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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर बीजेपी नेता राजकुमार सिंह और वार्ड नम्बर 89 की पार्षद मधु सिंह ने किया योगाभ्यास

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर बीजेपी नेता राजकुमार सिंह और वार्ड नम्बर 89 की पार्षद मधु सिंह ने किया योगाभ्यास गाजियाबाद। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर बीजेपी नेता राजकुमार सिंह और वार्ड नम्बर 89 की पार्षद मधु सिंह ने अपने क्षेत्रीय पार्क में अपने समर्थकों के साथ योगाभ्यास किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि योगा करके आपलोग परम आनंद की प्राप्ति कर सकते हैं। इसलिए करो योग, रहो निरोग।

कौशाम्बी वेलफेयर एसोसिएशन ने सेंट्रल पार्क कौशांबी में मनाया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

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कौशाम्बी वेलफेयर एसोसिएशन ने सेंट्रल पार्क कौशांबी में मनाया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता गाजियाबाद। मंगलवार को कौशाम्बी वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा सेंट्रल पार्क कौशांबी में "अंतरराष्ट्रीय योग दिवस" का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में निवासियों ने हिस्सा लेकर इसे सफल बनाया। ममता मंजू शर्मा एवं के एस त्रिपाठी द्वारा संयुक्त रूप से लोगों को योगा कराया गया। आज के महत्वपूर्ण आयोजन में संघचालक मक्खन लाल, कौशाम्बी निगम पार्षद मनोज गोयल, नगर निगम वसुंधरा जोन की प्रभारी श्रीमती सरिता सिंह, सफाई चीफ पवन, वरिष्ठ भाजपा नेता अवधेश कटियार, वार्ड के अध्यक्ष मुरारी सेठ, भाजपा नेता रवि मेवाती, कौशांबी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित सरीन, कोषाध्यक्ष विजय अग्रवाल, महामंत्री शोभा रानी बर्णबाल, सचिव श्वेताभ  शास्त्री, कार्यकारिणी सदस्य सुधिश अग्रवाल, पार्क समिति प्रमुख नीलम यादव, अनीता जैन, राकेश गुप्ता, चंद्रप्रकाश,  लक्ष्मीकांत चांदना, केवल शेट्टी, सतीश रोहतगी सहित बड़ी संख्या में कौशाम्बी निवासियों ने हिस्सा लिया। आज के इस आयोजन को सफल बनाने के लिए के.डब्ल्यू. ए. ...

वैदिक योग समिति वसुंधरा ने विद्या बाल भवन स्कूल में मनाया आठवां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

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वैदिक योग समिति वसुंधरा ने विद्या बाल भवन स्कूल में मनाया आठवां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस  कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता गाजियाबाद। मंगलवार को वैदिक योग समिति वसुंधरा गाजियाबाद के तत्वावधान में 75 वें आजादी के अमृत महोत्सव पर आठवां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ विद्या बाल भवन स्कूल में मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बीजेपी नेता और वार्ड नम्बर 74 के पार्षद प्रतिनिधि नरेश भाटी ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ हरिदत्त शर्मा और विशिष्ट अतिथि वार्ड नम्बर 54 की पार्षद मंजू त्यागी रहीं। इस अवसर पर वैदिक योग समिति की अध्यक्षा डॉ सुधा राणा ने कार्य का संचालन किया और आयुष मंत्रालय भारत सरकार के प्रोटोकॉल के अनुसार आसन व प्राणायाम करवाए। योग के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में 7 से 9 साल तक के बच्चों में सौम्य, प्रियांशी, शौर्य, युवराज, वान्या, शिवान्या  आदि ने योगी अलग-अलग परफॉर्मेंस बनाकर आदि गुरु शिव जी के 'शिव तांडव स्त्रोत' पर प्रदर्शन करके सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।  वहीं, 'काल के पंजे' वाले भजन पर 35 साल से लेकर 80 साल की महिलाओं ने भी नृत्य योग द्वारा सबके मन को...

कर्म एक सिद्धांत है, एक मॉडल है, एक प्रतिमान है, एक रूपक है और एक आध्यात्मिक रुख है!

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कर्म एक सिद्धांत है, एक मॉडल है, एक प्रतिमान है, एक रूपक है, और एक आध्यात्मिक रुख है! @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस कर्म की एक नहीं, बल्कि कई परिभाषाएं हैं जो विभिन्न अर्थ को अपने में समेटे हुए हैं। कर्म का नियम किसी भी देवता या ईश्वरीय निर्णय की किसी भी प्रक्रिया से स्वतंत्र रूप से संचालित होता है। इसलिए आध्यात्मिकता में विश्वास करने वालों के लिए यह शब्द कारण और प्रभाव के आध्यात्मिक सिद्धांत को भी संदर्भित करता है, जिसे अक्सर वर्णनात्मक रूप से कर्म का सिद्धांत कहा जाता है, जिसमें किसी व्यक्ति यानी कारण के इरादे और कार्य उस व्यक्ति अर्थात प्रभाव के भविष्य को प्रभावित करते हैं। इसलिए अच्छे इरादे और अच्छे कर्म, खुशहाल पुनर्जन्म में योगदान करते हैं, जबकि बुरे इरादे और बुरे कर्म, बुरे पुनर्जन्म में योगदान करते हैं।  # कर्म एक अंतहीन गाँठ जब आप नेपाल जाएंगे तो नेपाली मंदिर के प्रार्थना चक्र पर अंकित एक अंतहीन गाँठ को देखेंगे। स्पष्ट है कि नेपाल के अनंत गाँठ (ऊपर) जैसे कर्म प्रतीक एशिया में सामान्य सांस्कृतिक रूप हैं। अंतहीन गांठें कारण और प्रभाव के परस्पर संबंध का प्रतीक हैं,...

निर्णय क्या है? इसके बारे में विद्वानों की क्या राय है? इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझिए।

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निर्णय क्या है? इसके बारे में विद्वानों की क्या राय है? इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझिए। @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस निर्णय सफलता की जननी है। सही वक्त पर लिया गया समुचित निर्णय उन्नति के मार्ग प्रशस्त करता है। अनुभव बताता है कि किसी अधिकारी/प्रबन्धक का महत्वपूर्ण कार्य निर्णय लेना है। पीटर ड्रकर के मुताबिक, प्रबन्धक जो कुछ भी करता है, निर्णयों के द्वारा ही करता है। हम जानते हैं कि प्रशासकों को दिन-प्रतिदिन अनेक कार्य करने पड़ते हैं और इन कार्यों को करने के लिए उनके पास अनेक विकल्प होते हैं। पर इन विकल्पों में से सर्वोंत्तम विकल्प कौन सा है, इसका निर्धारण करना ही 'निर्णय' लेना है। इसलिए जीवन जगत की इस महत्वपूर्ण विधा में हर किसी को निष्णात होना चाहिए।  टेरी ने इसके बारे में कहा है कि 'प्रशासकों का जीवन ही निर्णय लेना है। यदि प्रशासक की कोई सार्वभौमिक पहचान है, तो वह है उसका निर्णय लेना। प्रशासक को अपने निर्णय प्रबन्ध के कार्यों-नियोजित संगठन, निर्देशन, नियन्त्रण आदि के अन्तर्गत ही लेने पड़ते हैं। इस प्रकार, हम यह कह सकते हैं कि निर्णयन यानी निर्णय प्रबन्ध प्रक...

कर्म क्या है? मनीषियों ने इसके बारे में क्या-क्या निर्णय दिए हैं?

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कर्म क्या है? मनीषियों ने इसके बारे में क्या-क्या निर्णय दिए हैं? @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस किसी भी व्यक्ति के मन में कार्य करने की प्रेरणा अपने आप पैदा होती है। इससे जुड़ा हर निर्णय वह खुद लेता है जो देश-काल-पात्र की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसके बारे में सबकी अवधारणा अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन लक्ष्य एक होता है- समाज सेवा, राष्ट्र सेवा और निज धर्म सेवा, अन्य किसी को आहत किये बिना। दो टूक शब्दों में कहूँ तो कर्म हिंदू धर्म की वह अवधारणा है, जो एक प्रणाली के माध्यम से कार्य-कारण के सिद्धांत की व्याख्या करती है, जहां पिछले हितकर कार्यों का हितकर प्रभाव और हानिकर कार्यों का हानिकर प्रभाव प्राप्त होता है। जो पुनर्जन्म का एक चक्र बनाते हुए आत्मा के जीवन में पुनः अवतरण या पुनर्जन्म की क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं की एक प्रणाली की रचना करती है।  कहा जाता है कि कार्य-कारण सिद्धांत न केवल भौतिक दुनिया में लागू होता है, बल्कि हमारे विचारों, शब्दों, कार्यों और उन कार्यों पर भी लागू होता है जो हमारे निर्देशों पर दूसरे किया करते हैं। जब पुनर्जन्म का चक्र समाप्त हो जाता है, तब...

कर्म निर्णय: गहन है कर्म, अकर्म और विकर्म की गति

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                          कर्म निर्णय: गहन है कर्म, अकर्म और विकर्म की गति @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस श्रीमद्भागवत गीता में कहा गया है कि कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः। अकर्मणश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः।। आशय यह कि कर्म का तत्त्व भी जानना चाहिये और अकर्म का तत्त्व भी जानना चाहिये तथा विकर्म का तत्त्व भी जानना चाहिये; क्योंकि कर्म की गति गहन है। 'कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यम्' यानी कर्म करते हुए निर्लिप्त रहना ही कर्म के तत्त्व को जानना है, जिसका वर्णन आगे अठारहवें श्लोकमें 'कर्मण्यकर्म यः पश्येत्' पदों से किया गया है। कर्म स्वरूप से एक दीखने पर भी अन्तःकरण के भाव के अनुसार उसके तीन भेद हो जाते हैं- कर्म, अकर्म और विकर्म। सकाम भाव से की गयी शास्त्र विहित क्रिया 'कर्म' बन जाती है। वहीं, फलेच्छा, ममता और आसक्ति से रहित होकर केवल दूसरों के हित के लिये किया गया कर्म 'अकर्म' बन जाता है। वहीं, विहित कर्म भी यदि दूसरे का हित करने अथवा उसे दुःख पहुँचाने के भाव से किया गया हो तो वह भी 'विकर्म' बन जाता है। नि...