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Burning questions regarding institutional registration and funding, such as that of the RSS. (आरएसएस जैसे संस्थागत रजिस्ट्रेशन और फंडिंग के दृष्टिगत सुलगते सवाल)

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आरएसएस जैसे संस्थागत रजिस्ट्रेशन और फंडिंग के दृष्टिगत सुलगते सवाल https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक किसी भी सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक या गैर-सरकारी संगठन (NGO) के संदर्भ में जब उसके रजिस्ट्रेशन, वित्तीय स्रोतों और धन के उपयोग को लेकर सवाल उठते हैं, तो यह केवल कानूनी मुद्दा नहीं रह जाता, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक विश्वास का प्रश्न बन जाता है।आखिर ये सवाल क्यों उठते हैं कि फलां-फलां संगठन की कानूनी स्थिति क्या है? क्या वह सोसायटी, ट्रस्ट, कंपनी या किसी अन्य स्वरूप में पंजीकृत है?  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 स्वाभाविक सवाल है कि यदि पंजीकृत नहीं है, तो उसकी गतिविधियां किस कानूनी ढांचे के अंतर्गत संचालित हो रही हैं? उसकी फंडिंग का स्रोत क्या है? धन आम जनता के दान से आता है या संस्थागत सहयोग से? क्या विदेशी स्रोतों से वित्तीय सहायता प्राप्त होती है? क्या सभी वित्तीय स्रोत संबंधित कान...

Emperor of the People (जन-जन के सम्राट)

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जन-जन के सम्राट @ कमलेश पांडेय/कवि  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 सत्ता के ऊँचे सिंहासन से, जो जनता का दर्द समझता है, भीड़ नहीं, इंसानों में जो अपने सपनों का भारत रचता है। गाँव की धूल, शहर की धड़कन, जिसकी राजनीति का आधार बने, सुख-दुःख में जो साथ खड़ा हो, जनता का सच्चा सरोकार बने। नहीं महलों की चकाचौंध में, अपना पथ वह भूल गया, जन-मन की आकांक्षाओं से जो हर दिन जुड़ना कबूल गया। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 किसानों की आशा की फसलें, युवाओं के सपनों की उड़ान, शिक्षा, रोजगार और विकास का जिसके मन में बसता अभियान। सुनता है वह हर आवाज़ को, चाहे छोटी हो या बड़ी, जनसेवा को धर्म मानकर जिसने अपनी राह गढ़ी। बिहार की धरती कहती है, नेतृत्व वही महान बने, जो पद से नहीं, व्यवहार से जन-जन की पहचान बने। जनहित जिसका प्रथम व्रत हो, सेवा जिसका सम्मान हो, ऐसे जननायक के जीवन में सदा सफलता का गान हो। सम्राट नहीं केवल नाम से, जनविश्वास का प्रहरी हो, जनता के सुख-दुःख का सा...

Political implications of cross-voting in Rajya Sabha and Legislative Council elections (राज्यसभा व विधान परिषद चुनावों में क्रॉस वोटिंग के सियासी निहितार्थ)

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राज्यसभा व विधान परिषद चुनावों में क्रॉस वोटिंग के सियासी निहितार्थ https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत की राजनीति में हालिया (जून 2026) के राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में क्रॉस वोटिंग के सबसे चर्चित मामले मुख्यतः झारखंड और कर्नाटक में सामने आए हैं, जिनके अपने-अपने सियासी निहितार्थ हैं। ऐसा इसलिए कि इन दोनों घटनाओं ने क्रमशः कांग्रेस और भाजपा की हेकड़ी भरी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। साथ ही खास तरह के राजनीतिक प्रबंधन को लोकतंत्र के लिए खतरा भी करार दे दिया, क्योंकि इससे मतदाताओं के विश्वास को ठेस पहुंची और आया राम, गया राम वाली पूंजीवादी राजनीतिक संस्कृति की बल्ले बल्ले हो गई।  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 लिहाजा, ऐसी राजनीतिक अनैतिकता के खिलाफ स्पष्ट प्रावधान होने चाहिए, ताकि उनके समर्थक मतदाताओं के साथ सियासी छलावा न हो। सबसे पहले समझते हैं कि आखिर क्रॉस वोटिंग का अर्थ क्या है? ...

So, will the dream of "Islamic imperialism" be shattered after the Iran-US agreement? And what will happen to Israel then? (तो क्या ईरान-अमेरिका समझौते के बाद 'इस्लामिक साम्राज्यवाद' का सपना खटाई में पड़ जाएगा? और फिर इजरायल का क्या होगा?)

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तो क्या ईरान-अमेरिका समझौते के बाद 'इस्लामिक साम्राज्यवाद' का सपना खटाई में पड़ जाएगा? और फिर इजरायल का क्या होगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 दुनियादारी का ज्ञान रखने वाले लोग अब यह जानना समझना चाह रहे हैं कि बहुप्रतीक्षित अमेरिका-ईरान समझौते के बाद अब 'इस्लामिक साम्राज्यवाद' के सपने का क्या होगा? क्या वह खटाई में पड़ जाएगा और 'अब्राहम परिवार' की अंतरराष्ट्रीय एकता मजबूत होगी? और यदि ऐसा हुआ तो फिर इजरायल की उन आक्रामक नीतियों का क्या होगा? जो कि उसकी हिफाजत के लिए बेहद जरूरी समझी जाती हैं। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 ऐसे में यह निष्कर्ष निकालना कि किसी संभावित अमेरिका–ईरान समझौते के बाद "इस्लामिक साम्राज्यवाद" का सपना समाप्त हो जाएगा, वैश्विक कूटनीति और धार्मिक/आध्यात्मिक महत्वाकांक्षा का काफी सरलीकरण होगा। क्योंकि इस्लामी दुनिया स्वयं एकरूप नहीं है; उसमें सुन्न...

फ्रांस में हुई ट्रंफ-मोदी की बहुप्रतीक्षित मुलाकात के वैश्विक कूटनीतिक निहितार्थ (Global diplomatic implications of the much-anticipated Trump-Modi meeting in France?

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फ्रांस में हुई ट्रंफ-मोदी की बहुप्रतीक्षित मुलाकात के वैश्विक कूटनीतिक निहितार्थ https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जब दुनिया के दो बड़े लोकतांत्रिक देशों के मशहूर राष्ट्राध्यक्ष मिलते हैं तो दुनियावी जनकल्याण की बातें अवश्य छिड़ती हैं। हाल ही में जब फ्रांस में भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump की मुलाकात हुई तो इसे केवल द्विपक्षीय शिष्टाचार भर नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके व्यापक राजनीतिक, सामरिक और कूटनीतिक संकेत मिले हैं।  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js? client=ca-pub-6262725213669814 वहीं, Narendra Modi और Donald Trump के बीच हालिया मुलाकात को कई विश्लेषक केवल औपचारिक कूटनीतिक संवाद नहीं, बल्कि व्यक्तिगत समीकरणों को पुनर्जीवित करने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों के रिश्तों पर जमी पूरी "बर्फ" पिघल गई है, लेकि...

आखिर छोटे छोटे दलों को तोड़वाकर भाजपा/कांग्रेस खुद को या गठबंधन को कितना मजबूत बना पाएंगी? (After all, by engineering the split of small parties, how much will the BJP or Congress be able to strengthen themselves or their alliances?)

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आखिर छोटे छोटे दलों को तोड़वाकर भाजपा/कांग्रेस खुद को या एनडीए/इंडिया गठबंधन को कितना मजबूत बना पाएंगी?            client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारतीय राजनीति में भाजपा या कांग्रेस जैसे बड़े दलों और क्षेत्रीय दलों के संबंध अक्सर सहयोग, प्रतिस्पर्धा और संघर्ष—तीनों पर आधारित होते हैं। यही वजह है कि पहले कांग्रेस द्वारा और अब भाजपा द्वारा छोटे-छोटे क्षेत्रीय और जातीय आधार वाले दलों को अपने साथ मिलाना, उनका विलय कराना या उनके नेताओं को पार्टी में शामिल कराना भारतीय राजनीति की एक महत्वपूर्ण रणनीति रही है।  client=ca-pub-6262725213669814 वाकई कोई कम, कोई ज्यादा, क्योंकि इसका उद्देश्य केवल सीटें बढ़ाना नहीं, बल्कि विपक्षी सामाजिक समीकरणों को कमजोर करना और अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करना भी होता है। इस यक्ष प्रश्न समुपस्थित है कि आखिर छोटे छोटे दलों को तोड़वाकर भाजपा/कांग्रेस खुद को या एनडीए/इंडिया गठबंधन को कितना मजबूत बना पाएंगी? देखा जाए तो भारत की बहुदलीय राजनीति में...

जी-7 क्या है? इसके वैश्विक मायने क्या हैं? दुनिया के विभिन्न महत्वपूर्ण देशों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? (What is the G-7? What are its global implications? What impact will it have on various important countries around the world?)

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जी-7 क्या है? इसके वैश्विक मायने क्या हैं? दुनिया के विभिन्न महत्वपूर्ण देशों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?  client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक client=ca-pub-6262725213669814 दुनिया के अस्ताचलगामी शक्तिशाली देशों के रणनीतिक संगठन जी-7 की शिखर बैठक फ्रांस के एवि‍यां (Évian-les-Bains) शहर में 15–17 जून 2026 तक आयोजित हुई, जिसमें महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसी बैठ में सवा साल मोदी-ट्रंफ की भी मुलाकात हुई, जिसका अपना बहुपक्षीय महत्व है। देखा जाए तो जी-7 अब केवल अमीर देशों का क्लब नहीं है; बल्कि यह वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, तकनीकी शासन, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। हालांकि इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि यह विकसित देशों के हितों से आगे बढ़कर व्यापक वैश्विक सहमति बना पाता है या नहीं। client=ca-pub-6262725213669814 जी-7 क्या है? इसके वैश्विक मायने क्या हैं? और दुनिया के विभिन्न महत्वपूर्ण देशों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? इसकी चुनौतियां क्या हैं और किस ब...