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मोदी शासन: एक रुद्र बनाम रौद्र रूप के सियासी मायने को ऐसे समझिए

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मोदी शासन: एक रुद्र बनाम रौद्र रूप, गर्व कीजिए कि हम भारतीय हैं! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक सदैव लोककल्याणकारी देवाधिदेव महादेव के दरबार में एक रुद्र का मतलब ग्यारह होता है। सनातन धर्म में यह बेहद कल्याणकारी अंक समझा जाता है। इस नजरिए से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजनीतिक क्लोन भारतीय जनता पार्टी के देशव्यापी शासन के छठवीं पारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निरंतरता के 11 वर्ष पूरे होने पर देशवासियों यानी हर हिंदुस्तानी को गर्व तो होना ही चाहिए। क्योंकि इसी वर्ष पाकिस्तान द्वारा प्रोत्साहित और चीन-अमेरिका द्वारा उकसाए हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद दी गई जवाबी प्रतिक्रिया में भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारी संयुक्त सेनाओं ने जो अपना रौद्र रूप दिखलाया है, वह काबिलेतारीफ है। इसने दुनियावी महाशक्तियों को अपनी हद में रहने अन्यथा दुष्परिणाम झेलने का दो टूक संदेश दिया है। कहना न होगा कि भारतीयों की यह महानतम उपलब्धि अनायास नहीं है, बल्कि मोदी सरकार की ग्यारह वर्षीय सैन्य साधना का चमत्कार है। यह आरएसएस के शताब्दी वर्ष को और भाजपा...

क्या बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के सियासी झोंके में बुझ जाएगा 'लोजपा आर' का 'राजनीतिक चिराग'?

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क्या बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के सियासी झोंके में बुझ जाएगा 'लोजपा आर' का 'राजनीतिक चिराग'? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक आगामी अक्टूबर-नवम्बर माह में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर कुछ राजनेता जो बयानवीर बनकर सियासी गलतफहमियां परोस रहे हैं, वह यदि उनके दल के ऊपर भारी पड़ गईं तो किसी को हैरत नहीं होगी, क्योंकि जैसी करनी वैसी भरनी ही बिहार की राजनीतिक नियति का स्पष्ट चक्र रहा है। जिस तरह से यहां पर जातिवादी समाजवादी नेता लालू प्रसाद (पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार) और नीतीश कुमार (मौजूदा मुख्यमंत्री, बिहार) ने लंबा शासन किया और आपसी समझदारी से किसी दूसरे की सियासी दाल नहीं गलने दी, वैसा उदाहरण किसी अन्य प्रदेश में कभी नहीं मिला! यही वजह है कि बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए "एक अनार सौ बीमार" की तर्ज पर चाहे जितने भी दावे कर लिए जाएं, लेकिन अंततोगत्वा क्या होगा, यह तो चुनाव परिणाम और लालू-नीतीश के इशारे पर उनके भरोसेमंद शागिर्द ही तय करेंगे, जो सूबाई सियासी खेला करने में माहिर समझे जाते हैं। यह अजीबोगरीब है कि कभी ल...

आतंकवाद के मुकाबिल बदलती अमेरिकी नीतियों के दृष्टिगत अब भारत को बनानी होगी नई रणनीति?

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आतंकवाद के मुकाबिल बदलती अमेरिकी नीतियों के दृष्टिगत अब भारत को बनानी होगी नई रणनीति? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक आपको पता होना चाहिए कि दमिश्क/अम्मान से रायटर ने गत 2 जून 2025 दिन सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूत के हवाले से खुलासा करते हुए कहा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने सीरिया के नए 'आतंकी/जेहादी' नेतृत्व द्वारा हजारों विदेशी जिहादी यानी पूर्व विद्रोही लड़ाकों को राष्ट्रीय सेना में शामिल करने की योजना को अपनी मंजूरी दे दी है, बशर्ते कि यह पारदर्शी तरीके से हो। जैसा कि तीन सीरियाई रक्षा अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इस योजना के तहत, लगभग 3,500 विदेशी लड़ाके, मुख्य रूप से चीन और पड़ोसी देशों के उइगर, एक नवगठित इकाई, 84वीं सीरियाई सेना डिवीजन में शामिल होंगे, जिसमें सीरियाई भी शामिल होंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये लड़ाके अपनी पुरानी मानसिकता से उबर पाएंगे? उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान को आज तालिबानी जेहादी लड़ाके चला रहे हैं और पाकिस्तान में भी मुस्लिम आतंकवादी लड़ाके सेना का अंग बन चुके हैं जिसकी पुष्टि ऑपरेशन सिंदूर के ...

भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता का बेजा इस्तेमाल के लिए दोषी कौन?

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भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता का बेजा इस्तेमाल के लिए दोषी कौन?  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता अक्षुण्ण रखने के लिए जजों का स्वतंत्र रहना बहुत जरूरी है। लेकिन प्रतिष्ठित पदों पर रहते हुए कतिपय जजों ने जो कुछ कारनामें किए हैं, उसके दृष्टिगत न्यायपालिका में मूलभूत बदलाव नहीं करना जनतंत्र के लिए भी अहितकर साबित हो रहा है। इसलिए यक्ष प्रश्न है कि भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता का बेजा इस्तेमाल के लिए आखिर में दोषी कौन है? और उसके खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने, करवाने में न्यायिक प्रशासन या फिर कार्यपालक प्रशासन के हाथपांव क्यों फूलने लगते हैं? यदि पुरानी बातें छोड़ भी दें तो जस्टिस जे एस वर्मा के खिलाफ जितनी मंथर गति से कार्रवाई चल रही है, वह पूरी संवैधानिक व्यवस्था के लिए गम्भीर चिंता की बात है। इससे भ्रष्टाचार के संलिप्त लोगों को बढ़ावा मिलेगा। सुलगता सवाल है कि किसी भी मामले में जितनी ततपरता पूर्वक आम आदमी के खिलाफ कार्रवाई होती है, उतनी ही ततपरतापूर्वक कार्रवाई किसी खास आदमी के खिलाफ आखिर क्यों नहीं दिख...

रेयर अर्थ एलिमेंट्स उत्पादों पर चीनी निर्यात प्रतिबंधों के चलते विभिन्न उद्योगों पर मंडराते संकट का कूटनीतिक समाधान ढूंढे भारत सरकार!

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रेयर अर्थ एलिमेंट्स उत्पादों पर चीनी निर्यात प्रतिबंधों के चलते भारत का इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग संकट में, अविलंब  कूटनीतिक समाधान खोजे सरकार! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक रेयर अर्थ एलिमेंट्स से जुड़े उत्पादों पर चीन द्वारा गत अप्रैल-मई माह 2025 से लगाए गए निर्यात प्रतिबंध ने भारत के ऑटोमोटिव क्षेत्र, खासकर तेजी से बढ़ते ईवी सेगमेंट, में संकट पैदा कर दिया है। क्योंकि रेयर अर्थ मैग्नेट ईवी मोटर के लिए जरूरी हैं। बता दें कि ईवी वाहनों में प्रति वाहन लगभग 550 ग्राम मटीरियल चाहिए, जबकि सामान्य पेट्रोल-डीजल वाहनों में 140 ग्राम। चूंकि ये मैग्नेट पावर विंडो, ऑडियो सिस्टम और एंटी-लॉक ब्रेक जैसे हिस्सों में भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इन आरईई उत्पादों के बिना इलेक्ट्रिक वेहिकिल्स उद्योग के विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। यही वजह है कि भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माता संघ (SIAM) ने लगातार कम हो रहे स्टॉक की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए समय रहते ही समुचित कदम उठाने की चेतावनी देते हुए दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि जल्द ही इसका समाधान नहीं हुआ तो ईवी उद्योग ‘पूरी त...

रेयर अर्थ एलिमेंट्स क्या हैं? भारत इसका उत्पादन क्यों बढ़ा रहा है? क्या वह वैश्विक महाशक्ति बन सकता है?

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रेयर अर्थ एलिमेंट्स क्या हैं? भारत इसका उत्पादन क्यों बढ़ा रहा है? क्या इसका उत्पादन बढ़ाए बिना भारत वैश्विक महाशक्ति बन सकता है? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक कहावत है कि "अग्र सोची, सदा सुखी।" यानी कि वर्तमान में ही भविष्य की सटीक रणनीति बना लेने वाला व्यक्ति ही हमेशा सुखी रहता है। किसी राष्ट्र के ऊपर भी यह बात अक्षरशः लागू होती है। ऐसे में यदि भारत को वैश्विक महाशक्ति बनना है तो उसे रेयर अर्थ एलिमेंट्स के उत्पादन, संवर्द्धन व विपणन पर ध्यान देना होगा। वहीं, जबतक ऐसा नहीं हो जाता, उसे इसके आपूर्तिकर्ता देशों यानी चीन, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे महत्वपूर्ण देशों के साथ मधुर कारोबारी सम्बन्ध बनाये रखना होगा। इसलिए देशवासियों के जेहन में यह सवाल उठ रहा है कि रेयर अर्थ एलिमेंट्स क्या हैं? भारत इसका उत्पादन क्यों बढ़ा रहा है? और क्या इसका उत्पादन बढ़ाए बिना भारत वैश्विक महाशक्ति बन सकता है? जानकारों का कहना है कि भारत अब दुनिया की चौथी आर्थिक महाशक्ति बन चुका है और शीघ्र ही वह जर्मनी को पछाड़कर तीसरी आर्थिक महाशक्ति भी बन जायेगा। जिस तरह से अब वह...

शब्द शिल्पी आईएएस डॉ दिनेश चंद्र सिंह, जिलाधिकारी, जौनपुर की नई पुस्तक विचार कुंभ, कर्म कुंभ, महाकुंभ 2025 का आमुख तैयार, प्रतिक्रिया आमंत्रित

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आमुख/कर्म-कुंभ/विचार-कुंभ/महा-कुंभ 2025 प्रस्तुत पुस्तक आपके हाथों में समर्पित है। यह विचार पुष्प की भांति है। यह व्यवहार पुष्पमाला सरीखा है, जिससे मानवता व सज्जनता का शृंगार होगा। धर्म हमें जीवन यात्रा हेतु दिव्य दृष्टि और धैर्य प्रदान करता है। इसका साक्षात दर्शन दिव्य व भव्य महाकुंभ 2025 के सफल आयोजन में पूरी दुनिया ने देखा। एक संत शासक के अनुशासन से जीवन कितना संवर व निखर सकता है, इसकी अनुभूति मेरे साथ ही उन तमाम लोगों को भी हुई होगी, जो यहां समीचीन विषय-वस्तु है। अष्टावक्र गीता में कहा गया है कि- "आयासात सकलो दुःखी नैनं जानाति कश्चन। अनेनैवोपदेशेन धन्यः प्राप्नोति निर्वृतिम्।।" (उद्धरण-सूत्र-3, अष्टावक्र गीता-पृष्ठ-220). अर्थात "निज प्रयास से सबलोग दुःखी हैं। इसको कोई नहीं जानता है। इसी उपदेश से भाग्यवान लोग निर्वाण को प्राप्त होते हैं।" देखा जाए तो धन, यश, पद, प्रतिष्ठा, ज्ञान, विद्वता, ऐश्वर्य, समृद्धि आदि सबकुछ प्रयास से ही मिलता है, लेकिन ये सब तो सांसारिक वस्तुएं या भाव हैं। तभी तो तमाम वैज्ञानिक उपलब्धियों से कृषि, यातायात, संचार साधन, वाणिज्य-...