से लड़ लेंगे।
स्वार्थ नहीं, परमार्थ हमारा, सेवा ही पहचान रहे,
भारत का मस्तक विश्व-पटल पर सदियों तक ऊँचा रहे।
वंदे मातरम् की गूँज सदा जन-जन के स्वर में बस जाए,
तिरंगे की हर लहराती शान विश्व हृदय को छू जाए।
यही हमारी साध, यही संकल्प, यही अमर अभियान रहे—
भारत पहले, भारत सर्वोपरि, भारत ही सम्मान रहे।
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