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दिल्ली-एनसीआर में ग्वालियर के मरीजों का सहारा बनेगा शारदा केयर हॉस्पिटल: गौरव पांडेय

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दिल्ली-एनसीआर में ग्वालियर के मरीजों का सहारा बनेगा शारदा केयर हॉस्पिटल, अब आयुष्मान योजना के तहत होगा सम्पूर्ण इलाज स्वास्थ्य संपादक, राजनैतिक दुनिया नई दिल्ली/ग्वालियर। दिल्ली-एनसीआर के ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा केयर अस्पताल में अब मध्यप्रदेश के ग्वालियर इलाके से इलाज के लिए आने वाले मरीजों का अब आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज होगा। इस बात की जानकारी  दिल्ली शारदा केयर हॉस्पिटल के अधिकारियों ने दी। इस हेतु गत रविवार को ग्वालियर के होटल लैंडमार्क में एक सीएमई का आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से ग्वालियर के डॉक्टर टीम को अपनी विशेषताओं से अवगत करवाते हुए इस बात की जानकारी दी गई।  इस मौके पर बताया गया कि शारदा केयर हॉस्पिटल आयुष्मान कार्ड से समस्त सर्जरी एवं मेडिसिन डिपार्टमेंट का पूरा इलाज करता है। जिसका लाभ अब ग्वालियर के लोग भी उठा सकते हैं। बताया जाता है कि शारदा केयर हॉस्पिटल जो एक नॉन प्रॉफिटेबल हॉस्पिटल है, इसका मुख्य उद्देश्य कम खर्च में विश्वस्तरीय सुविधाएं देने का है। इस मौके पर शारदा केयर हॉस्पिटल की दिल्ली एनसीआर यूनिट से आए मीडिय...

Sharda Care Hospital will be the support of patients of Gwalior in Delhi-NCR: Gaurav Pandey

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Sharda Care Hospital will be the support of patients of Gwalior in Delhi-NCR, now full treatment will be done under Ayushman scheme Health Editor, Rajnaitik Duniya New Delhi/Gwalior: The patients coming for treatment from the Gwalior area of Madhya Pradesh at Sharda Care Hospital in Greater Noida, Delhi-NCR, will now get free treatment under the Ayushman scheme. Officials of Delhi Sharda Care Hospital gave this information. For this, a CME was organized at Hotel Landmark in Gwalior on Sunday, through which the doctor team of Gwalior was informed about this by making them aware of their specialties.  On this occasion, it was told that Sarada Care Hospital treats all the surgeries and medicine departments with Ayushman card. The people of Gwalior can also take advantage of it. It is said that Sharda Care Hospital, which is a non-profitable hospital, is intended to provide world class facilities at low cost.  On this occasion, Media Communicati...

अरावली पर्वतश्रृंखला पर जारी सियासत के बीच सजग हुई सरकार से जगी उम्मीदें

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अरावली पर्वतश्रृंखला पर जारी सियासत के बीच सजग हुई सरकार से जगी उम्मीदें @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक दिल्ली-एनसीआर के लिए प्राकृतिक वरदान समझी जाने वाली अरावली पर्वतश्रृंखला पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दृष्टिगत और प्रस्तावित अरावली सत्याग्रह के बीच केंद्र सरकार ने विभिन्न राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस पर्वतमाला क्षेत्र में अब किसी भी प्रकार के नए खनन पट्टे (माइनिंग लीज) जारी न किए जाएं। इससे साफ है कि अरावली पर्वतश्रृंखला पर जारी सियासत के दृष्टिगत  केंद्र सरकार अब सजग हो चुकी है और जनहित के मद्देनजर आवश्यक दिशानिर्देश जारी किया है। इससे अरावली पर्वतश्रृंखला में जैव विविधता के संरक्षण की उम्मीद भी बढ़ी है। यदि वाकई ऐसा होता है तो देश की राजधानी नई दिल्ली के लिए यह शुभ कदम होगा। यहां के जल संरक्षण, वायु संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण आदि की दिशा में इसके सकारात्मक प्रभाव जल्द दिखेंगे। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने गत बुधवार को इस बारे में एक नया आदेश जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया हुआ है कि यह प्रतिबंध गुजरात, राजस्थान, हरिय...

सुशासन पुरूष अटल बिहारी बाजपेयी की दूरदर्शिता भरी नीतियों से भारत-भाजपा को मिली मुकम्मल उड़ान

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सुशासन पुरूष अटल बिहारी बाजपेयी की दूरदर्शिता भरी नीतियों से भारत-भाजपा को मिली मुकम्मल उड़ान @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक कवि मिजाज के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व व कृतित्व की अनुगूंज अब तलक देश-प्रदेश के हर कोने में सुनाई देती है। इसलिए भारत सरकार उनकी जयंती को सुशासन दिवस (25 दिसम्बर) के रूप में मनाती है, क्योंकि उनके जीवन का शाश्वत संदेश अटूट संकल्प, अनवरत संघर्ष, लोकनिष्ठ ईमानदारी, पारस्परिक एकता और मनःस्थित शांति पर केंद्रित हैं। निर्विवाद रूप से उनके विचारों ने राजनीति, समाज और व्यक्तिगत जीवन को प्रेरित तथा अनुप्राणित किया है। सच कहूं तो ये संदेश उनकी कविताओं, भाषणों और नीतियों से निकले हैं।  परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों ने समकालीन राजनीति को गहनता पूर्वक प्रभावित किया, विशेष रूप से भाजपा की उदार छवि, आर्थिक सुधारों और विदेश नीति में। उनके शांति-केंद्रित राष्ट्रवाद ने विपक्षी दलों को भी प्रभावित किया। ये प्रभाव आज भी मोदी सरकार की नीतियों में दिखते हैं। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रमुख राजनीतिक सिद्धांत राष्ट्...

आखिर आरएसएस को भाजपा के नजरिए से न देखें तो फिर कैसे देखें, बना यक्ष प्रश्न!

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आखिर आरएसएस को भाजपा के नजरिए से न देखें तो फिर कैसे देखें, बना यक्ष प्रश्न! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक मोहन भागवत ने कोलकाता में हाल ही में दिए बयान में कहा कि आरएसएस को भाजपा के नजरिए से देखना बड़ी गलती है, क्योंकि इससे संगठन की सच्ची प्रकृति का गलत अंदाजा लगता है। देखा जाए तो भागवत का यह बयान आरएसएस की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को राजनीतिक चश्मे से अलग करने के उद्देश्य से आया है। लेकिन इसके सियासी मायने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय दोनों दृष्टि से अहम हैं। इसलिए देश-दुनिया के पक्ष-विपक्ष में यह बहस छिड़ चुकी है कि आखिरकार भाजपा (पूर्व नाम जनसंघ)  के मातृ संगठन समझे जाने वाले आरएसएस को बदलती भाजपा की अवसरवादी नजरिए से न देखें तो आप लोग ही बता दें कि फिर कैसे देखें? मसलन, भागवत ने स्पष्ट किया है कि आरएसएस का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है और इसे न तो केवल सेवा संगठन समझा जाए, न ही भाजपा से जोड़कर। ऐसा उन्होंने इसलिए कहा क्योंकि कई लोग/दल गलती से आरएसएस को भाजपा से सीधे जोड़ते हैं, जबकि संगठन समाज निर्माण और हिंदू एकता पर केंद्रित है। चूंकि कोलकाता ...

पीएम मोदी की चार दिवसीय जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान यात्रा के कूटनीतिक निहितार्थ को ऐसे समझिए

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पीएम मोदी की चार दिवसीय जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान यात्रा के कूटनीतिक निहितार्थ को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चार दिवसीय विदेश यात्रा (15-18 दिसंबर 2025) के क्रम में इस बार मध्य-पूर्व एशियाई और अफ्रीकी देशों यथा- जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की यात्रा की और द्विपक्षीय कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत बनाया। पीएम मोदी के इस ताजा दौरे पर भी अमेरिका-चीन-रूस व यूरोपीय-एशियाई देशों की नजरें केंद्रित हैं, जो मध्य पूर्व और अफ्रीका में भारत की स्वतंत्र कूटनीतिक मजबूती को रेखांकित करती है। निर्विवाद रूप में पीएम मोदी की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक गहरा करने, व्यापार बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता पर केंद्रित है। सच कहूं तो यह यात्रा भी अमेरिका द्वारा पाकिस्तान-बंगलादेश के मार्फ़त भारत को घेरने की क्षुद्र रणनीति का अपने हिसाब से कूटनीतिक जवाब ही है, जिससे चीन का भी चौकन्ना हो जाना स्वाभाविक है। जहां तक जॉर्डन दौरा की बात है तो यह दौरा भारत-जॉर्डन राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जहां पीएम मो...

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को समर्पित 'वीबी-जी राम जी योजना' के सियासी मायने को ऐसे समझिए

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सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को समर्पित 'वीबी-जी राम जी योजना' के सियासी मायने को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक वीबी-जी राम जी योजना, जिसका पूरा नाम 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' है, मनरेगा को प्रतिस्थापित करने वाले नए विधेयक के रूप में जब भारतीय संसद में पेश की गई तो विपक्षी दलों ने भारी एतराज जताया। फलस्वरूप यह योजना संसद में भारी विवाद का कारण बनी क्योंकि विपक्ष ने इसे महात्मा गांधी के नाम वाली ऐतिहासिक योजना का अपमान माना। विपक्षी दलों का आरोप है कि योजना का नाम 'जी राम जी' रखकर गांधीजी के नाम को हटाया गया, जिसे वे 'गोडसे राम' विधेयक कह रहे हैं।  शायद इन विपक्षी राजनेताओं को याद नहीं है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और हे राम शब्द एक दूसरे के पूरक समझे जाते हैं, क्योंकि हे राम! उनके जीवन के अंतिम शब्द हैं जो उनकी स्मृति स्थल 'राजघाट' पर मोटे अक्षरों में खुदे हुए हैं।इसलिए चाहे मनरेगा और या फिर वीबी-जी राम जी इससे जनसेवा की सोच में कोई खास अंतर नहीं पड़ता है।हां, यदि तुष्टीकरण की सि...