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फिटनेस मंत्र बन चुकी साइकिल से पर्यावरण प्रदूषण शून्य

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फिटनेस मंत्र बन चुकी साइकिल से पर्यावरण प्रदूषण शून्य @ गौरव पांडेय/वरिष्ठ स्वास्थ्यकर्ता व लेखक यदि आप ग्लोबल वार्मिंग से देश-दुनिया को महफूज रखना चाहते हैं तो रोजमर्रे के कामों में साइकिल का अनुप्रयोग करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करना होगा। इससे न केवल डीजल-पेट्रोल पर व्यय होने वाली विदेशी मुद्रा बचेगी, पर्यावरण प्रदूषण भी कम होगा, बल्कि आमलोग स्वास्थ्य की दृष्टि से भी खुद को ज्यादा फिट महसूस करेंगे। जब हमारे पड़ोसी चीनी लोग और सुदूर मित्र जापानी लोग अपने रोजमर्रा के कार्यों को स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से संपादित करने की जगह सिर्फ साइकिल से सम्पादित कर सकते हैं, तो फिर हम भारतीय क्यों उनसे पीछे रहें। आज हमें इस निकृष्ट सोच से ऊपर उठना चाहिए कि  साइकिल समाज के ऐसे वंचित वर्ग के यातायात का माध्यम है जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट या स्कूटर, मोटरसाइकिल के महंगे ईंधन का खर्च वहन नहीं कर सकते। क्योंकि 21वीं शताब्दी में यह तस्वीर कुछ बदली बदली हुई नजर आ रही है। वैसे तो भारत में साइकिल का प्रचलन करीब 1960 के आसपास प्रारंभ हुआ, लेकिन अब इसके उपयोग को पर्यावरण हित में बढ़ावा द...

पुलिस ने मृतक के परिवार को किया ब्लैकमेल, मांग रहे इंसाफ: डॉली शर्मा

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पुलिस ने मृतक के परिवार को किया ब्लैकमेल, मांग रहे इंसाफ: डॉली शर्मा # उत्तरप्रदेश को अपराध प्रदेश में बदल दिया गया है, पुलिस कस्टडी में हो रही मौत दुर्भाग्यपूर्ण: प्रदेश प्रवक्ता कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता गाजियाबाद। यूपी की प्रदेश प्रवक्ता डॉली शर्मा ने कासगंज में पुलिस कस्टडी में हुई मौत के मामले में वस्तुस्थिति से अवगत होने के बाद उत्तरप्रदेश सरकार को कठघड़े में खड़ा करने की कोशिश की है। उन्होंने दूरभाष पर बताया कि पुलिस ने मृतक अल्ताफ के परिवार को ब्लैकमेल किया है, जिसके चलते आज वो इंसाफ मांग रहे हैं। उनकी मानसिक स्थिति खराब है, क्योंकि परिवार का कमाऊ पूत नहीं रहा। उसका शव देने के लिये उन पर अंगूठे लगाने का दबाव डाला गया और नौकरी तथा लाखों रुपये की मदद राशि देने की लालच देकर उनके साथ छल किया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तरप्रदेश को अपराध प्रदेश में बदल दिया गया है, जहां पुलिस कस्टडी में हो रही मौत की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि पार्टी की प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के निर्देश पर वह कासगंज गई थीं और उन्हें वहां ...

क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध नहीं, बल्कि करारोपण के उपाय करेगी सरकार!

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क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध नहीं, बल्कि करारोपण के उपाय करेगी सरकार! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार क्रिप्टो करेंसी बिल के पिछले मसौदे में सरकार द्वारा इस पर बैन लगाने की बात कही गई थी, हालांकि वित्त मंत्रालय अब इस बिल में संशोधन करने जा रहा है, ताकि उसे संसद के शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया जा सके। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में दिए एक बयान में कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण बैन पर विचार नहीं हो रहा है, लेकिन सरकार इन अस्थिर डिजिटल करेंसी के प्रति सतर्क रुख अपनाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि भारतीय रिजर्व बैंक एक सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को लॉन्च कर सकता है। वहीं, रेवेन्यू सेक्रेटरी तरुण बजाज ने कहा कि मंत्रालय यह विचार कर रहा है कि जब लोग क्रिप्टोकरेंसी से पैसा कमाएं तो वो टैक्स का सुनिश्चित भुगतान करें। उन्होंने कहा कि यदि आप क्रिप्टोकरेंसी में लाभ कमाते हैं, यदि आप किसी विशेष डील से पैसा बनाते हैं, तो भारत सरकार उससे टैक्स हासिल करना चाहेगी। भले ही यह कानूनी रूप से वैध हो या ना हो, लेकिन हम अपना टैक्स रेवेन्यू चाहते हैं। बता दें कि बहुत से लोग बि...

चिराग तले अंधेरा, आखिर वैश्य समाज कैसे पड़ गया इतना अकेला!

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चिराग तले अंधेरा, आखिर वैश्य समाज कैसे पड़ गया इतना अकेला! @ राजपथ/अशोक कौशिक, संपादक औद्योगिक नगरी गाजियाबाद में वैश्य सियासत की एक अलग और अलहदा पहचान रहती आई है। दल कोई भी हो, पर इस उर्वर समाज के सपूत वहां मुख्य भूमिका में अवश्य मौजूद रहते हैं। सिर्फ आजादी के बाद ही नहीं, बल्कि उससे पहले से भी! महात्मा गांधी, राममनोहर लोहिया, नरेंद्र मोदी, नरेश अग्रवाल, प्रेमचंद गुप्ता, अरविंद केजड़ीवाल जैसे अनेक धुरंधर राजनीतिज्ञों के सियासी दाना-पानी का जुगाड़ करने-करवाने में भी इस समाज के स्थानीय कर्णधारों ने समय समय पर महती भूमिका निभाई है। फलस्वरूप यहां के वैश्य समाजसेवियों को भी राजनीतिक, प्रशासनिक व कारोबारी महकमे में अच्छे अच्छे ओहदे मिले हैं।  आखिर ऐसे प्रभावशाली समाज के समकालीन कर्णधारों द्वारा लोहिया नगर स्थित हिंदी भवन में गत दिनों आयोजित अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के दर्शक दीर्घा में लोगों की नाम मात्र की मौजूदगी या यों कहें कि आमलोगों व कार्यकर्ताओं से ज्यादा नेताओं की मौजूदगी न केवल हैरान करती है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी का एक मजबूत जनाधार समझे जाने वाले इस समाज के ना...

उद्यमिता की एक मिसाल बन चुके हैं सुशील कुमार सिंह

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उद्यमिता की एक मिसाल बन चुके हैं सुशील कुमार सिंह # आप तभी जीतेंगे जबकि आप अंतिम समय तक मैदान में टिके रहेंगे # ब्रांड्स इम्पैक्ट ने सुशील कुमार सिंह को मोस्ट इंस्पायरिंग एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर 2021 का राइट चॉइस अवार्ड प्रदान किया है कोरोना काल में भी उम्दा प्रदर्शन के लिए @ कमलेश पांडेय/भास्कर ब्यूरो गाजियाबाद। यदि आप व्यक्तिगत या पारिवारिक कारणों वश अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को अभिशप्त होते हैं तो भी चिंता करने की कोई बात नहीं! क्योंकि यूपी में उद्यमिता की एक मिसाल पेश कर चुके जौनपुर निवासी सुशील कुमार सिंह का जीवन-दर्शन इस बात की साक्षी है कि किसी डिग्री के बिना भी देश-विदेश यानी भारत से अमेरिका तक अपना कारोबार फैलाया जा सकता है। बस लगन, हुनर और अपनी धुन के पक्का होना जरूरी है, भले ही स्वजन, परिजन या शेष दुनिया कुछ भी कहें। डासना नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी मनोज कुमार मिश्रा के बैचमेट रहे आईटी पेशेवर सुशील कुमार सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीएससी की पढ़ाई छोड़कर जब दिलवालों के शहर दिल्ली कूच करने का निर्णय लिया और दक्षिणी दिल्ली के बदरपुर ...

सनातन धर्म की लंका लगाने वाले 'सन्त' से बचिए!

सनातन धर्म की लंका लगाने वाले 'सन्त' से बचिए! @ राजपथ/अशोक कौशिक, समूह सम्पादक एक पंथनिरपेक्ष या धर्मनिरपेक्ष देश में धर्म और राजनीति में जुड़ाव व बिलगाव की क्या सीमाएं होनी चाहिए, इसे स्पष्ट न करते हुए हमारे संविधान निर्माताओं ने बहुत बड़ी भूल की है। इस सम्बन्ध में उनके द्वारा बनाये गए विधान और  उनके बाद उनके राजनैतिक उत्तराधिकारियों द्वारा किये गए संशोधनों ने इन जटिलताओं को और अधिक बढ़ा दिया है।  सच कहा जाए तो भारतीय संविधान ने हिन्दू धर्मावलंबियों की कीमत पर विभिन्न धर्मावलंबियों खासकर अल्पसंख्यकों को जो कतिपय सहूलियतें दी हैं, वह हिंदुओं को क्यों नहीं मिलनी चाहिए, इस सवाल का जवाब आजादी का 75वां वर्ष भी ढूंढ रहा है! वो भी तब जबकि भारत हिंदुओं के हिस्से वाला देश है। यह हकीकत है कि मुस्लिमों के हिस्से वाला देश पाकिस्तान और बाद में बना बंगलादेश है। इसलिए भारत में मुसलमानों को उतनी ही सुविधाएं मिलनी चाहिए, जितनी वो पाकिस्तान व बंगलादेश में हिंदुओं को देते हैं! कोढ़ में खाज यह कि संविधान का रखवाला हमारा सर्वोच्च न्यायालय भी इस प्रायोजित भेदभाव को अबतक नहीं बदल पाया है। इससे सत्ता व ...

क्या साहिबाबाद विधानसभा सीट से पूरा होगा डॉ सपना बंसल का सपना?

क्या साहिबाबाद विधानसभा सीट से पूरा होगा डॉ सपना बंसल का सपना? @ राजपथ/अशोक कौशिक, संपादक राजनीतिक पतंगबाजी का अपना ही मजा है। इसको सिर्फ वही ले सकता है, जो सक्रिय सियासत में है। आखिर कब, कैसे और किसकी सियासी पतंग काटनी है, यह बात सिर्फ उसे ही पता होती है जो ऐसी चाल चलता या चलवाता है।राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि इसकी भी एक अलग ही फितरत होती है, जिसका शिकार अक्सर सभ्य, सुशील  व सुसंस्कृत राजनीतिज्ञ ही होते हैं।  यूं तो उत्तरप्रदेश की सबसे बड़ी विधानसभा सीट साहिबाबाद पर सबकी नजर है। यह सीट अभी भाजपा के कब्जे में है। वरिष्ठ भाजपा नेता सुनील शर्मा यहां के लोकप्रिय विधायक हैं। पार्टी ने उन्हें पंचायती राज समिति का अध्यक्ष बनवाकर दर्जा प्राप्त मंत्री का दर्जा दे दिया है। यहां पर बहुजन समाज पार्टी से पूर्व विधायक रहे अमरपाल शर्मा का इस बार समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ना तय है। पिछली बार उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़कर शिकस्त खाई है। चर्चा है कि कांग्रेस इस बार अपने पूर्व महानगर अध्यक्ष नरेंद्र भारद्वाज या पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता डॉली शर्मा को चुनाव लड़ने का निर्देश द...